महँगी चूत सस्ता पानी -4
By किशोर Published on पढ़े जाने की संख्या: 1427
दोस्तों आपने मेरी कहानी का पहला एपिसोड “महँगी चूत सस्ता पानी -3“ पढ़ा होगा.
अब आगे...
दरवाज़ा भिड़ा था ....थोड़ी सी फाँक थी दोनों पल्लों के बीच , मैने कान लगाया ..अंदर हल्की हल्की हँसी की आवाज़ आ रही थी ....फुसफुसाहट की आवाज़ आ रही थी ..जैसे दो लड़कियाँ आपस में बातें कर रहीं हो ....बीच बीच में खीखिलाने की भी आवाज़ आती ....और कभी मस्ती में सिसकारियों की भी आवाज़ शामिल हो जाती ...
मैने दरवाज़े के पल्लों की फाँक से अंदर झाँका ...
अंदर की हालत देख मैं चौंक गया .... ये उनका एक और ही रूप था ....अंदर स्वेता दीदी और दीदी दोनों लगभग नंगे एक दूसरे की शरीर से खेल रहे थे ....एक दूसरे की चूचियाँ मसल रहे थे ..बातें भी कर रहे थे ..कभी एक दूसरे को चूम भी लेते .... ...दोनों की साड़ियाँ अस्त व्यस्त ..ब्लाउस और ब्रा से चूचियाँ बाहर निकलीं ..जांघों से उपर तक साड़ी .....
बस एक दूसरे में खोए .....दुनिया से बेख़बर ....
स्वेता दीदी , दीदी की बहुत अच्छी सहेली थीं ..उनकी शादी दो साल पहले हुई थी ..पर पता नहीं क्यूँ , अभी काफ़ी दिनों से अपनी माँ के साथ ही रहती हैं ..अपने पति के यहाँ नहीं जातीं ...
दीदी से काफ़ी घुल मिल गयीं थीं और शायद पुर मोहल्ले में दीदी की स्वेता दीदी ही एकमात्र सहेली थीं ..दिखने में ठीक ठाक थीं ..काफ़ी आकर्षक ...मीडियम शरीर ..सांवला पर चमकता चेहरा ....भारी भारी चूचियाँ और सब से आकर्षक थे उनके मचलती चूतड़ ....
उन से (स्वेता दीदी से ) मेरी कोई खास बात चीत नहीं थी ..बस ऐसे ही हाई ..हेलो ...
मैने उन दोनों को उनके खेल में डिस्टर्ब करना नहीं चाहा ... वापस लौट गया ... मुँह हाथ धो लिया ..पर मुझे जोरों की भूख लगी थी ....और दीदी थी के अपने कमरे में स्वेता दीदी के साथ अपनी भूख मिटा रहीं थीं..मेरी भूख की उन्हें परवाह ही नही थी ..
मैने वहीं बाहर से आवाज़ दी " दीदी आप कहाँ हो.....मुझे जोरो की भूख लगी है ....."
मेरी आवाज़ उन तक पहून्च गयी ..और थोड़ी देर बाद उनके कमरे का दरवाज़ा ख़ूला ...दीदी बाहर आईं ...पर अब तक उन्होने अपने आप को दुरुस्त कर लिया था ....स्वेता दीदी अंदर ही थी ..
बाहर आते ही दीदी ने मुझे गले लगाया " अले ..अले मेला बच्चा ..कब आया रे तू स्कूल से ..मुझे आवाज़ क्यूँ नहीं दी ???"
मन में तो आया के कहूँ " आआप आवाज़ कहाँ सुनती दीदी ..अंदर आप दोनों तो अपनी ही आवाज़ निकालने में मस्त जो थीं....." पर मैने कहा " नहीं दीदी बस अभी अभी आया हूँ ..पर देखा आपके कमरे का दरवाज़ा भिड़ा था ..इसलिए आवाज़ दी ....आप शायद सो रही होंगी इसलिए उठाया नहीं.."
" हां रे वो हैं ना स्वेता ..मेरी सहेली उसी के साथ मैं लेटी थी ..बेचारी बहुत दिनों के बाद तो आज आई थी ..हम लोग गप्पें मार रहे थे ....चलो मैं तुम्हारा नाश्ता लाती हूँ .."
कुछ ही देर बाद पायल दीदी हाथ में नाश्ते से भरी थाली लिए आ गयीं और रोज की तरह बैठ कर मुझे गोद में खींच कर बिठा लिया ..पर मैं उनकी गोद से उठ गया और उनके सामने ही बैठ गया ..दीदी चौंक पड़ीं ..
"ये क्या किशू ..???क्या हुआ ..क्यूँ उठ गया.....मैने नाश्ते में देर की इस वजेह से गुस्सा है मेरे से ..??? ""
"नहीं दीदी ...मैं गुस्सा नहीं हूँ..!" मैने कहा
" फिर क्या बात है ..??"
" अब ऐसे गोद में बैठ मुझे खाना अच्छा नहीं लगता ..." मैने अपनी नज़रें झूकाते हुए कहा ...
" पर क्यूँ ..?? अभी तक तो तुझे बड़ा अच्छा लगता था...आज क्या हुआ ..??"
" मुझे शर्म आती है .." मेरी नज़रें अभी भी झूकि थीं
ये सून कर दीदी जोरों से हंस पड़ीं ....
" ह्म्म्म्म तो ये बात है..अब मैं समझी ..कल रात के बाद से तू काफ़ी बड़ा हो गया है ....हाँ रे बड़ा तो तू हो ही गया है .. काफ़ी बड़ा ....."मेरे लंड की ओर देखते हुए उन्होने कहा ..और हँसने लगीं...मैं झेंप गया .....
"पर जब रात में मेरे सामने नंगा पड़ा था तो शर्म नहीं आई ..???" उनके चेहरे पर एक बहुत ही शरारत भरी मुस्कान थी ..
" उस समय की बात और थी दीदी..आप भी तो नंगी थी ..हिसाब किताब बराबर थी.." मैने भी उनको आँखों में देखते हुए कहा .
" वाह रे मेरे भोले राजा ..एक ही दिन में तो तू बहुत बड़ा हो गया है..बातें भी बड़ी बड़ी कर लेता है ...ठीक है बाबा ..चल मेरे हाथ से नाश्ता तो करेगा ना ...???" उन्होने बड़े प्यार से अपने हाथ में नीवाला ले मेरी ओर बढ़ाया ..
मैने झट मुँह खोल नीवाला मुँह में ले लिया , और कहा
" दीदी ..मेरा वश चले तो आप के हाथों से जिंदगी भर ऐसे ही ख़ाता रहूं ...हां दीदी ..जिंदगी भर ..." और मैं उनकी ओर एक टक देख रहा था
उनकी आँखें भर आई ..मेरी बात सुन कर ...
उनका गला भर आया
"जिंदगी भर कहाँ रे.....अब तो मैं बस और कुछ ही दिनों की मेहमान हूँ यहाँ ..फिर किसके हाथ से खाएगा .." दीदी अब रो रहीं थी ...और मुझे खिलाए भी जा रही थी..
" दीदी प्ल्ज़्ज़ रो मत ...नहीं तो मैं नहीं खाऊंगा ...जब जाओगी तब देखी जाएगी..अभी तो हम साथ हैं ना ..??"
" हां रे ..तू शायद ठीक कह रहा है...अब मेला बच्चा सही में बड़ा हो गया है...."
मैने उनकी आँखो से आँसू पोंछे ..और उनके हाथ से नीवाला ले खाता रहा.....
तभी उनके कमरे से स्वेता दीदी निकलीं ..दरवाज़ा एक दम से खोलते हुए .....
"वाह वाह ..क्या प्यार है भाई बहन में .... अरे पायल मैं भी हूँ , यहाँ ...कब से अंदर इंतेज़ार कर रही थी तेरा ..पर तू तो बस ....खोई है भाई के साथ ."
मेरी नज़र उन पर पड़ी ....आलमास्त जवानी का नमूना थी स्वेता दीदी ..उनके बोलने का लहज़ा ऐसा कि मानो सारा कमरा खिलखिला उठा हो.......बहुत हँसमुख और खूली खूली .... जो अंदर था ..वो बाहर भी ....हर जागेह सही उभार ...बलके थोड़ा ज़्यादा ही ..लगता था जैसे मेरे जीजू ने काफ़ी इस्तेमाल किया था उनकी उभारों का .साड़ी से बाहर निकलने को बस तैयार ....
मैं उन्हें घूरे जा रहा था ....
तभी उन्होने कहा " अरे क्या घूर रहा है मुझे ..अपनी पायल दीदी को घूर ना ....अपनी आँखों में बसा ले अछी तरह ........" और हँसने लगीं ....
" तू भी ना स्वेता .. चूप कर ..थोड़ी देर रुक ..किशू का खाना हो गया है ... तू अंदर बैठ मैं बस आई ...." दीदी ने स्वेता दीदी की तरफ घूरते हुए कहा ....
" ठीक है बाबा जाती हूँ ..जाती हूँ ...मैं भला तुम दोनों के बीच कबाब में हड्डी क्यूँ बनूँ ....है ना किशू..???" और फिर मेरी तरफ बड़े प्यार से देखते हुए जैसे आई वैसे ही दरवाज़ा जोरों से बंद करते हुए अंदर चली गयीं ..
" उफफफफफफफफफ्फ़.. एक दम तूफान है ये लड़की .....अच्छा किशू अब तू हाथ मुँह धो ले और अगर बाहर खेलने जाना है तो जा ..मैं ज़रा स्वेता से बातें कर लूँ ...." और फिर मेरी तरफ भेद भरी निगाहें डालते हुए कहा " तू पूछता है ना हमेशा , मैने वो सब बातें कहाँ से सीखीं? तो सून ये ही हैं मेरी गुरु.........." और फिर मुस्कुराते हुए अंदर चली गयीं .
मैं सोचता रहा जब चेली इतनी मस्त हैं तो फिर गुरु का क्या हाल होगा ...अल्मस्त .....!!!
मैने हाथ मुँह धोया और बाहर निकल गया दोस्तों के साथ खेलने...
खेल कूद कर शाम को वापस घर आया ..तब तक माँ और मामी भी पड़ोस से वापस आ गये थे ....और दीदी उनके साथ बातें कर रही थी....
मैं चूप चाप अपने कमरे में चला गया और फ्रेश हो कर पढ़ाई में लग गया ..
उस दिन होम वर्क काफ़ी ज़्यादा मिला था .और कुछ डिफिकल्ट सम्स भी मुझे सॉल्व करने थे जिन्हें मैं क्लास में नहीं कर पाया था ......मैं काफ़ी देर तक इन्ही सब में जुटा रहा ...
तभी दीदी अंदर आईं और बहुत खुश थीं मुझे पढ़ाई में इतना तल्लीन देख ....
"हां किशू .... बस ऐसे ही मन लगा कर पढ़ .....अच्छा चल अब खाना खा ले ..देख अभी वहाँ बुआ और माँ भी हैं ..कुछ ऐसी वैसी हरकत मत कर बैठना ..... "
" कैसी हरकत दीदी ..???" और मैं हरकत में आ गया ... उन्हें अपने से चिपकाते हुए उनकी चूचियाँ मसल्ने लगा और उनके होंठ पे अपने होंठ लगाए जोरों से चूसना शुरू कर दिया .
दीदी ने भी मुझे अपनी बाहों से लगा लिया ..दोनों एक दूसरे से चिपके रहे इसी तरह ..की दीदी ने मुझे झट अपने से अल्ग किया ...वो हाँफ रही थी ..उनकी सांस उखड़ी थी ..पर फिर भी उन्होने कहा
" ह्म्म्म्मम..तू अब सही में बड़ा हो गया है रे ......
बस येई ..जो तू अभी कर रहा था...वहाँ ज़रा शांत रहना ...." और अपना हाथ नीचे करते हुए मेरे लंड को जोरों से मसल दिया ..मेरे मुँह से "आआआआआआआह्ह्ह्ह डीडीिईईई ..." निकला
" बस जल्दी एयेए ..मैं टेबल पर तेरा इंतेज़ार कर रही हूँ ..." और हंसते हुए बाहर चली गयी....दीदी के अंदाज़ भी निराले थे .....
मैं रूम से बाहर निकला ..दीदी डाइनिंग टेबल पर मेरा इंतेज़ार कर रहीं थी ....पर साथ में माँ और मामी भी बैठीं थी ..
मैने दीदी की ओर एक शुक्रिया से भरी नज़रों से देखा ...इसलिए कि उन्हें मेरे उनके गोद में ना बैठने की बात याद थी ..और उन्होने खाना टेबल पर लगाया था. मैं उनकी बगल वाली कुर्सी पर बैठ गया..
मैने देखा दोनों माओं के आँखों में अश्चर्य था ....
"अरे क्या बात है पायल....आज किशू तेरी गोद के बजे कुर्सी पर बैठा है ..???" मेरी माँ ने दीदी से पूछा..
" हां बुआ ...अब हमारा किशू बड़ा हो गया है..उसे गोद में बैठना अच्छा नहीं लगता ..." दीदी ने मुस्कुराते हुए कहा ..
दोनों माएँ ज़ोर से हंस पड़ी और मामी ने कहा " हां पर तू भी तो अब ज़रा इन बातों का ख़याल रख ...अब तू ससुराल जानेवाली है ...देखो किशू को तेरा कितना ख़याल है...तू तो बस बच्ची बनी है अभी तक ....."
" चलो अच्छा है दोनों अब बड़े हो रहे हैं .." माँ ने जवाब दिया ....
तभी दीदी ने अपना कमाल दिखा ही दिया ..टेबल के नीचे एक हाथ डाल कर मेरे लंड को जोरों से दबा दिया .....इस एक दम से हमले से मैं उछल पड़ा ......
पर माँ और मामी को कोई शक़ ना हो ...इसलिए हालात पर क़ाबू रखते हुए मैने कहा " अरे माँ नीचे लगता है कोक्रोच मेरे पैर पर चल रहा था.....ज़रा टेबल के अंदर नीचे से कल फ्लिट डाल देना ...."
दीदी मेरी बात से हैरान थी ...और आँखों ही आँखों में उहोने मुझे शाबाशी दे दी और अपने हाथ की पकड़ और भी मजबूत कर ली ..और दूसरे हाथ से मुझे खिलाना शुरू कर दिया ..उनके हाथ के कमाल से मैं सिहर रहा था ....
" हां बेटा ..हो सकता है ...फ्लिट डाले भी काफ़ी दिन हो गये हैं ..मैं कल ही इसकी सफाई कर दूँगी ...तुम दोनों खाओ इतमीनान से ..मैं गरम रोटियाँ लाती हूँ ."
और दोनों औरतें चली गयीं किचन के अंदर .
"उफफफफफफ्फ़ दीदी आप भी ना ......अगर कहीं किसी ने देख लिया होता..????"
" ऐसे कैसे देख लेती ....और अब तू तो बड़ा हो गया है ना ....देख कैसे सब संभाल लिया तू ने .." अब मेरे लंड को अच्छी तरह दबा दबा के सहला रही थी और खाना भी खिलाए जा रही थी .....
