रोज़ा के चूत की आग मोटे लंड से शांत हुई -2
By रोज़ा Published on पढ़े जाने की संख्या: 1152
अब तक आपने पढ़ा... रोज़ा के चूत की आग मोटे लंड से शांत हुई -1
रोज़ा की कमर में दोनों हाथ डाल कर उसकी चूत बेताबी से चाटते हुए पूरी जीभ चूत में घुसा के अनिल चाटने लगा। अच्छे से चूत चाट कर फिर बेरहमी से रोज़ा के मम्मे मसलते हुए.
अब आगे..
बहनचोद तेरी जैसी सब औरतों ने यही कहा है मुझसे कि मेरे जैसा लंड देखा नहीं है उन्होंने। कितनों को चोद के भोंसड़ा बना चुका हूँ मैं… आज तेरी बारी है। सुन रोज़ा आज रात भर तुझे चोदुँगा, तेरी सहेली गयी भाड में। आज तुझे उसके घर जाने नहीं दूँगा, अभी यहाँ चोद कर फिर मेरे घर ले जाऊँगा समझी? बहनचोद साली तुझे बच्चों के बारे में पूछा तो जवाब क्यों नहीं देती हरामी।” गुस्से से अनिल ने रोज़ा के मम्मे ज़ोर से दबाये।
गालियाँ और बेरहमी से चूत मसलने से रोज़ा को बड़ा अच्छा लग रहा था। पहली बार एक जानवर जैसे मर्द से मस्ती करने में उसे मज़ा आ रहा था। अनिल की गोटियाँ मसलते हुए वो बोली, “आहहहह और चाट मेरी चूत और ऐसे ही मसल डाल मेरे मम्मे अनिल। आज तक शौहर ने इस तरह कभी मसला नहीं मेरा जिस्म और चूत भी चाटी नहीं उसने।
मेरे बदन से खूब खेलके फिर डाल अपना जानवर जैसा लंड मेरी चूत में। मैं भी बेताबी से तुझ से एक जंगली जैसी चुदवाने को तड़प रही हूँ। कईं बार अपनी चूत को केले से चोदते हुए गधे के लंड का तसव्वुर करती हूँ… तेरा लंड भी कम नहीं है… चाहे जो हो जाये आज… चाहे मेरी चूत फटे, मुँह सूजे, मम्मों से खून निकले या गाँड फटे, मैं तेरा लौड़ा आज ले लूँगी और पूरी तरह से लूँगी।
तू तो ऐसा बोल रहा है जैसे तूने बहुत चूतों को चोदा है, तेरी स्टाइल से और तेरे अंदाज़ से ये भी मानना ही पड़ेगा पर मैं घर जाके नहीं चुदवाऊँगी, मुझे यहीं चुदना है। घर तो अब आना जाना रहेगा ही… वो फिर कभी। तू तो मेरी बेटियों के बारे में मेरे पीछे ही पड़ गया है। मेरी बेटियाँ हैं… ये सुन के तेरी आँखों में चमक क्यों आ जाती है अनिल?” ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
अनिल खड़ा हो कर नंगा हुआ और फिर रोज़ा को भी खड़ी करके उसका पेटिकोट और साड़ी निकाल के उसको सिर्फ़ ब्लाऊज़ में खड़ी किया। दोनों हाथों से रोज़ा का ब्लाऊज़ वो खिंच के उतारने लगा जिससे ब्लाऊज़ फट गया। रोज़ा की ब्रा उतार के उसको पूरी नंगी कर दिया। अब वो सिर्फ ब्राऊन कलर के ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहने अनिल के सामने खड़ी थी।
रोज़ा की चूत में दो उँगली डाल के उसके मम्मे मसलते हुए अनिल बोला, “साली मुझे मालूम है तेरी जैसी रंडी गरम औरत को कैसे बेरहमी से गालियों और मार के साथ चोदना चाहिये। तेरी जैसी रईस औरत को काफी पसंद है जानवर जैसे चुदवाना। बहनचोद वैसे तो बुर्का पहन कर बहुत शरीफ बन कर रहती हो पर हमारे सामने एकदम राँड बन जाती हो तुम।
तेरी बेटियों की बात सुन के मेरी आँखों में इसलिये चमक आयी क्योंकि मुझे तो कमसिन लड़कियाँ भी बड़ी पसंद हैं। तेरी जैसी गरम मुल्लनी औरतों की जवान बेटियाँ भी गरम होती हैं और उनको चोदने में बड़ा मज़ा आता है। बहनचोद… तेरी कमसिन बेटियाँ हैं… ये सुन के लौड़े में और गरमी भर गयी, मादरचोद… उनकी उम्र और नाम तो बता।”
अपनी कमर आगे पीछे करके रोज़ा अनिल से चूत में उँगली करवाती हुई उसका लंड मसलते हुए बोली, “देख अनिल, तू गालियाँ दे या जो कुछ भी करे… मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं, पर मार नहीं खाऊँगी। देख मैं बाकी औरतों जैसी नहीं हूँ। अब तुझसे चुदवाना है तो पूरा दिल खोल के चुदवा लूँगी, उसमें मेरा ब्लाऊज़ फटे या बाकी कपड़े गंदे हों तो भी कोई बात नहीं, मैं कुछ नहीं कहूँगी पर साले अब मेरी चूत को बराबार सहला.
मुझे बहुत मज़ा आता है जब तू ऊपर से सहलाते हुए चूत में उँगली करता है तो। अरे तेरा ऐसा मूसल जैसा लंड मैं छोड़ने वाली नहीं हूँ, तू जैसे चाहेगा वैसे चुदवा लूँगी आज तुझसे। मेरी बेटियाँ हैं और वो जुड़वां हैं पर तुझे क्या दिलचस्पी है उनमें ये तो बता? एक का नाम खुशबू और दूसरी का जोया है।”
रोज़ा की वो हल्की अकड़ देख के अनिल ने गुस्से से उसकी चूचियाँ बड़ी बेरहमी से मसलीं और निप्पल काटते हुए तीन अँगुलियाँ ज़ोर से चूत में घुसा दीं जिससे रोज़ा को बड़ा दर्द हुआ पर फिर भी रोज़ा ने उससे और लिपट के आहें भरीं। अपना लंड रोज़ा के हाथ में दे कर और उसके निप्पलों से खेलते हुए.
अनिल बोला, “तेरी माँ की चूत साली, मुझे मत सिखा कि क्या करूँ हिजाबी रंडी। मैं जैसे चाहुँगा तुझे चोदुँगा, जितना चहुँगा मारूँगा समझी? तेरी जैसी रंडी चूत को मार के चोदने से तुम हमेशा हमारे हमारे लंड की गुलाम रहती हो। मेरे सामने ज्यादा अकड़ना नहीं समझी? मैंने प्यार से तेरे सैंडल के तलवे छाटने की बात कही तो तू ज्यादा ही अकड़ने लगी…”
रोज़ा को एक झापड़ मार कर रोज़ा की चिकनी चूत सहलाते हुए अनिल ने नीचे बैठ कर उसको चाट कर कहा, “मुझे मालूम है तेरी जैसी गरम चूत मेरा तगड़ा लंड कभी नहीं छोड़ेगी लेकिन साली तुझे चोदने की कीमत चाहिये मुझे… और कीमत है तेरी वो दो जुड़वां बेटियाँ, आहहहहहह नाम भी क्या सैक्सी हैं उनके, खुशबू और जोया, उम्र क्या है तेरी उन बेटियों की रोज़ा?”
अनिल के झापड़ से रोज़ा के गाल पे लाल निशान आ गया। उसके बाल बिखर के चेहरे पे आ गये। उसने अपने बाल संवारे और उसका अनिल को दबाने का जोश कुछ ठंडा पड़ गया। जिस तरह अनिल उसकी चूत चाट रहा था उससे रोज़ा मदहोश हो कर अनिल का सिर चूत पे दबाते हुई बोली,
“आहहह चोद जैसे मर्ज़ी आये वैसे चोद। आज तू चाहे कुछ भी कर ले लेकिन ऐसा मस्त लौड़ा जाने नहीं दूँगी मैं। तू जी भरके गालियाँ दे… मार मुझे लेकिन जानवर बनाके चोद भी मुझे.. अनिल! पर बदले में तू भी मेरी गालियाँ सुनने और मेरी मार खाने के लिये तैयार रह…
मुझे भी चुदाई के वक्त वहशियानपन करना अच्छा लगता है… अनिल तू मेरी जैसी औरत को रंडी क्यों बोलता है? शौहर के अलावा मैं कई साल बाद किसी अजनबी से चुदवा रही हूँ… इसलिये रंडी बोलता है क्या मुझे? मेरी उम्र से तू ही अंदाज़ा लगा मेरी बेटियों की उम्र का। नहीं लगा सकता ना अंदाज़ तू? तो सुन दोनों अभी-अभी २० साल की हो गयी हैं।”
अनिल ने रोज़ा की चिकनी चूत चाट कर बाहर से पूरी गीली कर दी थी । रोज़ा की चूत को अंदर से भी अच्छे से चाट कर अनिल रोज़ा के मम्मों को पकड़ कर उनका सहारा ले कर खड़े होते हुए बोला, “देखा मादरचोद मुसल्ली राँड, एक झापड़ से कैसे तुझे तेरी औकात मालूम हुई? ये भी देखा ना तूने कि कैसे एक अंजान मर्द के साथ रासते में चुदवाने के लिये नंगी हुई है तू…
इसलिये तेरी जैसी चूदास औरतों को मैं राँड बुलाता हूँ, थोड़ा यहाँ और वहाँ हाथ लगाओ और साली तुम टाँगें फ़ैला कर चुदवाने को तैयार हो जाती हो, है ना सच बात?” रोज़ा के मम्मे निचोड़ कर अनिल ने रोज़ा को नीचे बिठाया और अपना लंड उसके मुँह पे घुमाते हुए बोला, “चल मादरचोद चूत!
अब मेरा लंड चूस अच्छे से, अब देख तुमसे क्या-क्या करवाता हूँ। बहनचोद बीस साल की मुल्लनी कमसिन चूत कभी नहीं चोदी मैंने और तेरे पास दो-दो कमसिन चूत हैं? तेरी माँ की चूत… खूब मज़ा आयेगा तेरी बेटियों को चोदने में, खूब चोदुँगा तुझे और तेरी बेटियों को।”
रोज़ा ने अनिल का लंड अपने चेहरे पे घुमा कर उसे ऊपर करके एक बार लंड के नीचे और गोटियों का पसीना चाट लिया। फिर प्यार से लंड को देख कर उसको चूमते हुए बोली, “हाँ हो गयी औकात पता मुझे मेरी अनिल एक झापड़ से। अरे अनिल गाँडू, तेरे जैसा अलबेला मर्द हो या कोई और मर्द हो, इतना गरम करोगे तो बर्फ जैसी कोई भी औरत नंगी हो जाये चुदवाने के लिये और फिर मैं तो खुद इतनी गरम हूँ और अभी जवान हूँ…
और ये इतना मस्त लंड देखूँगी तो क्या चुदवाने के लिये टाँगें फ़ैला कर तेरे नीचे नहीं लेटूँगी? तू देख तो… तेरा लंड मेरी नंगी जवानी देख कर कैसा फुँफकार रहा है। मानो इतनी मस्त नंगी औरत देखी ही ना हो। अरे बीस साल की चूत नहीं चोदी तो क्या हुआ? मेरा जिस्म और मेरी चूत भी तो वैसी ही है ना?”
रोज़ा के चाटने से अनिल को अच्छा लगा। उसे अब पेशाब आ रहा था। एक बार पेशाब करके फिर रोज़ा से लंड चूसवाना उसने बेहतर समझा। अनिल ने रोज़ा को ये बताया पर रोज़ा उसकी आँखों में आँखें डाल कर देखती हुई उसका लटकता और तना लंड सहलाती रही, मानो वो कुछ कहना चाहती हो पर शर्म से कह नहीं पा रही हो।
अनिल ने एक मिनट रोज़ा को देखा और फिर उसके दिल की बात समझ गया। अपना लंड रोज़ा के मुँह की तरफ करके पेशाब करने लगा। अनिल के पेशाब से रोज़ा का मुँह भर गया तो फिर उसकी पेशाब मुँह से हो कर मम्मों को गीला करते हुए और फिर नीचे चूत को गीली करके ज़मीन पे गिरने लगा।
अपना लंड फिर रोज़ा की माँग पे निशना लगाकर उसमें पेशाब करते हुए अनिल बोला, “तेरी माँ की चूत हरामी राँड, आज तक किसी भी औरत की माँग ऐसे नहीं भरी थी, राँड तुझे पेशाब पिला कर और माँग भर के अब तुझे अपनी छिनाल बनाया है। रही बात गरम करने की तो क्या तूने आज तक अपने मर्द को भी तुझे इतना गरम करते देखा है?
