मेरी लंडखोर रंडी बहन की गैंग बैंग चुदाई-2
राहुल का लंड मेरी बहन अंजलि के हाथ में ही झड़ गया। बहन ने हंसते हुए उसके लंड का पूरा रस चाट लिया। गाढ़ा वीर्य उसके होंठों पर लगा था। उसने जीभ से चाटकर साफ कर लिया।
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राहुल का लंड मेरी बहन अंजलि के हाथ में ही झड़ गया। बहन ने हंसते हुए उसके लंड का पूरा रस चाट लिया। गाढ़ा वीर्य उसके होंठों पर लगा था। उसने जीभ से चाटकर साफ कर लिया।
दोनों हरामी मेरी बहन की एक-एक चुच्ची चूसने लगे। एकदम दुधमुंहे बच्चे के जैसे निप्पल चूसने में लगे थे। मेरी रांड बहन दोनों के सर पर हाथ फेरते हुए उनको अपना दूध चुसवा रही थी। अनमोल और मोनू उसके मोटे निप्पलों को मुंह में भरकर जोर-जोर से चूस रहे थे। उनकी जीभें निप्पलों को घुमा रही थीं। कभी-कभी दांतों से हल्का काटते भी थे। अंजलि की सांसें तेज हो गई थीं। उसकी आहें कमरे में गूंज रही थीं। बड़ा गजब का सीन था। मेरा लंड भी खड़ा होने लगा था।
मैंने मौके का फायदा उठाकर उनसे फिर से कहा कि मैं आपको बहुत पसंद करता हूं, लेकिन आप हो कि मेरी तरफ देखती ही नहीं हो! इस बात पर वे थोड़ी देर चुप रहीं, फिर बोली- पसंद तो मैं भी तुमको बहुत करती हूं, लेकिन तुम्हारे मामा से डरती हूं कि कहीं उन्हें पता लग गया तो मैं घर से भी निकाल दी जाऊंगी. मैं उस सूरत में अपने घर पर भी नहीं जा पाऊंगी, उधर क्या मुँह दिखाऊंगी सबको?
में घर में दाखिल हुई मुझे अमित और शुभम की आवाज़े सुनाई दी. मैं एक बेडरूम की ओर बढ़ी और उनकी आवाज़े सुनने की कोशिश करने लगी. इतने में मेने शुभम की आवाज़ सुनी, “हां मेरे लंड को इसी तरह चूसो, बड़ा मज़ा आ रहा है.”
एक दिन मैं रात में २ बजे बाथरूम जाने के लिए उठी तो ओमप्रकाश बाथरूम में पूरी तरह से नंगा खड़ा था और जल्दी जल्दी मुठ मार रहा था। उसके बाद वो अपने कमरे में चला गया। ओमप्रकाश को एक मस्त चूत चोदने के लिए चहिये थी जो की मेरे पास थी। मैं अभी जवान थी और २६ साल की मस्त माल थी।
जैसे ही मेने दूसरी बैग से सामान निकला और देखा तो मेरे होश ही उड़ गए थे और मुझे गुस्सा व शर्म आ रही थी उस बैग में एक लाइट पिंक कलर की ट्रांसपैरन्ट (आर पार दिखने वाली) नाइटी थी और साथ में मेंचिंग ब्रा पेंटी थी.
मेरा नाम सुशांत है और में आपके लिये नई सेक्स स्टोरी लेकर आया हूँ और आज में आपको एक ऐसी घटना के बारे में बताने जा रहा हूँ. जिसका मुझको बेसब्री से इंतज़ार था.. मेरा मतलब मैंने कैसे अपनी मामी को गर्म करके चोदा. मेरी मामी का नाम दीप्ती है.. उनका फिगर कुछ ख़ास नहीं है.. लेकिन वो दिखने में बहुत सेक्सी लगती है.. उनकी हाईट बहुत ज़्यादा है और उनकी उम्र लगभग 32 साल होगी.
दोस्तों मेरा नाम अनुराधा है मैं कानपुर में रहती हु, मैं अठारह साल की हु, मैं अभी पढाई कर रही हु, मेरा इससे पहले कोई बॉय फ्रेंड नहीं था. पर मेरी एक दोस्त है अंकिता, उसका एक बॉय फ्रेंड है मनीष, वो हमेशा मनीष के बारे में ही कहते रहती थी, आज मनीष ने ये किया आज मनीष ने वो किया आज मेरे चूत में लंड ऐसे घुसाया, ऐसे किश किया, ऐसे मेरे चूचियों को दबाया.
चाची का नाम रवीना था. सच कहूँ तो वो मुझे अपना दोस्त मानती थी. वो मेरे सामने बड़े ही सहज भाव से रहती थी. अपने कपडे लत्ते भी मेरे सामने ठीक से नहीं पहनती थी. उनकी चूची की आधी दरार हमेशा दिखती रहती थी. कभी कभी तो सेक्स की बात भी कर डालती थी.
आज मैं आपको अपनी कथा सुना रही हूँ. मैं पिछले ७ साल से धंधा कर रही हूँ. मेरी माँ भी एक रंडी थी. मेरी माँ कोई पेशेवर रंडी नही थी. मेरा बाप शराबी था, मेरी माँ से प्यार करता था, उसको भागा लाया था, बाप में मेरी माँ को दिल्ली के इस बदनाम कोठे पर बेच दिया था और खुद साला पैसा लेकर नौ दो ग्यारह हो गया.
जैसे की आपको पहले ही पता चल गया है मुझे चोदने वाला कोई और नहीं बल्कि मेरा सगा छोटा भाई है। वो मेरे से आठ साल छोटा है पर सेक्स सम्बन्ध बन गया इसी वेलेंटाइन डे पर। कभी कभी कुछ ऐसा हो जाता है और बात आगे बढ़ जाती है। और वो हो जाता है जो होना नहीं चाहिए, खाश कर अपने परिवार के सदस्यों के साथ और वो भी अपना सगा भाई हो तो और भी अलग बात हो जाती है।
मैं रीना दीदी को नहाते हुये देखने लगा उसकी गांड देखकर मेरा 9 इंच का लंड खड़ा हो गया मैने पहली बार रीना की गांड देखी मैंने कभी भी नही सोचा था की रीना दीदी इतनी सुंदर होगी मैं अपना लंड बाहर निकाल कर सहलाने लगा तभी रीना सीधी होकर नहाने लगी उसकी बड़ी बड़ी चूची और चूत देखकर मेरे लंड से पानी निकलने लगा.
बहुत दिन हुए मैं एक ट्रेन से वापिस घर आ रहा था. रात भर और पूरे दिन चल कर ट्रेन दिल्ली पहुँचती कोई २० घंटे में और आगे होती हुई जम्मू तक जाती. मुझे उतरना था दिल्ली, और मेरी स्लीपर टिएर में बुकिंग हुई हुई थी. हमेशा मेरी नज़र आस पास के माल पे रहती थी और कोई माल नज़र नहीं आती तो मैं पूरे टाइम सोता रहता था.
जीजा ने मेरा दुप्पटा मेरे सीने से निकाल कर हटा दिया. मेरा यौवन मेरी छातियों पर उनके हाथ ना जाने कहाँ से आ गये. मुझे ये सब बहुत अच्छा लग रहा था. धीरे धीरे जीजा आगे बढ़ते चले गये. आगे..और आगे. वो जोर जोर से मेरे नीबू जैसे दूध दाबने लगे. मैंने उनको कुछ ना कहा. जबकि मुझे मुझे उनको इसी समय रोक देना चाहिए था.
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