रंडी की चुदाई / जिगोलो

चूत के उद्घाटन बाद में तो रंडी बन गई -2

By अंकिता Published on पढ़े जाने की संख्या: 1309

दोस्तों आपने मेरी कहानी का पहला एपिसोड “चूत के उद्घाटन बाद में तो रंडी बन गई -1“ पढ़ा होगा.
अब आगे...

मैंने उसके लंड को पानी से साफ किया और उसने मेरी चूत को साफ किया।

फिर बाहर आये।

फिर हमने एक-दूसरे को किस किया और आइसक्रीम खाने लगे।

उसने कहा, “अंकिता, मज़ा आ रहा है न चुदाई में?”

मैंने कहा, “हाँ, बहुत मज़ा आ रहा है।”

दोनों ने टीवी चलाया हॉल में और मूवी देखने लगे।

हम नंगे ही थे।

फिर उसने कहा, “टीवी बंद करो, मैं अपने पास से हॉलीवुड की सेक्स मूवी दिखाता हूँ।”

हम दोनों देखने लगे।

जबरदस्त सेक्स मूवी देखने के बाद हमारा मूड बन गया।

वो बोला, “ऐसे नहीं, तुम अच्छे से तैयार हो, साड़ी पहनो और सारे कपड़े पहनकर आओ।”

मैं कपड़े पहनने गयी।

वो नंगा ही मेरा इंतज़ार कर रहा था वही हॉल में।

मैं साड़ी पहनकर आयी।

वो बोला, “एकदम माल लग रही हो।”

उसने मुझे अपनी ओर खींचा और चूचियाँ भींच दी।

मुझे वही बैठाया और मेरी साड़ी के पल्लू को बिना हटाए ही मेरे बूब्स को दबाने लगा।

फिर मेरी नाभि को चूमने लगा, धीरे-धीरे खड़े रहते हुए।

उसने फिर मेरा पल्लू हटाया, मेरे ब्लाउज़ को कंधे से सरकाया, ब्रा के साथ मेरे बूब्स में ब्लाउज़ को फँसा दिया और मेरे कानों को चूमा, फिर मेरी गर्दन को चूमने लगा।

मैं आँखें बंद करके आनंद की अनुभूति ले रही थी।

उसने मेरे ब्लाउज़ के बटन खोले और ब्लाउज़ उतार दिया, मेरी ब्रा को कंधे से फ्री कर दिया।

फिर मेरी साड़ी को खोल दिया।

मैं अब पेटीकोट में थी।

तब तक चेतन का लंड सलामी दे रहा था।

उसने मुझे टेबल पर बैठा दिया, मेरा पेटीकोट को धीरे-धीरे मेरी जाँघों तक उठा दिया और मुझे नीचे से जाँघों तक चूमने लगा।

मैं गर्म हो चुकी थी, चूत गीली हो गयी थी।

कुछ देर चूमने के बाद उसने मेरी पैंटी को खींचकर पूरा उतार दिया।

अब मैं ब्रा और पेटीकोट में थी।

उसने मुझे सोफे के सहारे खड़ा किया और पीछे से मेरी कमर को चूमने लगा, पेटीकोट के ऊपर से ही लंड को मेरी चूत पर रगड़ने लगा।

फिर उसने मेरी ब्रा को भी अलग कर दिया, मेरी पीठ को चूमा।

मेरे पूरे शरीर को उसने चूमा।

मैं सिर्फ पेटीकोट में थी।

उसने टेबल पर मुझे लिटाकर पेटीकोट को पूरा उठाकर मेरी चूत में उंगली डाली।

मेरी चूत गीली हो चुकी थी।

उसने वो उंगली मुझे चटायी, चूत का स्वाद मिला।

फिर वो टेबल पर बैठा और मुझे लंड चूसने का इशारा किया।

मैंने लंड चूसना शुरू किया, चूसकर गीला कर दिया था।

मैंने चेतन का सर पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से अपनी चूत पर रगड़ना शुरू किया।

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

उसने मुझे झुकाया और पेटीकोट को उठाकर पीछे से मुझे घुमाकर मेरी चूत में अपना लंड रगड़ते हुए धक्का दिया।

मेरी चूत में लंड घुसाते ही कमर पकड़कर ज़ोर-ज़ोर के धक्के देते हुए चोदने लगा।

मुझे स्वर्ग का आनंद मिल रहा था।

हम दोनों ने कामवासना की सारी हदों का आनंद लेना शुरू कर दिया।

चेतन मेरी जबरदस्त चुदाई कर रहा था और मेरी चूची को साथ में पी रहा था, साथ में उसे चूम रहा था।

