महँगी चूत सस्ता पानी -1
By किशोर Published on पढ़े जाने की संख्या: 926
आज के इस नेट और , मोबाइल की दुनिया में वो दिन लड़ गये जब लोग चूत देख पानी पानी हो जाया करते थे ... अब तो चूत के पानी से ही दिन चर्या शूरू होती है और रात की रंगीनियाँ भी इसी के पानी से ख़तम ..हा हा हा हा !! क्या पानी है ... इस का कोई सानी नहीं ...
हां दोस्तो आज सही में चूत सस्ती है और महँगा है पानी ... आइए मेरे इस नये थ्रेड में इसी पानी का भरपूर आनंद लीजिए ,,कुछ नमकीन , कुछ लिस लिसा ..कुछ खट्टा तो कुछ मीठा ..उफफफफ्फ़ क्या स्वाद है चूत की पानी का .. बस चूत रिस्ति रहे और और आप मुँह खोले इसे पीते रहें ...गटकते रहें ..चूस्ते रहें ...चूत उछलती रहे और आप उसे थामे चाट ते रहें , इस कुदरत के अनमोल रस का पान करते रहें ..
मैं किशोर ..लोग मुझे किश के नाम से जानते हैं ...हा हा हा...हां ये किस के बहुत करीब है..शायद इसलिए मुझे औरतें किस-एक्सपर्ट समझती हैं .... ...
ये कहानी शूरू होती है जब मैं सिर्फ़ 18 साल का था .... और मेरी कज़िन (मेरे मामा की बेटी) 32 साल की ....तीन बच्चो की माँ ,,भरपूर चूचियाँ..उछलते नितंब ...भरे होंठ ....चिकने सपाट और मांसल गोरे पेट की स्वामिनी ..जब वो चलती ..मेरे पॅंट के अंदर खलबली मच जाती ....
मेरी कज़िन पायल की चूत से भी पानी निकले और लगातार निकले इसकी भी पृष्ठभूमि तैय्यर करनी पड़ेगी ना ..तो चलिए चलते हैं कुछ साल पहले और देखते हैं हमारी तैय्यारि ...
मैं एक बहुत ही सुशील , सीधा सादा अपने माँ बाप का लाड़ला एकलौती संतान था . बड़े लड़ प्यार और स्नेह से मुझे रखा जाता ..किसी भी चीज़ की कोई कमी नहीं होती ....और पायल मेरे मामा की इक लौति संतान .....बड़ी नटखट , शरारती और सारे घर को अपने सर पर उठाने वाली ....
मेरे मामा भी हमारे साथ ही रहते ... उनकी नौकरी भी हमारे ही शहेर में थी..और हमारा घर काफ़ी बड़ा ... माँ ने ज़िद कर मामा को भी अपने साथ रहने को मजबूर कर दिया ...
पायल दीदी भले ही शरारती और नटखट हो ..पर मेरे साथ बड़े स्नेह और प्यार से रहती ...हमारी उम्र में भी काफ़ी अंतर था ...वो मुझे किशू बुलाती ...
मुझे अपने हाथों से खिलाती ...मेरे स्कूल का बस्ता तैय्यार करती ... मुझे मेरी पढ़ाई में मदद करती ...
हम दोनों का एक दूसरे के बिना रहना मुश्किल हो जाता ...मैं जब स्कूल से आता ..मेरी आँखें पायल दीदी को ढूँढती ...घर के चारों ओर मैं उन्हें ढूंढता ....जब वो सामने दिखतीं ...मेरे सांस में सांस आता ...मैं सीधा उनकी गोद में बैठ जाता ..वो प्यार से मेरे बाल सहलाती ..मेरे दिन भर की थकान उनके स्पर्श से ही गायब हो जाती ... मैं खिल उठता ....
उन दिनों पायल दीदी 20-22 साल की एक आल्मास्ट , दुनिया से बेख़बर, जवानी के नशे में झूमती लहराती रहती.... और मेरे मामा उनकी शादी की चिंता मे डूबे रहते .....
हाइ स्कूल की पढ़ाई के बाद वो घर में ही रहती ... घर के कम काज़ में हाथ बटाना तो दूर ...अपने में ही खोई रहती ...कहानियाँ पढ़ती , फिल्मी मॅगज़ीन्स पढ़ती ( जिन्हें मैं अपनी किताबों के बस्ते में छुपा कर लाता ..और उसी तरह दीदी के पढ़ने के बाद दूकानवाले को वापस कर देता ) ...
मामा ..मामी की डाँट का उन पर कोई असर नहीं होता...
" अरे कुछ तो शर्म कर ...कल को तेरी शादी होगी ...ससुराल में हमारी नाक काटेगी ये लड़की .."
मामी के इस तकियकलाम शब्दों को पायल दीदी अन्सूना कर देती ...मुझे अपने हाथों से अपने बगल चिपकाते हुए बोलती
"किशू...तेरी पढ़ाई हो गयी....? "
"हां दीदी.."
"तो फिर चल लुडो खेलते हैं .."
मेरे लिए उनके ये शब्द जादू का काम करते..मैं फटाफट अपने कमरे में अपने बिस्तर पे लुडो का बोर्ड बिछा देता ...हम दोनों आमने सामने बैठ जाते ..इतने पास कि दीदी की गर्म साँसें मेरे चेहरे को छूती ....इसमें स्नेह की गर्मी , निस्चल प्यार का स्पर्श और उनकी मदमस्त जवानी का झोंका भी शामिल रहता ..मुझे बहुत भाता ...
उन दिनों टीवी नहीं था ..रेडियो का प्रचलन था ....मेरे अलावा पायल दीदी का ये दूसरा चहेता था ..उस समय की फिल्मों का एक-एक गाना उनकी ज़ुबान पे होता ....हमेशा गुनगुनाती रहती अपनी सुरीली और मीठी आवाज़ में ...
दिन गुज़रते गये और मैं पायल दीदी के स्नेह और प्यार के बंधन में जकड़ता गया...हम दोनों के लिए एक दूसरे के लिए एक अटूट आकर्षण , बंधन , प्यार और स्नेह पनपता गया .....
और फिर एक दिन जब मैं स्कूल से वापस आया ,,दीदी ने मेरे लिए दरवाज़ा नहीं खोला ... दरवाज़ा भिड़ा था ..मेरे धक्का देते ही खूल गया..पर दीदी के बजाय अंदर सन्नाटे ने मेरा स्वागत किया.. दीदी की प्यार भरी बाहों की जगह एक घनघोर चुप्पी ने मुझे जाकड़ लिया .... मैं तड़प उठा ..दीदी कहाँ गयीं..??
मैं उनके कमरे की तरफ बढ़ा .... अंदर झाँका ..दीदी अपने पलंग पर लेटी थीं .....मैं और नज़दीक गया ..
मैं बेतहाशा उनकी ओर बढ़ा .... पायल दीदी पेट के बल लेटी थी , सर तकिये पर रखे सूबक सूबक कर रो रहीं थी ...उनका चेहरा मेरी ओर था ..उनके गुलाबी गाल आँसुओं से सराबोर थे ...तकिया गीला था ... आख़िर क्या बात हो गयी ..?? क्या हुआ आज दिन भर में ..??? जिस चेहरे पर हमेशा खिलखिलाहट और मुस्कान छाई रहती ..आज आँसुओं से सराबोर है ..आख़िर क्यों..??? किसी ने कुछ कहा ...?? मेरे मन में हलचल मची थी ...
मैं उनके बगल बैठ गया और पूछा " दीदी क्या हुआ ..आप रो क्यूँ रही हैं ..?? "
मेरी आवाज़ भी रुआंसी थी ...
दीदी ने मेरी तरफ चेहरा किया और उठ कर बैठ गयीं , मुझे अपनी छाती से लगाया ..मुझे भींच लिया और फिर और सूबक सूबक कर रोने लगीं ...
मैं हैरान परेशान था , पर उनकी छाती की गर्मी और स्तनों की नर्मी से बड़ा अच्छा भी लगा ...मैं एक बहुत ही अलग अनुभूति में डूबा था ...उनके साथ चिपके रहने का आनंद , पर उनके रोने से परेशान ... दो बिल्कुल अलग अनुभव थे ...मुझे समझ नहीं आ रहा था मैं क्या करूँ ..दीदी को चूप कराऊँ या फिर उनकी छाती से चिपके इस जन्नत में खोया रहूं ... पायल दीदी के शरीर की सुगंध ..उनके आँसू और पसीने की मिली जुली नमकीन खूशबू , मेरा मुँह उनकी छाती से इस तरेह चिपका था के मेरी नाक उनकी आर्म्पाइट की तरफ था ..उफ़फ्फ़ वहाँ से भी एक अजीब मादक सी खूशबू आ रही थी ....वोई पसीने की ...मैं एक अजीब ही स्तिथि में था ..क्या करूँ क्या ना करूँ ...पायल दीदी आप रोते हुए भी मुझे इतना सूख दे सकती हैं....दीदी दीदी ........मेरा रोम रोम उनके लिए तड़प रहा था ..उन्हें कैसे शांत करूँ ..मैं क्या करूँ ......
