सुहागरात चुदाई

सुहागरात में चुदाई - 1

By Rahul Published on पढ़े जाने की संख्या: 1177

मेरा नाम है राहुल. में 22 साल का मेडिकल स्टूडेंट हूँ. छः महीने पहले मेरी शादी मेरे बाजूवाले अंकल की 18 साल की लड़की मुस्कान से हुई है. शादी के वक्त मुस्कान कच्ची कुंवारी थी और बहुत ही शर्मीली थी. उसके शर्मीलापन का सामना कर के कैसे मेंने मुस्कान को पहली बार चोदा इस की ये कहानी है कहानी हमारी सुहागरात की.

बाजूवाले अंकल की लड़की होने से में उसे बचपन से जानता हूँ. कई बार में ने मामी को उस के नैप्पी बदलते देखा था. उस वक्त मुस्कान की छोटी सी पिकी भी मेंने देखी थी लेकिन मेरे दिमाग में सेक्स का ख़याल तक आया नहीं था. बुर के बाएं होठ पर का काला तिल अभी भी मुझे याद है.

मुझे क्या पता था की एक दिन में ही इस पिकी को चोदुंगा. मुस्कान 5.8" लम्बी है. वेट 50 KG रंग गोरा. चेहरा गोल आँखें भूरी और बड़ी बड़ी. पतली सीधी नासिका और पतले होठ. बाल काला हिप्स से निचे तक के लम्बे. हाथ पाँव चिकने और कोमल. बड़े संतरे की साइज के दो स्तन सीने पे ऊपर की और लगे हुए हैं.

गोल गोल और चिकने स्तन की पतली चमड़ी के निचे खून की नीली नीली नसें दिखाई देती है. स्तन के सेण्टर में 1” की छोटी अरेओला है जो गुलाबी रंग की है. अरेओला के बिच छोटे किसमिस के दाने जैसे ही घुंडी है. अरेओला और निप्पल्स बहुत सेंसिटिव है और चुदवाते वक्त कड़े हो जातें है.

वैसे ही मुस्कान के स्तन कठिन है जो चोदने के समय ज्यादा कठोर हो जातें है. केले के खम्भे जैसे ही सुडोल जांघ के बिच मुस्कान की बुर उलटे खड़े टीकों जैसे ही है. जब वो जांघें मिला के पाँव लम्बे रखती है तब बुर की दरार का छोटा सा हिस्सा ही दिखाई देता है. जांघें चौड़ी कर के ऊपर उठाने से बुर ठीक से देखि जा सकती है.

मोंस घनी है और काले घुंघुराले झांट से ढकी हुई है बड़े होठ भरपूर है. मोंस और बड़े होठ चोदते वक्त होते हर प्रहार झेलने के काबिल है. छोटे होठ यूँ दिखाई नहीं देते इतने पतले और नाजुक है और बड़े होठ से ढके हुए रहतें है. केवल चोदते वक्त फूल के वो बाहर निकल आते है.

मुस्कान की क्लाइटोरिस 1” लम्बी और मोटी है छोटे से पेनिस जैसे ही दिखती है. क्लाइटोरिस का छोटा सा मत्था चेरी जैसा दिखता है. मुस्कान की क्लाइटोरिस बहुत सेंसिटव है. कभी कभी मुस्कान मूड में न हो तो में उस की क्लाइटोरिस को सहला के गर्म कर लेता हूँ.

मुस्कान की चूत याने योनि छोटी और चुस्त है. छः महीने से हर रात में उसे चोदता हूँ फिर भी वो कुंवारी जैसे ही ही है. अभी भी लंड डालने में मुझे सावधानी रखनी पड़ती है चाहे वो कितनी भी गीली क्यों न हो. एक बार लंड अंदर जाय उस के बाद कोई तकलीफ नहीं होती में आराम से धक्के लगा के चोद सकता हूँ.

हमारी मंगनी तो दो साल से हुई थी लेकिन एक या दूसरे कारण से शादी लेट होती चली थी. में मेडिकल कॉलेज में पढ़ता था और हॉस्टल में रहता था. वो अपने फॅमिली के साथ रहती थी और आर्ट्स कॉलेज में पढ़ती थी. हम दोनों अक्सर मिला करते थे. लेकिन उस ने मेरे से वचन लिया था की शादी से पहले में “वो” की बात तक नहीं करूँगा.