फिर मुझे टेबल पर बैठाकर अपना लंड सेट किया और धीरे-धीरे मुझे फिर दीवार के सहारे टिकाया।

चेतन के टट्टे मेरी गीली गांड से लग रहे थे और थप-थप की आवाज़ आ रही थी।

उसी बीच मैं झड़ चुकी थी।

चूत गीली हो चुकी थी और वो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था।

उसका लंड मेरी चूत में गपा-गप अंदर-बाहर हो रहा था।

मैं अपनी चूत को ज़ोर-ज़ोर से चुदवा रही थी।

मैं “आआ आआह्ह ह्ह” की आवाज़ें निकाल रही थी।

मैंने चेतन से कहा, “अब थक चुकी हूँ।”

उसने कहा, “कुछ देर और।”

उसने मेरे बाल खोल दिये, फिर मुझे डॉगी बनने को कहा और लंड सेट कर मेरी सवारी करने लगा।

मेरे बालों को अपने हाथों से पकड़कर खींचता, जैसे मेरी सवारी कर रहा हो।

कुछ देर मेरी सवारी करते हुए हम दोनों का पानी निकल गया।

मेरी चुदाई पेटीकोट पहने ही हुई।

और हम एक-दूसरे के साथ ऐसे ही पड़े रहे।

मैंने चेतन से कहा, “मुझे आज मज़ा ही दे दिया। मुझे ऐसा लग रहा है कि मैं हवा में उड़ रही हूँ।”

कुछ देर बाद हम दोनों बाथरूम में गए और नहाये।

मैंने कपड़े धोने के लिए रख दिये।

हम सो गए।

हम दोनों एक-दूसरे से चिपके नंगे सो रहे थे।

सुबह सभी के उठने से पहले उसे निकालना भी था, कहीं कोई देख न ले।

हम उठे और हमने एक बार फिर एक-दूसरे को अच्छे से चूमा-चाटा और उसे बाहर तक छोड़ दिया।

मैं सो गयी, उस दिन कॉलेज नहीं गयी।

शुरू-शुरू में हम दोनों अक्सर घर के बाहर ही सेक्स करते थे, मतलब कभी होटल में, तो कभी किसी दोस्त के रूम पर चुदाई करते थे।

सिनेमा हॉल के अंधेरे में मेरे मम्मे दबाना चेतन का पसंदीदा खेल था।

शुरुआत में मुझे बाहर या होटल में डर लगता था और मैं बहुत शर्माती थी, पर सेक्स के दौरान खूब मज़े करती थी।

पूरी तरह से खुलने में मुझे एक साल लग गया।

फिर हम दोनों काफी खुल चुके थे।

जब पापा-मम्मी घर पर नहीं होते, तो हम मेरे घर में भी चुदाई कर लेते थे।

हालाँकि, ऐसा सुनहरा मौका महीनों में कभी-कभार ही मिलता था।

हम एक-दूसरे के साथ बहुत खुल गए थे।

देसी यंग गर्ल सेक्स कहानी में एक दिन फाइनल ईयर के एक सीनियर ने हमें देख लिया और हमारी एक फोटो खींच ली।

वो हमारे पास आया और उसने सीधे मेरे बूब्स दबा दिए।

हम दोनों चौंक गए।

उसने कहा, “ये सब यहाँ क्या कर रहे हो?”

फिर उसने मेरी कुर्ती के अंदर हाथ डालकर मेरे बूब्स को दोबारा दबाया।

मैंने उसका हाथ हटाया और चेतन ने उसे धक्का दे दिया।

वो बोला, “ज़्यादा होशियारी मत दिखाओ, मेरे पास तुम्हारा फोटो है। हम प्रिंसिपल के पास चल सकते हैं।”

उसने फोटो भी दिखाया।

हम घबरा गए कि कहीं बात घर तक न पहुँच जाए।

हमने उससे कहा कि वो प्लीज़ फोटो डिलीट कर दे।

उसने कहा, “हाँ, बिल्कुल डिलीट कर दूँगा, पर एक बार मुझे भी करना है। जल्दी बोलो कि प्रिंसिपल के पास चलें या अभी सेक्स करें?”