मेरी इस उधेड़बून का हल,भी आख़िर दीदी ने ही निकाला ... उन्होने मुझे अपनी छाती से अलग किया ..मेरे चेहरे को अपने नर्म हथेलियों से थाम लिया और मुझे बेतहाशा चूम ने लगीं ... मेरे गालों पर अपने मुलायम होंठों से चुंबनों की वर्षा कर दी .... ये भी मेरे लिए एक नया ही अनुभव था ..... पायल दीदी मुझे चूमे जा रहीं थी पर उनका रोना अब हिचक़ियों में तब्दील हो गया था ... और बीच बीच में मुझ से पूछती
" किशू ..किशू .....मैं तुम्हारे बिना कैसे रहूंगी ..?? "
मैं फिर परेशानी में आ गया ..आख़िर इन्हें मेरे बिना रहने की क्या ज़रूरत आ पड़ी ..?? मेरे छोटे से मश्तिश्क में हज़ारों सवाल थे ..जिनका जवाब मुझे मिल नहीं रहा था ..और मैं उलझनों में डूबता जाता ..पर दीदी के प्यार और निकट ता से शूकून भी मिल रहा था ....
और तभी मुझे अपने सारे सवालों का जवाब मिल गया ....
मेरी मामी ने कमरे में कदम रखा और भाई बहेन का प्यार , खास कर दीदी का रोना देख वो बोल उठीं ..
"वाह रे वा पायल रानी..अभी तेरी सिर्फ़ शादी की बात पक्की हुई है और इतना रोना धोना ..अरे जब तेरी विदाई होगी तू क्या करेगी ....बस बस बहुत हो गया ..अब चूप भी कर ..देख बेचारा किशू स्कूल से कब का आ चूका है ...उठ और उसे कुछ खिला ,,बेचारा कब का भूखा है..तुम्हारे रोने से इतना परेशान है....."
ह्म्म्म्ममम तो ये बात थी पायल दीदी के रोने के पीछे..उनकी शादी .... पर इस बात ने मुझे और उलझन में डाल दिया ... जितना मुझे मालूम था ...जितना मेरी छोटी सी मासूम जिंदगी ने मुझे बताया था ...शादी की बात से सारी लड़कियाँ खुशी से झूम उठती हैं .... पर यहाँ तो बिल्कुल ही अलग माजरा था ....खुशी से झूमना तो अलग दीदी दुख और दर्द का रोना ले बैठी थीं....
मामी की बातों ने जादू का असर किया .. मेरे भूखे रहने की बात से उनका रोना धोना एक झटके में ही रुक गया ...उन्होने मुझे बड़े प्यार से अलग किया ..अपनी आँचल से अपना चेहरा और आँखें पोन्छि ....और मुझे कहा
" अले ..अले ..मेला बच्चा अभी तक भूखा है ...उफ़फ्फ़ मैं भी कितनी पागल हूँ ..किशू यहीं बैठ ..मैं 5 मिनिट में तुम्हारा नाश्ता लाती हूँ ...."
इतना कहते हुए वो रसोई की तरफ भागती हुई चली गयीं ..कमरे में मामी और मैं रह गये ....
मैने मामी से पूछा "मामी ..दीदी शादी की बात से क्यूँ रो रही थी..??? शादी की बात से तो सब खुश होते हैं ना..??"
मामी ने झल्लाते हुए कहा " किशू बेटा ..अब मैं क्या जानूं इस पागल के दिमाग़ में क्या है ...... तू ही पूछ ले उस से ...तुम दोनों भाई बहेन की बात तुम ही जानो ......"
और बड़बड़ाती हुई वो भी कमरे से बाहर चली गयीं .
"ठीक है " मैने सोचा " आने दो उनको उन से ही पूछता हूँ.."
और मैं दरवाज़े की तरफ टकटकी लगाए पायल दीदी का बेसब्री से इंतेज़ार कर रहा था .......
अब तक दीदी के रोने धोने के मारे मैं अपनी भूख-प्यास भूल चूका था .... वरना स्कूल से घर आते ही मुझे जोरों की भूख लगती थी , जो स्वाभाविक है... और दीदी भी हमेशा तैय्यार रहती थी मेरे पेट की भूख शांत करने को .
मैं हाथ मुँह धो कर आता ..दीदी थाली भर नाश्ता ले आतीं और मैं उनकी गोद में उनके हाथों से नाश्ता करता ..खूब बातें करता .... अपने स्कूल की , उनकी पढ़ी किसी नयी कहानी की ....या फिर फिल्म-मॅगज़ीन से किसी आक्टर आक्ट्रेस की गॉसिप ...मीना कुमारी और मधुबाला उनकी फॅवुरेट थीं ..उन दोनों की एक एक बात उन्हें मालूम रहती ... बड़े मज़े ले ले कर पायल दीदी मुझे उनके नये फिल्मों के बारे बताती ...
उस दिन पहली बार इस रुटीन में रुकावट आई ....
पर अब जब मामला शांत था ..मेरी भूख फिर से जाग उठी .... मैने दरवाजे की तरफ देखा ..दीदी एक हाथ से थाली और दूसरे हाथ से पानी का ग्लास थामे चली आ रही थीं ...
मैने उन की ओर देखा ..पता नहीं क्यों मुझे उस दिन वो कुछ बदली बदली सी नज़र आईं... उनकी चाल में वो पहले वाली अल्हाड़पन, शोखी , मस्ती नहीं थी ..बड़े नपे तुले कदम थे ... और चेहरा भी काफ़ी सीरीयस था ... मुझे समझ नहीं आ रहा था एक ही दिन में ऐसा क्या हो गया ..?? शादी की बात से ऐसा क्या हो गया दीदी को..?? क्या शादी इतनी बूरी चीज़ होती है ...पर बाकी सभी लड़कियाँ तो कितनी खुश होती हैं
मैं इन सब बातों में खोया था ....तब तक वो मेरे बगल में बैठ गयीं ,,थाली और ग्लास फर्श पे रख दिया और अपने हाथों से एक कौर मेरी ओर बढ़ाया ..मैने मुँह नहीं खोला ... आस्चर्य से दीदी ने अपनी बड़ी बड़ी आँखों को और बड़ी करती हुई मेरी ओर देखा ...
" क्या बात है किशू ..? आज खाएगा नहीं क्या ..अभी तक तो तुझे जोरों की भूख लगी थी ... मुझ से नाराज़ है ..??? " उन्होने मेरे चेहरे को उपर उठाते हुए कहा ...
" नहीं दीदी ..मैं भला आप से क्यूँ नाराज़ होऊँगा ..? पर आप कुछ भूल रहीं हैं ..क्या आज तक मैने आप से अलग बैठ कर खाया है..????"
ये सुनते ही उनकी आँखों से फिर से आँसुओं की बड़ी बड़ी बूंदे टपकने लगी .....
उन्होने झट अपनी जांघों पर मुझे खींच कर बिठा लिया .....
बड़ी मुश्किल से फिर अपने आप को रोने से रोकते हुए उन्होने कहा " देख ना किशू आज मुझे ये क्या हो गया है ,,इतनी सी बात भी मैं भूल रही हूँ .."
इतनी देर तक एक तनाव भरे वातावरण के बाद दीदी की गोद में आते ही मुझे बड़ा शूकून मिला ... सारा तनाव एक पल में मिट गया ..
"हां दीदी ..शायद आप शादी की बात से काफ़ी परेशान हैं .... एक बात पूछूँ ..??"
" हां ..हां पूछ ना किशू ... "
" दीदी ....शादी की बात से तो मैने किसी को भी इतना दुखी होते नहीं देखा ..जितना आप दिख रही हो.....आख़िर क्या बात है ..प्लज़्ज़्ज़ बताओ ना ..?? क्या आप खुश नहीं ..???"
उन्होने अपने आँचल से फिर से अपने चेहरे और आँखों को पोन्छा ....और अपने चेहरे पे मुस्कान लाने की कोशिश करते हुए एक बड़ा नीवाला अपने लंबी लंबी सुडौल उंगलियों के बीच थामते हुए मेरी ओर बढ़ाया और कहा
" ले ..पहले खाना शुरू कर फिर बताती हूँ "
मैने भी मुँह खोलते हुए पुर का पूरा कौर अंदर ले लिया ..दीदी ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा
" अरे नहीं किशू ..ऐसी बात नहीं .... पर शादी की खुशी से ज़्यादा मुझे तुम से बिछड़ने का गम है .... देखो ना सिर्फ़ एक दिन तुम्हें नाश्ता कराने में देर हो गयी ..तुम्हें कितना बूरा लगा ..और जब मैं नहीं रहूंगी ..फिर क्या होगा ..??? और क्या तू भी मेरे बिना रह पाएगा ..??? "
इस आखरी सवाल से मैं एक दम सकते में आ गया ....मुझे झकझोर सा दिया दीदी के इस सवाल ने ...
मुझे अब आहेसस हुआ पायल दीदी शादी की बाद मेरी बहन से ज़्यादा किसी और की बीबी हो जाएँगी ... किसी और की पत्नी ..उनपे मेरा हक़ नहीं के बराबर होगा ..और उसी पल उन्हें देखने का मेरा नज़रिया ही बदल गया . वो मेरे सामने एक औरत थीं अब ..बहन नहीं ...