तू तो चुदवाने के पहले ही राँड बन गयी है। मादरचोद तेरी जैसे मुल्लनी औरत को मेरे जैसा लौड़ा जब मिलता है तो तुम लाज शरम छोड़के किसी भी जगह नंगी हो कर रंडी होने का सबूत देती हो। तेरी चूत भी काफी मस्त है लेकिन साली बीस साल की लड़की का सील तोड़ना अलग बात है रोज़ा… इसी लिये मुझे उनको चोदना है राँड।”
रोज़ा जैसा चाहती थी वो अनिल ने समझ कर उसको अपने पेशाब से नहला दिया। उस गरम पेशाब से अपने मम्मे और बदन को नहला कर रोज़ा को अच्छा लगा। सबसे अच्छा उसे तब लगा जब अनिल ने उसकी माँग पेशाब से भरी। रोज़ा को अनिल का पेशाब अपनी माँग और पूरे बदन पे सोने के पानी जैसा लगा।
अपने नंगे जिस्म पे वो पेशाब मलते-मलते हौले-हौले अपने मम्मे दबाते हुए वो बोली, “हुम्म्म हाय, अनिल मादरचोद… कितना अच्छा लगा तेरे पेशाब से नहाने में। तेरे लंड की कसम अनिल भड़वे… ये इतने तने हुए निप्पल मेरे कभी नहीं हुये। आज पहली बार मुझे अपनी सैक्सी इमेज का एहसास हुआ। अरे मेरे जैसी औरत की बात छोड़, किसी भी औरत को ऐसा लंड मिले तो वो मस्त हो जाये और चुदवाये रंडी जैसे।”
पेशाब टपकता अनिल का लंड रोज़ा अपने मुँह में डाल कर मस्ती से चूसते हुए अपनी चूत और मम्मे सहलाने लगी। अनिल रोज़ा की बात सुन कर खुश हो कर उसका सिर पकड़ कर खड़े-खड़े उसका मुँह चोदते हुए बोला, “तेरी माँ की चूत, कसम से आज तक तेरी जैसी हरामी औरत नहीं देखी जो पेशाब अपने जिस्म पे लगा कर खुद उसे अपने मम्मे और चूत पर मसलते हुए लंड चूसती है।
ऐसे ही चूस रंडी, ज़ोर से चूस मेरा लौड़ा और गोटियाँ और ऐसे ही चूसते हुए चूत में उँगली करती रह रानी। मुझे पता है मेरा लंड देख कर किसी भी औरत की चूत गीली होगी रंडी… पर तेरी जैसी छिनाल औरत नंगी हो मेरे सामने तो मैं जानता हूँ कि वो औरत दोनों को खूब मज़ा देगी। अब मेरा ये लंड लेने के बाद अपनी बेटियों को कब सुलायेगी मेरे नीचे ये बता।”
ज़िंदगी में पहली बार इतना काला, मोटा और लंबा लंड देख कर रोज़ा खुश हो कर पहले उसे मसलने लगी। फिर अनिल की गोटियाँ सहला कर और उसकी तरफ़ देख कर रोज़ा ने जीभ निकाल कर दो-तीन बार लंड चाट लिया। अनिल के चेहरे पे फ़ैली मुस्कुराहट देख कर रोज़ा को बड़ा अच्छा लगा और उसने अनिल का लंड मुँह में डाल लिया। अनिल के बड़े लौड़े से रोज़ा का मुँह पूरा भर गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
लंड पे मुँह आगे पीछे करते हुए लंड बहुत मस्ती से चूसते हुए रोज़ा बोली, “अब मुझे लंड चूसने देगा या नहीं गाँडू? अब मेरी बेटियों के बारे में कुछ मत पूछना जब तक तू मेरी चूत में अपना पानी ना डाले। तब तक तू मेरे और अपने बारे में ही बात करना। उसके बाद मैं तुझे जो चाहे वो बताऊँगी उन दोनों के बारे में। कसम से इतना बड़ा लंड ज़िंदगी में नहीं चूसा। लगता है आज चूत के साथ मेरे होंठ भी सूज जायेंगे तेरा लंड चूसते-चूसते अनिल।”
रोज़ा कि बात और चुसवायी अच्छी लगने से अनिल हल्के-हल्के उसका मुँह चोदते हुए और बालों में हाथ फेरते हुए बोला, “ठीक है मादरचोद रंडी, अब पहले तेरी चूत का भोंसड़ा बनाने के बाद ही तेरी कमसिन बेटियों की बात करूँगा। रोज़ा रंडी…
पहले मेरा लंड और फिर मेरी गोटियाँ और बाद में मेरी गाँड चाट। फिर बाद में तेरी गाँड मारूँगा और फिर चूत। बहनचोद इतना बड़ा लंड देखा नहीं था तो पहले मिलती, खूब चोदता तुझे रंडी। अब देख तेरी गाँड कैसे फाड़ुँगा… पहले अच्छे से चूस कर बड़ा कर मेरा लौड़ा तेरी गाँड फाड़ने के लिये।”
रोज़ा खुशी से लंड चूस रही थी। मुठ मारती हुई वो लंड चाट कर मुँह में ले रही थी। चाटने से चेहरे पे आ रहे बालों को अनिल पीछे करके रोज़ा को लंड चूसते देख कर सिसकरियाँ भर रहा था। अच्छे से लंड चूसने के बाद रोज़ा ने ज़मीन पे लेट कर अनिल के दोनों जाँघों के एक दम नीचे उसके लंड के पास आते हुए उसे अपने मुँह पे बिठाया जिससे उसका लंड पूरा रोज़ा की गिरफ़्त में रहे और अनिल की झाँट, गोटियाँ और गाँड का छेद भी एकदम जीभ के पास हो।
अनिल की झाँट चाट कर वो बोली, “हाँ और लंबा करूँगी… चाहे जो हो जाये। बहनचोद तुझे तो वक्त का अंदाज़ा भी नहीं होगा कि पूरे दस मिनट से चूस रही हूँ तेरा लंड… देख कितना गीला हुआ है। गोटियाँ क्या चूसूँ, मुझे तो तेरी झाँटों से आती खुशबू में दिलचस्पी है, वही तो है जो मदहोश करती है मुझे… अनिल कुत्ते।”
रोज़ा की इस अदा पे अनिल खुश हुआ पर उसे और खुशी तब मिली जब उसे अपनी गाँड पर रोज़ा की जीभ महसूस हुई। आँखें बन्द करके रोज़ा के मम्मे ज़ोर से मसलते हुए वो बोला, “साली तेरा चूसना इतना मस्त है कि इतना वक्त तूने चूसा वो समझा ही नहीं।
कसम से तेरे जैसा मस्त लौड़ा आज तक किसी ने नहीं चूसा मेरा। तू सही में मर्द को गरम करना और उसे खुश करना जानती है रोज़ा। और फिर ये तेरा गाँड चाटना, उफ्फ्फ, मादरचोद अच्छे से मेरी गाँड चाटेगी तो ऐसे ही तुझे चोदुँगा और हमेशा खुश रखुँगा, चल चोद मेरी गाँड अपनी जीभ से रोज़ा।”
रोज़ा जीभ गाँड पे घुमा कर चाटने लगी। उसका एक हाथ लंड पे मुठ भी मार रहा था। अनिल मम्मे बड़ी मस्ती से मसल कर उसे और गरम कर रहा था। गाँड के छेद में जीभ घुसेड़ कर वो अनिल को और खुश कर रही थी। गाँड चाटने के बाद उसने लंड के आजु बाजू का इलाका थूक से पूरा का पूरा गीला किया, मानो अनिल के लंड से रस बहने लगा हो।
लंड को चेहरे पे घुमती हुई वो बोली, “हाँ और दे मुझे और दे तेरी झाँटें… लंड और गाँड, आज सब चाट डालूँगी मादरचोद। आज मैं पूरे मूड में हूँ, सब कुछ करूँगी। मेरा ये ऐसा नशीला मूड तूने ही बनाया है, अब तू जैसा चाहे वैसे चोद मुझे अनिल।
मुझे अच्छे से चोद और जब तक मुझे चोद रहा है… मेरी बेटियों के ख्यालों में खो मत जाना। अरे मेरी बेटियाँ भी मिलेंगी तुझे, उनको मैं ही चुदवाऊँगी तुझसे। वो भले ही बीस साल की हों पर जिस्म २३-२४ जैसा है उनका। खूब चोद मेरी बेटियों को भी अनिल।”
अनिल अब रोज़ा पे उल्टा लेट गया। इससे रोज़ा को लंड और गाँड चाटने में आसानी हो गयी और रोज़ा की चूत और गाँड अनिल के मुँह के पास हो गयी। अपने पैर घुटनों में मोड़ कर अनिल पैरो की अँगुलियों से रोज़ा के मम्मे मसलने लगा। अपने खुरदुरे पैरों से रोज़ा के चिकने और मुलायम मम्मे बेरहमी से रगड़ते हुए वो बोला,
“तेरी माँ की चूत साली… मुझे अपनी बेटियों का लालच देती है छिनाल? साली तू क्या उनकी दलाल है हरामी? बहनचोद मैं तो तेरी बेटियों को वैसे भी चोदुँगा रंडी। लेकिन अब पहले तेरे जिस्म को चोदना है अभी। आहहहहहह हरामी… जीभ से मेरी गाँड चोद, पूरी अंदर डाल अपनी जीभ।”
थोड़ा और नीचे हो कर अनिल की गाँड के दोनों गोलों को अलग करके उसके छेद पे अपनी जीभ रख कर रोज़ा पागल बिल्ली की तरह चाटने लगी। उस तीखी गंध से उसे अच्छा लगा तो वो पूरी गाँड पे जीभ फेरते हुए छेद में जीभ घुसा कर चाटने लगी। अपने मुलायम मम्मों पे अनिल के खुरदुरे पैरों से होता खिलवाड़ उसे अच्छा लगा.
और वो बोली, “हाँ साले… डालती हूँ! पहले झाँटों से तो स्वाद खतम करने दे। मैं बेटियों का लालच नहीं दे रही बल्कि इसमें तो मेरा ही फायदा है, मुझे तेरे जैसे मर्द का मूसल जैसा लंड मिले। अनिल… मैं तो यही चाहुँगी कि मेरी बेटियों को भी अच्छी चूदाई मिले इस लंड से। वैसे वो मेरी बेटियाँ हैं… इसलिए हो सकता है कि वो कॉलेज में लड़कों से चुदवाती हों।”
रोज़ा की चूत फ़ैला कर उसमें जीभ डाल कर अनिल चूत को जीभ से चोदने लगा। पूरी जीभ अंदर डाल कर चूत चाटने के बाद अपनी गाँड को चोद रही रोज़ा की जीभ का अच्छा एहसास होने पे अनिल बोला, “आआआआहहहहह साआआआआलीईईई क्या गरम जीईईईभभभ है तेरी रंडी.
इतनी गरम जीभ आज तक मेरी गाँड पे नहीं लगी, और चाट, चूस अंदर डाल जीभ, राम कसम… आज पहली बार इतना गरम माल मिला है, साली तू रंडी बनने के लायक है, तुझे तो किसी बड़े आदमी की रखैल बनना चाहिये रोज़ा। चूस और चोद मेरी गाँड रंडी, आहहहहह।”
अनिल फिर चूत को उँगली से फ़ैला कर चाटने लगा। रोज़ा की गाँड को सहला कर वो बीच-बीच में गाँड भी चाटने लगा। फिर अपनी जीभ से चूत को चोदते हुए उसने रोज़ा की गाँड में उँगली घुसा डाली। गाँड में उँगली घुसने से रोज़ा उचकी। वो भी अनिल की गाँड चाटने लगी मस्ती से। उन दोनों का ये खेल चलता रहा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
अपना मुँह अनिल की गाँड से हटा कर रोज़ा बोली, “देखो अनिल, हम दोनों ने ये तजुर्बा पहली बार किया है। बहुत मज़ा आ रहा है तेरी गाँड चाटने में और तुझसे अपनी गाँड चाटवाने में। आहह अरे उँगली से क्या गाँड फाड़ेगा गाँडू? मेरी गाँड तेरे लौड़े से फटनी चाहिये।
ऊम्म्म्म्म और अंदर अपनी मर्दानी जीभ डाल मेरी गरम मुसल्ली चूत में अनिल कुत्ते। मेरे चोदु भड़वे, जी चाहता है कि आज रात की सुबह ही ना हो, तू ऐसे ही पेलता रहे मुझे रात भर। ओहहह… मेरे मम्मे पे अपने हथौड़े जैसे हाथ से मेहरबानी कर… बहुत दिनों से इनको तेरे जैसे मस्त मर्द ने छुआ और मसला नहीं है।”
अनिल उठ कर रोज़ा के सीने पे बैठ गया जिससे अब उसकी गाँड रोज़ा के मुँह पे आ गयी। रोज़ा अनिल की गाँड फ़ैला कर उसे चाटने लगी और अनिल उसके मम्मों को ज़ोर से मसलते हुए और निप्पलों को खींचते हुए बोला, “अरे बहनचोद रंडी, लौड़े से ही तेरी गाँड फाड़ूँगा रानी पर पहले तेरी गाँड में उँगली करके उसमें मस्ती तो भर दूँ।
साली इतनी क्यों उतावली हो रही है तू लंड के लिये? बहनचोद लंड घुसेगा तो देखुँगा कि कितनी मस्ती या दर्द से चुदवाती है तू। वैसे रंडी तेरे मम्मे सही में बड़े शानदार हैं, साली देख कैसे तन कर खड़े हैं तेरे निप्पल। बहनचोद… मम्मे बहुत दिनों से मसले नहीं ना किसी ने, आज देख तेरे मम्मों को कैसे नोच-नोच कर मसलता हूँ रंडी।”
रोज़ा में और मस्ती भर गयी मम्मों के मसलने से। अनिल उसके मम्मे मसल रहा था तो वो लंड पकड़ कर अनिल को दिखा कर हिलाती हुई उसकी मुठ मारने लगी जिससे उसमें से काफी रस निकले। एक हाथ से वो पतला सा रस ले कर उसे अपनी चूत पे रगड़ते हुए धीरे-धीरे रोज़ा उतावली हो कर अनिल की गाँड चाट रही थी। अब उसे एहसास हो रहा था कि उसकी चूत में लंड नहीं घुसा तो वो बेहद बेकाबू हो जायेगी।
अपनी चूत में उँगली डालते हुए वो अनिल से बोली, “उफ्फ बहनचोद, मैं सही में अब उतावली हो गयी हूँ तेरे लंड के लिये। तूने आज जैसे मुझे गरम करके रंडी बनाया है वैसे आज तक मैंने कभी नहीं किया था। तेरे इस दमदार लौड़े से दर्द भी हुआ तो भी अपनी गाँड को मैं चुदवाऊँगी, पर साले मादरचोद… अब चोद डाल मेरी चूत। बहुत तड़प रही है मेरी चूत तेरे लौड़े के लिये। दे मुझे अपना ये लौड़ा और शाँत कर मेरी जवानी।”
अपने नीचे लेटी रोज़ा की तड़प देख कर अनिल खुश हुआ। उस रंडी औरत को चूदाई के लिये इतनी बेताब बनी देख कर उसे और तड़पाने के लिये उसके मम्मे और भी बेरहमी से मसलते हुए निप्पल खींच कर उनको मस्ती से मरोड़ते हुए वो बोला,
“बहनचोद इतनी क्यों उतावली हो रही है कि लंड पे से मेरा पानी ले कर चूत में डाल रही है रंडी? अरे चूत में तो मेरा लौड़ा घुसेगा… तब मज़ा आयेगा तुझे… वो उँगली निकाल राँड। साली और थोड़ी मेरी गाँड चाट कर जीभ से चोद… उसके बाद तेरी चूत फड़ दूँगा मैं, चल और चाट मेरी गाँड मेरी रोज़ा रानी।”
“आहहहह… अब ये आग नहीं सही जाती, जल्दी मेरी चूत में डाल दे अपना मुस्टंडा लंड नहीं तो मैं मर जाऊँगी… बहन के लौड़े। एक बार मुझे शाँत कर… फिर तू कहेगा तो रात भर तेरी गाँड चाटूँगी मैं। लेकिन अब सहा नहीं जाता, अब गाँड चाटने को मत बोल, अभी मेरी चूत चोद डाल।”
रोज़ा उँगली से अपनी चूत चोदते हुए जोश में आकर दूसरे हाथ से अनिल के बाल पकड़ कर उसका सिर झंझोड़ डाला और उसकी छाती में एक मुक्का भी मारा। फिर उसका लंड सहलाने लगी जोश में। यह कहते हुए भी अनिल की गाँड को चूसती रही वो बहुत उतावली हो कर।
अनिल को पहले तो रोज़ा के मुक्के और अपने बाल खींचे जाने पर गुस्सा आया पर फिर रोज़ा पे रहम खा कर उसने उसकी चूत को झुक कर एक बार पूरी जीभ अंदर डाल के अच्छे से चाट लिया। फिर उसकी टाँगें फ़ैल कर उनमें बैठ के निप्पल खींच कर मम्मे बेरहमी से मसलते हुए बोला, “चल रोज़ा रंडी, पहले तेरी चूत फाड़ कर बाद में तेरी गाँड का भोंसड़ा बना दूँगा…
चल छिनाल मेरा लंड पकड़ कर अपनी रंडी चूत पे रख और चूत उठा कर मरे लौड़े से लगा। बहनचोद बहुत गरम हो गयी है… लगता है अब तेरी इस गरम मुल्लानी चूत में अपना मूसल लौड़ा डाल के तुझे नहीं चोदा तो तू जल जायेगी अपनी चूत की आग में। मादरचोद कैसे एक अंजान मर्द की गाँड चाट रही है तू साली भड़वी। राम कसम तेरे जैसी गरम माल देखी नहीं आज तक, चल रख मेरा लंड अपनी गरम चूत पे।”
अपना सीना ऊपर करके अनिल के हाथों में अपने मम्मे भर कर रोज़ा एक चुदक्कड़ बिल्ली की तरह झट से अनिल का लंड पकड़ कर अपनी चूत पे सटा कर खुद ही अपनी कमर ऊपर नीचे करती हुई लंड अंदर डालने की कोशिश करती हुई बोली, “आआहहहह… उम्म्म अब मुझे चैन मिलेगा भोंसड़ी के…, ले मैंने चूत पे लंड रख दिया, अब तू डाल अपना लौड़ा मेरी गरम चूत में बिंदास हो कर।”
रोज़ा ने लंड चूत पे जैसे ही रखा, अनिल ने हल्का धक्का दिया जिससे रोज़ा की तंग चूत का मुँह फ़ैला कर लंड की टोपी अंदर घुसी। रोज़ा की एक चूंची बेरहमी से मसलते हुए और दूसरे हाथ से अपना लंड पकड़ कर अनिल बोला, “मादरचोद बड़ी चुदासी लगती है तू… रंडी अब देख तेरी चूत की क्या हालत करता हूँ। मादरचोद बड़ा गरम किया है तूने मेरा लंड छिनाल, बड़ी मस्ती से चोदुँगा तेरी चूत हरामी।”
जैसे ही अनिल का हाथ अपने लंड पे गया, रोज़ा अपने हाथों से खुद अपनी चूचियाँ मसलती हुई बोली, “उउम्म्म थोड़ा और जोर से मार ना… पूरा लेना है लौड़ा चूत में हरामी। तू दर्द की चिंता मत कर, जितनी बेरहमी से हो सके डाल अपना लौड़ा मेरी चूत में और चोद मुझे।” रोज़ा की इस बात पे अनिल ने भी जोश में आकर उसकी कमर में हाथ डाल कर एक ज़ोर दार धक्का दिया.