मैने भी मौके का फ़ायदा उठाया और अपना हाथ भी टेबल के नीचे से उनकी जांघों के बीच ले जाते हुए उनकी चूत को उंगलियों से दबाना शुरू कर दिया .....अब उछलने की बारी उनकी थी ....पर वहाँ हम दोनों के अलावा और कोई नहीं था .....
हम मज़े लेते हुए खा रहे थे .....
तभी मामी गरम रोटियाँ लिए किचन से बाहर आईं ...टेबल पर रख दी और अंदर चली गयीं ..
हम दोनों अब सम्भल कर बैठ गये थे और जल्दी ही खाना हो हो गया ..मैं उठ गया
दीदी भी उठ गयी और उन्होने फुसफूसाया " मेरा दरवाज़ा भिड़ा रहेगा ..तू आ जाना ..रात में .."
मैने हां में सर हिला दिया .....
अपने कमरे में मैने अपनी बाकी की पढ़ाई पूरी कर ली ..10 बज चूके थे ....
मैं दीदी के कमरे की ओर चल पड़ा....... आज मन में बहुत गुदगुदी सी हो रही थी .... सोचते ही मेरा लंड खड़ा हो रहा था ..मैने हाथ से हल्के हल्के लंड पॅंट के उपर से ही सहला रहा था ..बड़ा मज़ा आ रहा था ..अंदर झाँका तो देखा मामी और दीदी बैठे बातें कर रहे थे ...मैं भी उनके साथ बैठ गया ...
बातें दीदी की शादी के गहनों के बारे हो रही थी ..... थोड़ी देर मैं सुनता रहा ..पर ना जानें क्यूँ आज मुझे उनकी शादी की बात अछी नहीं लगी ..इसलिए नहीं के वो मुझ से दूर हो जाएँगी ..पर शायद इसलिए के वो अब वो सब जो मेरे साथ करती हैं ...किसी और के साथ करेंगी ...मेरा मन जाने क्यूँ गुस्से से भर उठा ..और मैं वहाँ से अचानक उठ गया .
दीदी ने कहा "किशू ..बैठ ना कहाँ जा रहा है ....."
पर मैं उनकी बात अनसुनी करते हुए सीधा अपने कमरे में आ गया ....
थोड़ी देर बाद दीदी मेरे कमरे में आईं ....मैं लेटा था ....उन्होने पहले तो मेरे कमरे के दरवाज़ों को बंद किया ..और फिर मेरे बगल मे आ कर लेट गयीं ...और मेरे बालों को सहलाते हुए पूछा ..
"क्या हुआ किशू ..? तू वहाँ से क्यूँ वापस आ गया..क्या मेरी माँ वहाँ थी इसलिए ..???"
" नहीं दीदी....!"
"फिर क्या बात है ..बता ना ..प्लज़्ज़्ज़ ...मुझ से कुछ मत छुपा किशू ..मैं खुद इतनी परेशान हूँ अपनी शादी की बात से , और तू ये सब क्या कर रहा है..??"
" हां दीदी मैं भी परेशान हूँ आपकी शादी से ...."
" पर तू क्यूँ परेशान है..? तू तो खुश था मेरी शादी की बात से ....??"
" दीदी ........"
"हां हां किशू बोल ना ..."
"दीदी शादी के बाद आप जीजा जी के साथ भी तो वोई सब करेंगी ना ....जो मेरे साथ करती हैं ..???"
दीदी ने अपनी भवें सिकोडते हुए कहा
"हां रे करूँगी तो ज़रूर .."
" आप के शादी के गहनों की बात से मुझे अब ये लगा के आप की शादी सही में हो रही है ..... और आप किसी और के साथ ये सब करेंगी......मुझे अच्छा नहीं लगा ...मुझे बहुत गुस्सा भी आया ......." मैने दीदी से सारी बात कह दी ..ना जाने क्यूँ मैं उन से कुछ छुपा नहीं सकता था ...
" ह्म्म्म तो ये बात है ..... तू मुझे इतना प्यार करता है रे किशू ..??? तू मुझे किसी और के साथ नहीं देख सकता ..?? "
" हां दीदी .....मैं आप से बहुत प्यार करता हूँ ..बहुत ..."
" मैं भी तो उतना ही प्यार करती हूँ किशू ....."
और मैं उन से लिपट गया , उन्होने भी मुझे अपनी बाहों में भर लिया ..हम दोनों हिचकियाँ ले ले कर रो रहे थे ....एक दूसरे को चूमे जा रहे थे ..बार बार बाहों में जकड़े जा रहे थे ..मानों कभी अलग ना हों ...... दोनों के आँसू मिल कर एक हो रहे थे .....दोनों का गम एक था .....
काफ़ी देर तक हम ऐसे ही एक दूसरे से लिपटे एक दूसरे को चूमते रहे ..... सुबक्ते रहे ....
हम दोनों एक दूसरे को बार बार चिपकते , गाल चूमते ...होंठ चूमते ..एक दूसरे के पैरों से पैर मिला जाकड़ लेते ..मानों कभी अलग नहीं होना चाहते ....
दीदी सिसकते सिसकते कहती जातीं " हां रे शादी के बाद मेरा सब कुछ तेरे जीजा जी का होगा ..पर मेरा मन तो तेरा ही रहेगा ना किशू ..बिल्कुल तेरा ......हमेशा ..सारी जिंदगी .....तू ही तो मेरा सब कुछ है ...मेरी जिंदगी है रे..."
और फिर दीदी ने झट अपनी ब्लाउस और ब्रा उतार दी , मेरे सर अपने हाथों से थामते हुए अपने सीने से चिपका लिया ..मेरा चेहरा उनकी गुदाज , कड़ी पर फिर भी मुलायम चूचियों में धँस गया ......
अपनी चूची अपने हाथ से थामते हुए उसे मेरे मुँह में डाल दिया "ले ..मेला बच्चा ..पी ...देख कितनी गर्मी है तेरे लिए मेरे अंदर ....."
मैने भी अपना मुँह खोलते हुए होंतों के बीच उनकी चूची थामते हुए बूरी तरह चूसने लगा ......" हां दीदी बहुत गर्मी है यहाँ ..लग रहा है जैसे तुम मेरे अंदर आती जा रही हो ....." और सही में मुझे ऐसा महसूस हुआ उनकी चूची नहीं मैं उनकी जान , उनके दिल की धड़कन ..उनका पूरा अस्तित्व सब कूछ अपने अंदर समाए जा रहा हूँ .....एक अद्भुत अनुभव था ...
मैं लगातार चूसे जा रहा था ...चूसे जा रहा था , पूरे कमरे में चप चप की आवाज़ आ रही थी ..
" हां रे किशू बस चूस ..चूस ..मुझे पूरा चूस ले , निचोड़ ले ..भर ले अपने अंदर ....."
फिर उन्होने अपनी दूसरी चूची भी मेरे मुँह में लगा दी ......उफफफफफफफ्फ़ हम दोनों जैसे एक दूसरे के लिए पागल थे ..
इसी दौरान पता नहीं कब और कैसे दीदी ने अपनी साड़ी और पेटिकोट भी उतार दी थी और मेरे पॅंट के बटन भी खोल रही थी ..एक झटके में ही उन्होने मुझे भी नंगा कर दिया और मुझे अपने उपर करते हुए चिपका लिया बूरी तरह .......
हम दोनों के बीच अब हवा भी नहीं जा सकती ....उन्होने अपनी टाँगें भी मेरे जांघों पर रखते हुए वहाँ भी जाकड़ लिया ..मेरा कड़ा लंड उनकी चूत की दीवारों में रगड़ खा रहा था .....
एक एक अंग एक दूसरे से चिपका एक दूसरे को महसूस कर रहा था ...एक दूसरे को अपने में समा रहा था ......
अब दीदी ने मेरा चेहरा अपनी हाथों से थाम लिया .....अपनी जीभ मेरे मुँह के अंदर डाल दी और मुझ से कहा
" ले ले ......किशू ..तू ने छाती का रस तो पी लिया ना ..अब ले मेरे मुँह का रस भी ले ले ......चूस मेरी जीभ ..अच्छे से चूसना ..मेरा पूरा लार ..मेरा पूरा थूक ....सब कूछ ले ले ..कुछ मत छोड़ना ..है ना .....??"
"हां दीदी ..आज मैं आप का सब कुछ अंदर ले लूँगा ...सब कुछ ...आख़िर ये सब तो मेरा ही है ना दीदी ......"
और दीदी की जीभ चूसने लगा ... दीदी अपनी जीभ गीली करती जातीं और मैं चूस्ता जाता ...उफफफफफफफफफ्फ़ मैं मस्ती में था ..उनके लार का स्वाद अमृत जैसा था ..मैं पिता जा रहा था ..चूस्ता रहा था ......मैने अपनी जीभ भी उनके गालों के अंदर , उनके तालू , उनके कंठ तक ले जाता और चाट ता जाता ..हम एक दूसरे की हर चीज़ अपने अंदर ले रहे थे..
"हां हाआँ किशू ...चाट ले ...चाट ले ......अच्छा लग रहा है ना ..??? "
"हां दीदी बहुत अच्छा लग रहा है ...."
फिर दीदी ने अपना हाथ मेरे कड़क लंड पर ले गयीं ......उसे जाकड़ लिया ..उनकी चूत से तो बस लगातार पानी रिस रहा था ..अपनी गीली ऊट में अपने हाथों से मेरा लंड घिस रही थी ...... उनका चूतड़ उछल रहे थे .....अंग अंग कांप रहा था ..सिहर रहा था ..
मस्ती में वो कुछ भी बोले जा रही थी ..मैं भी आनंद और मस्ती में सराबोर था ......
मैं लगातार उनके मुँह के अंदर चाट रहा था उनकी जीभ चूस रहा था ...फिर मैने महसूस किया मेरा लंड उनके चूत की रस से बूरी तरह भीग गया था .....पूरी तरह गीला था .....
" दीदी ....आपकी चूत चाटने का मन कर रहा है ..देखिए ना कितना गीला है ..उसका रस भी अंदर लेना है.."
" अरे तो रोका किस ने है किशू ..??"
और उन्होने अपनी टाँगें फैला दी और अपनी उंगलियों से अपनी चूत की फांके भी चौड़ी कर दी
" आ जा ..मेला बच्चा .....चूस ...जो जी में आए चाट ले ..जहाँ जी में आए चूस ले ....ले एयेए "
मैं अपनी जीभ उनकी चूत में ले जाते हुए उनकी खूली , गुलाबी फांकों के अंदर डाल दी और लपा लॅप..सटा सॅट चाटने लगा ...... पूरी गीली चूत का रस अब मेरे मुँह के अंदर जा रहा था .....दीदी ने भी अपने चूतड़ को उपर कर लिया था और मेरे सर को थामते हुए चूत में धंसा लिया था..
मैं कभी चूस्ता , कभी चाट ता कभी अपने होंठों से उनकी चूत की पंखुड़ीयाँ दबा लेता ....
" हां ..हां किशू ..तू अब काफ़ी कुछ सीख गया है .....बस ऐसे ही करता रह ...उफफफफफफ्फ़ ....तू सही में मेरी जिंदगी है रे ....सही में ...देख ना तेरे जीजा मुझे चोद के भी इतना मज़ा नहीं दे सकते ..जितना तू सिर्फ़ चूस चूस के दे रहा है ....है....उूउउइईई माआआं .....आआआआः ....हां ..."
उनके मुँह से चोद्ना शब्द सुन ते मेरा लॉडा एक दम से फॅन फ़ना उठा ..और मैं काफ़ी उत्तेजित हो गया , मेरे उनकी चूत को चाटने की स्पीड बढ़ गयी ....
दीदी चूतड़ उछाल रही थी ....मेरे सर को जकड़ी थी अपनी टाँगें मेरी पीठ पर रखे मुझे अपनी ओर खींच रही थी .....मेरे में समान जाना चाह रही थी ..... सिसकारियाँ और आहों से कमरा गूँज रहा था ......
और फिर " हाइईइ रीईईईईई.....उफफफफफफफफफफफफ्फ़ किशुउऊुुुुुुुुुुुुुुुुउउ ले ले मेरी पूरी चूत ले ले ......आआआआआआआआआअ...." और जोरों से चूतड़ उछलते हुए एक जोरदार रस की फुहार मेरे मुँह पर छोड़ दिया उन्होने ...दो तीन जोरदार उछाल मारी उनकी चूतड़ ने , मेरा पूरा मुँह उनके रस से भर गया , और वह शांत हो कर पड़ गयीं ....
मेरा लंड पूरी तरह आकड़ा था ....
मैं हाथ चला रहा था , दीदी ने देखा ...वो झट से उठीं और मेरे लौडे को अपने हाथों में ले लिया ..उनकी गरम गरम हथेलियों के छूने से मेरा लॉडा और भी अकड़ गया ...लॉडा हाथ में थामे पहले उन्होने जीभ चलाते हुए मेरे मुँह में लगे अपनी चूत रस को चाटा और फिर मेरे लौडे को मुँह में डालते हुए कहा " वाह रे मेरा रस तो तू पी गया ...और अपना रस ऐसे ही हाथ से बाहर गिराएगा और वो भी मेरे सामने ........?????"
और उन्होने अपने होंठों से जकड़ते हुए बूरी तरह मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया ...अपने हाथ से सहलाती भी जातीं .......मैं तो वैसे ही काफ़ी एग्ज़ाइटेड था ..और दीदी के होंठ और जीभ के कमाल के सामने टिक नहीं पाया ...और मैने भी अपनी पिचकारी उनके मुँह मेी छ्चोड़ दी .......
उनका पूरा मुँह भर गया ...उन्होने एक भी बूँद बाहर नहीं गिरने दी ..पूरे का पूरा गटक गयीं ..और जो भी मेरे लंड में लगा था ..जीभ से सॉफ कर दी ...
हम फिर एक दूसरे से चिपके थे .....आँसू ने रस का रूप ले एक दूसरे को अंदर और बाहर से पूरी तरह सराबोर कर दिया था ....
हम उसी रस की मिठास , मधुरता और मादकता एक दूसरे की बाहों में महसूस किए जा रहे थे ..एक ऐसे सूख और आनंद में डूबे थे ..जिसे बताया नहीं जा सकता ..सिर्फ़ महसूस किया जा सकता था ..और हम दोनों एक दूसरे की बाहों में इसे महसूस कर रहे थे ....
मैने लेटे लेटे ही दीदी की टाँगों पर अपने पैर रख लिए ..दीदी आँखें बंद किए सूस्त पड़ी थी ...
मैं बस उन्हें निहारे जा रहा था ....मेरे लिए अगर कोई सुंदरता की छवि थी तो दीदी की छवि थी ,सुंदरता की देवी थी मेरे लिए ...... मैं उनको अपनी आँखों में ..अपने दिल में , अपने रोम रोम में बसा लेना चाहता था ..इतना के फिर कभी जिंदगी में मुझ से अलग ना हो पायें ...हर वक़्त मैं उनको महसूस करता रहूं...........
मैं बिना पलक झपकाए उन्हें ताक रहा था..
फिर मैं अपने सर को उठाता हुआ अपने होंठ उनके होंठों से लगाया और लगा बेतहाशा चूसने .......