मैं अब पायल दीदी की गोद में नहीं बलके एक खूबसूरत , जवान औरत की गोद में बैठा था ...
मेरे सारे बदन में एक झूरजूरी सी हो उठी ....मेरी समझ में नहीं आया ये क्या हो रहा था ... मेरे दिमाग़ में फिर से सवाल खड़े हो उठे ...ये क्या है ..???
पायल दीदी की गोद में मैं हर रोज़ बैठ ता हूँ ..पर ऐसा तो कभी महसूस नहीं हुआ ....फिर आज क्यूँ ..?? इन्ही सब सोच में खोया था
"अरे किस सोच में डूब गये ....लो और लो ..मुँह खोलो ना किशू .."
दीदी की आवाज़ से मैं वापस आया ... किसी तरह नाश्ता किया.... .और मुँह हाथ धो कर बाहर निकल गया दोस्तों के साथ खेलने ......
दीदी के रोने का कुछ कुछ मतलब शायद मुझे समझ आ रहा था ..शायद दीदी के मन में कुछ ऐसी ही भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा होगा ...
जब मैं वापस आया ..तो मेरे कानों में दीदी की सुरीली आवाज़ आई.... किसी फिल्मी गीत के बोल थे ..उनके चेहरे पे मुस्कुराहट थी ...खुशी थी ....
मुझे देखते ही उन्होने कहा "देख किशू आज पढ़ाई के बाद तू एक दम से सो मत जाना ..हम लोग आज ढेर सारी बातें करेंगे ..ठीक है ना ..???
" हां दीदी .... बिल्कुल सही कहा आप ने .... "
उन्होने मुझे फिर से अपनी छाती से चिपका लिया ..." ओओह किशू ...किशू ... तू कितना भोला है रे ...."
मैं समझ नहीं पा रहा था ..एक ही दिन में उन्होने मुझे दो बार सीने से लगाया और हर बार उनका तरीका कितना अलग था .....
"किस उधेड़बून में खो जाता है रे तू..?? चल आज रात को तेरी सारी उलझनें दूर कर दूँगी ...अब जा तू नहा धो और पढ़ाई कर .."
मैं दीदी के साथ रात होनेवाली बातों की कल्पना में खोया अपने रूम के अंदर चला गया.....
मैं कमरे में आने के बाद नाहया , फ्रेश हुआ , कुछ हल्का महसूस किया ..पर मन अभी भी बेचैन सा था ..पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था ...मैने किताब खोली ..पर दिमाग़ में अभी भी दीदी के आज के दो रूप मेरे मश्तिस्क पटल पर बार बार आते जाते ..जैसे किसी फिल्म की सीन बार बार दोहराई जा रही हो..
एक तो उनका वो रोना और मुझे अपने सीने से लगाना.... इस तरह जैसे वो मुझ से अलग नहीं होना चाहती ..मुझे अपने बाहों में भर मुझे हमेशा के लिए अपने साथ कर लेना चाहती हों .ज़रा भी दूर नहीं होने देना चाहती हों .. मुझ से अलग होने का दर्द और तड़प भरा था उस आलिंगन में .
.और दूसरी बार सुरीली धुन गुनगुनाते हुए मुझे अपनी छाती से चिपकाना ..इसमें कितना आनंद था ...मेरे साथ का आनंद .. मेरे साथ का सुख ..मुझे भी कितना अछा लगा ... पर इस दूसरी बार मुझे कुछ और भी महसूस हुआ ..उनके भरे भरे गोलाकार मुलायम स्तनों का दबाब मेरे सीने पर ... इसके पहले आज तक मेरा ध्यान इस तरह के आनंद पर कभी नहीं गायक़ था ..उस दिन क्यूँ ..?? ये महसूस अभी भी मेरे सीने पर था .. मुलायम स्तनों का दबाब , याद करते मेरे पॅंट के अंदर हलचल सी महसूस हुई ...कुछ कडपन महसूस हुआ ..नीचे झाँका तो देखा मेरा पॅंट उभरा हुआ है ...
मैने सामने के बटन खोले ....मेरा लंड खड़ा था ...
हे भगवान ये क्या हो रहा है ... मैने अपने हाथ से उसे शांत करने को थामा और सहलाया ... पर ये तो और भी कड़क हो गया और मुझे अच्छा लगा ... मैं उसे ऐसे ही थामे रहा ..एक दो बार उत्सुकतावश उसकी चॅम्डी उपर नीचे की ..और भी अच्छा महसूस हुआ ...मेरे पूरे शरीर में सिहरन हो उठी ...( मैने अपने स्कूल में कुछ लड़कों को ये बात करते सूना था के चॅम्डी उपर नीचे करने से बड़ा मज़ा आता है ) ..मैने इसे आज़माना चाहा ...
मैने चॅम्डी उपर नीचे करना जारी रखा ..एक असीम आनंद में मैं डूबा था ..दीदी का चेहरा और भरे स्तनों का मेरे सीने पर दबाब याद करते मैं लगातार चॅम्डी उपर नीचे कर रहा था , अचानक मेरा लंड काफ़ी कड़ा हो गया और फिर मुझे ऐसा लगा मानो पूरे शरीर से कुछ वहाँ मेरे लंड के अंदर आ रहा है , कुछ जमा हो रहा है ..मेरे चॅम्डी उपर नीचे करने की गति अपने आप तेज़ हो गयी ..तेज़ और तेज़ और तेज़ और उस के बाद पेशाब वाले छेद से एक दम से गाढ़ा सफेद पानी जैसा पिचकारी छूटने लगा ...मेरा शरीर कांप रहा था ...लंड झटके खा रहा था और थोड़ी देर बाद वो शांत हो कर सिकूड गया ..मुझे काफ़ी राहत महसूस हुआ ..
उस दिन मैने जिंदगी में पहली बार मूठ मारी .
मैं हैरान था अपने में इस बदलाओ को देख ..पायल दीदी के बारे ऐसी सोच ...क्या हो गया है मुझे..??? अगर उनको मालूम हुआ , वो क्या सोचेंगी ..??
मैं आँखें बंद किए कुर्सी पर सर पीछे किए हाँफ रहा था ...
थोड़ी देर बाद मैं नॉर्मल हुआ ..कुर्सी से .उठा अपने रूमाल से लंड को पोन्छा और फर्श पर जो सफेद गाढ़ा पानी गिरा था ..उसे भी सॉफ किया ... मुझे अब तक उस पानी का नाम तक नहीं मालूम था ....
तभी दीदी की आवाज़ आई ...." किशू पढ़ाई ख़त्म हो गयी ..???" और वो अंदर आ गयीं .
मैं अपनी किस्मेत सराह रहा था ..अगर थोड़ी देर पहले आतीं तो मेरी क्या हालत होती..??
"हां दीदी स्कूल की पढ़ाई तो ख़त्म हो गयी .पर अभी आप से बहुत कुछ पढ़ना बाकी है.."
"मुझ से पढ़ाई ....क्या मतलब ..???'
" अरे कुछ नहीं दीदी ..आप ने ही कहा था ना आप मेरी सारी उलझनें दूर करनेवाली हो ..??"
"ओह ..हां ..चल पहले खाना खा लो ..फिर बातें करते हैं .."
उस वक़्त उनके बोलने का लहज़ा बिल्कुल नॉर्मल था.... फिर वोई हँसी..खीखिलाहट और मस्ती ..मैं एक तक उन्हें देख रहा था ...
उफफफफफ्फ़..कितनी अछी लग रहीं थी ..पर उस वक़्त मुझे दीदी कुछ और भी लग रही थी....
"अरे ऐसे टकटकी लगाए क्या देख रहा है ... पहले कभी देखा नहीं है क्या .."
मैने मन ही मन में कहा " देखा तो है पर इस नज़र से नहीं .."
पर दीदी से कहा " नहीं दीदी ..अभी आपकी रोनेवाली सूरत नहीं है ना ... इसलिए आप हँसती हुई कितनी अच्छी लग रहीं हैं.."
दीदी थोड़ी देर मुझे देखती रहीं ...मेरे कंधे पे हाथ रखा .." अब नहीं रोउंगी ..कभी नहीं ... चल अब खाना खा ले " इतना कहते कहते उन्होने मुझे मेरे कंधों से जाकड़ लिया और साथ साथ किचन की तरफ हम जाने लगे ...
दीदी किचन में अंदर आते ही एक बड़ी थाली में अपने और मेरे लिए खाना लगाया और कहा
" चल किशू मेरे रूम में ,,यहाँ माँ और बुआ आते रहेंगे ...बात करने का मज़ा नहीं रहेगा ..."
"हां दीदी चलिए .." मैने तपाक से जवाब दिया ...
अपने रूम में पायल दीदी नीचे बैठ गयीं , रोज की तरह उन्होने मुझे अपनी गोद में बिठा लिया ...पर आज जब मैं उनकी जांघों पर बैठा ,, मुझे पहली बार आज कुछ अजीब सा लगा ... कुछ हिचकिचाहट सी हुई ... पर दीदी को बूरा ना लगे इस वाज़ेह मैं चुपचाप बैठ गया ..