“वो” माने चोदना. जब मौका मिले तब हम चूमा-चाटी करते थे. किश करते वक्त वो शर्म से आँखें मूंद लेती थी. कभी कभी वो मुझे स्तन सहलाने देती थी. कपडे के आर पार लेकिन मेरे हाथों पर अपना हाथ रख के पकड़ रखती थी. उस ने मुझे बुर को छूने नहीं दिया था न तो उस ने मेरे लंड को छुआ था.

हर वक्त उस के जाने के बाद में कम से कम तीन बार हस्त-मैथुन कर लेता था. आखिर हमारी शादी हो गयी और सुहागरात आ पहुंची. ये कहानी है उस रात की जब हम ने पहली चुदाई की. वो तो कच्ची कुंवारी थी. मेंने १९ साल की उम्र में सब से पहले मेरी भाभी और छोटी बहन नेहा को एक साथ चोदा था.

हालाँकि में ने कॉलेज में और हॉस्पिटल में दो तीन नर्सों के साथ चुदाई की थी मगर मुझे काफी अनुभव नहीं था. मुस्कान की शर्म और योनि पटल मेंने कैसे तोडा इस की ये कहानी है. लंड और चूत को जबान होती तो अपने आप अपनी कहानी सुनाते. लेकिन वो तो एक ही काम जानते हैं – चोदना.

इसीलिये आइये में ही आप को सुनाता हूँ कहानी उन दोनों के पहले मिलन की सुहागरात आ पहुंची. में नर्वस था? थोड़ा सा. मुझे पता था की मंजुला (हमारी सर्वेंट और मुस्कान की दोस्त जो चार साल से शादी शुदा है) ने मुस्कान को सेक्स के बारे में काफी जानकारी दी थी. लेकिन प्रत्यक्ष अनुभव तो आज होने वाला था.

प्यारी मुस्कान को चोदने के लिए में आतुर था लेकिन मन में कई सवाल उठाते थे जैसी की मेरा बदन उसे पसंद आएगा? मेरा लंड वो ले सकेगी? उस का योनि पटल कितना कड़ा होगा टूटने पर उसे कितना दर्द होगा? आखिर “देखा जाएगा” ऐसा सोच कर में रात की राह देखने लगा.

मंजुला और भाभी ने मिल कर शयनखंड सजाया था. फूल फूल और फूल, चारो और फूल ही फूल. पलंग पर केवल गुलाब की पत्तियां. बगल में टेबल पर पानी दूध मिठाई कंडोम के छः पैकेट्स और लुब्रीकेंट की ट्यूब. बाथ रूम में हमारे नाईट ड्रेस गरम पानी टॉवेल्स और कुछ दवाइयां.

स्नान कर के में पहला जा कर पलंग पर बैठा. मेरे पास चोदने के आसनो की एक अच्छी किताब थी जो में देखता था की में ने मंजुला की आवाज़ सुनी. झट से में ने किताब छुपा दी और बैठ गया. मंजुला मुस्कान को लिए अंदर आयी और कहने लगी “जीजू हमारी मुस्कान बहन बहुत शर्मीली हैं और उन्होंने एक बार भी लंड लिया नहीं है. तो जरा संभल के चोदियेगा.”

“इतनी फ़िक्र हो तो तू ही यहाँ रुक जा और हमें बताती रहना की क्या करना है कैसे करना है”.

“न बाबा न. आप जाने और वो जाने. आप दोनों को चोदते देख कर मुझे दिल हो जाय तो में क्या करूँ?” इतना कहे खिलखिला कर हँस कर वो भाग गयी.

में ने उठ कर दरवाजा बंद किया. में घुमा तो मुस्कान अचानक मेरे पाँव पड़ी. में ने उसे कन्धों से पकड़ कर उठाया और कहा “अरे पगली ऐसी पाँव पड़ने की जरुरत नहीं है. तू तो मेरे ह्रदय की रानी हो तेरा स्थान मेरे ह्रदय में है पाँव में नहीं.” सुन कर वो मुझ से लिपट गयी.

हलका सा आलिंगन दे के में ने कहा “ऐसी करतें हैं. ये सब कपडे और श्रृंगार उतार के नाईट ड्रेस पहन लेते हैं जिस से हमें जो करना है वो आराम से कर सकें.”

मेरा मतलब चोदने से था ये वो समझ गयी और तुरंत शर्मा गयी. बाथ रूम में जा कर मैंने पहले कपडे बदले बाद में वो गयी. जब वो बाहर निकली तब में पलंग पर बैठा था. मेरे पास बुलाने पर वो मेरे नजदीक आयी. में ने उनकी कमर पकड़ कर पास खींची और मेरी चौड़ी की हुई जांघ के बिच खड़ी कर दी.