मेरे पास कोई चारा नहीं था।

चेतन भी कुछ नहीं कर सकता था।

मेरी आँखों से आँसू निकलने लगे।

सीनियर ने मुझे गले लगाकर कहा, “देखो, इसे अपने बॉयफ्रेंड का लंड ही समझो।”

उसने कहा, “ज़्यादा टाइम नहीं है, जल्दी बोलो।”

मैंने कहा, “ठीक है।”

उसने चेतन को इशारा किया कि वो दरवाजे पर खड़े होकर देखे कि कोई आ रहा है या नहीं।

फिर वो मुझे पीछे ले गया और किस करने लगा।

मैं उसका साथ बिल्कुल नहीं दे रही थी।

उसने मेरी कुर्ती उतारने की कोशिश की तो मैंने कहा, “कोई आ गया तो?”

उसने कहा, “ठीक है.”

और मेरी ब्रा खोल दी।

वो मेरे बूब्स चूसने लगा।

फिर उसने मेरी जीन्स खोली और पैंटी समेत उसे घुटनों तक खिसका दिया।

मुझे दीवार के सहारे खड़ा किया।

मेरी ब्रा मेरे कंधों से लटक रही थी।

उसने बिना कॉन्डम के अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया।

मेरी चूत में दर्द हुआ क्योंकि पहली बार सूखा लंड मेरे अंदर गया था।

वो दोनों हाथों से मेरे बूब्स दबाते हुए मुझे चोद रहा था।

चेतन गुस्से में देख रहा था पर वह कुछ कर नहीं सकता था।

5 मिनट की चुदाई के बाद उसने अपना पानी वहीं निकाल दिया और लंड को सहलाने लगा।

इतने में चेतन हमारे पास आया।

मैं कपड़े पहन रही थी कि तभी मॉन्टी हमें बुलाने अंदर आ गया।

उसने मुझे और सीनियर को नंगे देख लिया।

वो हक्का-बक्का रह गया, उसे कुछ समझ नहीं आया।

मैंने कपड़े पहने और सीनियर से कहा कि वो फोटो डिलीट कर दे।

उसने कहा, “अभी नहीं, ठीक से नहीं कर पाया, कोई मज़ा भी नहीं आया।”

चेतन ने गुस्से में उसकी कॉलर पकड़ ली।

मॉन्टी ने दोनों को अलग किया।

मैंने मॉन्टी को पूरी कहानी बताई।

सीनियर बोला, “मैं एक बार और करूँगा।”

चेतन और मॉन्टी, दोनों ने कहा, “ये सिलसिला ऐसे ही चलता रहेगा, तू प्रिंसिपल के पास चल।”

फिर वो थोड़ा शांत हुआ और बोला, “प्लीज़, एक बार अच्छे से करना है।”

चेतन ने कहा, “हम कैसे मान लें कि तू फिर अगली बार ये नहीं कहेगा कि और करना है?”

उसने कहा, “ये मेरा मोबाइल रख लो। बस एक बार करने के बाद मैं फोटो डिलीट कर दूँगा, नहीं तो मोबाइल तुम्हारे पास ही रहेगा।”

मैंने गुस्से से कहा, “ये किस्सा यहीं खत्म करते हैं। बात ज़्यादा बढ़ने से कोई मतलब नहीं। ठीक है, चलो कर लो।”

उसने कहा, “यहाँ पर मुमकिन नहीं है, कहीं चलते हैं।”

मॉन्टी ने कहा, “मेरा रूम सेफ रहेगा।”

हम तैयार हो गए।

चेतन ने कहा, “अंकिता, तू चिंता मत कर। आज ये कहानी यहीं खत्म कर देंगे।”

वो मॉन्टी के साथ बाइक पर था।

चेतन के साथ रास्ते में उसने कहा कि उसे सिरदर्द की गोली चाहिए।

वो मेडिकल से गोली लेकर आया।

हम सीधे मॉन्टी के रूम पर गए। उसका रूम एक कमरे का था, जिसमें उसका दोस्त भी रहता था।

अंदर ही किचन और बाथरूम था।

उसने दरवाजा बंद किया।

अब हम चार लोग थे।

मॉन्टी बोला, “जल्दी करो, ज़्यादा समय नहीं है। दोपहर से शाम हो रही है। शाम को मेरा रूम पार्टनर आ जाएगा।”

मैंने चेतन से कहा, “कुछ खाने को भी चाहिए। दोपहर का खाना नहीं खाया था, भूख लग रही है।”

उसने मॉन्टी को पैसे देकर कहा कि कुछ खाने को ले आए।

चेतन मुझे अकेला नहीं छोड़ना चाहता था और रूम मॉन्टी का था।

अगर उस बीच कोई आ जाता, तो गड़बड़ हो जाती।

इसलिए उसने मॉन्टी से कहा कि वो दरवाजा बाहर से लॉक करके चले जाए।

मॉन्टी गया।

सीनियर अब पूरी तरह तैयार था।

पहले वो पानी पीने गया और गोली खाई।

चेतन ने कहा, “जल्दी सब खत्म कर!”