दीदी ने आँखें खोल दी और मेरी तरफ देख रही थी.....वो समझती थी सब कुछ,
जैसे मेरे मन के अंदर झाँक रही थी ......मेरी ललक .मेरी तड़प , मेरी चाहत अपने लिए , वे सब समझती थी ....उन्होने चूपचाप अपने होंठ और फैला दिए ..मुँह और खोल दिया
"हाआँ किशू चूस ले .....जी भर ले अपना.......जब तक मैं हूँ यहाँ मुझे निच्चोड़ ले , समा ले अपने अंदर ....मैं हमेशा तेरे अंदर रहूंगी ....."
और मैं उनके उपर आ गया उनसे फिर बूरी तरह लिपट गया , टाँगों से टाँगे ..हाथों से हाथ , छाती से छाती , होंठों से होंठ ..एक एक अंग एक दूसरे को अपने में समा लेने की पुरजोर कोशिश में जूटा था..
हम सिसक रहे थे ..कराह रहे थे ..तड़प रहे थे एक दूसरे की बाहों में , एक अभुत्पूर्व आनंद में डूबे थे....
मैं अपने एक हाथ से दीदी की हथेली को जोरों से थामे था , मसलता जा रहा था ....इसमें भी एक अजीब ही आनंद था.....दीदी मुँह के अंदर ही अंदर सिसकारियाँ भर रही थी..तभी मेरा हाथ नीचे उनकी चूत पर पहून्च गया ..और मैं उसे सहलाने लगा और मेरी उंगलियाँ उनकी चूत के काँपते और थरथराते होंठों से होती हुई उनकी बिल्कुल गीली चूत के होल पर पहून्च गयी,
मैने कौतूहलवश दीदी से पूछा " दीदी ये होल क्या है..क्या इसी के अंदर लंड जाता है ???"
" उफफफफफफफफफ्फ़.........." वहाँ मेरी उंगली के स्पर्श से ही दीदी मचल उठीं " अरे भोले राजा येई तो सब कुछ है रे.......येई तो हमारा सब से बड़ा खजाना है .....तुम्हारे जीजू इसी होल के अंदर अपना लंड डालेंगे और मेरी सील तोड़ेंगे ....."
" ये सील का क्या मतलब दीदी..??"
दीदी ने अपनी उंगलियों से अपनी टाइट चूत फैला दी....और टाँगें भी ..देख ले अंदर ..."हर कुँवारी लड़की की चूत के अंदर एक पतली झिल्ली होती है ......उसे ही मैने सील कहा ....जो पहली बार लंड अंदर जाने से टूट ती है ..और लड़की का कुँवारापन टूट जाता है ...."
मैने अंदर झाँका ..मुझे कोई सील तो नहीं दिखाई दी पर जो दिखाई दी , उतने से ही मेरा लॉडा तंन हो गया था...
अंदर कितना मुलायम था...गुलाबी , पानी रिस रहा था, गुलाबी दीवारों पर रस ऐसे दिखते जैसे चमकते हुए मोतियों के दाने ...दीदी भी बातें करते इतनी मस्त हो गयीं थी के उनकी चूत की दीवारें अंदर फडक रही थी....
मेरा मन किया की मैं अपना लंड अंदर डाल दूँ .....पर मैं तो दीदी से बहुत प्यार करता था ना ..मैं कैसे उनका ये अनमोल खजाना ले सकता था..ये तो उनके पति के लिए ही था ....मेरा उस पर अधिकार नहीं था....मैं उनके सुहागरात का मज़ा कम नहीं करना चाहता..
"दीदी ये अनमोल ख़ज़ाना तो आप जीजा जी के लिए ही संभाल के रखो ...मेरा तो बहुत मन करता है अपना लंड अंदर डाल दूँ....मैं तड़प रहा हूँ दीदी ...."
"हां रे मैं समझती हूँ ..पर तू नहीं जानता मैं कितनी खुश हूँ तेरी बातों से ..मेला बच्चा सही में कितना समझदार है ..और मुझ से इतना प्यार और कोई नहीं कर सकता ....किशू ...पर तू निराश मत होना ..मेरे राजा ......तुम्हारे जीजा जी के बाद सिर्फ़ तुम्हीं ऐसे इंसान रहोगे जिसे मैं अपनी चूत का मज़ा दूँगी और ऐसा मज़ा दूँगी के बस ......तू जिंदगी भर याद रखेगा ........"
"हां दीदी मैं भी अपना एक एक पल उस दिन के इंतेज़ार में गुज़ार दूँगा ....हां दीदी..आप देखना मैं अपनी शादी भी जब तक आपकी चूत में अपना लंड नहीं डाल लेता..नहीं करूँगा.."
और मैने अपना हाथ उनकी चूत से हटा लिया और उस हाथ से उनकी दूसरी हथेली भी जाकड़ ली..और उनसे फिर से चिपक गया और उनकी चूची मुँह में भर चूसने लगा ....... मेरा लॉडा एक दम कड़क हो कर उन के जांघों और पेट से रगड़ खा रहा था.....मचल रहा था अंदर जाने को...
दीदी ने मेरी बेचैनी भाँप ली थी..
"अले अले मेला बच्चा ..इतनी बेचैनी..? अरे मेरे पास चूत के सिवा भी बहुत कुछ है किशू .तेरे लंड की बेचैनी मिटाने के लिए .....आख़िर तेरी स्वेता दीदी की ही तो चेली हूँ ना ....."
और वह पलंग के सिरहाने तकिया रख , उस पर अपनी पीठ टिकाए अपनी दोनों चूचियाँ हाथों से थामते हुए मुझ से कहा
" ले किशू चोद मेरी चूचियों के बीच..दोनों चूचियों के बीच अपना लंड पेल दे और ऐसे चोद जैसे तेरा लंड मेरी चूत के अंदर हो ...चल जल्दी कर आ जा .."
और मैं अपने घूटनों के बाल बैठ अपने हाथ से लंड थामते हुए उनकी चूचियों के बीच डाल कर लगा ताबड़तोड़ धक्के लगाने लगा ....
उनकी मुलायम गुदाज चूचियों के बीच लंड से चोदे जा रहा था ..मुझे नहीं मालूम था चूत की चुदाई कैसी होती है ..पर ये चुदाई उस से कम नहीं होगी इतना मुझे मालूम हो गया था
मेरा लंड चूचियों को चोद्ता हुआ उनके मुँह तक पहून्च जाता और दीदी ने फिर अपना कमाल दिखा दिया ..उन्होने मेरे सुपाडे को अपनी लप्लपाति जीभ से चाटना भी शुरू कर दिया ..
उफफफफफफफफफ्फ़ ये कैसी चुदाई थी..जिसमें चोद्ने और जीभ से चटाने ..दोनों का मज़ा मिल रहा था
मैं लगातार उनकी चूचियाँ चोद रहा था ....दीदी अपने हाथों से चूचियों को ज़ोर ..और ज़ोर और जोरों से दबाती जाती और मेरा लंड जैसे जैसे अंदर जाता मैं सिहर उठ ता , कांप उठता ..और जीभ की चटाई से मज़ा और भी बढ़ जाता ....
"हां ...हां ...किशू...हाआँ ..बस ऐसे ही धक्के लगा...उफफफफफफफफफफ्फ़ ..आआआआ......आ ज़ाआाआ....अपना पूरा रस मुझ पर छ्चोड़ दे.......आ जाआ........एयेए जाआ...मेला बच्चा ..."
दीदी की ऐसी बातों से मैं और भी एग्ज़ाइटेड होता जा रहा था.......
मेरा चोद्ना और भी तेज़ हो जाता ........
और फिर मैं टिक नहीं सका ..मेरी पिचकारी छूटने लगी ..दीदी की छाती पर..उनकी चूचियों पर , उनके मुँह पर ..मैं झटके पे झटका देते झाड़ रहा था ..मेरा पूरा बदन अकड़ता हुआ खाली होता जा रहा था
दीदी ने मुझे अपनी बाहों में ले लिया...."हां हां मेला बच्चा .....आ जा ..आ जा " मेरे सर को अपने सीने से चिपका लिया, मेरे बाल सहलाने लगी ....."अच्छा लगा ना ....???."
"हां दीदी बहुत अच्छा लगा"..मैं हाफते हुए कहा और उनके सीने पर सर रखे अपने आप को उनके हवाले कर दिया .......
"किशू..किशू .....मैं तेरी कर्ज़दार हूँ रे ...मैं अपना क़र्ज़ ज़रूर चूकाऊँगी एक दिन ..ज़रूर ..मेला बच्चा ..मेला बच्चा ...." वो मुझे चूमती जातीं ...मेरे बाल सहलाए जाती और प्यार और, आभार के आँसू बहाए जा रही थी..मैं उन आँसुओ से सराबोर ....एक असीम आनंद में डूबता जा रहा था .....
हम दोनों एक दूसरे की बाहों में थे , एक दूसरे को महसूस कर रहे थे ....पता नहीं कब दोनों एक दूसरे की बाहों में ही नींद की बाहों में खो गये ...
जब नींद अच्छी आती है तो खूल भी जल्दी ही जाती है......मैं सुबेह तड़के ही जाग गया ....दीदी अभी भी मेरी बाहों में सो रही थी...चेहरे पर ज़रा भी शिकन नहीं ....जैसे कितनी शांत हों...........उनकी चूचियों, छाती और चेहरे पर अभी भी मेरा रस लगा था..मैं अपने हाथ उनकी पीठ से लगाता हुआ उन्हें अपनी ओर उपर खींच लिया और अपनी लप्लपाति जीभ से चाट चाट कर सफाई करने लगा..क्या सोंधा सोंधा टेस्ट , और साथ में दीदी के शरीर का अपना एक अलग टेस्ट , उनके हल्के हल्के पसीने का स्वाद ..उनके बदन की खूशबू ...उफफफफफफफफफ्फ़ एक अजीब ही नशा सा छा गया...... ..मैं जोरों से चाट रहा था...दीदी की आँखें खूल गयीं, एक नज़र मेरी तरफ डाला..और फिर मुस्कुराते हुए आँखें बंद कर लीं और लेटे लेटे मेरे चाटने का मज़ा ले रही थी.........मेरा लॉडा सुबेह सुबेह तो ऐसे ही कड़क रहता है और आज जब पायल दीदी मेरी बाहों में थी मेरा लंड और भी कड़क हो गया........अब तक दीदी भी जाग गयीं ......उन्होने मंद मंद मुस्कुराते हुए मेरी ओर देखा और चूप चाप लेटी रहीं ....... मेरी हरकतों का मज़ा ले रहीं थी...
मैने उनकी जांघों को आपस में मिला दिया ..अपना लॉडा उनकी जांघों के बीच , पेल दिया और लगा उनकी जांघों के बीच उनको चोद्ने .......उफफफफफफफफ्फ़ .........क्या मस्त जंघें थी उनकी...मांसल , सॉफ्ट , गुदाज ...और साथ में उनकी चूचियाँ , उनके होंठ , उनका पेट ...उनकी नाभि ..चाट ता जाता ......
दीदी कितनी अंडरस्टॅंडिंग थीं ...मेरी हालत वह समझ रही थी ..उन्होने अपनी जांघों को और भी टाइट कर लिया .......उफफफफफफफफफफफफफ्फ़ ...मैं पागल हो उठा था ..मैने उन्हें अपने से बूरी तरह चिपका लिया और जोरदार धक्के पे धक्का लगाए जा रहा था..जैसे आज के बाद और कुछ नहीं .....
दीदी अपनी अलसाई आवाज़ में कहती जातीं .."वाह रे वाह ..तू भी कितना कुछ सीख लिया ...मेरी हर जागेह चुदाइ कर रहा है .. देख ना एक चूत के ना मिलने से तुझे और कितनी नयी नयी जागेह मिल रही है मुझे चोद्ने को...........हाां चोद रे किशू ...चोद ले रे ..जहाँ जी चाहे चोद ..सब कुछ तेरा ही तो है ....हाआँ अपनी ख्वाहिश पूरी कर ले..मैं भी तुझे खुश देखना चाहती हूँ ..... आआआहह चाट और चाट ..और चूस ....उईईईईईईई .....हाआँ मेरी नाभि के अंदर जीभ घूसा ...हाआँ ........जीभ से वहाँ भी चोद .....उफफफफफफफफफफ्फ़ ...........आाआऐययईईई.....हाँ हां ऐसे ही ....." वह अपना पेट और उपर कर लेती ..जिस से मेरी जीभ और भी अंदर घूस जाती उनकी नाभि में ....
और मेरा चाटना , चूसना , जांघों को चोद्ना ज़ोर और ज़ोर पकड़ता गया ..उनकी जंघें टाइट और टाइट होती गयी....उनकी जंघें मेरे लौडे के रस से इतनी गीली थीं के मुझे लंड पेलने में कोई दिक्कत नहीं होती ..एक दम मक्खन जैसा था
दीदी की चूत से भी लगातार पानी रिस रहा था, उन्हें अपनी नाभि में मेरे जीभ का चलाना बहुत ही एग्ज़ाइट कर रहा था .....
अपनी चूतड़ उछाल उछाल कर मस्ती में डूबी थीं ..और मैं उन्हें उनके पेट से उनको जकड़ा था , मुलायम और सपाट पेट ....जीभ नाभि के अंदर डाल देता ..और लंड जांघों के बीच एक अजीब मस्ती के सफ़र का आनंद ले रहा था..
"आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह......हाईईईईईईईईई..हाां किशू.........मेला बच्छााआआ ....आआआआअहह ....."
" दिदीइ.....आआआआआ ......बस और नहीं .......ऊऊऊऊऊऊ ..." और मैं उनके जांघों पर जोरदार पिचकारी चोद्ना शुरू कर दिया ...जांघों पर ..उनके पेट पर ...उनकी छाती पर ..लॉडा हाथ से थामे झटके पर झटका देता जाता ..मेरे रस की गर्मी..उसकी तेज़ फूहार से दीदी का सारा बदन झुरजुरी से कांप उठा और वह भी चूतड़ उछाल उछाल कर अपनी चूत से पानी छ्चोड़े जा रही थी ........
हम दोनों के अंदर की सारी मस्ती , सारी खूषी , सारी ललक बाहर आ रही थी ..एक दूसरे पर हम छिड़के जा रहे थे ....
कुछ देर तक हम ऐसे एक दूसरे की बाहों में पड़े थे......
अब तक सुबेह काफ़ी निकल चूकि थी ..बाहर चिड़ियों का चहचाहना और सूरज की किरणों ने हमारी आँखें खोलीं ....
दीदी ने अंगडायाँ लेते हुए मुझे अपने उपर से हटाया ......उफ़फ्फ़ दीदी की अंगड़ाई ने फिर से मेरे अंदर हलचल मचानी शुरू कर दी....
पर इसके पहले के मैं कुछ कर पाता , "बस किशू ....देख अब सब लोग जाग गये हैं ..कोई आ जाए तो मुश्किल हो जाएगी..मैं जा रही हूँ " और वो मेरे लौडे को कस के दबाती हुई बाहर निकल गयी ....