उनके मुलायम मांसल जांघों में बैठने का एक अजीब ही मज़ा आ रहा था ..इसके पहले मैने कभी इस बात पर ध्यान नहीं दिया था ..उनकी गोद में बैठना मेरे लिए बहुत ही साधारण बात थी ... पर आज येई एक बहुत अजीब ही अनुभव था... मेरे हिप्स उनकी जाँघ में धँसी थी ...मुझे उनके शरीर की गर्मी , उनके साँसों का स्पर्श महसूस हो रहा था ...उनके शरीर की मादक खूशबू , इन सब से मुझमें एक मस्ती का आलम छा रहा था ...मैं इस स्वर्गिक आनंद में खो सा गया था ..
" अरे बाबा कहाँ खो गया ... खाना तो खा ले किशू ..क्या बात है आज तू इतना खोया खोया सा क्यूँ है ..कुछ बात है तो बोल ना ... शाम को नाश्ते के टाइम भी कुछ ऐसा ही था ....क्या मुझ से अभी भी नाराज़ है..??"
"नहीं दीदी ..आप कभी ऐसा मत सोचना ..मैं आप से कैसे नाराज़ हो सकता हूँ ... कोई बात नहीं है .. **
" हां लो ....मेरा भी बहुत दिल है तुम से खूल कर बातें करने की ... तू मुझ से कुछ छुपा रहा है....आज तू काफ़ी बदला बदला सा नज़र आ रहा है ... देख किशू मैं तुम्हारी दीदी ही नहीं , दोस्त भी हूँ ....मुझ से कुछ भी मत छुपाना ... चाहे कुछ भी हो मैं कभी बूरा नहीं मानूँगी ...तेरे मन में जो कुछ भी है मुझे बता दे ....
वो बोलती भी जा रहीं थी और मुझे एक कौर खिलाती और दूसरा खूद भी खाती जाती ...
'" हां दीदी ..आप तो मेरी सब से अच्छी दोस्त हैं .." मैं भी खाता जा रहा था और उन्हें जवाब भी देता जा रहा था ... "मेरे मन में भी बहुत सारे सवाल हैं दीदी ... जिनका जवाब सिर्फ़ आप ही दे सकती हो ..."
"हां बिल्कुल ठीक समझा रे तू...हम दोस्त भी हैं ....और भी एक बात किशू ...अब तो मैं यहाँ कुछ दिनों की ही मेहमान हूँ, बस जो तुझे बोलना है..करना है ..बोल ले और कर ले ..मन में कुछ भी मत रख ..." और फिर उनके चेहरे पर एक शरारत भरी मुस्कान थी .
उनकी इस बात पर "जो करना है कर ले " मैं चौंक उठा ....आख़िर दीदी का मतलब क्या है ..क्या करने को बोल रही हैं ..??
"दीदी ...बोलने की बात तो मैं समझता हूँ..पर करना क्या है..????"
और इस बात पर दीदी ने अपने मस्ती भरे अंदाज़ में जोरदार ठहाका लगाया ...और मुझे चिपकाते हुए कहा
"तू सही में एक दम भोले राजा है रे ..एक दम भोला भाला .."
फिर एक दम से चूप हो गयीं . मेरी ओर बड़ी हसरत भरी निगाहों से देखा और कहा "पर अब उतना भोला नहीं रहा रे तू ...." और फिर से हँसने लगीं ...
मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था ..आज दीदी को क्या हो गया है...कैसी बातें कर रहीं हैं ...
"हा हा हा ..अरे तू टेन्षन मत ले ..खाना खा ले अभी फिर तेरी सारी टेन्षन मैं दूर कर दूँगी ..." और एक नीवाला बड़े प्यार से मेरे मुँह में डाल दिया ..
तभी खाना खिलाते खिलाते उनकी साड़ी का आँचल नीचे आ गया ..उनका सीना अब उघ्ड़ा था ..उनके स्तनों की गोलाईयो के बीच की घाटी सॉफ सॉफ दिख रही थी .... मेरी नज़र उस पर पड़ी ... उनकी साँसों के साथ उनके स्तन भी उपर नीचे हो रहे थे ... मैं एक टक उधर ही देख रहा था ...
दीदी की नज़रें मुझ से मिलीं ..उन्होने शायद मेरी नज़र ताड़ ली थीं ..पर बड़ी अजीब बात हुई ..उन्होने कुछ नहीं किया ... आँचल ठीक नहीं किया वैसे ही गिरे रहने दिया .... इसके पहले कभी भी ऐसा होता तो वो आँचल फ़ौरन ठीक कर लेती थी ..पर आज नहीं ..... क्यूँ ..????
मैने चुप चाप बिना कुछ रिक्ट किए अपनी नज़रें हटा ली ....
दीदी मुस्कुरा रहीं थी ...
मैने जानबूझ कर ऐसा दिखाया जैसे मैने कुछ देखा नहीं ,,
खाना ख़त्म हो चूका था ..." और लाऊँ किशू ...?"
"नहीं दीदी......"
और हम दोनों उठ गये .
" देख तू हाथ मुँह हाथ धो ले और सीधा मेरे कमरे में आ जाना ..मैं बस आई .."
मैने फटाफट मुँह हाथ धो कर उनके कमरे में चला गया..
मैं एक अजीब ही उधेड़बून में था ...उस दिन सब कुछ बदला बदला सा था ...दीदी कहती थी मैं बदला बदला नज़र आ रहा हूँ ..और मेरी नज़र में दीदी अब वो दीदी नहीं थी ..एक ही दिन में सब कुछ बदल गया ..आख़िर क्या हुआ ... ???
मैं सोच ही रहा था तब तक दीदी आ गयीं और मेरे बिल्कुल सामने बैठ गयीं ....इतनी करीब की हमारी साँसें एक दूसरे को छू रही थी ...
थोड़ी देर तक वो अपनी बड़ी बड़ी आँखों से मुझे देखती रही और एक भाव शून्य आवाज़ में मुझ से सीधा सवाल किया..
" तू आज शाम को जब मैं तेरे कमरे में आई उसके पहले क्या कर रहा था ..??''
मैं एक दम से सकते में आ गया ..क्या मेरा मूठ मारना दीदी ने देख लिया ?? मेरे चेहरे पे घबड़ाहट थी ...पर फिर भी काफ़ी कोशिश की घबड़ाहट छुपाने की और जवाब दिया ..
"कुछ भी तो नहीं दीदी ..मैं तो होमवर्क कर रहा था ...."
दीदी को जोरों से हँसी आ गयी मेरे इस जवाब से ..हंसते हुए उन्होने कहा
" हां ये तो सही है तू होम वर्क कर रहा था ..पर तेरे हाथ में कलम की बजाए कुछ और ही था .....है ना ...??"
मेरी तो सिट्टी पिटी गुम थी ..मैं समझ गया मेरी हरकतों का दीदी को पता चल गया है....मैं एक दम से चूप था ..मेरे मुँह से कुछ आवाज़ नहीं निकल रही थी ...मेरी हालत पतली थी ...
मैने हकलाते हुए कहा " दीदी ...वो ..वो ..""
"हा हा हा ..अरे मेरे भोले राजा ..घबडा मत ..मैं समझती हूँ .इस उम्र में ये सभी नॉर्मल लड़कों के साथ होता है ...मुझे तो खुशी हुई के मेरा किशू भी नॉर्मल है .... "
मेरी जान में जान आई , पर दीदी के इस रवैय्ये से फिर मैं हैरान था ... और इसी हैरानी में मैने पूछा
"पर दीदी आप को कैसे मालूम हुआ ??.."
'मैं तेरे कमरे में आ रही थी , पर जैसे ही अंदर पैर रखा ..मैने तेरी हालत देखी ..तू हिल रहा था और कांप रहा था और तेरा हाथ जोरों से उपर नीचे हो रहा था ...मैं समझ गयी ..पर मैने तेरे मज़े में तुझे डिस्टर्ब करना नहीं चाहा ..दबे पावं वापस चली गयी ....और फिर थोड़ी देर बाद आई ..पर भोले राजा कमरा तो कम से कम बंद कर लिया होता ...." और फिर से हँसने लगीं
दीदी की बातों से मैं आश्वस्त हो गया के दीदी भी कुछ कम नहीं ....ये सब उनकी रोमॅंटिक कहानियों की किताबों में डूबे रहने का नतीज़ा था ....
" पर दीदी मैं क्या करता ... मैं काफ़ी परेशान था.... "
"क्या परेशानी थी किशू को ..ज़रा मैं भी तो सूनू..??"
" मैं नहीं बताता .....आप बूरा मान जाओगी .."
" अरे वाह ..?? अगर बूरा मान ना होता तो क्या तेरी हरकत को देख मैं तुम्हें डाँट ती नहीं ..?? मैं तो चाहती हूँ के हम दोनों एक दूसरे से कुछ भी ना छुपाए ..चल बता ना .....डर मत ..प्ल्ज़्ज़ ..."
" दीदी प्ल्ज़्ज़ .....मैं नहीं बता सकता ...... "
" ठीक है मत बता किशू ,,मैं येई समझूंगी तुम मुझे पराया समझते हो .....मैने क्या समझा था .....और क्या हो रहा है....."