जिससे उसका मोटा लंड रोज़ा की चूत फैलाते हुए करीब-करीब आधा घुस गया। इतना मोटा लौड़ा घुसने से रोज़ा का सीना और माथा पसीने से लथपथ हो गया। दर्द से उसने आँखें बंद करके होंठ दाँतों में दबाये। रोज़ा के सीने का पसीना चाट कर अनिल बोला, “तेरी माँ की चूत चोदूँ, साली रंडी, क्या टाइट चूत है तेरी। लगता है तेरे शौहर का लंड ज्यादा बड़ा नहीं है जो मेरा लंड इतना टाइट जा रहा है।”
अपनी कमर हिला कर, पैर फ़ैलाते हुए रोज़ा अनिल के लंड का रास्ता और आसान करती हुई, अनिल के चौड़े सीने पे हाथ फेरती हुई बोली, “अरे मेरे शौहर की बात छोड़, तुझे मज़ा आ रहा है ना एक ४२-४३ साल की औरत की इतनी टाइट चूत में लंड डालने में?
यार तू अपनी सोच, मेरे बारे में बोल, शौहर का क्या काम है? उसका काम खतम हुआ जब उसने दो बेटियाँ दे दीं, मुझे अब उसका कोई काम नहीं है, साला पाँच मिनट में झड़ जाता है। तेरी कसम अनिल मुझे ये इतना पसीना इक्कीस साल की शादी में कभी नहीं आता था।”
दो-तीन बार लंड आगे पीछे करके अनिल ने फिर ज़ोर से धक्का देके लंड रोज़ा की चूत में घुसाया। इस बार पूरा लौड़ा अंदर घुसा तो रोज़ा चिल्लाने और तड़पने लगी। अपने मम्मे खुद मसलती हुई वो ज़ोर से आंहें भरने लगी। अनिल बिना रुके लंड चूत में ठेलते और मम्मे मसलते हुए बोला,
“मादरचोद उसकी बात तो आती रहेगी ही रंडी, तू मेरा लौड़ा और चूदाई की उससे तुलना करेगी ही ना? अब कैसे बोली कि इक्कीस साल में पहली बार ऐसा पसीना आया… वो भी आधा लंड घुसने से? तेरी माँ को चोदूँ राँड… ये सोच कि पूरा लंड घुसा कर जब जानवर जैसे तुझे चोदुँगा तब तेरा क्या हाल होगा?”
अनिल का पूरा लौड़ा अंदर घुसने पर रोज़ा जोर से ’ओहहह आहहह ऊफ़्फ़्फ़’ चिल्लाने लगी। वो खुद कमर ऊपर करके अनिल के लंड से भिड़ा रही थी। अनिल ने चूत आहिस्ता चोदते हुए रोज़ा के होंठों पे अपने होंठ दबा कर मस्ती से मम्मे मसलना शुरू किया। मम्मों से इतना खेलने से वो एकदम लाल हो गये थे।
रोज़ा अनिल को बाहों में ले कर उसको किस करके बोली, “अरे मैं तुलना करके उससे कहूँगी कि तेरे जैसे असली मर्द कैसे चोदते हैं। तू क्यों बीच में उसे लाता है, तू मेरी और अपनी बात कर ना। आज तुझे मौका मिला है तो कर ले इस जिस्म से अपने दिल की भड़ास पूरी। ऐसा मौका बार-बार नहीं आता कि मेरी जैसे गरम चुदास औरत तेरे जैसे तगड़े चोदू मर्द के नीचे हो।
हाँ ये बात और है कि तेरे जैसे मर्दों के गरम करने पर मेरे जैसी औरतें टाँगें फ़ैला देती हैं… लेकिन गरम होने में बहुत वक्त लेती हैं मेरे जैसी औरतें। आहहहहह आँआँ फाड़ दिया मेरी चूत को… गधी की औलाद… भोंसड़ी वाले… चोद…. और डाआआआल अपना लौड़ाआआआ अंदर आआआआ ओओओओआँआँआआआहहहहह।” ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“ठीक है राँड अब तेरे हिजड़े शौहर की बात नहीं करूँगा। चोदने तक तेरी बात और उसके बाद तेरी सहेलियों और तेरी कमसिन बेटियों की बात करूँगा। आज रात भर तुझे ऐसे ही खुली हवा में चोदुँगा रंडी की तरह… और कोई भी आये तो मेरे बाद उससे भी तुझे चुदवाऊँगा समझी?
तेरी जैसी रंडी औरत को जब-जब मैं चाहता हूँ… अपने नीचे लेता हूँ, तेरी जैसी औरतें नखरे करके और शरमाके चुदवाती हैं इससे हम मर्द बड़े गरम होते हैं। तुम मुसल्लियाँ आराम से गरम होती हो और बेरहमी चुदा के ठंडी होती हो। मादरचोद लगता है ज़िंदगी में पहली बार लंड गया तेरी चूत में जो तू इतना चिल्ला रही है… हरामी ये तो शुरूआत है… अभी तेरी गाँड बाकी है छिनाल।”
जीभ रोज़ा के मुँह में घुसा कर उसके मम्मे मसलते हुए अनिल ने अब उसकी चूदाई ज़ोर से शुरू की। रोज़ा ने थोड़ा अपने होंठ अनिल के होंठों से अलग किये उसे जवाब देने के लिये और इसलिये उसने अपनी चूंची उसके मुँह में दे दी। अनिल का लंड ज्यादा से ज्यादा चूत में ले कर वो पैर फ़ैला के कमर उठा कर मस्ती से चुदवाने लगी।
अनिल का मुँह मम्मे पे दबा कर वो बोली, “ले मेरे मम्मे चूस कर मेरे दर्द को ज़रा तसल्ली दे। अनिल बहनचोद… मैं तो ऐसे चुदवाने को शादी की पहली रात से तड़प रही थी कि खुली हवा में चुदवाऊँ लेकिन मेरा शौहर, साले का लंड खुले में आते ही मानो ठंडा पड़ जाता है।
अरे अब शुरूआत ऐसी हो चुकी है तो अंत भी बड़ा ज़ालिम होना चाहिये। मुझे ऐसा लगना चाहिये कि ज़िंदगी में पहली बार चुदी हूँ। सुन अनिल गाँडू… तेरा रस मेरी चूत के एकदम अंदर डालना… मेरी बच्चेदानी पे… तभी मुझे सही में तसल्ली मिलेगी।”
रोज़ा के मम्मे पहले बच्चे की तरह चूस कर फिर जोश में आकर दोनों निप्पल बारी-बारी चूस कर, चबाते हुए पूरे लाल कर दिये अनिल ने। नीचे चूत में लंड घुसा-घुसा कर रोज़ा को चोदते हुए अनिल ने उसके मम्मे इतने चूसे कि उसके चबाने से रोज़ा के मम्मों से हल्का सा खून आ गया जिसे अनिल ने चाट लिया।
फिर मम्मे मसलते हुए अनिल बोला, “रोज़ा तेरे जैसी गरम माल के साथ ज़िंदगी भर खेलुँगा, तुझे अपनी राँड बना कर रखुँगा, तेरी जैसे गरम चूत आज तक नहीं मिली। रोज़ा शादी के इक्कीस साल रेगिस्तान में भटकने के बाद आज तुझे समंदर मिल रहा है, एक असली दमदार लंड से…
तेरा शौहर जल्दी झड़ता है… इस लिये मुझे शक है कि वो तेरी बेटियों का बाप नहीं है क्यों? बहनचोद चूदाई के अंत में तू लंड निकाल लेने के भीख माँगेगी… समझी छिनाल? बहनचोद तुझे चोदके फिर माँ बनाऊँगा और अपने बच्चे की सौतेली बहनों को और उसकी माँ को चोदता रहुँगा।”
रोज़ा अनिल का चेहरा चूमते हुए हाथ नीचे डाल कर उसकी गोटियाँ मसल कर बोली, “अरे-अरे ये गाली मत दे उसे… उसके साथ शादी के बाद आज पहली बार किसी पराये मर्द का लंड इस चूत को नसीब हुआ है पर शादी से पहले बहुत लंड लिये हैं मैंने अपनी चूत में। आज इस चूत को फाड़ कर अपनी रस की एक भी बूँद मेरी चूत के बाहर ना जाये… ये देखना। अच्छा लेकिन ये तो बता तुझे मुझ जैसी लजीज़ माल तो कई मिली होंगी ना?”
लंड करीब-करीब बाहर निकाल कर फिर बेरहमी से अंदर ठाँसते हुए और मम्मे नोचते मसलते हुए अनिल बोला, “बहनचोद तेरा चूतिया मर्द मिले तो उसकी गाँड मारूँगा, हरामी ने तेरी जैसी गरम चूत इतने दिन मुझसे जो छिपायी। तेरी माँ की चूत… साली तू तो बचपन से मेरी राँड होनी चाहिये थी।
तेरी माँ को चोदूँ राँड… अपने कीमती लंड के पानी की एक भी बूँद बाहर नहीं जाने दूँगा। तेरी गरम चूत की कसम… कईं चूतें चोदीं, पर तेरी जैसी माल आज तक नहीं मिली। तेरी जैसी गरम और हर बात में साथ देने वाली चूत नसीब वाले मर्द को ही मिलती है रंडी।”
“तू मेरी चूत चोदता रह… भड़वे। तेरी गाली, मार और लंड मुझे और मस्त बना रहे हैं अनिल। और ज़ोर से चोद मुझे, निकाल ले पूरी भड़ास गाँडू मेरी ये चूत चोद कर।” अनिल के लंड पे शायद भूत सवार था। वो तो बेरहमी से रोज़ा को चोद कर उसके मम्मे मसलते हुए दबा रहा था।
चूत चोदते हुए उसकी गाँड में उँगली घुसाते हुए उसमें घुमा कर निकाल के रोज़ा को चाटने के लिये देते हुए वो बोला, “ये बोल आज के पहले भी मर्दों ने तुझे भीड़ में मसला होगा तो उनसे क्यों नहीं चुदी तू राँड?” रोज़ा अनिल की उँगली शौकिया तौर पे एक रंडी जैसे चाट कर और फिर अपनी एक उँगली उसके लंड के साथ अपनी चूत में डाल कर निकाल के अनिल को चाटने के लिये देते हुए बोली,
“अरे कईं लोगों ने मुझे क्या कईं औरतों को मसला है… इसलिये तो हम औरतों को भीड़ में जाना पसंद नहीं। रही बात औरों से मसलवाने कि तो कईं बार मसली गयी हूँ पर किसी में तेरे जितना दम ही नहीं था इसलिये सिर्फ़ मसलने पे ही बात खतम हुई। तू जिस हिसाब से मेरी बात माने बिना भीड़ में ब्लाऊज़ खोलने लगा… तब मैंने फ़ैसला किया कि तुझे अपने साथ आने को कहूँगी।”
रोज़ा की उँगली पूरी चाट कर हल्के से चबाते हुए अनिल बोला, “क्या बोलती है? तेरी जैसी गरम रंडी औरत को भीड़ में जाना पसंद नहीं? अरे तेरी जैसी औरत को ही तो मैं भीड़ में ढूँढ कर गरम कर कर चोदता हूँ, तू मेरी ज़िंदगी में बस में मिली वैसे तीसरी चूत है। तूने भीड़ में सामने वाले को आज के पहले कितनी लिफ़्ट दी और वो कहाँ तक आया तेरे साथ?”