मैं दीदी को देखता रहा.......और फिर मैं भी बाथरूम के अंदर चला गया ...
उस दिन नाश्ते के टेबल पर जब दीदी ने मुझे खिलाना शुरू किया ..मेरी माँ ने दीदी के हाथ थामते हुए कहा "अरे पायल ..अब तो तू इसे अपने हाथ से खाने दे...तू जब चली जाएगी तो किस के हाथ से खाएगा ..क्या भूखा ही रहेगा ..??" और फिर मेरी तरफ देखते हुए कहा "किशू तू भी खुद से खाना शुरू कर दे ..दीदी का लाड़ प्यार बहुत हो गया..!"
मैं जानता था एक दिन ये होनेवाला ही है ..मैं चूप रहा.....मुझे अंदर से जैसे किसी ने झकझोर दिया था..मैं आसमान से सीधे ज़मीन पर आ टपका था..वास्तविकता और सचाई मेरे सामने खड़ी थी.....
दीदी समझ गयीं मुझे गहरा धक्का लगा था ....." ठीक है बुआ ..पर आज तो खिलाने दे ..कल से किशू खुद ही खाएगा ..है ना किशू .....?"
मैं क्या बोलता ??? ..एक बहुत ही आभार से भरी नज़रों से दीदी की ओर देखा ..दीदी अपने आँचल से अपनी आँखें पोंछते हुए मुझे खिलाने लगीं.
शाम को जब स्कूल से आया ..दीदी ने दरवाज़ा खोला ...... आज फिर घर में सन्नाटा था ..
" कहाँ हैं सब लोग दीदी ..???" मैने पूछा ..
'' माँ और बुआ शादी की शॉपिंग को गये हैं और पापा ( मामा) और फूफा ऑफीस से कब तक आएँगे किसे मालूम..????"
मेरे चेहरे पे चमक आ गयी ..मेरा मन गुदगुदी से खिल उठा
मैने दीदी को अपनी बाहों में जाकड़ लिया , अपने सीने से लगाता हुआ उन्हें चूमने लगा
" ओओओओओओह्ह दीदी यानी के हम दोनों अकेले .....??????"
" अरे बाबा अभी तो छ्चोड़ ना किशू ..चल हाथ मुँह धो ले साथ में नाश्ता करते हैं ....फिर कुछ और .." और मुस्कुराते हुए मुझे अपने से अलग किया .
तभी कॉल बेल की तीखी आवाज़ आई........
" अभी कौन आ गया.." मैने झुंझलाते हुए बड़बड़ाता हुआ दरवाज़ा खोला..
बाहर स्वेता दीदी खड़ी थीं.........
मैं एक टक उन को(स्वेता दीदी) देखता रहा....मेरी आँखें चौंधिया गयीं , पालक झपकने को तैयार ही नहीं ....
उन्होने कपड़े इस तरह पहेन रखे थे.....कपड़े बदन ढँकने के बजाए उन्हें और उभार रहे थे...मानों एक एक अंग कपड़ों को चीरता हुआ बाहर आ जाए ...पतली और तंग टाइट ब्लाउस ......उनकी चूचियों की उभार छुपाने की नाकामयाब कोशिश में जुटी थीं ....गले से नीचे नंगा सीना ........साड़ी नाभि से नीचे ....पेट उघ्ड़ा ......आँचल कंधों से फिसलता हुआ .........
" अरे क्या देख रहा है किशू ..मुझे अंदर तो आने दे..क्या बाहर ही खड़ी रहूं..???" स्वेता दीदी की आवाज़ से मेरा ध्यान उनके शरीर से उनकी आवाज़ पर आया....
"ओह..अरे हां आइए ना .." और मैं दरवाज़े से हट ता हुआ उन्हें अंदर आने का इशारा किया....
मटकती हुई चाल से स्वेता दीदी अंदर आईं .....मैं उनके पिछे था ...उनकी मटकती चाल से उनके दोनों चूतड़ साड़ी से उछल बाहर आने को मचल रहे थे.... उधर उनके चूतड़ उछल रहे थे और इधर मेरे पॅंट के अंदर भी उछल कूद मची थी.......
" पायल कहाँ है किशू..?" उन्होने हंसते हुए पूछा .
"दीदी शायद किचन में हैं ...आप जाइए ना ..देख लीजिए .." मेरा गला सूख रहा था .....स्वेता दीदी की मटकती चाल से , उनकी अजीब मुस्कान से ..उनकी तीखी और पैनी नज़रों से ..मानों वह मुझे खा जाना चाहती हों .....
थोड़ी देर बाद दोनों दीदी किचन से बाहर निकलीं ..
पायल दीदी ने कहा " चल किशू मेरे रूम में ...हम तीनों नाश्ता करते हैं ....."
स्वेता दीदी हाआँ में हां मिलाते हुए मुझे अपनी बाहों से अपने बगल भींच लिया , मैं झिझकता हुआ उनके करीब हो गया
" अरे झिझक क्यूँ रहा है किशू ..मैं भी तो तेरे लिए पायल जैसी ही हूँ ना ..बस तू जैसे अपनी पायल दीदी के साथ खूल कर रहता है ना ......मेरे साथ भी ऐसे ही रहना ..क्यूँ पायल मैने ठीक कहा ना ..??" और मुझे अपने से और भी करीब चिपका लिया ...मैं उनके गुदाज और मुलायम शरीर के स्पर्श , उनके बालों की सुगंध , उनके साँसों के झोंकों से मदहोश हुआ जा रहा था
" अरे हां किशू तू ज़रा भी मत हिचकिचा..स्वेता दीदी बहुत अच्छी हैं , तुम्हारे लिए मेरे से कुछ भी कम नहीं ........." और पायल दीदी की इस बात पर दोनों जोरों से हँसने लगी और हम दीदी के कमरे के अंदर आ गये थे ..
मेरी समझ में कुछ कुछ तो आ ही रहा था ..लगता है दीदी ने अपने और मेरे बारे स्वेता दीदी को सब कुछ बता दिया था ......
मुझे स्वेता दीदी ने अपनी गोद में बिठा लिया ...मैने पायल दीदी की ओर देखा ....मानो मैं कह रहा हूँ...." दीदी मैं जब आप की गोद में नहीं बैठ ता इनके गोद में कैसे बैठूं ..??"
दीदी ने मेरी नज़रों की बात समझ ली और कहा " मेरा राजा भाय्या ..आज पहली बार है ना स्वेता दीदी के लिए ..तू उनकी गोद में आज बैठा रह .." और फिर स्वेता दीदी की तरफ देखते हुए कहा .." स्वेता ..किशू अब बहुत बड़ा हो गया है ..... " और फिर दोनों हँसने लगे ..
" हां रे पायल सही कह रही है तू ..मैं भी देख रही हूँ ना .." और उन्होने मेरे पॅंट के अंदर बने तंबू की तरफ इशारा किया .......जो काफ़ी उँचा हो गया था ..मेरे चूतड़ उनकी गद्दे जैसी मुलायम और गर्म जांघों के उपर था और मुझे अच्छा लग रहा था ...
फिर उन्होने झट अपनी उंगलियों से पॅंट के बटन खोल दिए और कहा " देखें तो ज़रा कितना बड़ा हो गया है ...????"
बटन खुलते ही मेरा लंड उछलता हुआ बाहर आ गया.........अभी भी 4-5 इंच के बराबर तो था ही पर काफ़ी मोटा था ...........
स्वेता दीदी ने झट उसे अपनी मुट्ठी से पकड़ लिया और सहलाने लगीं जैसे उसे महसूस कर मेरे बड़े होने का सबूत देख रही हों ..
पायल दीदी ने मुझे खिलते हुए स्वेता दीदी से पूछा.." क्यूँ दीदी ..अब हो गयी ना तस्सली .? कितना बड़ा है अब मेरा किशू ...??"
उनकी पूरी हथेली मेरे मोटे लंड से भरी थी ...स्वेता दीदी उसे हल्के हल्के दबाते हुए कहा "हां री पायल बहुत बड़ा हो गया है " और धीरे से मेरे लंड की चॅम्डी उपर नीचे करने लगीं ..
मेरे पूरे बदन में झुरजुरी होती जा रही थी ...उन दोनों की बातों से स्वेता दीदी से मेरी झिझक भी दूर हो गयी थी.........
दीदी का हाथ मुझे खिला रहा था और स्वेता के हाथ मेरा लंड सहला रहे थे .दोनों दीदी के बीच मैं मस्ती और आनंद के लहरो में हिचकोले ले रहा था..मैने अपने आप को उनके हवाले कर दिया था...
मेरा खाना ख़त्म हो चूका था दीदी ने थाली उठाई और किचन में रख घर के दरवाज़े को अच्छी तरह बोल्ट कर दिया , वापस आईं और हमारे बगल बैठ गयीं
मैं अभी भी स्वेता दीदी की गोद में ही था ........और मेरा लंड उनके हाथ में ...स्वेता दीदी को मेरा चिकना लंड सहलाने में बड़ा मज़ा आ रहा था...... शायद जितना मज़ा मुझे आ रहा था उस से कहीं ज़्यादा उन्हें ..उनकी आँखें बंद थी और अब एक हाथ से मेरा लंड सहला रही थी और दूसरा हाथ अपनी साड़ी के अंदर डालते हुए अपनी चूत सहला रही थी......
दीदी ने स्वेता की हालत देखी.उनकी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा था......पतली और तंग ब्लाउस के अंदर चूचियाँ कड़क हो गयीं थीए , नंगा सीना दिल की तेज़ धड़कनों से उपर नीचे हो रहा था........
उन्होने चूपचाप उनके ब्लाउस के बटन खोल दिए ..ब्लाउस उनके सीने से अलग कर दिया और ब्रा के स्ट्रॅप्स एक झटके में ही खोल दी...उनकी कड़क चूचियाँ मेरे चेहरे पर उछलती हुई लगी.....मैं उनकी चूचियाँ देखता रहा...गोल गोल ..भारी भारी , नुकीली पर गोल घुंडिया एक दम टाइट ........
" अरे देख क्या रहा है मेरे भोले राजा...मेरी चूचियाँ तो ऐसे चूसता है जैसे आम चूसता है.........चल इन्हें भी चूस ..." दीदी ने मुझे बड़े प्यार से फटकारा और स्वेता की एक चूची अपने हाथ से थामते हुए मेरे मुँह में ठूंस दी....
मैं अपनी लप्लपाति जीभ और चुभलाते होंठों से स्वेता की चूची पर टूट पड़ा ...होंठों से दबाते हुए और जीभ से चाट ते हुए ...स्वेता कांप उठी ..उनकी मेरे लंड पर पकड़ और मजबूत हो गयी.........और अपनी चूत का सहलाना भी तेज़ हो गया .......उनके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी.........आँखें मस्ती में बंद थीं
तभी दीदी उनकी दूसरी जाँघ पर बैठते हुए अपना मुँह उनकी दूसरी चूची पर लगा दिया और लगीं उसे चूसने ...
एक साथ दोनों चूचियों की चूसाई ......स्वेता कांप उठी..उनका सारा बदन सिहर उठा...
"हाइईईईई रे हाइईइ...दोनों भाई बहन ...उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ ..हाआँ हाां चूसो ..मेरा पूरा रस चूस लो ..उफफफफ्फ़ "
दीदी का चेहरा मेरे चेहरे से बिल्कुल सटा था ........उनकी साँसें और मेरी साँसें टकरा रही थी...मैं बीच बीच उनके होंठों को भी चूस लेता .........
हम तीनों एक दूसरे से चिपके अपनी अपनी हरकतों में डूबे थे ..
तीनों बदहावाश थे ........ना कपड़ों का ध्यान ना अपने होश का ख़याल .....
मस्ती का आलम छाया था..इसी मस्ती में हम एक दूसरे के कपड़े उतारते जा रहे थे ..जब जिसका मूड हुआ किसी के कपड़े खींच देता ........
थोड़ी ही देर में तीनों नंगे एक दूसरे के बदन से खेल रहे थे ..एक दूसरे से लिपटे थे ..
मैं कभी स्वेता दीदी की चूची चूसता , कभी दीदी की चूचियाँ मसल देता .....कभी उनके पेट सहलाता ..कभी स्वेता दीदी की नाभि के अंदर अपनी उंगली डाल देता .....अब मैने भी स्वेता दीदी की चूत में अपनी उंगली लगाई.......उनके खुद की उंगली चलाने से पूरी तरह गीली थी उनकी चूत...मेरी उंगली लगते ही उन्होने अपनी उंगली हटा दी और अपनी उंगली पायल की चूत में लगाते हुए घिसना चालू कर दिया .......
स्वेता दीदी एक हाथ से मेरा लंड सहला रही थी , दूसरे से पायल दीदी की चूत .......मेरा लंड कड़क और कड़क होता जा रहा था , मेरी मस्ती बढ़ती जा रही थी..मैं जितनी मस्ती मेी आता जाता..स्वेता दीदी की चूत उतनी ज़ोर से सहलाता जाता ..मेरी उंगलियाँ उनकी चूत की फांकों पर फिसल रही थी...और इधर स्वेता जितनी मस्ती में आती पायल की चूत उतनी ही तेज़ी से मसल्ति जाती.....
और पायल दीदी तो उनकी चूचियों पर ही टूट पड़ी थीं .............
चप..चप.....पच ..पुच...लॅप लप ...आआआ....उईईईईईई.......हाइईईईईई...की आवाज़ लगातार आ रही थी
और इसी मस्ती की दौर में स्वेता का बदन अकड़ गया ..झटके खाने लगा ....उनके हाथ ढीले पड़ गये ..और उन्होने बूरी तरह अपने चूतड़ उठाए चूत से पानी छोड़ना शुरू कर दिया ...मैं हैरान था .......उनकी चूत से धार इतनी तेज़ निकल रही थी ..मानों वह पेशाब कर रही हों ......
शायद इस तरह एक साथ दोनों चूचियों की चुसाइ , और उनके बदन का एक साथ मेरे और दीदी के सहलाने का असर था...... काफ़ी दिनों से उनकी चुदाइ भी नहीं हुई थी.......अपने पति से अलग थीं .....काफ़ी दिनों से ...इसका मिला जुला असर था ...... उनका इस तरह झड़ना
तभी दीदी ने मेरा कड़क लंड देखा ...इतना कड़ा था के हिल रहा था ,,उन्होने झट अपनी हथेली से उसे जकड़ते हुए जोरों से मुझे मूठ मारने लगीं " हाई रे मेला बच्चा ...ले अब जल्दी आ जा ...हां मेरे हाथ में ही छ्चोड़ दे ..आ ज्जा .."
मैं तो पहले ही से तड़प रहा था दीदी के दो चार बार हाथ उपर नीचे होते ही उनके हाथ में मैने पिचकारी छ्चोड़ दी ...
मैं" दीदी ..दीदी ......." की चीख मारते हुए उन से बूरी तरह लिपट गया....और उनकी चूत में उंगली घिसने लगा ...जो अब तक बूरी तरह गीली हो चूकि थी .......उनकी चूत की फाँक में दो चार बार उंगली उपर नीचे होते ही दीदी भी मुझ से लिपट गयीं और चूतड़ उछालते हुए अपनी चूत से रस की बौछार कर दी.........