उसने कहा, “ठीक है।”

मैंने कहा, “बिना कॉन्डम के मैं नहीं करूँगी।”

उसने कहा, “कुछ नहीं होगा, मुझे बिना कॉन्डम ही करना है।”

सीनियर बोला, “जैसा मैं कहूँ, वैसा ही करना।”

मैंने गुस्से में कहा, “ठीक है।”

उसने मेरी कमर में हाथ डालकर मुझे अपनी तरफ खींच लिया।

मैं पूरी तरह सरेंडर कर चुकी थी।

उसने अपने होंठ मेरे होंठों से मिला दिए और मेरे रसीले होंठ चूसने लगा।

मुझे अच्छा नहीं लग रहा था।

वो मेरी सॉफ्ट गांड दबाने लगा।

मेरी साँसें तेज़ होने लगीं और मैं गर्म होने लगी।

मेरा दिल भी तेज़ी से धड़कने लगा।

उसने अपना लंड उभारकर मेरी चूत से चिपका दिया।

मेरे दिल के तार झनझना गए, जैसे बाग में बहार आ गई।

मेरा मन डोल उठा।

मेरी चूत भी उभरकर उसके लंड के उभार को छूने लगी।

10 मिनट तक वो लगातार मुझे किस करता रहा।

अब मैं भी रेस्पॉन्स देने लगी थी।

फिर उसने मेरी कुर्ती पूरी तरह उतार दी और मेरे बूब्स को ब्रा के ऊपर से दबाने लगा।

मैं भी गर्म होने लगी थी।

मैं भूलने लगी थी कि कोई अनजान लंड से मैं चुदने वाली हूँ।

तब मैं अपने आप को रोक नहीं पाई … मैंने उसके सिर को अपने बूब्स में दबाना शुरू कर दिया।

धीरे से उसने मेरी जीन्स को पैंटी समेत निकाल दिया और ब्रा भी उतार दी।

मैं नंगी खड़ी थी।

फिर उसने अपने कपड़े एक झटके में उतार दिए।

उसका लंड सलामी दे रहा था।

वो करीब 7 इंच का था, चेतन के बराबर, पर चेतन से मोटा था।

उसने मुझे चूसने के लिए कहा।

मैं लंड चूसने लगी लेकिन वो मेरे मुँह को चोदने लगा।

मेरा मुँह दुखने लगा।

वो रुका नहीं, अपना काम करता रहा।

पहली बार कोई दूसरा मर्द मेरे मम्मे दबा रहा था।

अब मुझे उसके साथ मज़ा भी आने लगा था।

इसके बाद उसने मुझे लेटने को कहा और मेरी कमर के नीचे दो तकिए रखे।

इस पोज़िशन में मेरी चूत ऊपर आ गई थी।

उसने चूत पर मुँह लगाया और उसे चाटने-चूसने लगा।

मैं मदहोश होने लगी।

मस्ती में अपनी चूत चटवाने का मज़ा लेने लगी।

क्या बताऊँ दोस्तों, जैसे वो मेरी चूत चाट रहा था, मज़ा आ गया था।

वो पूरी जीभ अंदर तक डाल देता था, फिर उंगली डालता था।

जैसे ही उंगली डालता, मैं पानी-पानी हो जाती थी।

मेरी चूत बिल्कुल गीली हो गई थी।

उसने दोबारा उठकर लंड मेरे मुँह में दे दिया।

मैं चूसने लगी।

लंड ने कामरस छोड़ना शुरू कर दिया।

मैंने उसके लंड को चूस-चूसकर गीला कर दिया था।

उसने कहा, “अब झुक जाओ।”

मैंने अपनी गांड उसकी तरफ करते हुए पीठ झुका ली।

मैं डॉगी पोज़िशन में आ गई थी।

उसने पीछे से मेरी चूत को सहलाया और गीली चूत को एक-दो बार रगड़ा।

फिर चूत पर लंड लगाया और एक धक्के में अंदर घुसा दिया।

इतने में मॉन्टी खाने का सामान लेकर आ गया।

इधर हमारी चुदाई चल रही थी।

उसने जल्दी से दरवाजा लॉक किया।

मैं भूल गई थी कि मॉन्टी मेरी चुदाई देख रहा है, चेतन के साथ।

लंड अंदर घुस रहा था और धीरे-धीरे बाहर निकल रहा था।

एक झटके में फिर अंदर, फिर दोबारा धीरे-धीरे बाहर।

जब वो झटका देता, तो मुझे हल्का दर्द होता और दर्द भरी “उम्म्… अहह… हाय… अयाह…” निकल जाती थी।