अनिल अब चूत चोदते हुए रोज़ा की गाँड में एक के बाद दूसरी उँगली डालते हुए अब चूत और गाँड एक साथ चोदने लगा। रोज़ा पूरी मस्ती में आ कर अपनी कमर उछाल-उछाल कर चुदवाती हुई बोली, “और तेज़ भौंसड़ी के… और तेज़ डाल ना, मज़ा आ रहा है एक साथ चूत और गाँड चुदवाने में। उफ़्फ़्फ़ बड़ा ज़ालिम मर्द है तू… अनिल, और चोद मुझे गाँडू।”
रोज़ा की गाँड में तीसरी उँगली डाल के घुमाते हुए उसकी चूत को अनिल चोद रहा था। रोज़ा की चूत में लंड घुसने की ’थप थप’ की आवाज़ आने लगी और रोज़ा की सिसकरियाँ सुनायी देने लगी। अनिल फिर निप्पल खींचते हुए बोला, “ये ले रानी और ले और ले, तेरी माँ की चूत… आज तेरी गाँड और चूत फाड़ दूँगा। बोल तूने कहाँ तक लिफ़्ट दी है मर्दों को जब उन्होंने तेरा जिस्म भीड़ में मसला… रोज़ा रानी?”
कमर उछाल-उछाल कर चुदवाने से रोज़ा के मम्मे उछल रहे थे और फचक-फचक की आवाज़ आने लगी जब अनिल का लंड उसकी चूत में घुस कर बाहर निकलता क्योंकि दोनो बहुत गीले हुए थे। निप्पल खींचने से रोज़ा दर्द और मस्ती से बोली, “आहह आहहह और तेज़ गाँडू, मेरे जिस्म को बेरहमी से मसलते हुए चोद मेरी चूत।
अनिल मैंने तेरे से ज्यादा किसी को लिफ़्ट नहीं दी। लिफ़्ट तो बस भीड़ तक ही दी, जो दूसरे मर्दों ने किया, वो भीड़ में वहीं करने दिया पर तेरे सामने नंगी हो कर जैसे चुदवा रही हूँ वैसा मौका किसी भी मर्द को नहीं दिया। एक दो मर्दों ने भीड़ में ही अपना लंड पैंट की ज़िप खोल कर बाहर निकाल कर मेरी सलवार के ऊपर से गाँड पे रगाड़ा भी और मेरी पीठ और सलवार पर अपना वीर्य भी छोड़ा पर मैंने चुदवाया किसी से नहीं”.
रोज़ा का जोश और बढ़ावा देख कर खुश हो कर अनिल ने सोचा कि साली को सच में आज तक ऐसा लौड़ा नहीं मिला जो ये इतनी उछल कर चुदवा रही है। अब इसको और मज़ा दूँगा। वो रोज़ा की कमर पकड़ कर बोला, “सुन रंडी चूत… अब मैं नीचे आऊँगा और तू मेरे ऊपर आ कर मेरे लौड़े से तू चूत चुदवा ले अपनी… समझी रंडी?”
रोज़ा को बाहों में पकड़ कर घूम कर उसे अनिल अपने ऊपर ले कर बोला, “चल रंडी अब देखता हूँ… कितना दम है तुझ में।” रोज़ा के लाल मम्मों को अब और बेरहमी से मसलते हुए और निप्पल खींच कर उसे दर्द और मज़ा देते हुए नीचे से गाँड उठा कर उसके धक्कों का जवाब अनिल देने लगा।
इस पोज़िशन में आठ-दस धक्के खाने के बाद रोज़ा चूत से लंड निकाल कर घूम के अपनी पीठ अनिल की तरफ कर के लंड अपनी चूत में डाल कर चुदवाने लगी। ऐसा करने से अनिल को अपना लंड रोज़ा की चूत से अंदर बाहर होते दिखने लगा। साथ-साथ रोज़ा अपने मम्मे खुद दबा कर कईं बार अपनी चूत को सहलाते हुए सिसकरियाँ भरती हुई चुदवाने लगी।
रोज़ा के इस स्टाइल और बे-शर्मी से खुश हो कर अनिल उसकी चूत सहलाते हुए अब आराम से उसकी गाँड में भी उँगली करने लगा। बीच में उसके मम्मे भी खींच कर नोचते हुए वो बोला, “बहनचोद तू तो बड़ी मस्त रंडी है, क्या स्टाइल से चुद रही है राँड, ऐसा कभी देखा नहीं छिनाल, और ज़ोर से चुदवा ले रंडी, देखने दे तेरी चूत में कितनी गर्मी है छिनाल। आहहहहह साली और ज़ोर से उछल, लंड तेरी बच्चेदानी पे टकरा रहा है या नहीं रखैल?”
नीचे के धक्कों से रोज़ा भी अब अपना पूरा ज़ोर लगा कर उछलने लगी। काफी चूदाई के बाद उसकी चूत में अब सूजन महसूस होने लगी जिसका अनिल को भी एहसास हुआ। ज़ोर से उछलने और हिलने से रोज़ा के मम्मे हवा में झूल रहे थे और अनिल उनको बेरहमी से मसल रहा था।
अपनी चूत सहलाते हुए रोज़ा बोली, “हाँ अनिल… साले! तेरा लंड मेरी बच्चेदानी पे ठोकर दे रहा है। लगता है तेरे लौड़े को मेरी गरम चूत में झड़ कर इस चूदाई की निशानी छोड़नी है। तेरे लौड़े से चुदवाने से मेरी चूत सूज गयी है लेकिन अभी तक दिल नहीं भरा… मेरे चोदू राजा।”
रोज़ा के उछलते मम्मे मुठ्ठी में दबाते हुए अनिल बोला, “साली रंडी अब और चोदुँगा तुझे, ये तो नॉर्मल स्टाइल हुई… अभी तुझे कुत्तिया बनाके चोदना है। तेरी जैसी गरम औरत को कुत्तिया बनाके चोदने में बड़ा मज़ा आता है मुझे… रोज़ा छिनाल! इससे लंड को ठंडक पहुँचती है मेरे। देख मम्मे कैसे उछल रहे हैं हवा में, मादरचोद मज़ा आ रहा है तुझे चोदने में।”
अब रोज़ा की हालत बड़ी खराब होने लगी। इतना दर्द उसे पहले कभी नहीं हुआ था। वो कमर थोड़ी ऊपर करके अब अनिल का पूरा लंड चूत में ना लेते हुए बोली, “हाँ… हाँ… तुझे मज़ा आ रहा है भड़वे! पर मेरी हवा बिगड़ने लगी है तेरे लौड़े से।”
रोज़ा की कमर कस कर पकड़ कर चूत में लंड ठेलते हुए अनिल बोला, “तो क्या करूँ? तुझे नीचे ले कर आखिरी धक्के मार के तेरी चूत में अपनी निशानी छोड़ जाऊँ क्या रोज़ा रंडी?” रोज़ा को अब बोलने की ताकत नहीं रही थी इसलिये वो चिल्लाते हुए बोली, “आह आहहह आहहह ओहहह अल्लाह आहहह ओहहह मेरे मौला ओहहह अल्लाह चूत फट गयी ओहहहहह हाय गाँआँआँडू आहहहहह आहहह होओओओओ अल्लाह।”
जानवर बनके अनिल बिना रहम के उसको चोदते हुए बोला, “फटने दे रंडी, तुझे याद रहेगा कि असली मर्द के लंड से तेरी चूत फटी, ये ले… और ले… और ले साली।” बेरहमी से उसे चोदते हुए और फिर उसे अपने नीचे ले कर अनिल चोदते हुए बोला, “बोल मेरी रंडी बनेगी ना? तेरी बेटियाँ देगी ना मुझे रोज़ा?”
अब अनिल का लंड पूरा का पूरा रोज़ा की बच्चेदानी पर धक्के देने लगा था। अपना सीना अनिल के मुँह पे दबाते हुए रोज़ा बोली, “अरे बन गयी हूँ ना अब मैं तेरी रंडी अनिल और हाँ… दूँगी तुझे अपनी बेटियाँ भी। पर क्या मेरी बेटियाँ तुझसे चुदवा सकेंगी, ये तगड़ा लौड़ा उनकी चूत फाड़ नहीं देगा राजा?”
मुँह पे आये रोज़ा के मम्मे चूसते हुए और कमर कस के पकड़ कर चोदते हुए अनिल बोला, “नहीं ले सकी मेरा लंड तो चूत फटेगी और क्या होगा? पर असली मर्द से चूत फटने का मज़ा तो मिलेगा ना उनको? नहीं तो ना जाने कौनसे चूतियों से अपनी चूत चुदवाके अपनी जवानी बर्बाद करेंगी वो दोनों।”
रोज़ा अनिल के बाल संवारते हुए झड़ने के करीब होने से अपना जिस्म अनिल के बदन से रगड़ते हुए बोली, “ठीक है भोंसड़ी वाले! तुझे मैं अपनी बेटी को चोदने दूँगी में। तूने जो मुझे चोदके मुझ पर मेहरबानी की है उसके लिये तुझे अपनी बेटी जरूर दूँगी।”
अनिल भी झड़ने पे आया था। वो कस कर रोज़ा को पकड़ कर उसके निप्पल बेरहमी से चूसते चबाते और चूत चोदते हुए बोला, “मैं भी झड़ने वाला हूँ तेरी गरम चूत में, बहुत मज़ा आया जान, ले और ले रंडी। आहहहहहह ये ले रंडी साली मज़ा आया तुझे चोदने में रोज़ा।” ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
रोज़ा जैसे ही झड़ने लगी तो चिल्लाती हुई बोली, “आहहहहह आआआहहहह आँआँआँआँहहहहह मैं तो ओओओओओओ गयीईईईई ऊऊईईईई अल्लाह आहहहह, मुझे कस कर पकड़ अनिल।” रोज़ा की उछल कूद से जैसे ही अनिल झड़ने लगा तो रोज़ा को कस कर पकड़ कर अपना लंड पूरा अंदर तक घुसाते हुए बोला, “ये ले छीनाआआआआल चूत आहहहहहहह क्क्याआआआआ चूत है तेरीईईईई।”
अनिल कस के रोज़ा को पकड़ कर लंड का पानी उसकी चूत में छोड़ने लगा। रोज़ा को वो गरम पानी अपनी बच्चेदानी पे गिरने का एहसास होने लगा। वो गरम-गरम लावा उसकी चूत में जाके उसकी चूत को ठंडक देने लगा। लंड का पानी चूत को भरने लगा और चूत भरने के बाद काफी वीर्य बाहर आकर रोज़ा की जाँघों को गीला करता हुआ नीचे गिरने लगा।
अनिल निप्पल चूस कर बोला, “ले जान आआआआआहहहहहह सालीईईईई पूराआआआआ पानी ले रही है तेरी चूत रोज़ा छिनाल।” रोज़ा ने अनिल का चेहरा पकड़ कर एक ज़ोरदार चुम्मा उसके होंठों पे सटाया। रोज़ा अब भी हाँफ रही थी और संतोष के मारे उसकी आँखें अभी भी बंद थी। पूरा झड़ने के बाद दोनों हाँफ रहे थे। जैसे ही अनिल का लंड चूत से निकला तो ’पॉप’ की आवाज़ हुई और लंड निकालने के बाद चूत में वीर्य बाहर बहने लगा।
रोज़ा की ब्रा से चूत साफ़ करके अनिल उठ कर घुटनों पे खड़ा हो कर लंड रोज़ा के होंठों के पास लाते हुए बोला, “मेरे इस मुस्टंडे लंड को कैसे साफ़ करेगी रोज़ा राँड?” लंड रोज़ा के होंठों पे घुमाते हुए अनिल आगे बोला, “ले रंडी चाट के साफ़ कर मेरा लंड… छिनाल रोज़ा।” रोज़ा थकान की वजह से यंत्रवत अपनी जीभ बाहर निकाल कर अनिल का लंड चाटने लगी। अनिल हौले-हौले अपना लंड रोज़ा के मुँह में डाल के साफ़ करते हुए बोला, “अच्छे से चूस कर साफ़ कर रंडी, ये तेरे हिजड़े शौहर का लौड़ा नहीं है, तेरे यार का लौड़ा है। ठीक से साफ़ कर इसे।”
रोज़ा के पूरा लंड चाट कर साफ़ करने के बाद वो दोनों उसी खुली हवा में थकान से निढाल हो कर लेट गये। उस रात अनिल से चुदवाने के बाद रोज़ा सहेली के घर जाने की बजाय वापस अपने घर गयी। उन फटे और गंदे कपड़ों में सहेली के घर जाती तो सहेली को पक्का शक हो जाता। फटे ब्लाउज़ में बिना ब्रा के सीने को गंदी साड़ी में लपेट कर, साड़ी बिना पेटीकोट के पैंटी पर बाँध कर वो घर आयी। अनिल रोज़ा को घर तक छोड़ने गया था। रोज़ा की बेटी सो रही थीं इसलिये उसे कुछ तकलीफ नहीं हुई घर में।
रोज़ा की कमर में दोनों हाथ डाल कर उसकी चूत बेताबी से चाटते हुए पूरी जीभ चूत में घुसा के अनिल चाटने लगा। अच्छे से चूत चाट कर फिर बेरहमी से रोज़ा के मम्मे मसलते हुए.