कहानी जारी रहेगी………. महँगी चूत सस्ता पानी -5
अब आगे...
दरवाज़ा भिड़ा था ....थोड़ी सी फाँक थी दोनों पल्लों के बीच , मैने कान लगाया ..अंदर हल्की हल्की हँसी की आवाज़ आ रही थी ....फुसफुसाहट की आवाज़ आ रही थी ..जैसे दो लड़कियाँ आपस में बातें कर रहीं हो ....बीच बीच में खीखिलाने की भी आवाज़ आती ....और कभी मस्ती में सिसकारियों की भी आवाज़ शामिल हो जाती ...
मैने दरवाज़े के पल्लों की फाँक से अंदर झाँका ...
अंदर की हालत देख मैं चौंक गया .... ये उनका एक और ही रूप था ....अंदर स्वेता दीदी और दीदी दोनों लगभग नंगे एक दूसरे की शरीर से खेल रहे थे ....एक दूसरे की चूचियाँ मसल रहे थे ..बातें भी कर रहे थे ..कभी एक दूसरे को चूम भी लेते .... ...दोनों की साड़ियाँ अस्त व्यस्त ..ब्लाउस और ब्रा से चूचियाँ बाहर निकलीं ..जांघों से उपर तक साड़ी .....
बस एक दूसरे में खोए .....दुनिया से बेख़बर ....
स्वेता दीदी , दीदी की बहुत अच्छी सहेली थीं ..उनकी शादी दो साल पहले हुई थी ..पर पता नहीं क्यूँ , अभी काफ़ी दिनों से अपनी माँ के साथ ही रहती हैं ..अपने पति के यहाँ नहीं जातीं ...
दीदी से काफ़ी घुल मिल गयीं थीं और शायद पुर मोहल्ले में दीदी की स्वेता दीदी ही एकमात्र सहेली थीं ..दिखने में ठीक ठाक थीं ..काफ़ी आकर्षक ...मीडियम शरीर ..सांवला पर चमकता चेहरा ....भारी भारी चूचियाँ और सब से आकर्षक थे उनके मचलती चूतड़ ....
उन से (स्वेता दीदी से ) मेरी कोई खास बात चीत नहीं थी ..बस ऐसे ही हाई ..हेलो ...
मैने उन दोनों को उनके खेल में डिस्टर्ब करना नहीं चाहा ... वापस लौट गया ... मुँह हाथ धो लिया ..पर मुझे जोरों की भूख लगी थी ....और दीदी थी के अपने कमरे में स्वेता दीदी के साथ अपनी भूख मिटा रहीं थीं..मेरी भूख की उन्हें परवाह ही नही थी ..
मैने वहीं बाहर से आवाज़ दी " दीदी आप कहाँ हो.....मुझे जोरो की भूख लगी है ....."
मेरी आवाज़ उन तक पहून्च गयी ..और थोड़ी देर बाद उनके कमरे का दरवाज़ा ख़ूला ...दीदी बाहर आईं ...पर अब तक उन्होने अपने आप को दुरुस्त कर लिया था ....स्वेता दीदी अंदर ही थी ..
बाहर आते ही दीदी ने मुझे गले लगाया " अले ..अले मेला बच्चा ..कब आया रे तू स्कूल से ..मुझे आवाज़ क्यूँ नहीं दी ???"
मन में तो आया के कहूँ " आआप आवाज़ कहाँ सुनती दीदी ..अंदर आप दोनों तो अपनी ही आवाज़ निकालने में मस्त जो थीं....." पर मैने कहा " नहीं दीदी बस अभी अभी आया हूँ ..पर देखा आपके कमरे का दरवाज़ा भिड़ा था ..इसलिए आवाज़ दी ....आप शायद सो रही होंगी इसलिए उठाया नहीं.."
" हां रे वो हैं ना स्वेता ..मेरी सहेली उसी के साथ मैं लेटी थी ..बेचारी बहुत दिनों के बाद तो आज आई थी ..हम लोग गप्पें मार रहे थे ....चलो मैं तुम्हारा नाश्ता लाती हूँ .."
कुछ ही देर बाद पायल दीदी हाथ में नाश्ते से भरी थाली लिए आ गयीं और रोज की तरह बैठ कर मुझे गोद में खींच कर बिठा लिया ..पर मैं उनकी गोद से उठ गया और उनके सामने ही बैठ गया ..दीदी चौंक पड़ीं ..
"ये क्या किशू ..???क्या हुआ ..क्यूँ उठ गया.....मैने नाश्ते में देर की इस वजेह से गुस्सा है मेरे से ..??? ""
"नहीं दीदी ...मैं गुस्सा नहीं हूँ..!" मैने कहा
" फिर क्या बात है ..??"
" अब ऐसे गोद में बैठ मुझे खाना अच्छा नहीं लगता ..." मैने अपनी नज़रें झूकाते हुए कहा ...
" पर क्यूँ ..?? अभी तक तो तुझे बड़ा अच्छा लगता था...आज क्या हुआ ..??"
" मुझे शर्म आती है .." मेरी नज़रें अभी भी झूकि थीं
ये सून कर दीदी जोरों से हंस पड़ीं ....
" ह्म्म्म्म तो ये बात है..अब मैं समझी ..कल रात के बाद से तू काफ़ी बड़ा हो गया है ....हाँ रे बड़ा तो तू हो ही गया है .. काफ़ी बड़ा ....."मेरे लंड की ओर देखते हुए उन्होने कहा ..और हँसने लगीं...मैं झेंप गया .....
"पर जब रात में मेरे सामने नंगा पड़ा था तो शर्म नहीं आई ..???" उनके चेहरे पर एक बहुत ही शरारत भरी मुस्कान थी ..
" उस समय की बात और थी दीदी..आप भी तो नंगी थी ..हिसाब किताब बराबर थी.." मैने भी उनको आँखों में देखते हुए कहा .
" वाह रे मेरे भोले राजा ..एक ही दिन में तो तू बहुत बड़ा हो गया है..बातें भी बड़ी बड़ी कर लेता है ...ठीक है बाबा ..चल मेरे हाथ से नाश्ता तो करेगा ना ...???" उन्होने बड़े प्यार से अपने हाथ में नीवाला ले मेरी ओर बढ़ाया ..
मैने झट मुँह खोल नीवाला मुँह में ले लिया , और कहा
" दीदी ..मेरा वश चले तो आप के हाथों से जिंदगी भर ऐसे ही ख़ाता रहूं ...हां दीदी ..जिंदगी भर ..." और मैं उनकी ओर एक टक देख रहा था
उनकी आँखें भर आई ..मेरी बात सुन कर ...
उनका गला भर आया
"जिंदगी भर कहाँ रे.....अब तो मैं बस और कुछ ही दिनों की मेहमान हूँ यहाँ ..फिर किसके हाथ से खाएगा .." दीदी अब रो रहीं थी ...और मुझे खिलाए भी जा रही थी..
" दीदी प्ल्ज़्ज़ रो मत ...नहीं तो मैं नहीं खाऊंगा ...जब जाओगी तब देखी जाएगी..अभी तो हम साथ हैं ना ..??"
" हां रे ..तू शायद ठीक कह रहा है...अब मेला बच्चा सही में बड़ा हो गया है...."
मैने उनकी आँखो से आँसू पोंछे ..और उनके हाथ से नीवाला ले खाता रहा.....
तभी उनके कमरे से स्वेता दीदी निकलीं ..दरवाज़ा एक दम से खोलते हुए .....
"वाह वाह ..क्या प्यार है भाई बहन में .... अरे पायल मैं भी हूँ , यहाँ ...कब से अंदर इंतेज़ार कर रही थी तेरा ..पर तू तो बस ....खोई है भाई के साथ ."
मेरी नज़र उन पर पड़ी ....आलमास्त जवानी का नमूना थी स्वेता दीदी ..उनके बोलने का लहज़ा ऐसा कि मानो सारा कमरा खिलखिला उठा हो.......बहुत हँसमुख और खूली खूली .... जो अंदर था ..वो बाहर भी ....हर जागेह सही उभार ...बलके थोड़ा ज़्यादा ही ..लगता था जैसे मेरे जीजू ने काफ़ी इस्तेमाल किया था उनकी उभारों का .साड़ी से बाहर निकलने को बस तैयार ....
मैं उन्हें घूरे जा रहा था ....
तभी उन्होने कहा " अरे क्या घूर रहा है मुझे ..अपनी पायल दीदी को घूर ना ....अपनी आँखों में बसा ले अछी तरह ........" और हँसने लगीं ....
" तू भी ना स्वेता .. चूप कर ..थोड़ी देर रुक ..किशू का खाना हो गया है ... तू अंदर बैठ मैं बस आई ...." दीदी ने स्वेता दीदी की तरफ घूरते हुए कहा ....
" ठीक है बाबा जाती हूँ ..जाती हूँ ...मैं भला तुम दोनों के बीच कबाब में हड्डी क्यूँ बनूँ ....है ना किशू..???" और फिर मेरी तरफ बड़े प्यार से देखते हुए जैसे आई वैसे ही दरवाज़ा जोरों से बंद करते हुए अंदर चली गयीं ..
" उफफफफफफफफफ्फ़.. एक दम तूफान है ये लड़की .....अच्छा किशू अब तू हाथ मुँह धो ले और अगर बाहर खेलने जाना है तो जा ..मैं ज़रा स्वेता से बातें कर लूँ ...." और फिर मेरी तरफ भेद भरी निगाहें डालते हुए कहा " तू पूछता है ना हमेशा , मैने वो सब बातें कहाँ से सीखीं? तो सून ये ही हैं मेरी गुरु.........." और फिर मुस्कुराते हुए अंदर चली गयीं .
मैं सोचता रहा जब चेली इतनी मस्त हैं तो फिर गुरु का क्या हाल होगा ...अल्मस्त .....!!!
मैने हाथ मुँह धोया और बाहर निकल गया दोस्तों के साथ खेलने...
खेल कूद कर शाम को वापस घर आया ..तब तक माँ और मामी भी पड़ोस से वापस आ गये थे ....और दीदी उनके साथ बातें कर रही थी....
मैं चूप चाप अपने कमरे में चला गया और फ्रेश हो कर पढ़ाई में लग गया ..
उस दिन होम वर्क काफ़ी ज़्यादा मिला था .और कुछ डिफिकल्ट सम्स भी मुझे सॉल्व करने थे जिन्हें मैं क्लास में नहीं कर पाया था ......मैं काफ़ी देर तक इन्ही सब में जुटा रहा ...
तभी दीदी अंदर आईं और बहुत खुश थीं मुझे पढ़ाई में इतना तल्लीन देख ....
"हां किशू .... बस ऐसे ही मन लगा कर पढ़ .....अच्छा चल अब खाना खा ले ..देख अभी वहाँ बुआ और माँ भी हैं ..कुछ ऐसी वैसी हरकत मत कर बैठना ..... "
" कैसी हरकत दीदी ..???" और मैं हरकत में आ गया ... उन्हें अपने से चिपकाते हुए उनकी चूचियाँ मसल्ने लगा और उनके होंठ पे अपने होंठ लगाए जोरों से चूसना शुरू कर दिया .
दीदी ने भी मुझे अपनी बाहों से लगा लिया ..दोनों एक दूसरे से चिपके रहे इसी तरह ..की दीदी ने मुझे झट अपने से अल्ग किया ...वो हाँफ रही थी ..उनकी सांस उखड़ी थी ..पर फिर भी उन्होने कहा
" ह्म्म्म्मम..तू अब सही में बड़ा हो गया है रे ......
बस येई ..जो तू अभी कर रहा था...वहाँ ज़रा शांत रहना ...." और अपना हाथ नीचे करते हुए मेरे लंड को जोरों से मसल दिया ..मेरे मुँह से "आआआआआआआह्ह्ह्ह डीडीिईईई ..." निकला
" बस जल्दी एयेए ..मैं टेबल पर तेरा इंतेज़ार कर रही हूँ ..." और हंसते हुए बाहर चली गयी....दीदी के अंदाज़ भी निराले थे .....
मैं रूम से बाहर निकला ..दीदी डाइनिंग टेबल पर मेरा इंतेज़ार कर रहीं थी ....पर साथ में माँ और मामी भी बैठीं थी ..
मैने दीदी की ओर एक शुक्रिया से भरी नज़रों से देखा ...इसलिए कि उन्हें मेरे उनके गोद में ना बैठने की बात याद थी ..और उन्होने खाना टेबल पर लगाया था. मैं उनकी बगल वाली कुर्सी पर बैठ गया..
मैने देखा दोनों माओं के आँखों में अश्चर्य था ....
"अरे क्या बात है पायल....आज किशू तेरी गोद के बजे कुर्सी पर बैठा है ..???" मेरी माँ ने दीदी से पूछा..
" हां बुआ ...अब हमारा किशू बड़ा हो गया है..उसे गोद में बैठना अच्छा नहीं लगता ..." दीदी ने मुस्कुराते हुए कहा ..
दोनों माएँ ज़ोर से हंस पड़ी और मामी ने कहा " हां पर तू भी तो अब ज़रा इन बातों का ख़याल रख ...अब तू ससुराल जानेवाली है ...देखो किशू को तेरा कितना ख़याल है...तू तो बस बच्ची बनी है अभी तक ....."
" चलो अच्छा है दोनों अब बड़े हो रहे हैं .." माँ ने जवाब दिया ....
तभी दीदी ने अपना कमाल दिखा ही दिया ..टेबल के नीचे एक हाथ डाल कर मेरे लंड को जोरों से दबा दिया .....इस एक दम से हमले से मैं उछल पड़ा ......
पर माँ और मामी को कोई शक़ ना हो ...इसलिए हालात पर क़ाबू रखते हुए मैने कहा " अरे माँ नीचे लगता है कोक्रोच मेरे पैर पर चल रहा था.....ज़रा टेबल के अंदर नीचे से कल फ्लिट डाल देना ...."
दीदी मेरी बात से हैरान थी ...और आँखों ही आँखों में उहोने मुझे शाबाशी दे दी और अपने हाथ की पकड़ और भी मजबूत कर ली ..और दूसरे हाथ से मुझे खिलाना शुरू कर दिया ..उनके हाथ के कमाल से मैं सिहर रहा था ....
" हां बेटा ..हो सकता है ...फ्लिट डाले भी काफ़ी दिन हो गये हैं ..मैं कल ही इसकी सफाई कर दूँगी ...तुम दोनों खाओ इतमीनान से ..मैं गरम रोटियाँ लाती हूँ ."
और दोनों औरतें चली गयीं किचन के अंदर .
"उफफफफफफ्फ़ दीदी आप भी ना ......अगर कहीं किसी ने देख लिया होता..????"
" ऐसे कैसे देख लेती ....और अब तू तो बड़ा हो गया है ना ....देख कैसे सब संभाल लिया तू ने .." अब मेरे लंड को अच्छी तरह दबा दबा के सहला रही थी और खाना भी खिलाए जा रही थी .....