ये कामुक आहें उसके जोश को और बढ़ा रही थीं।

देसी यंग गर्ल सेक्स का मजा लेकर “आआआ… ऊऊऊ… ईईई…” करने लगी।

अभी उसका लंड थोड़ा ही अंदर गया था कि उसने एक ज़ोर का झटका मारा और पूरा लंड अंदर चला गया।

फिर वो थोड़ी देर बाद तेज़ झटके मारने लगा।

कुछ देर बाद मुझे अपनी चुदाई का मज़ा आने लगा और मैं झड़ गई।

इसी बीच उसने मेरी गीली गांड में उंगली डाली.

तो मैं उछल पड़ी और बोली, “मेरी गांड अभी वर्जिन है।”

उसने कहा, “ठीक है, जैसा तुम बोलो।”

उसने फिर मेरी चूत में लंड डाला।

अब मैं अपनी गांड पीछे करके उसका साथ देने लगी।

उसने मुझे उल्टा किया और मेरे पेट के नीचे एक गोल तकिया रख दिया।

इस पोज़िशन में वो मुझे चोदता रहा और मुझसे बोला, “डार्लिंग, मज़ा आ रहा है न?”

मैं कुछ नहीं बोली।

उसने कहा, “गोली का असर पता नहीं कब तक रहेगा। मैं थक गया हूँ, तुम मेरे ऊपर आ जाओ।”

मैं समझ गई कि उसने मेडिकल से सिरदर्द की नहीं, सेक्स की गोली ली थी।

अब मैं उसके ऊपर आकर उठक-बैठक करके चुद रही थी।

वो मेरे बूब्स से खेल रहा था।

फिर उसने मुझे घुमा दिया।

उसकी छाती की तरफ मेरी पीठ थी।

अब मैं फिर उछल-उछलकर चुद रही थी।

इसी बीच उसने पीछे से मेरे सारे बाल खोल दिए और उन्हें पकड़कर मुझे खींचता रहा।

मैं भी थक चुकी थी।

कुछ और देर चुदाई के बाद वो तेज़-तेज़ मुझे चोदने लगा।

मुझे पता चल गया कि अब उसका माल निकलने वाला है।

मैं भी उसका साथ देने लगी क्योंकि मैं भी झड़ने वाली थी।

मैंने उससे कहा, “बाहर निकालना!”

उसने कहा, “क्यों नहीं, डार्लिंग!”

वैसे तो मैं एक बार झड़ चुकी थी।

अब वो जोर-जोर से करता जा रहा था।

फिर उसने ऊपर ही सारा माल निकाल दिया और साथ ही मैं भी झड़ गई।

तभी चेतन आया और उससे कहा, “अब पासवर्ड बता।”

उसने बताया और चेतन ने फोटो डिलीट कर दी।

तब मुझे और अच्छा लगा, लेकिन चुदाई में मुझे बहुत मज़ा आया था।

मैं बाथरूम गई, अपने आप को साफ किया।

इतने में वो सीनियर बोला, “मैं चलता हूँ, लेकिन तेरी गर्लफ्रेंड एकदम माल है।”

वो चला गया।

अब मैं बहुत थक चुकी थी और भूख भी लग रही थी।

मैं नंगी ही थी।

मॉन्टी मेरी चुदाई देखकर खुश हो गया था, उसका चेहरा बता रहा था।

हमने साथ में वहीं खाया और थोड़ी देर वही लेट गई।

मैं नंगी ही थी।

तभी चेतन मेरे पास आया और बोला, “अंकिता, आज जो कुछ भी हुआ, उसके लिए सॉरी।”

मैंने कहा, “कोई बात नहीं, सब भूल जाओ।” उसने मुझे किस किया।

चेतन का मूड भी बन गया था, शायद मेरी चुदाई देखकर।

चेतन ने मुस्कुराकर इशारा किया।

मैंने हाँ में सिर हिलाया।

वो समझ गया कि मेरी सहमति है।

फिर हम दोनों ने मॉन्टी को देखा।

वो बोला, “मैं चुदाई देख चुका हूँ। प्लीज़ मुझे बाहर जाने को मत बोलो।”

हम दोनों मुस्कुरा दिए।

आपको ये Sex Stories कैसी लगी? मुझे ज़रूर बताएँ।

आगे की कहानी जल्द ही आप को सुनाऊँगी।

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