अब आगे..
बहनचोद तेरी जैसी सब औरतों ने यही कहा है मुझसे कि मेरे जैसा लंड देखा नहीं है उन्होंने। कितनों को चोद के भोंसड़ा बना चुका हूँ मैं… आज तेरी बारी है। सुन रोज़ा आज रात भर तुझे चोदुँगा, तेरी सहेली गयी भाड में। आज तुझे उसके घर जाने नहीं दूँगा, अभी यहाँ चोद कर फिर मेरे घर ले जाऊँगा समझी? बहनचोद साली तुझे बच्चों के बारे में पूछा तो जवाब क्यों नहीं देती हरामी।” गुस्से से अनिल ने रोज़ा के मम्मे ज़ोर से दबाये।
गालियाँ और बेरहमी से चूत मसलने से रोज़ा को बड़ा अच्छा लग रहा था। पहली बार एक जानवर जैसे मर्द से मस्ती करने में उसे मज़ा आ रहा था। अनिल की गोटियाँ मसलते हुए वो बोली, “आहहहह और चाट मेरी चूत और ऐसे ही मसल डाल मेरे मम्मे अनिल। आज तक शौहर ने इस तरह कभी मसला नहीं मेरा जिस्म और चूत भी चाटी नहीं उसने।
मेरे बदन से खूब खेलके फिर डाल अपना जानवर जैसा लंड मेरी चूत में। मैं भी बेताबी से तुझ से एक जंगली जैसी चुदवाने को तड़प रही हूँ। कईं बार अपनी चूत को केले से चोदते हुए गधे के लंड का तसव्वुर करती हूँ… तेरा लंड भी कम नहीं है… चाहे जो हो जाये आज… चाहे मेरी चूत फटे, मुँह सूजे, मम्मों से खून निकले या गाँड फटे, मैं तेरा लौड़ा आज ले लूँगी और पूरी तरह से लूँगी।
तू तो ऐसा बोल रहा है जैसे तूने बहुत चूतों को चोदा है, तेरी स्टाइल से और तेरे अंदाज़ से ये भी मानना ही पड़ेगा पर मैं घर जाके नहीं चुदवाऊँगी, मुझे यहीं चुदना है। घर तो अब आना जाना रहेगा ही… वो फिर कभी। तू तो मेरी बेटियों के बारे में मेरे पीछे ही पड़ गया है। मेरी बेटियाँ हैं… ये सुन के तेरी आँखों में चमक क्यों आ जाती है अनिल?” ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
अनिल खड़ा हो कर नंगा हुआ और फिर रोज़ा को भी खड़ी करके उसका पेटिकोट और साड़ी निकाल के उसको सिर्फ़ ब्लाऊज़ में खड़ी किया। दोनों हाथों से रोज़ा का ब्लाऊज़ वो खिंच के उतारने लगा जिससे ब्लाऊज़ फट गया। रोज़ा की ब्रा उतार के उसको पूरी नंगी कर दिया। अब वो सिर्फ ब्राऊन कलर के ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहने अनिल के सामने खड़ी थी।
रोज़ा की चूत में दो उँगली डाल के उसके मम्मे मसलते हुए अनिल बोला, “साली मुझे मालूम है तेरी जैसी रंडी गरम औरत को कैसे बेरहमी से गालियों और मार के साथ चोदना चाहिये। तेरी जैसी रईस औरत को काफी पसंद है जानवर जैसे चुदवाना। बहनचोद वैसे तो बुर्का पहन कर बहुत शरीफ बन कर रहती हो पर हमारे सामने एकदम राँड बन जाती हो तुम।
तेरी बेटियों की बात सुन के मेरी आँखों में इसलिये चमक आयी क्योंकि मुझे तो कमसिन लड़कियाँ भी बड़ी पसंद हैं। तेरी जैसी गरम मुल्लनी औरतों की जवान बेटियाँ भी गरम होती हैं और उनको चोदने में बड़ा मज़ा आता है। बहनचोद… तेरी कमसिन बेटियाँ हैं… ये सुन के लौड़े में और गरमी भर गयी, मादरचोद… उनकी उम्र और नाम तो बता।”
अपनी कमर आगे पीछे करके रोज़ा अनिल से चूत में उँगली करवाती हुई उसका लंड मसलते हुए बोली, “देख अनिल, तू गालियाँ दे या जो कुछ भी करे… मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं, पर मार नहीं खाऊँगी। देख मैं बाकी औरतों जैसी नहीं हूँ। अब तुझसे चुदवाना है तो पूरा दिल खोल के चुदवा लूँगी, उसमें मेरा ब्लाऊज़ फटे या बाकी कपड़े गंदे हों तो भी कोई बात नहीं, मैं कुछ नहीं कहूँगी पर साले अब मेरी चूत को बराबार सहला.
मुझे बहुत मज़ा आता है जब तू ऊपर से सहलाते हुए चूत में उँगली करता है तो। अरे तेरा ऐसा मूसल जैसा लंड मैं छोड़ने वाली नहीं हूँ, तू जैसे चाहेगा वैसे चुदवा लूँगी आज तुझसे। मेरी बेटियाँ हैं और वो जुड़वां हैं पर तुझे क्या दिलचस्पी है उनमें ये तो बता? एक का नाम खुशबू और दूसरी का जोया है।”
रोज़ा की वो हल्की अकड़ देख के अनिल ने गुस्से से उसकी चूचियाँ बड़ी बेरहमी से मसलीं और निप्पल काटते हुए तीन अँगुलियाँ ज़ोर से चूत में घुसा दीं जिससे रोज़ा को बड़ा दर्द हुआ पर फिर भी रोज़ा ने उससे और लिपट के आहें भरीं। अपना लंड रोज़ा के हाथ में दे कर और उसके निप्पलों से खेलते हुए.
अनिल बोला, “तेरी माँ की चूत साली, मुझे मत सिखा कि क्या करूँ हिजाबी रंडी। मैं जैसे चाहुँगा तुझे चोदुँगा, जितना चहुँगा मारूँगा समझी? तेरी जैसी रंडी चूत को मार के चोदने से तुम हमेशा हमारे हमारे लंड की गुलाम रहती हो। मेरे सामने ज्यादा अकड़ना नहीं समझी? मैंने प्यार से तेरे सैंडल के तलवे छाटने की बात कही तो तू ज्यादा ही अकड़ने लगी…”
रोज़ा को एक झापड़ मार कर रोज़ा की चिकनी चूत सहलाते हुए अनिल ने नीचे बैठ कर उसको चाट कर कहा, “मुझे मालूम है तेरी जैसी गरम चूत मेरा तगड़ा लंड कभी नहीं छोड़ेगी लेकिन साली तुझे चोदने की कीमत चाहिये मुझे… और कीमत है तेरी वो दो जुड़वां बेटियाँ, आहहहहहह नाम भी क्या सैक्सी हैं उनके, खुशबू और जोया, उम्र क्या है तेरी उन बेटियों की रोज़ा?”
अनिल के झापड़ से रोज़ा के गाल पे लाल निशान आ गया। उसके बाल बिखर के चेहरे पे आ गये। उसने अपने बाल संवारे और उसका अनिल को दबाने का जोश कुछ ठंडा पड़ गया। जिस तरह अनिल उसकी चूत चाट रहा था उससे रोज़ा मदहोश हो कर अनिल का सिर चूत पे दबाते हुई बोली,
“आहहह चोद जैसे मर्ज़ी आये वैसे चोद। आज तू चाहे कुछ भी कर ले लेकिन ऐसा मस्त लौड़ा जाने नहीं दूँगी मैं। तू जी भरके गालियाँ दे… मार मुझे लेकिन जानवर बनाके चोद भी मुझे.. अनिल! पर बदले में तू भी मेरी गालियाँ सुनने और मेरी मार खाने के लिये तैयार रह…
मुझे भी चुदाई के वक्त वहशियानपन करना अच्छा लगता है… अनिल तू मेरी जैसी औरत को रंडी क्यों बोलता है? शौहर के अलावा मैं कई साल बाद किसी अजनबी से चुदवा रही हूँ… इसलिये रंडी बोलता है क्या मुझे? मेरी उम्र से तू ही अंदाज़ा लगा मेरी बेटियों की उम्र का। नहीं लगा सकता ना अंदाज़ तू? तो सुन दोनों अभी-अभी २० साल की हो गयी हैं।”
अनिल ने रोज़ा की चिकनी चूत चाट कर बाहर से पूरी गीली कर दी थी । रोज़ा की चूत को अंदर से भी अच्छे से चाट कर अनिल रोज़ा के मम्मों को पकड़ कर उनका सहारा ले कर खड़े होते हुए बोला, “देखा मादरचोद मुसल्ली राँड, एक झापड़ से कैसे तुझे तेरी औकात मालूम हुई? ये भी देखा ना तूने कि कैसे एक अंजान मर्द के साथ रासते में चुदवाने के लिये नंगी हुई है तू…
इसलिये तेरी जैसी चूदास औरतों को मैं राँड बुलाता हूँ, थोड़ा यहाँ और वहाँ हाथ लगाओ और साली तुम टाँगें फ़ैला कर चुदवाने को तैयार हो जाती हो, है ना सच बात?” रोज़ा के मम्मे निचोड़ कर अनिल ने रोज़ा को नीचे बिठाया और अपना लंड उसके मुँह पे घुमाते हुए बोला, “चल मादरचोद चूत!
अब मेरा लंड चूस अच्छे से, अब देख तुमसे क्या-क्या करवाता हूँ। बहनचोद बीस साल की मुल्लनी कमसिन चूत कभी नहीं चोदी मैंने और तेरे पास दो-दो कमसिन चूत हैं? तेरी माँ की चूत… खूब मज़ा आयेगा तेरी बेटियों को चोदने में, खूब चोदुँगा तुझे और तेरी बेटियों को।”
रोज़ा ने अनिल का लंड अपने चेहरे पे घुमा कर उसे ऊपर करके एक बार लंड के नीचे और गोटियों का पसीना चाट लिया। फिर प्यार से लंड को देख कर उसको चूमते हुए बोली, “हाँ हो गयी औकात पता मुझे मेरी अनिल एक झापड़ से। अरे अनिल गाँडू, तेरे जैसा अलबेला मर्द हो या कोई और मर्द हो, इतना गरम करोगे तो बर्फ जैसी कोई भी औरत नंगी हो जाये चुदवाने के लिये और फिर मैं तो खुद इतनी गरम हूँ और अभी जवान हूँ…
और ये इतना मस्त लंड देखूँगी तो क्या चुदवाने के लिये टाँगें फ़ैला कर तेरे नीचे नहीं लेटूँगी? तू देख तो… तेरा लंड मेरी नंगी जवानी देख कर कैसा फुँफकार रहा है। मानो इतनी मस्त नंगी औरत देखी ही ना हो। अरे बीस साल की चूत नहीं चोदी तो क्या हुआ? मेरा जिस्म और मेरी चूत भी तो वैसी ही है ना?”
रोज़ा के चाटने से अनिल को अच्छा लगा। उसे अब पेशाब आ रहा था। एक बार पेशाब करके फिर रोज़ा से लंड चूसवाना उसने बेहतर समझा। अनिल ने रोज़ा को ये बताया पर रोज़ा उसकी आँखों में आँखें डाल कर देखती हुई उसका लटकता और तना लंड सहलाती रही, मानो वो कुछ कहना चाहती हो पर शर्म से कह नहीं पा रही हो।
अनिल ने एक मिनट रोज़ा को देखा और फिर उसके दिल की बात समझ गया। अपना लंड रोज़ा के मुँह की तरफ करके पेशाब करने लगा। अनिल के पेशाब से रोज़ा का मुँह भर गया तो फिर उसकी पेशाब मुँह से हो कर मम्मों को गीला करते हुए और फिर नीचे चूत को गीली करके ज़मीन पे गिरने लगा।
अपना लंड फिर रोज़ा की माँग पे निशना लगाकर उसमें पेशाब करते हुए अनिल बोला, “तेरी माँ की चूत हरामी राँड, आज तक किसी भी औरत की माँग ऐसे नहीं भरी थी, राँड तुझे पेशाब पिला कर और माँग भर के अब तुझे अपनी छिनाल बनाया है। रही बात गरम करने की तो क्या तूने आज तक अपने मर्द को भी तुझे इतना गरम करते देखा है?