मैने भी मौके का फ़ायदा उठाया और अपना हाथ भी टेबल के नीचे से उनकी जांघों के बीच ले जाते हुए उनकी चूत को उंगलियों से दबाना शुरू कर दिया .....अब उछलने की बारी उनकी थी ....पर वहाँ हम दोनों के अलावा और कोई नहीं था .....
हम मज़े लेते हुए खा रहे थे .....
तभी मामी गरम रोटियाँ लिए किचन से बाहर आईं ...टेबल पर रख दी और अंदर चली गयीं ..
हम दोनों अब सम्भल कर बैठ गये थे और जल्दी ही खाना हो हो गया ..मैं उठ गया
दीदी भी उठ गयी और उन्होने फुसफूसाया " मेरा दरवाज़ा भिड़ा रहेगा ..तू आ जाना ..रात में .."
मैने हां में सर हिला दिया .....
अपने कमरे में मैने अपनी बाकी की पढ़ाई पूरी कर ली ..10 बज चूके थे ....
मैं दीदी के कमरे की ओर चल पड़ा....... आज मन में बहुत गुदगुदी सी हो रही थी .... सोचते ही मेरा लंड खड़ा हो रहा था ..मैने हाथ से हल्के हल्के लंड पॅंट के उपर से ही सहला रहा था ..बड़ा मज़ा आ रहा था ..अंदर झाँका तो देखा मामी और दीदी बैठे बातें कर रहे थे ...मैं भी उनके साथ बैठ गया ...
बातें दीदी की शादी के गहनों के बारे हो रही थी ..... थोड़ी देर मैं सुनता रहा ..पर ना जानें क्यूँ आज मुझे उनकी शादी की बात अछी नहीं लगी ..इसलिए नहीं के वो मुझ से दूर हो जाएँगी ..पर शायद इसलिए के वो अब वो सब जो मेरे साथ करती हैं ...किसी और के साथ करेंगी ...मेरा मन जाने क्यूँ गुस्से से भर उठा ..और मैं वहाँ से अचानक उठ गया .
दीदी ने कहा "किशू ..बैठ ना कहाँ जा रहा है ....."
पर मैं उनकी बात अनसुनी करते हुए सीधा अपने कमरे में आ गया ....
थोड़ी देर बाद दीदी मेरे कमरे में आईं ....मैं लेटा था ....उन्होने पहले तो मेरे कमरे के दरवाज़ों को बंद किया ..और फिर मेरे बगल मे आ कर लेट गयीं ...और मेरे बालों को सहलाते हुए पूछा ..
"क्या हुआ किशू ..? तू वहाँ से क्यूँ वापस आ गया..क्या मेरी माँ वहाँ थी इसलिए ..???"
" नहीं दीदी....!"
"फिर क्या बात है ..बता ना ..प्लज़्ज़्ज़ ...मुझ से कुछ मत छुपा किशू ..मैं खुद इतनी परेशान हूँ अपनी शादी की बात से , और तू ये सब क्या कर रहा है..??"
" हां दीदी मैं भी परेशान हूँ आपकी शादी से ...."
" पर तू क्यूँ परेशान है..? तू तो खुश था मेरी शादी की बात से ....??"
" दीदी ........"
"हां हां किशू बोल ना ..."
"दीदी शादी के बाद आप जीजा जी के साथ भी तो वोई सब करेंगी ना ....जो मेरे साथ करती हैं ..???"
दीदी ने अपनी भवें सिकोडते हुए कहा
"हां रे करूँगी तो ज़रूर .."
" आप के शादी के गहनों की बात से मुझे अब ये लगा के आप की शादी सही में हो रही है ..... और आप किसी और के साथ ये सब करेंगी......मुझे अच्छा नहीं लगा ...मुझे बहुत गुस्सा भी आया ......." मैने दीदी से सारी बात कह दी ..ना जाने क्यूँ मैं उन से कुछ छुपा नहीं सकता था ...
" ह्म्म्म तो ये बात है ..... तू मुझे इतना प्यार करता है रे किशू ..??? तू मुझे किसी और के साथ नहीं देख सकता ..?? "
" हां दीदी .....मैं आप से बहुत प्यार करता हूँ ..बहुत ..."
" मैं भी तो उतना ही प्यार करती हूँ किशू ....."
और मैं उन से लिपट गया , उन्होने भी मुझे अपनी बाहों में भर लिया ..हम दोनों हिचकियाँ ले ले कर रो रहे थे ....एक दूसरे को चूमे जा रहे थे ..बार बार बाहों में जकड़े जा रहे थे ..मानों कभी अलग ना हों ...... दोनों के आँसू मिल कर एक हो रहे थे .....दोनों का गम एक था .....
काफ़ी देर तक हम ऐसे ही एक दूसरे से लिपटे एक दूसरे को चूमते रहे ..... सुबक्ते रहे ....
हम दोनों एक दूसरे को बार बार चिपकते , गाल चूमते ...होंठ चूमते ..एक दूसरे के पैरों से पैर मिला जाकड़ लेते ..मानों कभी अलग नहीं होना चाहते ....
दीदी सिसकते सिसकते कहती जातीं " हां रे शादी के बाद मेरा सब कुछ तेरे जीजा जी का होगा ..पर मेरा मन तो तेरा ही रहेगा ना किशू ..बिल्कुल तेरा ......हमेशा ..सारी जिंदगी .....तू ही तो मेरा सब कुछ है ...मेरी जिंदगी है रे..."
और फिर दीदी ने झट अपनी ब्लाउस और ब्रा उतार दी , मेरे सर अपने हाथों से थामते हुए अपने सीने से चिपका लिया ..मेरा चेहरा उनकी गुदाज , कड़ी पर फिर भी मुलायम चूचियों में धँस गया ......
अपनी चूची अपने हाथ से थामते हुए उसे मेरे मुँह में डाल दिया "ले ..मेला बच्चा ..पी ...देख कितनी गर्मी है तेरे लिए मेरे अंदर ....."
मैने भी अपना मुँह खोलते हुए होंतों के बीच उनकी चूची थामते हुए बूरी तरह चूसने लगा ......" हां दीदी बहुत गर्मी है यहाँ ..लग रहा है जैसे तुम मेरे अंदर आती जा रही हो ....." और सही में मुझे ऐसा महसूस हुआ उनकी चूची नहीं मैं उनकी जान , उनके दिल की धड़कन ..उनका पूरा अस्तित्व सब कूछ अपने अंदर समाए जा रहा हूँ .....एक अद्भुत अनुभव था ...
मैं लगातार चूसे जा रहा था ...चूसे जा रहा था , पूरे कमरे में चप चप की आवाज़ आ रही थी ..
" हां रे किशू बस चूस ..चूस ..मुझे पूरा चूस ले , निचोड़ ले ..भर ले अपने अंदर ....."
फिर उन्होने अपनी दूसरी चूची भी मेरे मुँह में लगा दी ......उफफफफफफफ्फ़ हम दोनों जैसे एक दूसरे के लिए पागल थे ..
इसी दौरान पता नहीं कब और कैसे दीदी ने अपनी साड़ी और पेटिकोट भी उतार दी थी और मेरे पॅंट के बटन भी खोल रही थी ..एक झटके में ही उन्होने मुझे भी नंगा कर दिया और मुझे अपने उपर करते हुए चिपका लिया बूरी तरह .......
हम दोनों के बीच अब हवा भी नहीं जा सकती ....उन्होने अपनी टाँगें भी मेरे जांघों पर रखते हुए वहाँ भी जाकड़ लिया ..मेरा कड़ा लंड उनकी चूत की दीवारों में रगड़ खा रहा था .....
एक एक अंग एक दूसरे से चिपका एक दूसरे को महसूस कर रहा था ...एक दूसरे को अपने में समा रहा था ......
अब दीदी ने मेरा चेहरा अपनी हाथों से थाम लिया .....अपनी जीभ मेरे मुँह के अंदर डाल दी और मुझ से कहा
" ले ले ......किशू ..तू ने छाती का रस तो पी लिया ना ..अब ले मेरे मुँह का रस भी ले ले ......चूस मेरी जीभ ..अच्छे से चूसना ..मेरा पूरा लार ..मेरा पूरा थूक ....सब कूछ ले ले ..कुछ मत छोड़ना ..है ना .....??"
"हां दीदी ..आज मैं आप का सब कुछ अंदर ले लूँगा ...सब कुछ ...आख़िर ये सब तो मेरा ही है ना दीदी ......"
और दीदी की जीभ चूसने लगा ... दीदी अपनी जीभ गीली करती जातीं और मैं चूस्ता जाता ...उफफफफफफफफफ्फ़ मैं मस्ती में था ..उनके लार का स्वाद अमृत जैसा था ..मैं पिता जा रहा था ..चूस्ता रहा था ......मैने अपनी जीभ भी उनके गालों के अंदर , उनके तालू , उनके कंठ तक ले जाता और चाट ता जाता ..हम एक दूसरे की हर चीज़ अपने अंदर ले रहे थे..
"हां हाआँ किशू ...चाट ले ...चाट ले ......अच्छा लग रहा है ना ..??? "
"हां दीदी बहुत अच्छा लग रहा है ...."
फिर दीदी ने अपना हाथ मेरे कड़क लंड पर ले गयीं ......उसे जाकड़ लिया ..उनकी चूत से तो बस लगातार पानी रिस रहा था ..अपनी गीली ऊट में अपने हाथों से मेरा लंड घिस रही थी ...... उनका चूतड़ उछल रहे थे .....अंग अंग कांप रहा था ..सिहर रहा था ..
मस्ती में वो कुछ भी बोले जा रही थी ..मैं भी आनंद और मस्ती में सराबोर था ......
मैं लगातार उनके मुँह के अंदर चाट रहा था उनकी जीभ चूस रहा था ...फिर मैने महसूस किया मेरा लंड उनके चूत की रस से बूरी तरह भीग गया था .....पूरी तरह गीला था .....
" दीदी ....आपकी चूत चाटने का मन कर रहा है ..देखिए ना कितना गीला है ..उसका रस भी अंदर लेना है.."
" अरे तो रोका किस ने है किशू ..??"
और उन्होने अपनी टाँगें फैला दी और अपनी उंगलियों से अपनी चूत की फांके भी चौड़ी कर दी
" आ जा ..मेला बच्चा .....चूस ...जो जी में आए चाट ले ..जहाँ जी में आए चूस ले ....ले एयेए "
मैं अपनी जीभ उनकी चूत में ले जाते हुए उनकी खूली , गुलाबी फांकों के अंदर डाल दी और लपा लॅप..सटा सॅट चाटने लगा ...... पूरी गीली चूत का रस अब मेरे मुँह के अंदर जा रहा था .....दीदी ने भी अपने चूतड़ को उपर कर लिया था और मेरे सर को थामते हुए चूत में धंसा लिया था..
मैं कभी चूस्ता , कभी चाट ता कभी अपने होंठों से उनकी चूत की पंखुड़ीयाँ दबा लेता ....
" हां ..हां किशू ..तू अब काफ़ी कुछ सीख गया है .....बस ऐसे ही करता रह ...उफफफफफफ्फ़ ....तू सही में मेरी जिंदगी है रे ....सही में ...देख ना तेरे जीजा मुझे चोद के भी इतना मज़ा नहीं दे सकते ..जितना तू सिर्फ़ चूस चूस के दे रहा है ....है....उूउउइईई माआआं .....आआआआः ....हां ..."
उनके मुँह से चोद्ना शब्द सुन ते मेरा लॉडा एक दम से फॅन फ़ना उठा ..और मैं काफ़ी उत्तेजित हो गया , मेरे उनकी चूत को चाटने की स्पीड बढ़ गयी ....
दीदी चूतड़ उछाल रही थी ....मेरे सर को जकड़ी थी अपनी टाँगें मेरी पीठ पर रखे मुझे अपनी ओर खींच रही थी .....मेरे में समान जाना चाह रही थी ..... सिसकारियाँ और आहों से कमरा गूँज रहा था ......
और फिर " हाइईइ रीईईईईई.....उफफफफफफफफफफफफ्फ़ किशुउऊुुुुुुुुुुुुुुुुउउ ले ले मेरी पूरी चूत ले ले ......आआआआआआआआआअ...." और जोरों से चूतड़ उछलते हुए एक जोरदार रस की फुहार मेरे मुँह पर छोड़ दिया उन्होने ...दो तीन जोरदार उछाल मारी उनकी चूतड़ ने , मेरा पूरा मुँह उनके रस से भर गया , और वह शांत हो कर पड़ गयीं ....
मेरा लंड पूरी तरह आकड़ा था ....
मैं हाथ चला रहा था , दीदी ने देखा ...वो झट से उठीं और मेरे लौडे को अपने हाथों में ले लिया ..उनकी गरम गरम हथेलियों के छूने से मेरा लॉडा और भी अकड़ गया ...लॉडा हाथ में थामे पहले उन्होने जीभ चलाते हुए मेरे मुँह में लगे अपनी चूत रस को चाटा और फिर मेरे लौडे को मुँह में डालते हुए कहा " वाह रे मेरा रस तो तू पी गया ...और अपना रस ऐसे ही हाथ से बाहर गिराएगा और वो भी मेरे सामने ........?????"
और उन्होने अपने होंठों से जकड़ते हुए बूरी तरह मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया ...अपने हाथ से सहलाती भी जातीं .......मैं तो वैसे ही काफ़ी एग्ज़ाइटेड था ..और दीदी के होंठ और जीभ के कमाल के सामने टिक नहीं पाया ...और मैने भी अपनी पिचकारी उनके मुँह मेी छ्चोड़ दी .......
उनका पूरा मुँह भर गया ...उन्होने एक भी बूँद बाहर नहीं गिरने दी ..पूरे का पूरा गटक गयीं ..और जो भी मेरे लंड में लगा था ..जीभ से सॉफ कर दी ...
हम फिर एक दूसरे से चिपके थे .....आँसू ने रस का रूप ले एक दूसरे को अंदर और बाहर से पूरी तरह सराबोर कर दिया था ....
हम उसी रस की मिठास , मधुरता और मादकता एक दूसरे की बाहों में महसूस किए जा रहे थे ..एक ऐसे सूख और आनंद में डूबे थे ..जिसे बताया नहीं जा सकता ..सिर्फ़ महसूस किया जा सकता था ..और हम दोनों एक दूसरे की बाहों में इसे महसूस कर रहे थे ....
मैने लेटे लेटे ही दीदी की टाँगों पर अपने पैर रख लिए ..दीदी आँखें बंद किए सूस्त पड़ी थी ...
मैं बस उन्हें निहारे जा रहा था ....मेरे लिए अगर कोई सुंदरता की छवि थी तो दीदी की छवि थी ,सुंदरता की देवी थी मेरे लिए ...... मैं उनको अपनी आँखों में ..अपने दिल में , अपने रोम रोम में बसा लेना चाहता था ..इतना के फिर कभी जिंदगी में मुझ से अलग ना हो पायें ...हर वक़्त मैं उनको महसूस करता रहूं...........
मैं बिना पलक झपकाए उन्हें ताक रहा था..
फिर मैं अपने सर को उठाता हुआ अपने होंठ उनके होंठों से लगाया और लगा बेतहाशा चूसने .......