उसके हाथ पकड़ कर में ने कहा “अरे वह अच्छी डिज़ाइन बनायी है मेहँदी की. हम हर साल शादी की साल गिरह पर मेहँदी रचाने का प्रोग्राम करेंगे. और हाँ अकेले हाथ पर है या और कोई जगह पर?”

“पाँव पर भी है.” उस ने कहा.

“उस के सिवा?” में ने पूछा.

तो वो खूब शरमाई और टेढ़ा देखने लगी. बात ये थी की मंजुला ने मुझे बताया था की मुस्कान ने स्तन पर भी मेहँदी रचाई है. में ने उस की हथेली पर चुम्बन किया और हाथ गले से लिपटाये. कमर से खिंच कर आलिंगन दिया तो मेरा सर उसके स्तन के साथ दब गया. उस ने मेरे बालों में उंगलियां फिरानी शुरू कर दी.

कुछ देर के बाद उस का चेहरा पकड़ कर मुंह पर चुम्बन करने का प्रयत्न किया लेकिन उसने करने नहीं दिया. उस को जरा हटा कर में ने जांघ सिकोड़ी और उस को ऊपर बिठाया. मेरा दाहिना हाथ उस की कमर पकड़े हुआ था जब की बायाँ हाथ जांघ सहला रहा था. कोमल कोमल और चिकनी मुस्कान को आगोश में लेना मुझे बहुत अच्छा लगता था.

उस के बदन की सुवास मुझे एक्साइट कर रही थी और मेरा लंड हिलने लगा था. धीरे धीरे मेरा हाथ उसकी पीठ पर रेंगने लगा. ड्रेस के निचे ब्रा की पट्टी को पकड़ में ने पूछा “अरे तू ने तो ब्रा पहन रक्खी है. निकाल नहीं सकी क्या? लाओ में निकाल दूँ?”

मेरी उंगलिया ब्रा का हुक तक पहुंचे इस से पहले उस ने सर हिला के ना कहा और खड़ी हो गयी. में ने भी खड़ा हो कर उस को मेरे बाहु पाश में जकड लिया. लेकिन अफ़सोस उसने अपने हाथ छाती के आगे क्रॉस कर रक्खे थे इसी लिए उस के स्तन मुझे छू न सके. ठुड्डी पर उंगली रख कर में ने उसका चेहरा उठाया और होठ से होठ का स्पर्श किया. उस के बदन में झुरझुरी फ़ैल गयी. आँखें बंद रखते हुए उस ने मुझे फिर से चुम्बन करने दिया.

में ने कहा “मुस्कान प्यारी आँखें खोल मेरा चेहरा देखना तुझे पसंद नहीं है क्या?”

धीरे से वो बोली “पसंद है बहुत पसंद है” उस ने आंखें खोली.

मेरी आंख से आंख मिलते ही वो फिर से शर्मा गयी और दांत से अपने होठ काटने लगी. में ने झट से मुंह से मुंह चिपका के चुम्बन किया. इस बार उस के होठ मेरे मुंह में ले कर मेंने चूसे अभी तक मुस्कान ने मुंह खोला नहीं था. में ने कहा “मुस्कान मुंह खोल थोड़ा सा” और फिर से किश करने लगा.

जब उसने अपने होठ खोले नहीं तब में ने मेरी जीभ उस के होठ पर फिराये और कड़क बना कर होठ बिच डाली. मुझे ऐसा महसूस होने लगा की में उस की पिकी के होठ खोल कर अपना लंड अंदर डाल रहा हूँ. उधर मेरा लंड भी तन गया था. मेरी जीभ अपने होठ पर पाते ही मुस्कान ने मुंह खोला.

मेरी जबान उसके मुंह में थी और चारो और घूमी फिरि. मुझे बहुत स्वीट लगा ये चुम्बन. उस के मुंह की सुवास अंदर की कोमल त्वचा उस के दांत होठ सब पर में ने अपनी जीभ फिराई. फ्रेंच किश करते करते में ने उसे पलंग पर लेटा दिया. मेरे हाथ उस के स्तन पर जाने लगे.

उस ने अभी भी अपनी छाती ढँक रक्खी थी. में ने उस के हाथ हटाने का प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हुवा. में ने जबर दस्ती नहीं करनी थी इसी लिए में ने फिर से फ्रेंच किश शुरू की. अब में उस के मुंह पर से हट कर गाल पर गाल से गले पर गले से उस के कान पर ऐसी अलग अलग स्थान पर किश करने लगा.