तू तो चुदवाने के पहले ही राँड बन गयी है। मादरचोद तेरी जैसे मुल्लनी औरत को मेरे जैसा लौड़ा जब मिलता है तो तुम लाज शरम छोड़के किसी भी जगह नंगी हो कर रंडी होने का सबूत देती हो। तेरी चूत भी काफी मस्त है लेकिन साली बीस साल की लड़की का सील तोड़ना अलग बात है रोज़ा… इसी लिये मुझे उनको चोदना है राँड।”
रोज़ा जैसा चाहती थी वो अनिल ने समझ कर उसको अपने पेशाब से नहला दिया। उस गरम पेशाब से अपने मम्मे और बदन को नहला कर रोज़ा को अच्छा लगा। सबसे अच्छा उसे तब लगा जब अनिल ने उसकी माँग पेशाब से भरी। रोज़ा को अनिल का पेशाब अपनी माँग और पूरे बदन पे सोने के पानी जैसा लगा।
अपने नंगे जिस्म पे वो पेशाब मलते-मलते हौले-हौले अपने मम्मे दबाते हुए वो बोली, “हुम्म्म हाय, अनिल मादरचोद… कितना अच्छा लगा तेरे पेशाब से नहाने में। तेरे लंड की कसम अनिल भड़वे… ये इतने तने हुए निप्पल मेरे कभी नहीं हुये। आज पहली बार मुझे अपनी सैक्सी इमेज का एहसास हुआ। अरे मेरे जैसी औरत की बात छोड़, किसी भी औरत को ऐसा लंड मिले तो वो मस्त हो जाये और चुदवाये रंडी जैसे।”
पेशाब टपकता अनिल का लंड रोज़ा अपने मुँह में डाल कर मस्ती से चूसते हुए अपनी चूत और मम्मे सहलाने लगी। अनिल रोज़ा की बात सुन कर खुश हो कर उसका सिर पकड़ कर खड़े-खड़े उसका मुँह चोदते हुए बोला, “तेरी माँ की चूत, कसम से आज तक तेरी जैसी हरामी औरत नहीं देखी जो पेशाब अपने जिस्म पे लगा कर खुद उसे अपने मम्मे और चूत पर मसलते हुए लंड चूसती है।
ऐसे ही चूस रंडी, ज़ोर से चूस मेरा लौड़ा और गोटियाँ और ऐसे ही चूसते हुए चूत में उँगली करती रह रानी। मुझे पता है मेरा लंड देख कर किसी भी औरत की चूत गीली होगी रंडी… पर तेरी जैसी छिनाल औरत नंगी हो मेरे सामने तो मैं जानता हूँ कि वो औरत दोनों को खूब मज़ा देगी। अब मेरा ये लंड लेने के बाद अपनी बेटियों को कब सुलायेगी मेरे नीचे ये बता।”
ज़िंदगी में पहली बार इतना काला, मोटा और लंबा लंड देख कर रोज़ा खुश हो कर पहले उसे मसलने लगी। फिर अनिल की गोटियाँ सहला कर और उसकी तरफ़ देख कर रोज़ा ने जीभ निकाल कर दो-तीन बार लंड चाट लिया। अनिल के चेहरे पे फ़ैली मुस्कुराहट देख कर रोज़ा को बड़ा अच्छा लगा और उसने अनिल का लंड मुँह में डाल लिया। अनिल के बड़े लौड़े से रोज़ा का मुँह पूरा भर गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
लंड पे मुँह आगे पीछे करते हुए लंड बहुत मस्ती से चूसते हुए रोज़ा बोली, “अब मुझे लंड चूसने देगा या नहीं गाँडू? अब मेरी बेटियों के बारे में कुछ मत पूछना जब तक तू मेरी चूत में अपना पानी ना डाले। तब तक तू मेरे और अपने बारे में ही बात करना। उसके बाद मैं तुझे जो चाहे वो बताऊँगी उन दोनों के बारे में। कसम से इतना बड़ा लंड ज़िंदगी में नहीं चूसा। लगता है आज चूत के साथ मेरे होंठ भी सूज जायेंगे तेरा लंड चूसते-चूसते अनिल।”
रोज़ा कि बात और चुसवायी अच्छी लगने से अनिल हल्के-हल्के उसका मुँह चोदते हुए और बालों में हाथ फेरते हुए बोला, “ठीक है मादरचोद रंडी, अब पहले तेरी चूत का भोंसड़ा बनाने के बाद ही तेरी कमसिन बेटियों की बात करूँगा। रोज़ा रंडी…
पहले मेरा लंड और फिर मेरी गोटियाँ और बाद में मेरी गाँड चाट। फिर बाद में तेरी गाँड मारूँगा और फिर चूत। बहनचोद इतना बड़ा लंड देखा नहीं था तो पहले मिलती, खूब चोदता तुझे रंडी। अब देख तेरी गाँड कैसे फाड़ुँगा… पहले अच्छे से चूस कर बड़ा कर मेरा लौड़ा तेरी गाँड फाड़ने के लिये।”
रोज़ा खुशी से लंड चूस रही थी। मुठ मारती हुई वो लंड चाट कर मुँह में ले रही थी। चाटने से चेहरे पे आ रहे बालों को अनिल पीछे करके रोज़ा को लंड चूसते देख कर सिसकरियाँ भर रहा था। अच्छे से लंड चूसने के बाद रोज़ा ने ज़मीन पे लेट कर अनिल के दोनों जाँघों के एक दम नीचे उसके लंड के पास आते हुए उसे अपने मुँह पे बिठाया जिससे उसका लंड पूरा रोज़ा की गिरफ़्त में रहे और अनिल की झाँट, गोटियाँ और गाँड का छेद भी एकदम जीभ के पास हो।
अनिल की झाँट चाट कर वो बोली, “हाँ और लंबा करूँगी… चाहे जो हो जाये। बहनचोद तुझे तो वक्त का अंदाज़ा भी नहीं होगा कि पूरे दस मिनट से चूस रही हूँ तेरा लंड… देख कितना गीला हुआ है। गोटियाँ क्या चूसूँ, मुझे तो तेरी झाँटों से आती खुशबू में दिलचस्पी है, वही तो है जो मदहोश करती है मुझे… अनिल कुत्ते।”
रोज़ा की इस अदा पे अनिल खुश हुआ पर उसे और खुशी तब मिली जब उसे अपनी गाँड पर रोज़ा की जीभ महसूस हुई। आँखें बन्द करके रोज़ा के मम्मे ज़ोर से मसलते हुए वो बोला, “साली तेरा चूसना इतना मस्त है कि इतना वक्त तूने चूसा वो समझा ही नहीं।
कसम से तेरे जैसा मस्त लौड़ा आज तक किसी ने नहीं चूसा मेरा। तू सही में मर्द को गरम करना और उसे खुश करना जानती है रोज़ा। और फिर ये तेरा गाँड चाटना, उफ्फ्फ, मादरचोद अच्छे से मेरी गाँड चाटेगी तो ऐसे ही तुझे चोदुँगा और हमेशा खुश रखुँगा, चल चोद मेरी गाँड अपनी जीभ से रोज़ा।”
रोज़ा जीभ गाँड पे घुमा कर चाटने लगी। उसका एक हाथ लंड पे मुठ भी मार रहा था। अनिल मम्मे बड़ी मस्ती से मसल कर उसे और गरम कर रहा था। गाँड के छेद में जीभ घुसेड़ कर वो अनिल को और खुश कर रही थी। गाँड चाटने के बाद उसने लंड के आजु बाजू का इलाका थूक से पूरा का पूरा गीला किया, मानो अनिल के लंड से रस बहने लगा हो।
लंड को चेहरे पे घुमती हुई वो बोली, “हाँ और दे मुझे और दे तेरी झाँटें… लंड और गाँड, आज सब चाट डालूँगी मादरचोद। आज मैं पूरे मूड में हूँ, सब कुछ करूँगी। मेरा ये ऐसा नशीला मूड तूने ही बनाया है, अब तू जैसा चाहे वैसे चोद मुझे अनिल।
मुझे अच्छे से चोद और जब तक मुझे चोद रहा है… मेरी बेटियों के ख्यालों में खो मत जाना। अरे मेरी बेटियाँ भी मिलेंगी तुझे, उनको मैं ही चुदवाऊँगी तुझसे। वो भले ही बीस साल की हों पर जिस्म २३-२४ जैसा है उनका। खूब चोद मेरी बेटियों को भी अनिल।”
अनिल अब रोज़ा पे उल्टा लेट गया। इससे रोज़ा को लंड और गाँड चाटने में आसानी हो गयी और रोज़ा की चूत और गाँड अनिल के मुँह के पास हो गयी। अपने पैर घुटनों में मोड़ कर अनिल पैरो की अँगुलियों से रोज़ा के मम्मे मसलने लगा। अपने खुरदुरे पैरों से रोज़ा के चिकने और मुलायम मम्मे बेरहमी से रगड़ते हुए वो बोला,
“तेरी माँ की चूत साली… मुझे अपनी बेटियों का लालच देती है छिनाल? साली तू क्या उनकी दलाल है हरामी? बहनचोद मैं तो तेरी बेटियों को वैसे भी चोदुँगा रंडी। लेकिन अब पहले तेरे जिस्म को चोदना है अभी। आहहहहहह हरामी… जीभ से मेरी गाँड चोद, पूरी अंदर डाल अपनी जीभ।”
थोड़ा और नीचे हो कर अनिल की गाँड के दोनों गोलों को अलग करके उसके छेद पे अपनी जीभ रख कर रोज़ा पागल बिल्ली की तरह चाटने लगी। उस तीखी गंध से उसे अच्छा लगा तो वो पूरी गाँड पे जीभ फेरते हुए छेद में जीभ घुसा कर चाटने लगी। अपने मुलायम मम्मों पे अनिल के खुरदुरे पैरों से होता खिलवाड़ उसे अच्छा लगा.
और वो बोली, “हाँ साले… डालती हूँ! पहले झाँटों से तो स्वाद खतम करने दे। मैं बेटियों का लालच नहीं दे रही बल्कि इसमें तो मेरा ही फायदा है, मुझे तेरे जैसे मर्द का मूसल जैसा लंड मिले। अनिल… मैं तो यही चाहुँगी कि मेरी बेटियों को भी अच्छी चूदाई मिले इस लंड से। वैसे वो मेरी बेटियाँ हैं… इसलिए हो सकता है कि वो कॉलेज में लड़कों से चुदवाती हों।”
रोज़ा की चूत फ़ैला कर उसमें जीभ डाल कर अनिल चूत को जीभ से चोदने लगा। पूरी जीभ अंदर डाल कर चूत चाटने के बाद अपनी गाँड को चोद रही रोज़ा की जीभ का अच्छा एहसास होने पे अनिल बोला, “आआआआहहहहह साआआआआलीईईई क्या गरम जीईईईभभभ है तेरी रंडी.
इतनी गरम जीभ आज तक मेरी गाँड पे नहीं लगी, और चाट, चूस अंदर डाल जीभ, राम कसम… आज पहली बार इतना गरम माल मिला है, साली तू रंडी बनने के लायक है, तुझे तो किसी बड़े आदमी की रखैल बनना चाहिये रोज़ा। चूस और चोद मेरी गाँड रंडी, आहहहहह।”
अनिल फिर चूत को उँगली से फ़ैला कर चाटने लगा। रोज़ा की गाँड को सहला कर वो बीच-बीच में गाँड भी चाटने लगा। फिर अपनी जीभ से चूत को चोदते हुए उसने रोज़ा की गाँड में उँगली घुसा डाली। गाँड में उँगली घुसने से रोज़ा उचकी। वो भी अनिल की गाँड चाटने लगी मस्ती से। उन दोनों का ये खेल चलता रहा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
अपना मुँह अनिल की गाँड से हटा कर रोज़ा बोली, “देखो अनिल, हम दोनों ने ये तजुर्बा पहली बार किया है। बहुत मज़ा आ रहा है तेरी गाँड चाटने में और तुझसे अपनी गाँड चाटवाने में। आहह अरे उँगली से क्या गाँड फाड़ेगा गाँडू? मेरी गाँड तेरे लौड़े से फटनी चाहिये।
ऊम्म्म्म्म और अंदर अपनी मर्दानी जीभ डाल मेरी गरम मुसल्ली चूत में अनिल कुत्ते। मेरे चोदु भड़वे, जी चाहता है कि आज रात की सुबह ही ना हो, तू ऐसे ही पेलता रहे मुझे रात भर। ओहहह… मेरे मम्मे पे अपने हथौड़े जैसे हाथ से मेहरबानी कर… बहुत दिनों से इनको तेरे जैसे मस्त मर्द ने छुआ और मसला नहीं है।”
अनिल उठ कर रोज़ा के सीने पे बैठ गया जिससे अब उसकी गाँड रोज़ा के मुँह पे आ गयी। रोज़ा अनिल की गाँड फ़ैला कर उसे चाटने लगी और अनिल उसके मम्मों को ज़ोर से मसलते हुए और निप्पलों को खींचते हुए बोला, “अरे बहनचोद रंडी, लौड़े से ही तेरी गाँड फाड़ूँगा रानी पर पहले तेरी गाँड में उँगली करके उसमें मस्ती तो भर दूँ।
साली इतनी क्यों उतावली हो रही है तू लंड के लिये? बहनचोद लंड घुसेगा तो देखुँगा कि कितनी मस्ती या दर्द से चुदवाती है तू। वैसे रंडी तेरे मम्मे सही में बड़े शानदार हैं, साली देख कैसे तन कर खड़े हैं तेरे निप्पल। बहनचोद… मम्मे बहुत दिनों से मसले नहीं ना किसी ने, आज देख तेरे मम्मों को कैसे नोच-नोच कर मसलता हूँ रंडी।”
रोज़ा में और मस्ती भर गयी मम्मों के मसलने से। अनिल उसके मम्मे मसल रहा था तो वो लंड पकड़ कर अनिल को दिखा कर हिलाती हुई उसकी मुठ मारने लगी जिससे उसमें से काफी रस निकले। एक हाथ से वो पतला सा रस ले कर उसे अपनी चूत पे रगड़ते हुए धीरे-धीरे रोज़ा उतावली हो कर अनिल की गाँड चाट रही थी। अब उसे एहसास हो रहा था कि उसकी चूत में लंड नहीं घुसा तो वो बेहद बेकाबू हो जायेगी।
अपनी चूत में उँगली डालते हुए वो अनिल से बोली, “उफ्फ बहनचोद, मैं सही में अब उतावली हो गयी हूँ तेरे लंड के लिये। तूने आज जैसे मुझे गरम करके रंडी बनाया है वैसे आज तक मैंने कभी नहीं किया था। तेरे इस दमदार लौड़े से दर्द भी हुआ तो भी अपनी गाँड को मैं चुदवाऊँगी, पर साले मादरचोद… अब चोद डाल मेरी चूत। बहुत तड़प रही है मेरी चूत तेरे लौड़े के लिये। दे मुझे अपना ये लौड़ा और शाँत कर मेरी जवानी।”
अपने नीचे लेटी रोज़ा की तड़प देख कर अनिल खुश हुआ। उस रंडी औरत को चूदाई के लिये इतनी बेताब बनी देख कर उसे और तड़पाने के लिये उसके मम्मे और भी बेरहमी से मसलते हुए निप्पल खींच कर उनको मस्ती से मरोड़ते हुए वो बोला,
“बहनचोद इतनी क्यों उतावली हो रही है कि लंड पे से मेरा पानी ले कर चूत में डाल रही है रंडी? अरे चूत में तो मेरा लौड़ा घुसेगा… तब मज़ा आयेगा तुझे… वो उँगली निकाल राँड। साली और थोड़ी मेरी गाँड चाट कर जीभ से चोद… उसके बाद तेरी चूत फड़ दूँगा मैं, चल और चाट मेरी गाँड मेरी रोज़ा रानी।”
“आहहहह… अब ये आग नहीं सही जाती, जल्दी मेरी चूत में डाल दे अपना मुस्टंडा लंड नहीं तो मैं मर जाऊँगी… बहन के लौड़े। एक बार मुझे शाँत कर… फिर तू कहेगा तो रात भर तेरी गाँड चाटूँगी मैं। लेकिन अब सहा नहीं जाता, अब गाँड चाटने को मत बोल, अभी मेरी चूत चोद डाल।”
रोज़ा उँगली से अपनी चूत चोदते हुए जोश में आकर दूसरे हाथ से अनिल के बाल पकड़ कर उसका सिर झंझोड़ डाला और उसकी छाती में एक मुक्का भी मारा। फिर उसका लंड सहलाने लगी जोश में। यह कहते हुए भी अनिल की गाँड को चूसती रही वो बहुत उतावली हो कर।
अनिल को पहले तो रोज़ा के मुक्के और अपने बाल खींचे जाने पर गुस्सा आया पर फिर रोज़ा पे रहम खा कर उसने उसकी चूत को झुक कर एक बार पूरी जीभ अंदर डाल के अच्छे से चाट लिया। फिर उसकी टाँगें फ़ैल कर उनमें बैठ के निप्पल खींच कर मम्मे बेरहमी से मसलते हुए बोला, “चल रोज़ा रंडी, पहले तेरी चूत फाड़ कर बाद में तेरी गाँड का भोंसड़ा बना दूँगा…
चल छिनाल मेरा लंड पकड़ कर अपनी रंडी चूत पे रख और चूत उठा कर मरे लौड़े से लगा। बहनचोद बहुत गरम हो गयी है… लगता है अब तेरी इस गरम मुल्लानी चूत में अपना मूसल लौड़ा डाल के तुझे नहीं चोदा तो तू जल जायेगी अपनी चूत की आग में। मादरचोद कैसे एक अंजान मर्द की गाँड चाट रही है तू साली भड़वी। राम कसम तेरे जैसी गरम माल देखी नहीं आज तक, चल रख मेरा लंड अपनी गरम चूत पे।”
अपना सीना ऊपर करके अनिल के हाथों में अपने मम्मे भर कर रोज़ा एक चुदक्कड़ बिल्ली की तरह झट से अनिल का लंड पकड़ कर अपनी चूत पे सटा कर खुद ही अपनी कमर ऊपर नीचे करती हुई लंड अंदर डालने की कोशिश करती हुई बोली, “आआहहहह… उम्म्म अब मुझे चैन मिलेगा भोंसड़ी के…, ले मैंने चूत पे लंड रख दिया, अब तू डाल अपना लौड़ा मेरी गरम चूत में बिंदास हो कर।”
रोज़ा ने लंड चूत पे जैसे ही रखा, अनिल ने हल्का धक्का दिया जिससे रोज़ा की तंग चूत का मुँह फ़ैला कर लंड की टोपी अंदर घुसी। रोज़ा की एक चूंची बेरहमी से मसलते हुए और दूसरे हाथ से अपना लंड पकड़ कर अनिल बोला, “मादरचोद बड़ी चुदासी लगती है तू… रंडी अब देख तेरी चूत की क्या हालत करता हूँ। मादरचोद बड़ा गरम किया है तूने मेरा लंड छिनाल, बड़ी मस्ती से चोदुँगा तेरी चूत हरामी।”
जैसे ही अनिल का हाथ अपने लंड पे गया, रोज़ा अपने हाथों से खुद अपनी चूचियाँ मसलती हुई बोली, “उउम्म्म थोड़ा और जोर से मार ना… पूरा लेना है लौड़ा चूत में हरामी। तू दर्द की चिंता मत कर, जितनी बेरहमी से हो सके डाल अपना लौड़ा मेरी चूत में और चोद मुझे।” रोज़ा की इस बात पे अनिल ने भी जोश में आकर उसकी कमर में हाथ डाल कर एक ज़ोर दार धक्का दिया.