दीदी ने आँखें खोल दी और मेरी तरफ देख रही थी.....वो समझती थी सब कुछ,
जैसे मेरे मन के अंदर झाँक रही थी ......मेरी ललक .मेरी तड़प , मेरी चाहत अपने लिए , वे सब समझती थी ....उन्होने चूपचाप अपने होंठ और फैला दिए ..मुँह और खोल दिया
"हाआँ किशू चूस ले .....जी भर ले अपना.......जब तक मैं हूँ यहाँ मुझे निच्चोड़ ले , समा ले अपने अंदर ....मैं हमेशा तेरे अंदर रहूंगी ....."
और मैं उनके उपर आ गया उनसे फिर बूरी तरह लिपट गया , टाँगों से टाँगे ..हाथों से हाथ , छाती से छाती , होंठों से होंठ ..एक एक अंग एक दूसरे को अपने में समा लेने की पुरजोर कोशिश में जूटा था..
हम सिसक रहे थे ..कराह रहे थे ..तड़प रहे थे एक दूसरे की बाहों में , एक अभुत्पूर्व आनंद में डूबे थे....
मैं अपने एक हाथ से दीदी की हथेली को जोरों से थामे था , मसलता जा रहा था ....इसमें भी एक अजीब ही आनंद था.....दीदी मुँह के अंदर ही अंदर सिसकारियाँ भर रही थी..तभी मेरा हाथ नीचे उनकी चूत पर पहून्च गया ..और मैं उसे सहलाने लगा और मेरी उंगलियाँ उनकी चूत के काँपते और थरथराते होंठों से होती हुई उनकी बिल्कुल गीली चूत के होल पर पहून्च गयी,
मैने कौतूहलवश दीदी से पूछा " दीदी ये होल क्या है..क्या इसी के अंदर लंड जाता है ???"
" उफफफफफफफफफ्फ़.........." वहाँ मेरी उंगली के स्पर्श से ही दीदी मचल उठीं " अरे भोले राजा येई तो सब कुछ है रे.......येई तो हमारा सब से बड़ा खजाना है .....तुम्हारे जीजू इसी होल के अंदर अपना लंड डालेंगे और मेरी सील तोड़ेंगे ....."
" ये सील का क्या मतलब दीदी..??"
दीदी ने अपनी उंगलियों से अपनी टाइट चूत फैला दी....और टाँगें भी ..देख ले अंदर ..."हर कुँवारी लड़की की चूत के अंदर एक पतली झिल्ली होती है ......उसे ही मैने सील कहा ....जो पहली बार लंड अंदर जाने से टूट ती है ..और लड़की का कुँवारापन टूट जाता है ...."
मैने अंदर झाँका ..मुझे कोई सील तो नहीं दिखाई दी पर जो दिखाई दी , उतने से ही मेरा लॉडा तंन हो गया था...
अंदर कितना मुलायम था...गुलाबी , पानी रिस रहा था, गुलाबी दीवारों पर रस ऐसे दिखते जैसे चमकते हुए मोतियों के दाने ...दीदी भी बातें करते इतनी मस्त हो गयीं थी के उनकी चूत की दीवारें अंदर फडक रही थी....
मेरा मन किया की मैं अपना लंड अंदर डाल दूँ .....पर मैं तो दीदी से बहुत प्यार करता था ना ..मैं कैसे उनका ये अनमोल खजाना ले सकता था..ये तो उनके पति के लिए ही था ....मेरा उस पर अधिकार नहीं था....मैं उनके सुहागरात का मज़ा कम नहीं करना चाहता..
"दीदी ये अनमोल ख़ज़ाना तो आप जीजा जी के लिए ही संभाल के रखो ...मेरा तो बहुत मन करता है अपना लंड अंदर डाल दूँ....मैं तड़प रहा हूँ दीदी ...."
"हां रे मैं समझती हूँ ..पर तू नहीं जानता मैं कितनी खुश हूँ तेरी बातों से ..मेला बच्चा सही में कितना समझदार है ..और मुझ से इतना प्यार और कोई नहीं कर सकता ....किशू ...पर तू निराश मत होना ..मेरे राजा ......तुम्हारे जीजा जी के बाद सिर्फ़ तुम्हीं ऐसे इंसान रहोगे जिसे मैं अपनी चूत का मज़ा दूँगी और ऐसा मज़ा दूँगी के बस ......तू जिंदगी भर याद रखेगा ........"
"हां दीदी मैं भी अपना एक एक पल उस दिन के इंतेज़ार में गुज़ार दूँगा ....हां दीदी..आप देखना मैं अपनी शादी भी जब तक आपकी चूत में अपना लंड नहीं डाल लेता..नहीं करूँगा.."
और मैने अपना हाथ उनकी चूत से हटा लिया और उस हाथ से उनकी दूसरी हथेली भी जाकड़ ली..और उनसे फिर से चिपक गया और उनकी चूची मुँह में भर चूसने लगा ....... मेरा लॉडा एक दम कड़क हो कर उन के जांघों और पेट से रगड़ खा रहा था.....मचल रहा था अंदर जाने को...
दीदी ने मेरी बेचैनी भाँप ली थी..
"अले अले मेला बच्चा ..इतनी बेचैनी..? अरे मेरे पास चूत के सिवा भी बहुत कुछ है किशू .तेरे लंड की बेचैनी मिटाने के लिए .....आख़िर तेरी स्वेता दीदी की ही तो चेली हूँ ना ....."
और वह पलंग के सिरहाने तकिया रख , उस पर अपनी पीठ टिकाए अपनी दोनों चूचियाँ हाथों से थामते हुए मुझ से कहा
" ले किशू चोद मेरी चूचियों के बीच..दोनों चूचियों के बीच अपना लंड पेल दे और ऐसे चोद जैसे तेरा लंड मेरी चूत के अंदर हो ...चल जल्दी कर आ जा .."
और मैं अपने घूटनों के बाल बैठ अपने हाथ से लंड थामते हुए उनकी चूचियों के बीच डाल कर लगा ताबड़तोड़ धक्के लगाने लगा ....
उनकी मुलायम गुदाज चूचियों के बीच लंड से चोदे जा रहा था ..मुझे नहीं मालूम था चूत की चुदाई कैसी होती है ..पर ये चुदाई उस से कम नहीं होगी इतना मुझे मालूम हो गया था
मेरा लंड चूचियों को चोद्ता हुआ उनके मुँह तक पहून्च जाता और दीदी ने फिर अपना कमाल दिखा दिया ..उन्होने मेरे सुपाडे को अपनी लप्लपाति जीभ से चाटना भी शुरू कर दिया ..
उफफफफफफफफफ्फ़ ये कैसी चुदाई थी..जिसमें चोद्ने और जीभ से चटाने ..दोनों का मज़ा मिल रहा था
मैं लगातार उनकी चूचियाँ चोद रहा था ....दीदी अपने हाथों से चूचियों को ज़ोर ..और ज़ोर और जोरों से दबाती जाती और मेरा लंड जैसे जैसे अंदर जाता मैं सिहर उठ ता , कांप उठता ..और जीभ की चटाई से मज़ा और भी बढ़ जाता ....
"हां ...हां ...किशू...हाआँ ..बस ऐसे ही धक्के लगा...उफफफफफफफफफफ्फ़ ..आआआआ......आ ज़ाआाआ....अपना पूरा रस मुझ पर छ्चोड़ दे.......आ जाआ........एयेए जाआ...मेला बच्चा ..."
दीदी की ऐसी बातों से मैं और भी एग्ज़ाइटेड होता जा रहा था.......
मेरा चोद्ना और भी तेज़ हो जाता ........
और फिर मैं टिक नहीं सका ..मेरी पिचकारी छूटने लगी ..दीदी की छाती पर..उनकी चूचियों पर , उनके मुँह पर ..मैं झटके पे झटका देते झाड़ रहा था ..मेरा पूरा बदन अकड़ता हुआ खाली होता जा रहा था
दीदी ने मुझे अपनी बाहों में ले लिया...."हां हां मेला बच्चा .....आ जा ..आ जा " मेरे सर को अपने सीने से चिपका लिया, मेरे बाल सहलाने लगी ....."अच्छा लगा ना ....???."
"हां दीदी बहुत अच्छा लगा"..मैं हाफते हुए कहा और उनके सीने पर सर रखे अपने आप को उनके हवाले कर दिया .......
"किशू..किशू .....मैं तेरी कर्ज़दार हूँ रे ...मैं अपना क़र्ज़ ज़रूर चूकाऊँगी एक दिन ..ज़रूर ..मेला बच्चा ..मेला बच्चा ...." वो मुझे चूमती जातीं ...मेरे बाल सहलाए जाती और प्यार और, आभार के आँसू बहाए जा रही थी..मैं उन आँसुओ से सराबोर ....एक असीम आनंद में डूबता जा रहा था .....
हम दोनों एक दूसरे की बाहों में थे , एक दूसरे को महसूस कर रहे थे ....पता नहीं कब दोनों एक दूसरे की बाहों में ही नींद की बाहों में खो गये ...
जब नींद अच्छी आती है तो खूल भी जल्दी ही जाती है......मैं सुबेह तड़के ही जाग गया ....दीदी अभी भी मेरी बाहों में सो रही थी...चेहरे पर ज़रा भी शिकन नहीं ....जैसे कितनी शांत हों...........उनकी चूचियों, छाती और चेहरे पर अभी भी मेरा रस लगा था..मैं अपने हाथ उनकी पीठ से लगाता हुआ उन्हें अपनी ओर उपर खींच लिया और अपनी लप्लपाति जीभ से चाट चाट कर सफाई करने लगा..क्या सोंधा सोंधा टेस्ट , और साथ में दीदी के शरीर का अपना एक अलग टेस्ट , उनके हल्के हल्के पसीने का स्वाद ..उनके बदन की खूशबू ...उफफफफफफफफफ्फ़ एक अजीब ही नशा सा छा गया...... ..मैं जोरों से चाट रहा था...दीदी की आँखें खूल गयीं, एक नज़र मेरी तरफ डाला..और फिर मुस्कुराते हुए आँखें बंद कर लीं और लेटे लेटे मेरे चाटने का मज़ा ले रही थी.........मेरा लॉडा सुबेह सुबेह तो ऐसे ही कड़क रहता है और आज जब पायल दीदी मेरी बाहों में थी मेरा लंड और भी कड़क हो गया........अब तक दीदी भी जाग गयीं ......उन्होने मंद मंद मुस्कुराते हुए मेरी ओर देखा और चूप चाप लेटी रहीं ....... मेरी हरकतों का मज़ा ले रहीं थी...
मैने उनकी जांघों को आपस में मिला दिया ..अपना लॉडा उनकी जांघों के बीच , पेल दिया और लगा उनकी जांघों के बीच उनको चोद्ने .......उफफफफफफफफ्फ़ .........क्या मस्त जंघें थी उनकी...मांसल , सॉफ्ट , गुदाज ...और साथ में उनकी चूचियाँ , उनके होंठ , उनका पेट ...उनकी नाभि ..चाट ता जाता ......
दीदी कितनी अंडरस्टॅंडिंग थीं ...मेरी हालत वह समझ रही थी ..उन्होने अपनी जांघों को और भी टाइट कर लिया .......उफफफफफफफफफफफफफ्फ़ ...मैं पागल हो उठा था ..मैने उन्हें अपने से बूरी तरह चिपका लिया और जोरदार धक्के पे धक्का लगाए जा रहा था..जैसे आज के बाद और कुछ नहीं .....
दीदी अपनी अलसाई आवाज़ में कहती जातीं .."वाह रे वाह ..तू भी कितना कुछ सीख लिया ...मेरी हर जागेह चुदाइ कर रहा है .. देख ना एक चूत के ना मिलने से तुझे और कितनी नयी नयी जागेह मिल रही है मुझे चोद्ने को...........हाां चोद रे किशू ...चोद ले रे ..जहाँ जी चाहे चोद ..सब कुछ तेरा ही तो है ....हाआँ अपनी ख्वाहिश पूरी कर ले..मैं भी तुझे खुश देखना चाहती हूँ ..... आआआहह चाट और चाट ..और चूस ....उईईईईईईई .....हाआँ मेरी नाभि के अंदर जीभ घूसा ...हाआँ ........जीभ से वहाँ भी चोद .....उफफफफफफफफफफ्फ़ ...........आाआऐययईईई.....हाँ हां ऐसे ही ....." वह अपना पेट और उपर कर लेती ..जिस से मेरी जीभ और भी अंदर घूस जाती उनकी नाभि में ....
और मेरा चाटना , चूसना , जांघों को चोद्ना ज़ोर और ज़ोर पकड़ता गया ..उनकी जंघें टाइट और टाइट होती गयी....उनकी जंघें मेरे लौडे के रस से इतनी गीली थीं के मुझे लंड पेलने में कोई दिक्कत नहीं होती ..एक दम मक्खन जैसा था
दीदी की चूत से भी लगातार पानी रिस रहा था, उन्हें अपनी नाभि में मेरे जीभ का चलाना बहुत ही एग्ज़ाइट कर रहा था .....
अपनी चूतड़ उछाल उछाल कर मस्ती में डूबी थीं ..और मैं उन्हें उनके पेट से उनको जकड़ा था , मुलायम और सपाट पेट ....जीभ नाभि के अंदर डाल देता ..और लंड जांघों के बीच एक अजीब मस्ती के सफ़र का आनंद ले रहा था..
"आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह......हाईईईईईईईईई..हाां किशू.........मेला बच्छााआआ ....आआआआअहह ....."
" दिदीइ.....आआआआआ ......बस और नहीं .......ऊऊऊऊऊऊ ..." और मैं उनके जांघों पर जोरदार पिचकारी चोद्ना शुरू कर दिया ...जांघों पर ..उनके पेट पर ...उनकी छाती पर ..लॉडा हाथ से थामे झटके पर झटका देता जाता ..मेरे रस की गर्मी..उसकी तेज़ फूहार से दीदी का सारा बदन झुरजुरी से कांप उठा और वह भी चूतड़ उछाल उछाल कर अपनी चूत से पानी छ्चोड़े जा रही थी ........
हम दोनों के अंदर की सारी मस्ती , सारी खूषी , सारी ललक बाहर आ रही थी ..एक दूसरे पर हम छिड़के जा रहे थे ....
कुछ देर तक हम ऐसे एक दूसरे की बाहों में पड़े थे......
अब तक सुबेह काफ़ी निकल चूकि थी ..बाहर चिड़ियों का चहचाहना और सूरज की किरणों ने हमारी आँखें खोलीं ....
दीदी ने अंगडायाँ लेते हुए मुझे अपने उपर से हटाया ......उफ़फ्फ़ दीदी की अंगड़ाई ने फिर से मेरे अंदर हलचल मचानी शुरू कर दी....
पर इसके पहले के मैं कुछ कर पाता , "बस किशू ....देख अब सब लोग जाग गये हैं ..कोई आ जाए तो मुश्किल हो जाएगी..मैं जा रही हूँ " और वो मेरे लौडे को कस के दबाती हुई बाहर निकल गयी ....
मैं दीदी को देखता रहा.......और फिर मैं भी बाथरूम के अंदर चला गया ...