जब मेरे होठो ने कान को छुए तब उस को गुदगुदी होने लगी और वो हँस पड़ी. अब मुझे रास्ता मिल गया. मेरा एक हाथ जो कमर पे था उस से में ने उस की कमर कुरेदी. ज्यादा गुदगुदी होने से वो छटपटा गयी और छाती से उस के हाथ हट गए. तुरंत में ने उस का स्तन थाम लिया.

मेरा हाथ हटाने का उस ने हलका सा प्रयत्न किया लेकिन में स्तन को सहलाऊँ ये उस को भी पसंद था इसी लिए ज्यादा जोर नहीं किया. भरे भरे कठिन और गोल गोल स्तन में ने नाईटी के आरपार सहलाये लेकिन मन नहीं भरा. खुले हुए स्तन के साथ खेलने को में तरस रहा था.

में ने कहा “कितने सुन्दर है तेरे स्तन! कड़े कड़े और गोल. मेरी हथेली में समाते भी नहीं है. अभी अभी बड़े हो गए लगतें हैं. लेकिन ये क्या? स्तन पर तो घुंडी होनी चाहिए वो कहाँ है? में देखूं तो मुस्कान.” बोल कर में ने नाईटी के हुक्स खोलना शुरू किये.

उस ने शर्म से मेरे हाथ पकड़ लिए. में ने थोड़ा सा जोर लगाया तो उस ने भी जोर से हाथ पकड़ रक्खे. ऊँचे स्तन रूपी पर्वत बिच के मैदान में हमारे हाथों की लड़ाई हो गयी. उस की मर्जी बिना कुछ नहीं करने का मेरा निश्चय था इसी लिए में ने आग्रह छोड़ा और हार कबुल कर ली. उधर मेरा लंड ठुमक ठुमक करने लगा था.

किश करते हुए और एक हाथ से उसका पेट सहलाते हुए में ने कहा “प्यारी कब तक छुपाए रखोगी अपने स्तन? मुझे देखने तो दे. तेरी मंजूरी बिना में स्पर्श नहीं करूँगा.”

वो जरा नरम हुई. शरमाते शरमाते वो टेढ़ा देखने लगी और छाती से हाथ हटाके अपनी आँखों पर रख दिए. में ने नाईटी के हुक्स खोले लेकिन जब नाईटी के फ्लैप हटाने लगा तब फिर से उस ने मेरे हाथ पकड़ लिए. थोड़ा जोर करके में ने नाईटी खोली और ब्रा में कैद स्तन खुले किये.

गोरे गोरे स्तन का जो हिस्सा खुला हुवा उस पर में ने किश करनी शुरू कर दी. चुम्बन की बौछार से वो एक्साइट होने लगी थी. उस का चेहरा लाल हो गया था और सांसे तेजी से चलने लगी थी. फिर भी वो पीठ के बल सोई हुई होने से में उस की ब्रा निकाल नहीं सका क्यों की ब्रा का हुक पीठ पर था.

वो करवट बदले ऐसा मुझे कुछ करना था. मुंह पर किश करते हुए में ने नाईटी ज्यादा खोली और उस के सपाट पेट पर हाथ रेंगने लगा. उस को गुदगुदी होने लगी. में ने ज्यादा कुरेदी तो वो गुदगुदी से छटपटाने लगी और थोड़ी घूमी. मेंने उसे आगोश में लिया और मेरी उंगलियां ब्रा के हुक पर पहुंच गयी.

आलिंगन से इस वक्त उस के स्तन मेरे सीने से चिपका गए और दब गए. मेरे हाथ उसकी पीठ पर घूमने लगे. उसके बदन पर रोयें खड़े हो गए. मेरी उंगलिओ ने ब्रा का हुक खोल दिया. अब वो मुझे ज्यादा सहकार देने लगी. अपने आप वो पीठ के बल हो गयी. खुली हुई ब्रा में हाथ डाल कर जब में ने उस के नंगे स्तन को पकड़ा तो उस ने विरोध नहीं किया.

वो शरमाती रही और में स्तन सहलाता रहा. छोटी छोटी निप्पल्स कड़ी होने लगी थी जिसे में ने चिमटी में ले कर मसाला. एक दो बार मेरे से जरा जोर से स्तन दबाया गया. वो चीख उठी और मेरे हाथ पे अपना हाथ रख दिए लेकिन मेरे हाथ हटाए नहीं. कई दिनों के बाद उस ने मुझे बताया था की मेरा स्तन का सहलाना उसे बहुत प्यारा लगता था.

अगले भाग में आगे की कहानी जारी रहेगी!... आप सभी के मेल का स्वागत है।

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