जिससे उसका मोटा लंड रोज़ा की चूत फैलाते हुए करीब-करीब आधा घुस गया। इतना मोटा लौड़ा घुसने से रोज़ा का सीना और माथा पसीने से लथपथ हो गया। दर्द से उसने आँखें बंद करके होंठ दाँतों में दबाये। रोज़ा के सीने का पसीना चाट कर अनिल बोला, “तेरी माँ की चूत चोदूँ, साली रंडी, क्या टाइट चूत है तेरी। लगता है तेरे शौहर का लंड ज्यादा बड़ा नहीं है जो मेरा लंड इतना टाइट जा रहा है।”
अपनी कमर हिला कर, पैर फ़ैलाते हुए रोज़ा अनिल के लंड का रास्ता और आसान करती हुई, अनिल के चौड़े सीने पे हाथ फेरती हुई बोली, “अरे मेरे शौहर की बात छोड़, तुझे मज़ा आ रहा है ना एक ४२-४३ साल की औरत की इतनी टाइट चूत में लंड डालने में?
यार तू अपनी सोच, मेरे बारे में बोल, शौहर का क्या काम है? उसका काम खतम हुआ जब उसने दो बेटियाँ दे दीं, मुझे अब उसका कोई काम नहीं है, साला पाँच मिनट में झड़ जाता है। तेरी कसम अनिल मुझे ये इतना पसीना इक्कीस साल की शादी में कभी नहीं आता था।”
दो-तीन बार लंड आगे पीछे करके अनिल ने फिर ज़ोर से धक्का देके लंड रोज़ा की चूत में घुसाया। इस बार पूरा लौड़ा अंदर घुसा तो रोज़ा चिल्लाने और तड़पने लगी। अपने मम्मे खुद मसलती हुई वो ज़ोर से आंहें भरने लगी। अनिल बिना रुके लंड चूत में ठेलते और मम्मे मसलते हुए बोला,
“मादरचोद उसकी बात तो आती रहेगी ही रंडी, तू मेरा लौड़ा और चूदाई की उससे तुलना करेगी ही ना? अब कैसे बोली कि इक्कीस साल में पहली बार ऐसा पसीना आया… वो भी आधा लंड घुसने से? तेरी माँ को चोदूँ राँड… ये सोच कि पूरा लंड घुसा कर जब जानवर जैसे तुझे चोदुँगा तब तेरा क्या हाल होगा?”
अनिल का पूरा लौड़ा अंदर घुसने पर रोज़ा जोर से ’ओहहह आहहह ऊफ़्फ़्फ़’ चिल्लाने लगी। वो खुद कमर ऊपर करके अनिल के लंड से भिड़ा रही थी। अनिल ने चूत आहिस्ता चोदते हुए रोज़ा के होंठों पे अपने होंठ दबा कर मस्ती से मम्मे मसलना शुरू किया। मम्मों से इतना खेलने से वो एकदम लाल हो गये थे।
रोज़ा अनिल को बाहों में ले कर उसको किस करके बोली, “अरे मैं तुलना करके उससे कहूँगी कि तेरे जैसे असली मर्द कैसे चोदते हैं। तू क्यों बीच में उसे लाता है, तू मेरी और अपनी बात कर ना। आज तुझे मौका मिला है तो कर ले इस जिस्म से अपने दिल की भड़ास पूरी। ऐसा मौका बार-बार नहीं आता कि मेरी जैसे गरम चुदास औरत तेरे जैसे तगड़े चोदू मर्द के नीचे हो।
हाँ ये बात और है कि तेरे जैसे मर्दों के गरम करने पर मेरे जैसी औरतें टाँगें फ़ैला देती हैं… लेकिन गरम होने में बहुत वक्त लेती हैं मेरे जैसी औरतें। आहहहहह आँआँ फाड़ दिया मेरी चूत को… गधी की औलाद… भोंसड़ी वाले… चोद…. और डाआआआल अपना लौड़ाआआआ अंदर आआआआ ओओओओआँआँआआआहहहहह।” ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
“ठीक है राँड अब तेरे हिजड़े शौहर की बात नहीं करूँगा। चोदने तक तेरी बात और उसके बाद तेरी सहेलियों और तेरी कमसिन बेटियों की बात करूँगा। आज रात भर तुझे ऐसे ही खुली हवा में चोदुँगा रंडी की तरह… और कोई भी आये तो मेरे बाद उससे भी तुझे चुदवाऊँगा समझी?
तेरी जैसी रंडी औरत को जब-जब मैं चाहता हूँ… अपने नीचे लेता हूँ, तेरी जैसी औरतें नखरे करके और शरमाके चुदवाती हैं इससे हम मर्द बड़े गरम होते हैं। तुम मुसल्लियाँ आराम से गरम होती हो और बेरहमी चुदा के ठंडी होती हो। मादरचोद लगता है ज़िंदगी में पहली बार लंड गया तेरी चूत में जो तू इतना चिल्ला रही है… हरामी ये तो शुरूआत है… अभी तेरी गाँड बाकी है छिनाल।”
जीभ रोज़ा के मुँह में घुसा कर उसके मम्मे मसलते हुए अनिल ने अब उसकी चूदाई ज़ोर से शुरू की। रोज़ा ने थोड़ा अपने होंठ अनिल के होंठों से अलग किये उसे जवाब देने के लिये और इसलिये उसने अपनी चूंची उसके मुँह में दे दी। अनिल का लंड ज्यादा से ज्यादा चूत में ले कर वो पैर फ़ैला के कमर उठा कर मस्ती से चुदवाने लगी।
अनिल का मुँह मम्मे पे दबा कर वो बोली, “ले मेरे मम्मे चूस कर मेरे दर्द को ज़रा तसल्ली दे। अनिल बहनचोद… मैं तो ऐसे चुदवाने को शादी की पहली रात से तड़प रही थी कि खुली हवा में चुदवाऊँ लेकिन मेरा शौहर, साले का लंड खुले में आते ही मानो ठंडा पड़ जाता है।
अरे अब शुरूआत ऐसी हो चुकी है तो अंत भी बड़ा ज़ालिम होना चाहिये। मुझे ऐसा लगना चाहिये कि ज़िंदगी में पहली बार चुदी हूँ। सुन अनिल गाँडू… तेरा रस मेरी चूत के एकदम अंदर डालना… मेरी बच्चेदानी पे… तभी मुझे सही में तसल्ली मिलेगी।”
रोज़ा के मम्मे पहले बच्चे की तरह चूस कर फिर जोश में आकर दोनों निप्पल बारी-बारी चूस कर, चबाते हुए पूरे लाल कर दिये अनिल ने। नीचे चूत में लंड घुसा-घुसा कर रोज़ा को चोदते हुए अनिल ने उसके मम्मे इतने चूसे कि उसके चबाने से रोज़ा के मम्मों से हल्का सा खून आ गया जिसे अनिल ने चाट लिया।
फिर मम्मे मसलते हुए अनिल बोला, “रोज़ा तेरे जैसी गरम माल के साथ ज़िंदगी भर खेलुँगा, तुझे अपनी राँड बना कर रखुँगा, तेरी जैसे गरम चूत आज तक नहीं मिली। रोज़ा शादी के इक्कीस साल रेगिस्तान में भटकने के बाद आज तुझे समंदर मिल रहा है, एक असली दमदार लंड से…
तेरा शौहर जल्दी झड़ता है… इस लिये मुझे शक है कि वो तेरी बेटियों का बाप नहीं है क्यों? बहनचोद चूदाई के अंत में तू लंड निकाल लेने के भीख माँगेगी… समझी छिनाल? बहनचोद तुझे चोदके फिर माँ बनाऊँगा और अपने बच्चे की सौतेली बहनों को और उसकी माँ को चोदता रहुँगा।”
रोज़ा अनिल का चेहरा चूमते हुए हाथ नीचे डाल कर उसकी गोटियाँ मसल कर बोली, “अरे-अरे ये गाली मत दे उसे… उसके साथ शादी के बाद आज पहली बार किसी पराये मर्द का लंड इस चूत को नसीब हुआ है पर शादी से पहले बहुत लंड लिये हैं मैंने अपनी चूत में। आज इस चूत को फाड़ कर अपनी रस की एक भी बूँद मेरी चूत के बाहर ना जाये… ये देखना। अच्छा लेकिन ये तो बता तुझे मुझ जैसी लजीज़ माल तो कई मिली होंगी ना?”
लंड करीब-करीब बाहर निकाल कर फिर बेरहमी से अंदर ठाँसते हुए और मम्मे नोचते मसलते हुए अनिल बोला, “बहनचोद तेरा चूतिया मर्द मिले तो उसकी गाँड मारूँगा, हरामी ने तेरी जैसी गरम चूत इतने दिन मुझसे जो छिपायी। तेरी माँ की चूत… साली तू तो बचपन से मेरी राँड होनी चाहिये थी।
तेरी माँ को चोदूँ राँड… अपने कीमती लंड के पानी की एक भी बूँद बाहर नहीं जाने दूँगा। तेरी गरम चूत की कसम… कईं चूतें चोदीं, पर तेरी जैसी माल आज तक नहीं मिली। तेरी जैसी गरम और हर बात में साथ देने वाली चूत नसीब वाले मर्द को ही मिलती है रंडी।”
“तू मेरी चूत चोदता रह… भड़वे। तेरी गाली, मार और लंड मुझे और मस्त बना रहे हैं अनिल। और ज़ोर से चोद मुझे, निकाल ले पूरी भड़ास गाँडू मेरी ये चूत चोद कर।” अनिल के लंड पे शायद भूत सवार था। वो तो बेरहमी से रोज़ा को चोद कर उसके मम्मे मसलते हुए दबा रहा था।
चूत चोदते हुए उसकी गाँड में उँगली घुसाते हुए उसमें घुमा कर निकाल के रोज़ा को चाटने के लिये देते हुए वो बोला, “ये बोल आज के पहले भी मर्दों ने तुझे भीड़ में मसला होगा तो उनसे क्यों नहीं चुदी तू राँड?” रोज़ा अनिल की उँगली शौकिया तौर पे एक रंडी जैसे चाट कर और फिर अपनी एक उँगली उसके लंड के साथ अपनी चूत में डाल कर निकाल के अनिल को चाटने के लिये देते हुए बोली,
“अरे कईं लोगों ने मुझे क्या कईं औरतों को मसला है… इसलिये तो हम औरतों को भीड़ में जाना पसंद नहीं। रही बात औरों से मसलवाने कि तो कईं बार मसली गयी हूँ पर किसी में तेरे जितना दम ही नहीं था इसलिये सिर्फ़ मसलने पे ही बात खतम हुई। तू जिस हिसाब से मेरी बात माने बिना भीड़ में ब्लाऊज़ खोलने लगा… तब मैंने फ़ैसला किया कि तुझे अपने साथ आने को कहूँगी।”
रोज़ा की उँगली पूरी चाट कर हल्के से चबाते हुए अनिल बोला, “क्या बोलती है? तेरी जैसी गरम रंडी औरत को भीड़ में जाना पसंद नहीं? अरे तेरी जैसी औरत को ही तो मैं भीड़ में ढूँढ कर गरम कर कर चोदता हूँ, तू मेरी ज़िंदगी में बस में मिली वैसे तीसरी चूत है। तूने भीड़ में सामने वाले को आज के पहले कितनी लिफ़्ट दी और वो कहाँ तक आया तेरे साथ?”