उस दिन नाश्ते के टेबल पर जब दीदी ने मुझे खिलाना शुरू किया ..मेरी माँ ने दीदी के हाथ थामते हुए कहा "अरे पायल ..अब तो तू इसे अपने हाथ से खाने दे...तू जब चली जाएगी तो किस के हाथ से खाएगा ..क्या भूखा ही रहेगा ..??" और फिर मेरी तरफ देखते हुए कहा "किशू तू भी खुद से खाना शुरू कर दे ..दीदी का लाड़ प्यार बहुत हो गया..!"
मैं जानता था एक दिन ये होनेवाला ही है ..मैं चूप रहा.....मुझे अंदर से जैसे किसी ने झकझोर दिया था..मैं आसमान से सीधे ज़मीन पर आ टपका था..वास्तविकता और सचाई मेरे सामने खड़ी थी.....
दीदी समझ गयीं मुझे गहरा धक्का लगा था ....." ठीक है बुआ ..पर आज तो खिलाने दे ..कल से किशू खुद ही खाएगा ..है ना किशू .....?"
मैं क्या बोलता ??? ..एक बहुत ही आभार से भरी नज़रों से दीदी की ओर देखा ..दीदी अपने आँचल से अपनी आँखें पोंछते हुए मुझे खिलाने लगीं.
शाम को जब स्कूल से आया ..दीदी ने दरवाज़ा खोला ...... आज फिर घर में सन्नाटा था ..
" कहाँ हैं सब लोग दीदी ..???" मैने पूछा ..
'' माँ और बुआ शादी की शॉपिंग को गये हैं और पापा ( मामा) और फूफा ऑफीस से कब तक आएँगे किसे मालूम..????"
मेरे चेहरे पे चमक आ गयी ..मेरा मन गुदगुदी से खिल उठा
मैने दीदी को अपनी बाहों में जाकड़ लिया , अपने सीने से लगाता हुआ उन्हें चूमने लगा
" ओओओओओओह्ह दीदी यानी के हम दोनों अकेले .....??????"
" अरे बाबा अभी तो छ्चोड़ ना किशू ..चल हाथ मुँह धो ले साथ में नाश्ता करते हैं ....फिर कुछ और .." और मुस्कुराते हुए मुझे अपने से अलग किया .
तभी कॉल बेल की तीखी आवाज़ आई........
" अभी कौन आ गया.." मैने झुंझलाते हुए बड़बड़ाता हुआ दरवाज़ा खोला..
बाहर स्वेता दीदी खड़ी थीं.........
मैं एक टक उन को(स्वेता दीदी) देखता रहा....मेरी आँखें चौंधिया गयीं , पालक झपकने को तैयार ही नहीं ....
उन्होने कपड़े इस तरह पहेन रखे थे.....कपड़े बदन ढँकने के बजाए उन्हें और उभार रहे थे...मानों एक एक अंग कपड़ों को चीरता हुआ बाहर आ जाए ...पतली और तंग टाइट ब्लाउस ......उनकी चूचियों की उभार छुपाने की नाकामयाब कोशिश में जुटी थीं ....गले से नीचे नंगा सीना ........साड़ी नाभि से नीचे ....पेट उघ्ड़ा ......आँचल कंधों से फिसलता हुआ .........
" अरे क्या देख रहा है किशू ..मुझे अंदर तो आने दे..क्या बाहर ही खड़ी रहूं..???" स्वेता दीदी की आवाज़ से मेरा ध्यान उनके शरीर से उनकी आवाज़ पर आया....
"ओह..अरे हां आइए ना .." और मैं दरवाज़े से हट ता हुआ उन्हें अंदर आने का इशारा किया....
मटकती हुई चाल से स्वेता दीदी अंदर आईं .....मैं उनके पिछे था ...उनकी मटकती चाल से उनके दोनों चूतड़ साड़ी से उछल बाहर आने को मचल रहे थे.... उधर उनके चूतड़ उछल रहे थे और इधर मेरे पॅंट के अंदर भी उछल कूद मची थी.......
" पायल कहाँ है किशू..?" उन्होने हंसते हुए पूछा .
"दीदी शायद किचन में हैं ...आप जाइए ना ..देख लीजिए .." मेरा गला सूख रहा था .....स्वेता दीदी की मटकती चाल से , उनकी अजीब मुस्कान से ..उनकी तीखी और पैनी नज़रों से ..मानों वह मुझे खा जाना चाहती हों .....
थोड़ी देर बाद दोनों दीदी किचन से बाहर निकलीं ..
पायल दीदी ने कहा " चल किशू मेरे रूम में ...हम तीनों नाश्ता करते हैं ....."
स्वेता दीदी हाआँ में हां मिलाते हुए मुझे अपनी बाहों से अपने बगल भींच लिया , मैं झिझकता हुआ उनके करीब हो गया
" अरे झिझक क्यूँ रहा है किशू ..मैं भी तो तेरे लिए पायल जैसी ही हूँ ना ..बस तू जैसे अपनी पायल दीदी के साथ खूल कर रहता है ना ......मेरे साथ भी ऐसे ही रहना ..क्यूँ पायल मैने ठीक कहा ना ..??" और मुझे अपने से और भी करीब चिपका लिया ...मैं उनके गुदाज और मुलायम शरीर के स्पर्श , उनके बालों की सुगंध , उनके साँसों के झोंकों से मदहोश हुआ जा रहा था
" अरे हां किशू तू ज़रा भी मत हिचकिचा..स्वेता दीदी बहुत अच्छी हैं , तुम्हारे लिए मेरे से कुछ भी कम नहीं ........." और पायल दीदी की इस बात पर दोनों जोरों से हँसने लगी और हम दीदी के कमरे के अंदर आ गये थे ..
मेरी समझ में कुछ कुछ तो आ ही रहा था ..लगता है दीदी ने अपने और मेरे बारे स्वेता दीदी को सब कुछ बता दिया था ......
मुझे स्वेता दीदी ने अपनी गोद में बिठा लिया ...मैने पायल दीदी की ओर देखा ....मानो मैं कह रहा हूँ...." दीदी मैं जब आप की गोद में नहीं बैठ ता इनके गोद में कैसे बैठूं ..??"
दीदी ने मेरी नज़रों की बात समझ ली और कहा " मेरा राजा भाय्या ..आज पहली बार है ना स्वेता दीदी के लिए ..तू उनकी गोद में आज बैठा रह .." और फिर स्वेता दीदी की तरफ देखते हुए कहा .." स्वेता ..किशू अब बहुत बड़ा हो गया है ..... " और फिर दोनों हँसने लगे ..
" हां रे पायल सही कह रही है तू ..मैं भी देख रही हूँ ना .." और उन्होने मेरे पॅंट के अंदर बने तंबू की तरफ इशारा किया .......जो काफ़ी उँचा हो गया था ..मेरे चूतड़ उनकी गद्दे जैसी मुलायम और गर्म जांघों के उपर था और मुझे अच्छा लग रहा था ...
फिर उन्होने झट अपनी उंगलियों से पॅंट के बटन खोल दिए और कहा " देखें तो ज़रा कितना बड़ा हो गया है ...????"
बटन खुलते ही मेरा लंड उछलता हुआ बाहर आ गया.........अभी भी 4-5 इंच के बराबर तो था ही पर काफ़ी मोटा था ...........
स्वेता दीदी ने झट उसे अपनी मुट्ठी से पकड़ लिया और सहलाने लगीं जैसे उसे महसूस कर मेरे बड़े होने का सबूत देख रही हों ..
पायल दीदी ने मुझे खिलते हुए स्वेता दीदी से पूछा.." क्यूँ दीदी ..अब हो गयी ना तस्सली .? कितना बड़ा है अब मेरा किशू ...??"
उनकी पूरी हथेली मेरे मोटे लंड से भरी थी ...स्वेता दीदी उसे हल्के हल्के दबाते हुए कहा "हां री पायल बहुत बड़ा हो गया है " और धीरे से मेरे लंड की चॅम्डी उपर नीचे करने लगीं ..
मेरे पूरे बदन में झुरजुरी होती जा रही थी ...उन दोनों की बातों से स्वेता दीदी से मेरी झिझक भी दूर हो गयी थी.........
दीदी का हाथ मुझे खिला रहा था और स्वेता के हाथ मेरा लंड सहला रहे थे .दोनों दीदी के बीच मैं मस्ती और आनंद के लहरो में हिचकोले ले रहा था..मैने अपने आप को उनके हवाले कर दिया था...
मेरा खाना ख़त्म हो चूका था दीदी ने थाली उठाई और किचन में रख घर के दरवाज़े को अच्छी तरह बोल्ट कर दिया , वापस आईं और हमारे बगल बैठ गयीं
मैं अभी भी स्वेता दीदी की गोद में ही था ........और मेरा लंड उनके हाथ में ...स्वेता दीदी को मेरा चिकना लंड सहलाने में बड़ा मज़ा आ रहा था...... शायद जितना मज़ा मुझे आ रहा था उस से कहीं ज़्यादा उन्हें ..उनकी आँखें बंद थी और अब एक हाथ से मेरा लंड सहला रही थी और दूसरा हाथ अपनी साड़ी के अंदर डालते हुए अपनी चूत सहला रही थी......
दीदी ने स्वेता की हालत देखी.उनकी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा था......पतली और तंग ब्लाउस के अंदर चूचियाँ कड़क हो गयीं थीए , नंगा सीना दिल की तेज़ धड़कनों से उपर नीचे हो रहा था........
उन्होने चूपचाप उनके ब्लाउस के बटन खोल दिए ..ब्लाउस उनके सीने से अलग कर दिया और ब्रा के स्ट्रॅप्स एक झटके में ही खोल दी...उनकी कड़क चूचियाँ मेरे चेहरे पर उछलती हुई लगी.....मैं उनकी चूचियाँ देखता रहा...गोल गोल ..भारी भारी , नुकीली पर गोल घुंडिया एक दम टाइट ........
" अरे देख क्या रहा है मेरे भोले राजा...मेरी चूचियाँ तो ऐसे चूसता है जैसे आम चूसता है.........चल इन्हें भी चूस ..." दीदी ने मुझे बड़े प्यार से फटकारा और स्वेता की एक चूची अपने हाथ से थामते हुए मेरे मुँह में ठूंस दी....
मैं अपनी लप्लपाति जीभ और चुभलाते होंठों से स्वेता की चूची पर टूट पड़ा ...होंठों से दबाते हुए और जीभ से चाट ते हुए ...स्वेता कांप उठी ..उनकी मेरे लंड पर पकड़ और मजबूत हो गयी.........और अपनी चूत का सहलाना भी तेज़ हो गया .......उनके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी.........आँखें मस्ती में बंद थीं
तभी दीदी उनकी दूसरी जाँघ पर बैठते हुए अपना मुँह उनकी दूसरी चूची पर लगा दिया और लगीं उसे चूसने ...
एक साथ दोनों चूचियों की चूसाई ......स्वेता कांप उठी..उनका सारा बदन सिहर उठा...
"हाइईईईई रे हाइईइ...दोनों भाई बहन ...उफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ ..हाआँ हाां चूसो ..मेरा पूरा रस चूस लो ..उफफफफ्फ़ "
दीदी का चेहरा मेरे चेहरे से बिल्कुल सटा था ........उनकी साँसें और मेरी साँसें टकरा रही थी...मैं बीच बीच उनके होंठों को भी चूस लेता .........
हम तीनों एक दूसरे से चिपके अपनी अपनी हरकतों में डूबे थे ..
तीनों बदहावाश थे ........ना कपड़ों का ध्यान ना अपने होश का ख़याल .....
मस्ती का आलम छाया था..इसी मस्ती में हम एक दूसरे के कपड़े उतारते जा रहे थे ..जब जिसका मूड हुआ किसी के कपड़े खींच देता ........
थोड़ी ही देर में तीनों नंगे एक दूसरे के बदन से खेल रहे थे ..एक दूसरे से लिपटे थे ..
मैं कभी स्वेता दीदी की चूची चूसता , कभी दीदी की चूचियाँ मसल देता .....कभी उनके पेट सहलाता ..कभी स्वेता दीदी की नाभि के अंदर अपनी उंगली डाल देता .....अब मैने भी स्वेता दीदी की चूत में अपनी उंगली लगाई.......उनके खुद की उंगली चलाने से पूरी तरह गीली थी उनकी चूत...मेरी उंगली लगते ही उन्होने अपनी उंगली हटा दी और अपनी उंगली पायल की चूत में लगाते हुए घिसना चालू कर दिया .......
स्वेता दीदी एक हाथ से मेरा लंड सहला रही थी , दूसरे से पायल दीदी की चूत .......मेरा लंड कड़क और कड़क होता जा रहा था , मेरी मस्ती बढ़ती जा रही थी..मैं जितनी मस्ती मेी आता जाता..स्वेता दीदी की चूत उतनी ज़ोर से सहलाता जाता ..मेरी उंगलियाँ उनकी चूत की फांकों पर फिसल रही थी...और इधर स्वेता जितनी मस्ती में आती पायल की चूत उतनी ही तेज़ी से मसल्ति जाती.....
और पायल दीदी तो उनकी चूचियों पर ही टूट पड़ी थीं .............
चप..चप.....पच ..पुच...लॅप लप ...आआआ....उईईईईईई.......हाइईईईईई...की आवाज़ लगातार आ रही थी
और इसी मस्ती की दौर में स्वेता का बदन अकड़ गया ..झटके खाने लगा ....उनके हाथ ढीले पड़ गये ..और उन्होने बूरी तरह अपने चूतड़ उठाए चूत से पानी छोड़ना शुरू कर दिया ...मैं हैरान था .......उनकी चूत से धार इतनी तेज़ निकल रही थी ..मानों वह पेशाब कर रही हों ......
शायद इस तरह एक साथ दोनों चूचियों की चुसाइ , और उनके बदन का एक साथ मेरे और दीदी के सहलाने का असर था...... काफ़ी दिनों से उनकी चुदाइ भी नहीं हुई थी.......अपने पति से अलग थीं .....काफ़ी दिनों से ...इसका मिला जुला असर था ...... उनका इस तरह झड़ना
तभी दीदी ने मेरा कड़क लंड देखा ...इतना कड़ा था के हिल रहा था ,,उन्होने झट अपनी हथेली से उसे जकड़ते हुए जोरों से मुझे मूठ मारने लगीं " हाई रे मेला बच्चा ...ले अब जल्दी आ जा ...हां मेरे हाथ में ही छ्चोड़ दे ..आ ज्जा .."
मैं तो पहले ही से तड़प रहा था दीदी के दो चार बार हाथ उपर नीचे होते ही उनके हाथ में मैने पिचकारी छ्चोड़ दी ...
मैं" दीदी ..दीदी ......." की चीख मारते हुए उन से बूरी तरह लिपट गया....और उनकी चूत में उंगली घिसने लगा ...जो अब तक बूरी तरह गीली हो चूकि थी .......उनकी चूत की फाँक में दो चार बार उंगली उपर नीचे होते ही दीदी भी मुझ से लिपट गयीं और चूतड़ उछालते हुए अपनी चूत से रस की बौछार कर दी.........
कहानी जारी रहेगी………. महँगी चूत सस्ता पानी -5
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