और उनकी आँखों से आँसुओं की बड़ी बड़ी बड़ी बूँदें टपकनी शुरू हो गयी....
कहानी जारी रहेगी………. महँगी चूत सस्ता पानी -2
हां दोस्तो आज सही में चूत सस्ती है और महँगा है पानी ... आइए मेरे इस नये थ्रेड में इसी पानी का भरपूर आनंद लीजिए ,,कुछ नमकीन , कुछ लिस लिसा ..कुछ खट्टा तो कुछ मीठा ..उफफफफ्फ़ क्या स्वाद है चूत की पानी का .. बस चूत रिस्ति रहे और और आप मुँह खोले इसे पीते रहें ...गटकते रहें ..चूस्ते रहें ...चूत उछलती रहे और आप उसे थामे चाट ते रहें , इस कुदरत के अनमोल रस का पान करते रहें ..
मैं किशोर ..लोग मुझे किश के नाम से जानते हैं ...हा हा हा...हां ये किस के बहुत करीब है..शायद इसलिए मुझे औरतें किस-एक्सपर्ट समझती हैं .... ...
ये कहानी शूरू होती है जब मैं सिर्फ़ 18 साल का था .... और मेरी कज़िन (मेरे मामा की बेटी) 32 साल की ....तीन बच्चो की माँ ,,भरपूर चूचियाँ..उछलते नितंब ...भरे होंठ ....चिकने सपाट और मांसल गोरे पेट की स्वामिनी ..जब वो चलती ..मेरे पॅंट के अंदर खलबली मच जाती ....
मेरी कज़िन पायल की चूत से भी पानी निकले और लगातार निकले इसकी भी पृष्ठभूमि तैय्यर करनी पड़ेगी ना ..तो चलिए चलते हैं कुछ साल पहले और देखते हैं हमारी तैय्यारि ...
मैं एक बहुत ही सुशील , सीधा सादा अपने माँ बाप का लाड़ला एकलौती संतान था . बड़े लड़ प्यार और स्नेह से मुझे रखा जाता ..किसी भी चीज़ की कोई कमी नहीं होती ....और पायल मेरे मामा की इक लौति संतान .....बड़ी नटखट , शरारती और सारे घर को अपने सर पर उठाने वाली ....
मेरे मामा भी हमारे साथ ही रहते ... उनकी नौकरी भी हमारे ही शहेर में थी..और हमारा घर काफ़ी बड़ा ... माँ ने ज़िद कर मामा को भी अपने साथ रहने को मजबूर कर दिया ...
पायल दीदी भले ही शरारती और नटखट हो ..पर मेरे साथ बड़े स्नेह और प्यार से रहती ...हमारी उम्र में भी काफ़ी अंतर था ...वो मुझे किशू बुलाती ...
मुझे अपने हाथों से खिलाती ...मेरे स्कूल का बस्ता तैय्यार करती ... मुझे मेरी पढ़ाई में मदद करती ...
हम दोनों का एक दूसरे के बिना रहना मुश्किल हो जाता ...मैं जब स्कूल से आता ..मेरी आँखें पायल दीदी को ढूँढती ...घर के चारों ओर मैं उन्हें ढूंढता ....जब वो सामने दिखतीं ...मेरे सांस में सांस आता ...मैं सीधा उनकी गोद में बैठ जाता ..वो प्यार से मेरे बाल सहलाती ..मेरे दिन भर की थकान उनके स्पर्श से ही गायब हो जाती ... मैं खिल उठता ....
उन दिनों पायल दीदी 20-22 साल की एक आल्मास्ट , दुनिया से बेख़बर, जवानी के नशे में झूमती लहराती रहती.... और मेरे मामा उनकी शादी की चिंता मे डूबे रहते .....
हाइ स्कूल की पढ़ाई के बाद वो घर में ही रहती ... घर के कम काज़ में हाथ बटाना तो दूर ...अपने में ही खोई रहती ...कहानियाँ पढ़ती , फिल्मी मॅगज़ीन्स पढ़ती ( जिन्हें मैं अपनी किताबों के बस्ते में छुपा कर लाता ..और उसी तरह दीदी के पढ़ने के बाद दूकानवाले को वापस कर देता ) ...
मामा ..मामी की डाँट का उन पर कोई असर नहीं होता...
" अरे कुछ तो शर्म कर ...कल को तेरी शादी होगी ...ससुराल में हमारी नाक काटेगी ये लड़की .."
मामी के इस तकियकलाम शब्दों को पायल दीदी अन्सूना कर देती ...मुझे अपने हाथों से अपने बगल चिपकाते हुए बोलती
"किशू...तेरी पढ़ाई हो गयी....? "
"हां दीदी.."
"तो फिर चल लुडो खेलते हैं .."
मेरे लिए उनके ये शब्द जादू का काम करते..मैं फटाफट अपने कमरे में अपने बिस्तर पे लुडो का बोर्ड बिछा देता ...हम दोनों आमने सामने बैठ जाते ..इतने पास कि दीदी की गर्म साँसें मेरे चेहरे को छूती ....इसमें स्नेह की गर्मी , निस्चल प्यार का स्पर्श और उनकी मदमस्त जवानी का झोंका भी शामिल रहता ..मुझे बहुत भाता ...
उन दिनों टीवी नहीं था ..रेडियो का प्रचलन था ....मेरे अलावा पायल दीदी का ये दूसरा चहेता था ..उस समय की फिल्मों का एक-एक गाना उनकी ज़ुबान पे होता ....हमेशा गुनगुनाती रहती अपनी सुरीली और मीठी आवाज़ में ...
दिन गुज़रते गये और मैं पायल दीदी के स्नेह और प्यार के बंधन में जकड़ता गया...हम दोनों के लिए एक दूसरे के लिए एक अटूट आकर्षण , बंधन , प्यार और स्नेह पनपता गया .....
और फिर एक दिन जब मैं स्कूल से वापस आया ,,दीदी ने मेरे लिए दरवाज़ा नहीं खोला ... दरवाज़ा भिड़ा था ..मेरे धक्का देते ही खूल गया..पर दीदी के बजाय अंदर सन्नाटे ने मेरा स्वागत किया.. दीदी की प्यार भरी बाहों की जगह एक घनघोर चुप्पी ने मुझे जाकड़ लिया .... मैं तड़प उठा ..दीदी कहाँ गयीं..??
मैं उनके कमरे की तरफ बढ़ा .... अंदर झाँका ..दीदी अपने पलंग पर लेटी थीं .....मैं और नज़दीक गया ..
मैं बेतहाशा उनकी ओर बढ़ा .... पायल दीदी पेट के बल लेटी थी , सर तकिये पर रखे सूबक सूबक कर रो रहीं थी ...उनका चेहरा मेरी ओर था ..उनके गुलाबी गाल आँसुओं से सराबोर थे ...तकिया गीला था ... आख़िर क्या बात हो गयी ..?? क्या हुआ आज दिन भर में ..??? जिस चेहरे पर हमेशा खिलखिलाहट और मुस्कान छाई रहती ..आज आँसुओं से सराबोर है ..आख़िर क्यों..??? किसी ने कुछ कहा ...?? मेरे मन में हलचल मची थी ...
मैं उनके बगल बैठ गया और पूछा " दीदी क्या हुआ ..आप रो क्यूँ रही हैं ..?? "
मेरी आवाज़ भी रुआंसी थी ...
दीदी ने मेरी तरफ चेहरा किया और उठ कर बैठ गयीं , मुझे अपनी छाती से लगाया ..मुझे भींच लिया और फिर और सूबक सूबक कर रोने लगीं ...
मैं हैरान परेशान था , पर उनकी छाती की गर्मी और स्तनों की नर्मी से बड़ा अच्छा भी लगा ...मैं एक बहुत ही अलग अनुभूति में डूबा था ...उनके साथ चिपके रहने का आनंद , पर उनके रोने से परेशान ... दो बिल्कुल अलग अनुभव थे ...मुझे समझ नहीं आ रहा था मैं क्या करूँ ..दीदी को चूप कराऊँ या फिर उनकी छाती से चिपके इस जन्नत में खोया रहूं ... पायल दीदी के शरीर की सुगंध ..उनके आँसू और पसीने की मिली जुली नमकीन खूशबू , मेरा मुँह उनकी छाती से इस तरेह चिपका था के मेरी नाक उनकी आर्म्पाइट की तरफ था ..उफ़फ्फ़ वहाँ से भी एक अजीब मादक सी खूशबू आ रही थी ....वोई पसीने की ...मैं एक अजीब ही स्तिथि में था ..क्या करूँ क्या ना करूँ ...पायल दीदी आप रोते हुए भी मुझे इतना सूख दे सकती हैं....दीदी दीदी ........मेरा रोम रोम उनके लिए तड़प रहा था ..उन्हें कैसे शांत करूँ ..मैं क्या करूँ ......