अनिल अब चूत चोदते हुए रोज़ा की गाँड में एक के बाद दूसरी उँगली डालते हुए अब चूत और गाँड एक साथ चोदने लगा। रोज़ा पूरी मस्ती में आ कर अपनी कमर उछाल-उछाल कर चुदवाती हुई बोली, “और तेज़ भौंसड़ी के… और तेज़ डाल ना, मज़ा आ रहा है एक साथ चूत और गाँड चुदवाने में। उफ़्फ़्फ़ बड़ा ज़ालिम मर्द है तू… अनिल, और चोद मुझे गाँडू।”
रोज़ा की गाँड में तीसरी उँगली डाल के घुमाते हुए उसकी चूत को अनिल चोद रहा था। रोज़ा की चूत में लंड घुसने की ’थप थप’ की आवाज़ आने लगी और रोज़ा की सिसकरियाँ सुनायी देने लगी। अनिल फिर निप्पल खींचते हुए बोला, “ये ले रानी और ले और ले, तेरी माँ की चूत… आज तेरी गाँड और चूत फाड़ दूँगा। बोल तूने कहाँ तक लिफ़्ट दी है मर्दों को जब उन्होंने तेरा जिस्म भीड़ में मसला… रोज़ा रानी?”
कमर उछाल-उछाल कर चुदवाने से रोज़ा के मम्मे उछल रहे थे और फचक-फचक की आवाज़ आने लगी जब अनिल का लंड उसकी चूत में घुस कर बाहर निकलता क्योंकि दोनो बहुत गीले हुए थे। निप्पल खींचने से रोज़ा दर्द और मस्ती से बोली, “आहह आहहह और तेज़ गाँडू, मेरे जिस्म को बेरहमी से मसलते हुए चोद मेरी चूत।
अनिल मैंने तेरे से ज्यादा किसी को लिफ़्ट नहीं दी। लिफ़्ट तो बस भीड़ तक ही दी, जो दूसरे मर्दों ने किया, वो भीड़ में वहीं करने दिया पर तेरे सामने नंगी हो कर जैसे चुदवा रही हूँ वैसा मौका किसी भी मर्द को नहीं दिया। एक दो मर्दों ने भीड़ में ही अपना लंड पैंट की ज़िप खोल कर बाहर निकाल कर मेरी सलवार के ऊपर से गाँड पे रगाड़ा भी और मेरी पीठ और सलवार पर अपना वीर्य भी छोड़ा पर मैंने चुदवाया किसी से नहीं”.
रोज़ा का जोश और बढ़ावा देख कर खुश हो कर अनिल ने सोचा कि साली को सच में आज तक ऐसा लौड़ा नहीं मिला जो ये इतनी उछल कर चुदवा रही है। अब इसको और मज़ा दूँगा। वो रोज़ा की कमर पकड़ कर बोला, “सुन रंडी चूत… अब मैं नीचे आऊँगा और तू मेरे ऊपर आ कर मेरे लौड़े से तू चूत चुदवा ले अपनी… समझी रंडी?”
रोज़ा को बाहों में पकड़ कर घूम कर उसे अनिल अपने ऊपर ले कर बोला, “चल रंडी अब देखता हूँ… कितना दम है तुझ में।” रोज़ा के लाल मम्मों को अब और बेरहमी से मसलते हुए और निप्पल खींच कर उसे दर्द और मज़ा देते हुए नीचे से गाँड उठा कर उसके धक्कों का जवाब अनिल देने लगा।
इस पोज़िशन में आठ-दस धक्के खाने के बाद रोज़ा चूत से लंड निकाल कर घूम के अपनी पीठ अनिल की तरफ कर के लंड अपनी चूत में डाल कर चुदवाने लगी। ऐसा करने से अनिल को अपना लंड रोज़ा की चूत से अंदर बाहर होते दिखने लगा। साथ-साथ रोज़ा अपने मम्मे खुद दबा कर कईं बार अपनी चूत को सहलाते हुए सिसकरियाँ भरती हुई चुदवाने लगी।
रोज़ा के इस स्टाइल और बे-शर्मी से खुश हो कर अनिल उसकी चूत सहलाते हुए अब आराम से उसकी गाँड में भी उँगली करने लगा। बीच में उसके मम्मे भी खींच कर नोचते हुए वो बोला, “बहनचोद तू तो बड़ी मस्त रंडी है, क्या स्टाइल से चुद रही है राँड, ऐसा कभी देखा नहीं छिनाल, और ज़ोर से चुदवा ले रंडी, देखने दे तेरी चूत में कितनी गर्मी है छिनाल। आहहहहह साली और ज़ोर से उछल, लंड तेरी बच्चेदानी पे टकरा रहा है या नहीं रखैल?”
नीचे के धक्कों से रोज़ा भी अब अपना पूरा ज़ोर लगा कर उछलने लगी। काफी चूदाई के बाद उसकी चूत में अब सूजन महसूस होने लगी जिसका अनिल को भी एहसास हुआ। ज़ोर से उछलने और हिलने से रोज़ा के मम्मे हवा में झूल रहे थे और अनिल उनको बेरहमी से मसल रहा था।
अपनी चूत सहलाते हुए रोज़ा बोली, “हाँ अनिल… साले! तेरा लंड मेरी बच्चेदानी पे ठोकर दे रहा है। लगता है तेरे लौड़े को मेरी गरम चूत में झड़ कर इस चूदाई की निशानी छोड़नी है। तेरे लौड़े से चुदवाने से मेरी चूत सूज गयी है लेकिन अभी तक दिल नहीं भरा… मेरे चोदू राजा।”
रोज़ा के उछलते मम्मे मुठ्ठी में दबाते हुए अनिल बोला, “साली रंडी अब और चोदुँगा तुझे, ये तो नॉर्मल स्टाइल हुई… अभी तुझे कुत्तिया बनाके चोदना है। तेरी जैसी गरम औरत को कुत्तिया बनाके चोदने में बड़ा मज़ा आता है मुझे… रोज़ा छिनाल! इससे लंड को ठंडक पहुँचती है मेरे। देख मम्मे कैसे उछल रहे हैं हवा में, मादरचोद मज़ा आ रहा है तुझे चोदने में।”
अब रोज़ा की हालत बड़ी खराब होने लगी। इतना दर्द उसे पहले कभी नहीं हुआ था। वो कमर थोड़ी ऊपर करके अब अनिल का पूरा लंड चूत में ना लेते हुए बोली, “हाँ… हाँ… तुझे मज़ा आ रहा है भड़वे! पर मेरी हवा बिगड़ने लगी है तेरे लौड़े से।”
रोज़ा की कमर कस कर पकड़ कर चूत में लंड ठेलते हुए अनिल बोला, “तो क्या करूँ? तुझे नीचे ले कर आखिरी धक्के मार के तेरी चूत में अपनी निशानी छोड़ जाऊँ क्या रोज़ा रंडी?” रोज़ा को अब बोलने की ताकत नहीं रही थी इसलिये वो चिल्लाते हुए बोली, “आह आहहह आहहह ओहहह अल्लाह आहहह ओहहह मेरे मौला ओहहह अल्लाह चूत फट गयी ओहहहहह हाय गाँआँआँडू आहहहहह आहहह होओओओओ अल्लाह।”
जानवर बनके अनिल बिना रहम के उसको चोदते हुए बोला, “फटने दे रंडी, तुझे याद रहेगा कि असली मर्द के लंड से तेरी चूत फटी, ये ले… और ले… और ले साली।” बेरहमी से उसे चोदते हुए और फिर उसे अपने नीचे ले कर अनिल चोदते हुए बोला, “बोल मेरी रंडी बनेगी ना? तेरी बेटियाँ देगी ना मुझे रोज़ा?”
अब अनिल का लंड पूरा का पूरा रोज़ा की बच्चेदानी पर धक्के देने लगा था। अपना सीना अनिल के मुँह पे दबाते हुए रोज़ा बोली, “अरे बन गयी हूँ ना अब मैं तेरी रंडी अनिल और हाँ… दूँगी तुझे अपनी बेटियाँ भी। पर क्या मेरी बेटियाँ तुझसे चुदवा सकेंगी, ये तगड़ा लौड़ा उनकी चूत फाड़ नहीं देगा राजा?”
मुँह पे आये रोज़ा के मम्मे चूसते हुए और कमर कस के पकड़ कर चोदते हुए अनिल बोला, “नहीं ले सकी मेरा लंड तो चूत फटेगी और क्या होगा? पर असली मर्द से चूत फटने का मज़ा तो मिलेगा ना उनको? नहीं तो ना जाने कौनसे चूतियों से अपनी चूत चुदवाके अपनी जवानी बर्बाद करेंगी वो दोनों।”
रोज़ा अनिल के बाल संवारते हुए झड़ने के करीब होने से अपना जिस्म अनिल के बदन से रगड़ते हुए बोली, “ठीक है भोंसड़ी वाले! तुझे मैं अपनी बेटी को चोदने दूँगी में। तूने जो मुझे चोदके मुझ पर मेहरबानी की है उसके लिये तुझे अपनी बेटी जरूर दूँगी।”
अनिल भी झड़ने पे आया था। वो कस कर रोज़ा को पकड़ कर उसके निप्पल बेरहमी से चूसते चबाते और चूत चोदते हुए बोला, “मैं भी झड़ने वाला हूँ तेरी गरम चूत में, बहुत मज़ा आया जान, ले और ले रंडी। आहहहहहह ये ले रंडी साली मज़ा आया तुझे चोदने में रोज़ा।” ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
रोज़ा जैसे ही झड़ने लगी तो चिल्लाती हुई बोली, “आहहहहह आआआहहहह आँआँआँआँहहहहह मैं तो ओओओओओओ गयीईईईई ऊऊईईईई अल्लाह आहहहह, मुझे कस कर पकड़ अनिल।” रोज़ा की उछल कूद से जैसे ही अनिल झड़ने लगा तो रोज़ा को कस कर पकड़ कर अपना लंड पूरा अंदर तक घुसाते हुए बोला, “ये ले छीनाआआआआल चूत आहहहहहहह क्क्याआआआआ चूत है तेरीईईईई।”
अनिल कस के रोज़ा को पकड़ कर लंड का पानी उसकी चूत में छोड़ने लगा। रोज़ा को वो गरम पानी अपनी बच्चेदानी पे गिरने का एहसास होने लगा। वो गरम-गरम लावा उसकी चूत में जाके उसकी चूत को ठंडक देने लगा। लंड का पानी चूत को भरने लगा और चूत भरने के बाद काफी वीर्य बाहर आकर रोज़ा की जाँघों को गीला करता हुआ नीचे गिरने लगा।
अनिल निप्पल चूस कर बोला, “ले जान आआआआआहहहहहह सालीईईईई पूराआआआआ पानी ले रही है तेरी चूत रोज़ा छिनाल।” रोज़ा ने अनिल का चेहरा पकड़ कर एक ज़ोरदार चुम्मा उसके होंठों पे सटाया। रोज़ा अब भी हाँफ रही थी और संतोष के मारे उसकी आँखें अभी भी बंद थी। पूरा झड़ने के बाद दोनों हाँफ रहे थे। जैसे ही अनिल का लंड चूत से निकला तो ’पॉप’ की आवाज़ हुई और लंड निकालने के बाद चूत में वीर्य बाहर बहने लगा।
रोज़ा की ब्रा से चूत साफ़ करके अनिल उठ कर घुटनों पे खड़ा हो कर लंड रोज़ा के होंठों के पास लाते हुए बोला, “मेरे इस मुस्टंडे लंड को कैसे साफ़ करेगी रोज़ा राँड?” लंड रोज़ा के होंठों पे घुमाते हुए अनिल आगे बोला, “ले रंडी चाट के साफ़ कर मेरा लंड… छिनाल रोज़ा।” रोज़ा थकान की वजह से यंत्रवत अपनी जीभ बाहर निकाल कर अनिल का लंड चाटने लगी। अनिल हौले-हौले अपना लंड रोज़ा के मुँह में डाल के साफ़ करते हुए बोला, “अच्छे से चूस कर साफ़ कर रंडी, ये तेरे हिजड़े शौहर का लौड़ा नहीं है, तेरे यार का लौड़ा है। ठीक से साफ़ कर इसे।”
रोज़ा के पूरा लंड चाट कर साफ़ करने के बाद वो दोनों उसी खुली हवा में थकान से निढाल हो कर लेट गये। उस रात अनिल से चुदवाने के बाद रोज़ा सहेली के घर जाने की बजाय वापस अपने घर गयी। उन फटे और गंदे कपड़ों में सहेली के घर जाती तो सहेली को पक्का शक हो जाता। फटे ब्लाउज़ में बिना ब्रा के सीने को गंदी साड़ी में लपेट कर, साड़ी बिना पेटीकोट के पैंटी पर बाँध कर वो घर आयी। अनिल रोज़ा को घर तक छोड़ने गया था। रोज़ा की बेटी सो रही थीं इसलिये उसे कुछ तकलीफ नहीं हुई घर में।
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