मेरी इस उधेड़बून का हल,भी आख़िर दीदी ने ही निकाला ... उन्होने मुझे अपनी छाती से अलग किया ..मेरे चेहरे को अपने नर्म हथेलियों से थाम लिया और मुझे बेतहाशा चूम ने लगीं ... मेरे गालों पर अपने मुलायम होंठों से चुंबनों की वर्षा कर दी .... ये भी मेरे लिए एक नया ही अनुभव था ..... पायल दीदी मुझे चूमे जा रहीं थी पर उनका रोना अब हिचक़ियों में तब्दील हो गया था ... और बीच बीच में मुझ से पूछती
" किशू ..किशू .....मैं तुम्हारे बिना कैसे रहूंगी ..?? "
मैं फिर परेशानी में आ गया ..आख़िर इन्हें मेरे बिना रहने की क्या ज़रूरत आ पड़ी ..?? मेरे छोटे से मश्तिश्क में हज़ारों सवाल थे ..जिनका जवाब मुझे मिल नहीं रहा था ..और मैं उलझनों में डूबता जाता ..पर दीदी के प्यार और निकट ता से शूकून भी मिल रहा था ....
और तभी मुझे अपने सारे सवालों का जवाब मिल गया ....
मेरी मामी ने कमरे में कदम रखा और भाई बहेन का प्यार , खास कर दीदी का रोना देख वो बोल उठीं ..
"वाह रे वा पायल रानी..अभी तेरी सिर्फ़ शादी की बात पक्की हुई है और इतना रोना धोना ..अरे जब तेरी विदाई होगी तू क्या करेगी ....बस बस बहुत हो गया ..अब चूप भी कर ..देख बेचारा किशू स्कूल से कब का आ चूका है ...उठ और उसे कुछ खिला ,,बेचारा कब का भूखा है..तुम्हारे रोने से इतना परेशान है....."
ह्म्म्म्ममम तो ये बात थी पायल दीदी के रोने के पीछे..उनकी शादी .... पर इस बात ने मुझे और उलझन में डाल दिया ... जितना मुझे मालूम था ...जितना मेरी छोटी सी मासूम जिंदगी ने मुझे बताया था ...शादी की बात से सारी लड़कियाँ खुशी से झूम उठती हैं .... पर यहाँ तो बिल्कुल ही अलग माजरा था ....खुशी से झूमना तो अलग दीदी दुख और दर्द का रोना ले बैठी थीं....
मामी की बातों ने जादू का असर किया .. मेरे भूखे रहने की बात से उनका रोना धोना एक झटके में ही रुक गया ...उन्होने मुझे बड़े प्यार से अलग किया ..अपनी आँचल से अपना चेहरा और आँखें पोन्छि ....और मुझे कहा
" अले ..अले ..मेला बच्चा अभी तक भूखा है ...उफ़फ्फ़ मैं भी कितनी पागल हूँ ..किशू यहीं बैठ ..मैं 5 मिनिट में तुम्हारा नाश्ता लाती हूँ ...."
इतना कहते हुए वो रसोई की तरफ भागती हुई चली गयीं ..कमरे में मामी और मैं रह गये ....
मैने मामी से पूछा "मामी ..दीदी शादी की बात से क्यूँ रो रही थी..??? शादी की बात से तो सब खुश होते हैं ना..??"
मामी ने झल्लाते हुए कहा " किशू बेटा ..अब मैं क्या जानूं इस पागल के दिमाग़ में क्या है ...... तू ही पूछ ले उस से ...तुम दोनों भाई बहेन की बात तुम ही जानो ......"
और बड़बड़ाती हुई वो भी कमरे से बाहर चली गयीं .
"ठीक है " मैने सोचा " आने दो उनको उन से ही पूछता हूँ.."
और मैं दरवाज़े की तरफ टकटकी लगाए पायल दीदी का बेसब्री से इंतेज़ार कर रहा था .......
अब तक दीदी के रोने धोने के मारे मैं अपनी भूख-प्यास भूल चूका था .... वरना स्कूल से घर आते ही मुझे जोरों की भूख लगती थी , जो स्वाभाविक है... और दीदी भी हमेशा तैय्यार रहती थी मेरे पेट की भूख शांत करने को .
मैं हाथ मुँह धो कर आता ..दीदी थाली भर नाश्ता ले आतीं और मैं उनकी गोद में उनके हाथों से नाश्ता करता ..खूब बातें करता .... अपने स्कूल की , उनकी पढ़ी किसी नयी कहानी की ....या फिर फिल्म-मॅगज़ीन से किसी आक्टर आक्ट्रेस की गॉसिप ...मीना कुमारी और मधुबाला उनकी फॅवुरेट थीं ..उन दोनों की एक एक बात उन्हें मालूम रहती ... बड़े मज़े ले ले कर पायल दीदी मुझे उनके नये फिल्मों के बारे बताती ...
उस दिन पहली बार इस रुटीन में रुकावट आई ....
पर अब जब मामला शांत था ..मेरी भूख फिर से जाग उठी .... मैने दरवाजे की तरफ देखा ..दीदी एक हाथ से थाली और दूसरे हाथ से पानी का ग्लास थामे चली आ रही थीं ...
मैने उन की ओर देखा ..पता नहीं क्यों मुझे उस दिन वो कुछ बदली बदली सी नज़र आईं... उनकी चाल में वो पहले वाली अल्हाड़पन, शोखी , मस्ती नहीं थी ..बड़े नपे तुले कदम थे ... और चेहरा भी काफ़ी सीरीयस था ... मुझे समझ नहीं आ रहा था एक ही दिन में ऐसा क्या हो गया ..?? शादी की बात से ऐसा क्या हो गया दीदी को..?? क्या शादी इतनी बूरी चीज़ होती है ...पर बाकी सभी लड़कियाँ तो कितनी खुश होती हैं
मैं इन सब बातों में खोया था ....तब तक वो मेरे बगल में बैठ गयीं ,,थाली और ग्लास फर्श पे रख दिया और अपने हाथों से एक कौर मेरी ओर बढ़ाया ..मैने मुँह नहीं खोला ... आस्चर्य से दीदी ने अपनी बड़ी बड़ी आँखों को और बड़ी करती हुई मेरी ओर देखा ...
" क्या बात है किशू ..? आज खाएगा नहीं क्या ..अभी तक तो तुझे जोरों की भूख लगी थी ... मुझ से नाराज़ है ..??? " उन्होने मेरे चेहरे को उपर उठाते हुए कहा ...
" नहीं दीदी ..मैं भला आप से क्यूँ नाराज़ होऊँगा ..? पर आप कुछ भूल रहीं हैं ..क्या आज तक मैने आप से अलग बैठ कर खाया है..????"
ये सुनते ही उनकी आँखों से फिर से आँसुओं की बड़ी बड़ी बूंदे टपकने लगी .....
उन्होने झट अपनी जांघों पर मुझे खींच कर बिठा लिया .....
बड़ी मुश्किल से फिर अपने आप को रोने से रोकते हुए उन्होने कहा " देख ना किशू आज मुझे ये क्या हो गया है ,,इतनी सी बात भी मैं भूल रही हूँ .."
इतनी देर तक एक तनाव भरे वातावरण के बाद दीदी की गोद में आते ही मुझे बड़ा शूकून मिला ... सारा तनाव एक पल में मिट गया ..
"हां दीदी ..शायद आप शादी की बात से काफ़ी परेशान हैं .... एक बात पूछूँ ..??"
" हां ..हां पूछ ना किशू ... "
" दीदी ....शादी की बात से तो मैने किसी को भी इतना दुखी होते नहीं देखा ..जितना आप दिख रही हो.....आख़िर क्या बात है ..प्लज़्ज़्ज़ बताओ ना ..?? क्या आप खुश नहीं ..???"
उन्होने अपने आँचल से फिर से अपने चेहरे और आँखों को पोन्छा ....और अपने चेहरे पे मुस्कान लाने की कोशिश करते हुए एक बड़ा नीवाला अपने लंबी लंबी सुडौल उंगलियों के बीच थामते हुए मेरी ओर बढ़ाया और कहा
" ले ..पहले खाना शुरू कर फिर बताती हूँ "
मैने भी मुँह खोलते हुए पुर का पूरा कौर अंदर ले लिया ..दीदी ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा
" अरे नहीं किशू ..ऐसी बात नहीं .... पर शादी की खुशी से ज़्यादा मुझे तुम से बिछड़ने का गम है .... देखो ना सिर्फ़ एक दिन तुम्हें नाश्ता कराने में देर हो गयी ..तुम्हें कितना बूरा लगा ..और जब मैं नहीं रहूंगी ..फिर क्या होगा ..??? और क्या तू भी मेरे बिना रह पाएगा ..??? "
इस आखरी सवाल से मैं एक दम सकते में आ गया ....मुझे झकझोर सा दिया दीदी के इस सवाल ने ...
मुझे अब आहेसस हुआ पायल दीदी शादी की बाद मेरी बहन से ज़्यादा किसी और की बीबी हो जाएँगी ... किसी और की पत्नी ..उनपे मेरा हक़ नहीं के बराबर होगा ..और उसी पल उन्हें देखने का मेरा नज़रिया ही बदल गया . वो मेरे सामने एक औरत थीं अब ..बहन नहीं ...
मैं अब पायल दीदी की गोद में नहीं बलके एक खूबसूरत , जवान औरत की गोद में बैठा था ...
मेरे सारे बदन में एक झूरजूरी सी हो उठी ....मेरी समझ में नहीं आया ये क्या हो रहा था ... मेरे दिमाग़ में फिर से सवाल खड़े हो उठे ...ये क्या है ..???
पायल दीदी की गोद में मैं हर रोज़ बैठ ता हूँ ..पर ऐसा तो कभी महसूस नहीं हुआ ....फिर आज क्यूँ ..?? इन्ही सब सोच में खोया था
"अरे किस सोच में डूब गये ....लो और लो ..मुँह खोलो ना किशू .."
दीदी की आवाज़ से मैं वापस आया ... किसी तरह नाश्ता किया.... .और मुँह हाथ धो कर बाहर निकल गया दोस्तों के साथ खेलने ......
दीदी के रोने का कुछ कुछ मतलब शायद मुझे समझ आ रहा था ..शायद दीदी के मन में कुछ ऐसी ही भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा होगा ...
जब मैं वापस आया ..तो मेरे कानों में दीदी की सुरीली आवाज़ आई.... किसी फिल्मी गीत के बोल थे ..उनके चेहरे पे मुस्कुराहट थी ...खुशी थी ....
मुझे देखते ही उन्होने कहा "देख किशू आज पढ़ाई के बाद तू एक दम से सो मत जाना ..हम लोग आज ढेर सारी बातें करेंगे ..ठीक है ना ..???
" हां दीदी .... बिल्कुल सही कहा आप ने .... "
उन्होने मुझे फिर से अपनी छाती से चिपका लिया ..." ओओह किशू ...किशू ... तू कितना भोला है रे ...."
मैं समझ नहीं पा रहा था ..एक ही दिन में उन्होने मुझे दो बार सीने से लगाया और हर बार उनका तरीका कितना अलग था .....
"किस उधेड़बून में खो जाता है रे तू..?? चल आज रात को तेरी सारी उलझनें दूर कर दूँगी ...अब जा तू नहा धो और पढ़ाई कर .."
मैं दीदी के साथ रात होनेवाली बातों की कल्पना में खोया अपने रूम के अंदर चला गया.....
मैं कमरे में आने के बाद नाहया , फ्रेश हुआ , कुछ हल्का महसूस किया ..पर मन अभी भी बेचैन सा था ..पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था ...मैने किताब खोली ..पर दिमाग़ में अभी भी दीदी के आज के दो रूप मेरे मश्तिस्क पटल पर बार बार आते जाते ..जैसे किसी फिल्म की सीन बार बार दोहराई जा रही हो..
एक तो उनका वो रोना और मुझे अपने सीने से लगाना.... इस तरह जैसे वो मुझ से अलग नहीं होना चाहती ..मुझे अपने बाहों में भर मुझे हमेशा के लिए अपने साथ कर लेना चाहती हों .ज़रा भी दूर नहीं होने देना चाहती हों .. मुझ से अलग होने का दर्द और तड़प भरा था उस आलिंगन में .
.और दूसरी बार सुरीली धुन गुनगुनाते हुए मुझे अपनी छाती से चिपकाना ..इसमें कितना आनंद था ...मेरे साथ का आनंद .. मेरे साथ का सुख ..मुझे भी कितना अछा लगा ... पर इस दूसरी बार मुझे कुछ और भी महसूस हुआ ..उनके भरे भरे गोलाकार मुलायम स्तनों का दबाब मेरे सीने पर ... इसके पहले आज तक मेरा ध्यान इस तरह के आनंद पर कभी नहीं गायक़ था ..उस दिन क्यूँ ..?? ये महसूस अभी भी मेरे सीने पर था .. मुलायम स्तनों का दबाब , याद करते मेरे पॅंट के अंदर हलचल सी महसूस हुई ...कुछ कडपन महसूस हुआ ..नीचे झाँका तो देखा मेरा पॅंट उभरा हुआ है ...
मैने सामने के बटन खोले ....मेरा लंड खड़ा था ...
हे भगवान ये क्या हो रहा है ... मैने अपने हाथ से उसे शांत करने को थामा और सहलाया ... पर ये तो और भी कड़क हो गया और मुझे अच्छा लगा ... मैं उसे ऐसे ही थामे रहा ..एक दो बार उत्सुकतावश उसकी चॅम्डी उपर नीचे की ..और भी अच्छा महसूस हुआ ...मेरे पूरे शरीर में सिहरन हो उठी ...( मैने अपने स्कूल में कुछ लड़कों को ये बात करते सूना था के चॅम्डी उपर नीचे करने से बड़ा मज़ा आता है ) ..मैने इसे आज़माना चाहा ...
मैने चॅम्डी उपर नीचे करना जारी रखा ..एक असीम आनंद में मैं डूबा था ..दीदी का चेहरा और भरे स्तनों का मेरे सीने पर दबाब याद करते मैं लगातार चॅम्डी उपर नीचे कर रहा था , अचानक मेरा लंड काफ़ी कड़ा हो गया और फिर मुझे ऐसा लगा मानो पूरे शरीर से कुछ वहाँ मेरे लंड के अंदर आ रहा है , कुछ जमा हो रहा है ..मेरे चॅम्डी उपर नीचे करने की गति अपने आप तेज़ हो गयी ..तेज़ और तेज़ और तेज़ और उस के बाद पेशाब वाले छेद से एक दम से गाढ़ा सफेद पानी जैसा पिचकारी छूटने लगा ...मेरा शरीर कांप रहा था ...लंड झटके खा रहा था और थोड़ी देर बाद वो शांत हो कर सिकूड गया ..मुझे काफ़ी राहत महसूस हुआ ..
उस दिन मैने जिंदगी में पहली बार मूठ मारी .
मैं हैरान था अपने में इस बदलाओ को देख ..पायल दीदी के बारे ऐसी सोच ...क्या हो गया है मुझे..??? अगर उनको मालूम हुआ , वो क्या सोचेंगी ..??
मैं आँखें बंद किए कुर्सी पर सर पीछे किए हाँफ रहा था ...
थोड़ी देर बाद मैं नॉर्मल हुआ ..कुर्सी से .उठा अपने रूमाल से लंड को पोन्छा और फर्श पर जो सफेद गाढ़ा पानी गिरा था ..उसे भी सॉफ किया ... मुझे अब तक उस पानी का नाम तक नहीं मालूम था ....
तभी दीदी की आवाज़ आई ...." किशू पढ़ाई ख़त्म हो गयी ..???" और वो अंदर आ गयीं .
मैं अपनी किस्मेत सराह रहा था ..अगर थोड़ी देर पहले आतीं तो मेरी क्या हालत होती..??
"हां दीदी स्कूल की पढ़ाई तो ख़त्म हो गयी .पर अभी आप से बहुत कुछ पढ़ना बाकी है.."
"मुझ से पढ़ाई ....क्या मतलब ..???'
" अरे कुछ नहीं दीदी ..आप ने ही कहा था ना आप मेरी सारी उलझनें दूर करनेवाली हो ..??"
"ओह ..हां ..चल पहले खाना खा लो ..फिर बातें करते हैं .."
उस वक़्त उनके बोलने का लहज़ा बिल्कुल नॉर्मल था.... फिर वोई हँसी..खीखिलाहट और मस्ती ..मैं एक तक उन्हें देख रहा था ...
उफफफफफ्फ़..कितनी अछी लग रहीं थी ..पर उस वक़्त मुझे दीदी कुछ और भी लग रही थी....
"अरे ऐसे टकटकी लगाए क्या देख रहा है ... पहले कभी देखा नहीं है क्या .."
मैने मन ही मन में कहा " देखा तो है पर इस नज़र से नहीं .."
पर दीदी से कहा " नहीं दीदी ..अभी आपकी रोनेवाली सूरत नहीं है ना ... इसलिए आप हँसती हुई कितनी अच्छी लग रहीं हैं.."
दीदी थोड़ी देर मुझे देखती रहीं ...मेरे कंधे पे हाथ रखा .." अब नहीं रोउंगी ..कभी नहीं ... चल अब खाना खा ले " इतना कहते कहते उन्होने मुझे मेरे कंधों से जाकड़ लिया और साथ साथ किचन की तरफ हम जाने लगे ...
दीदी किचन में अंदर आते ही एक बड़ी थाली में अपने और मेरे लिए खाना लगाया और कहा
" चल किशू मेरे रूम में ,,यहाँ माँ और बुआ आते रहेंगे ...बात करने का मज़ा नहीं रहेगा ..."
"हां दीदी चलिए .." मैने तपाक से जवाब दिया ...
अपने रूम में पायल दीदी नीचे बैठ गयीं , रोज की तरह उन्होने मुझे अपनी गोद में बिठा लिया ...पर आज जब मैं उनकी जांघों पर बैठा ,, मुझे पहली बार आज कुछ अजीब सा लगा ... कुछ हिचकिचाहट सी हुई ... पर दीदी को बूरा ना लगे इस वाज़ेह मैं चुपचाप बैठ गया ..
उनके मुलायम मांसल जांघों में बैठने का एक अजीब ही मज़ा आ रहा था ..इसके पहले मैने कभी इस बात पर ध्यान नहीं दिया था ..उनकी गोद में बैठना मेरे लिए बहुत ही साधारण बात थी ... पर आज येई एक बहुत अजीब ही अनुभव था... मेरे हिप्स उनकी जाँघ में धँसी थी ...मुझे उनके शरीर की गर्मी , उनके साँसों का स्पर्श महसूस हो रहा था ...उनके शरीर की मादक खूशबू , इन सब से मुझमें एक मस्ती का आलम छा रहा था ...मैं इस स्वर्गिक आनंद में खो सा गया था ..
" अरे बाबा कहाँ खो गया ... खाना तो खा ले किशू ..क्या बात है आज तू इतना खोया खोया सा क्यूँ है ..कुछ बात है तो बोल ना ... शाम को नाश्ते के टाइम भी कुछ ऐसा ही था ....क्या मुझ से अभी भी नाराज़ है..??"
"नहीं दीदी ..आप कभी ऐसा मत सोचना ..मैं आप से कैसे नाराज़ हो सकता हूँ ... कोई बात नहीं है .. **
" हां लो ....मेरा भी बहुत दिल है तुम से खूल कर बातें करने की ... तू मुझ से कुछ छुपा रहा है....आज तू काफ़ी बदला बदला सा नज़र आ रहा है ... देख किशू मैं तुम्हारी दीदी ही नहीं , दोस्त भी हूँ ....मुझ से कुछ भी मत छुपाना ... चाहे कुछ भी हो मैं कभी बूरा नहीं मानूँगी ...तेरे मन में जो कुछ भी है मुझे बता दे ....
वो बोलती भी जा रहीं थी और मुझे एक कौर खिलाती और दूसरा खूद भी खाती जाती ...
'" हां दीदी ..आप तो मेरी सब से अच्छी दोस्त हैं .." मैं भी खाता जा रहा था और उन्हें जवाब भी देता जा रहा था ... "मेरे मन में भी बहुत सारे सवाल हैं दीदी ... जिनका जवाब सिर्फ़ आप ही दे सकती हो ..."
"हां बिल्कुल ठीक समझा रे तू...हम दोस्त भी हैं ....और भी एक बात किशू ...अब तो मैं यहाँ कुछ दिनों की ही मेहमान हूँ, बस जो तुझे बोलना है..करना है ..बोल ले और कर ले ..मन में कुछ भी मत रख ..." और फिर उनके चेहरे पर एक शरारत भरी मुस्कान थी .
उनकी इस बात पर "जो करना है कर ले " मैं चौंक उठा ....आख़िर दीदी का मतलब क्या है ..क्या करने को बोल रही हैं ..??
"दीदी ...बोलने की बात तो मैं समझता हूँ..पर करना क्या है..????"
और इस बात पर दीदी ने अपने मस्ती भरे अंदाज़ में जोरदार ठहाका लगाया ...और मुझे चिपकाते हुए कहा
"तू सही में एक दम भोले राजा है रे ..एक दम भोला भाला .."
फिर एक दम से चूप हो गयीं . मेरी ओर बड़ी हसरत भरी निगाहों से देखा और कहा "पर अब उतना भोला नहीं रहा रे तू ...." और फिर से हँसने लगीं ...
मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था ..आज दीदी को क्या हो गया है...कैसी बातें कर रहीं हैं ...
"हा हा हा ..अरे तू टेन्षन मत ले ..खाना खा ले अभी फिर तेरी सारी टेन्षन मैं दूर कर दूँगी ..." और एक नीवाला बड़े प्यार से मेरे मुँह में डाल दिया ..
तभी खाना खिलाते खिलाते उनकी साड़ी का आँचल नीचे आ गया ..उनका सीना अब उघ्ड़ा था ..उनके स्तनों की गोलाईयो के बीच की घाटी सॉफ सॉफ दिख रही थी .... मेरी नज़र उस पर पड़ी ... उनकी साँसों के साथ उनके स्तन भी उपर नीचे हो रहे थे ... मैं एक टक उधर ही देख रहा था ...
दीदी की नज़रें मुझ से मिलीं ..उन्होने शायद मेरी नज़र ताड़ ली थीं ..पर बड़ी अजीब बात हुई ..उन्होने कुछ नहीं किया ... आँचल ठीक नहीं किया वैसे ही गिरे रहने दिया .... इसके पहले कभी भी ऐसा होता तो वो आँचल फ़ौरन ठीक कर लेती थी ..पर आज नहीं ..... क्यूँ ..????
मैने चुप चाप बिना कुछ रिक्ट किए अपनी नज़रें हटा ली ....
दीदी मुस्कुरा रहीं थी ...
मैने जानबूझ कर ऐसा दिखाया जैसे मैने कुछ देखा नहीं ,,
खाना ख़त्म हो चूका था ..." और लाऊँ किशू ...?"
"नहीं दीदी......"
और हम दोनों उठ गये .
" देख तू हाथ मुँह हाथ धो ले और सीधा मेरे कमरे में आ जाना ..मैं बस आई .."
मैने फटाफट मुँह हाथ धो कर उनके कमरे में चला गया..
मैं एक अजीब ही उधेड़बून में था ...उस दिन सब कुछ बदला बदला सा था ...दीदी कहती थी मैं बदला बदला नज़र आ रहा हूँ ..और मेरी नज़र में दीदी अब वो दीदी नहीं थी ..एक ही दिन में सब कुछ बदल गया ..आख़िर क्या हुआ ... ???
मैं सोच ही रहा था तब तक दीदी आ गयीं और मेरे बिल्कुल सामने बैठ गयीं ....इतनी करीब की हमारी साँसें एक दूसरे को छू रही थी ...
थोड़ी देर तक वो अपनी बड़ी बड़ी आँखों से मुझे देखती रही और एक भाव शून्य आवाज़ में मुझ से सीधा सवाल किया..
" तू आज शाम को जब मैं तेरे कमरे में आई उसके पहले क्या कर रहा था ..??''
मैं एक दम से सकते में आ गया ..क्या मेरा मूठ मारना दीदी ने देख लिया ?? मेरे चेहरे पे घबड़ाहट थी ...पर फिर भी काफ़ी कोशिश की घबड़ाहट छुपाने की और जवाब दिया ..
"कुछ भी तो नहीं दीदी ..मैं तो होमवर्क कर रहा था ...."
दीदी को जोरों से हँसी आ गयी मेरे इस जवाब से ..हंसते हुए उन्होने कहा
" हां ये तो सही है तू होम वर्क कर रहा था ..पर तेरे हाथ में कलम की बजाए कुछ और ही था .....है ना ...??"
मेरी तो सिट्टी पिटी गुम थी ..मैं समझ गया मेरी हरकतों का दीदी को पता चल गया है....मैं एक दम से चूप था ..मेरे मुँह से कुछ आवाज़ नहीं निकल रही थी ...मेरी हालत पतली थी ...
मैने हकलाते हुए कहा " दीदी ...वो ..वो ..""
"हा हा हा ..अरे मेरे भोले राजा ..घबडा मत ..मैं समझती हूँ .इस उम्र में ये सभी नॉर्मल लड़कों के साथ होता है ...मुझे तो खुशी हुई के मेरा किशू भी नॉर्मल है .... "
मेरी जान में जान आई , पर दीदी के इस रवैय्ये से फिर मैं हैरान था ... और इसी हैरानी में मैने पूछा
"पर दीदी आप को कैसे मालूम हुआ ??.."
'मैं तेरे कमरे में आ रही थी , पर जैसे ही अंदर पैर रखा ..मैने तेरी हालत देखी ..तू हिल रहा था और कांप रहा था और तेरा हाथ जोरों से उपर नीचे हो रहा था ...मैं समझ गयी ..पर मैने तेरे मज़े में तुझे डिस्टर्ब करना नहीं चाहा ..दबे पावं वापस चली गयी ....और फिर थोड़ी देर बाद आई ..पर भोले राजा कमरा तो कम से कम बंद कर लिया होता ...." और फिर से हँसने लगीं
दीदी की बातों से मैं आश्वस्त हो गया के दीदी भी कुछ कम नहीं ....ये सब उनकी रोमॅंटिक कहानियों की किताबों में डूबे रहने का नतीज़ा था ....
" पर दीदी मैं क्या करता ... मैं काफ़ी परेशान था.... "
"क्या परेशानी थी किशू को ..ज़रा मैं भी तो सूनू..??"
" मैं नहीं बताता .....आप बूरा मान जाओगी .."
" अरे वाह ..?? अगर बूरा मान ना होता तो क्या तेरी हरकत को देख मैं तुम्हें डाँट ती नहीं ..?? मैं तो चाहती हूँ के हम दोनों एक दूसरे से कुछ भी ना छुपाए ..चल बता ना .....डर मत ..प्ल्ज़्ज़ ..."
" दीदी प्ल्ज़्ज़ .....मैं नहीं बता सकता ...... "
" ठीक है मत बता किशू ,,मैं येई समझूंगी तुम मुझे पराया समझते हो .....मैने क्या समझा था .....और क्या हो रहा है....."
और उनकी आँखों से आँसुओं की बड़ी बड़ी बड़ी बूँदें टपकनी शुरू हो गयी....
कहानी जारी रहेगी………. महँगी चूत सस्ता पानी -2
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