कजिन सेक्स

महँगी चूत सस्ता पानी -2

By किशोर Published on पढ़े जाने की संख्या: 1487

दोस्तों आपने मेरी कहानी का पहला एपिसोड “महँगी चूत सस्ता पानी -1“ पढ़ा होगा.
अब आगे...

"उफफफ्फ़ ..दीदी आँसू मत बहाओ प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़....बताता हूँ बाबा बताता हूँ..पर तुम डांटना ....मत "

और मैने अपने हाथो से उनके आँसू पोंछे ..वो अब मुस्कुरा रही थी ..दीदी भी अजीब ही थीं ..पल में तोला पल में रात्ति .....

"दीदी जब से मैने आपकी शादी की बात सूनी है ना ....."

"हां हां बोल ना ....क्या हुआ मेरी शादी की बात से ..??'"

" दीदी आप मुझे ऐसी लग रहीं जैसे अब आप मेरी बहन नहीं हैं .... "

" अरे बाबा मैं तो वोई पायल रहूंगी ना भोले राजा ....फिर तेरी बहन कैसे नहीं हुई .."

" ओह मैं कैसे समझाऊं दीदी ..... मेरा मतलब आप मुझे अब अछी लगने लगी हो ..""

" अरे बाबा तो क्या मैं पहले बूरी थी ....."

" नहीं दीदी ऐसा नहीं .....उफफफ्फ़ मैं कैसे बताऊं .... मुझे समझ नहीं आ रहा .."

" सॉफ बोल ना किशू ..घबडा मत ..मैं बूरा नहीं मानूँगी ....."

" ठीक है तो सुनो ...." मैने भी सोच लिया के अब चाहे जो भी हो देखा जाएगा ..अपने मन की बात बता ही दी जाए .."दीदी आप मुझे ऐसे लगती हैं जैसे मैं आप से प्यार करूँ ..... "और मैं इतना कहते ही बिल्कुल सन्न था के दीदी ने अब थप्पड़ लगा ही दिया ..

" अरे बाबा प्यार तो तू करता ही है अपनी बहन से ..??"

" नहीं दीदी अब बहन वाला प्यार नहीं ......."

और दीदी मेरी इस बात से थोड़ी चौंक पड़ीं ....उनके चेहरे पे एक आश्चर्या का भाव आया ...... आँखें चौड़ी हो गयीं ..

और मैं आँखें बंद किए अपने गाल पर उनके थप्पड़ का इंतेज़ार कर रहा था........

मैं झन्नाटेदार थप्पड़ की सोच में आँखें बंद किए दीदी की हथेली का अपने गाल पर इंतेज़ार कर रहा था ..उनकी हथेली मेरे गाल पर पड़ी तो ज़रूर ..पर ये झन्नाटेदार थप्पड़ नहीं था ..... एक प्यार भारी हल्की सी चपत थी ... मैं फिर से हैरान था दीदी के इस रवैय्ये से ....

मैं एक टक उन्हें देख रहा था ..... उनकी आँखों में मैने वोई देखा ... जो मेरी आँखों में था ...एक भूख ...

हम दोनों एक दूसरे को उसी भूखी निगाहों से देख रहे थे ....किंतु एक झिझक ..एक संकोच .. अभी भी था जो हमें रोके था .... भाई बहन का रिश्ता अभी भी हावी था ..हम इस रिश्ते से भी काफ़ी आगे निकलना चाह रहे थे ..इस रिश्ते को और भी विस्तृत करना चाह रहे थे ..भाई बहन की सीमाओं को लाँघ कर एक औरत और मर्द का रिश्ता ...ऐसा रिश्ता जहाँ कोई बंधन नहीं ... नारी और पुरुष का रिश्ता ....

मैने सॉफ सॉफ देखा दीदी कांप रही थी , उनके हाथ जैसे तड़प रहे थे मुझे थामने को ...मैं बस चूपचप उन्हें बिना पलक झपकाए देखे जा रहा था ....जैसे मैं उन्हें अपनी आँखों में समा लेना चाहता हूँ ...

और तभी एक झन्नाटेदार थप्पड़ पड़ा मेरे गाल पर ....जिसकी अपेक्षा मुझे पहले थी ..पर अभी इस वक़्त ??....जब मैं कुछ और ही सोच रहा था ..मेरा सारा नशा कफूर हो गया ..ये क्या हो गया..दीदी के भी अंदाज़ निराले ही होते थे .....

" अरे बेवक़ूफ़ .... सिर्फ़ मुझे तकता रहेगा यह कुछ करेगा भी ..?? मैने कहा था ना जो कहना है जो करना है कर ले ..?? तू क्या चाहता है मैं नंगी हो कर तेरे सामने खड़ी हो जाऊं ....???? " दीदी झल्लाते हुए चीख पड़ीं ...

मैं जैसे सोते से जाग उठा ...उनके थप्पड़ ने मेरी झिझक दूर कर दी....उनके थप्पड़ ने भाई बहन के बीच का परदा चीर डाला .....

मैने उन्हें अपनी बाहों में जाकड़ लिया ..अपने से चिपका लिया ...उनकी छाती और मेरा सीना जैसे एक हो गये हों..उनके स्तन मेरे सीने से ऐसे चिपके ...लगा जैसे सपाट हो गये हों ...आआहह मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे कुनकुने पानी से भरा गुब्बारा मेरे सीने में फॅट जाएगा ..थोड़ी देर इसी तरह चिपकाए रहा , उनका सर मेरे कंधे पर इस तरह पड़ा था मानो दीदी ने अपने आप को मेरे हवाले कर दिया हो ... किसी औरत का इस तरह आत्मसमर्पण ..मेरे लिए एक अजीब ही अनुभव था , मेरी समझ में नहीं आ रहा था ये सब क्या हो रहा है , पर जो हो रहा था अपने आप हो रहा था ..बस होता जा रहा था ..फिर मैने उन्हें अपने सीने से अलग किया ..उनके कंधों को थामे उनका चेहरा अपने सामने कर लिया ...और टूट पड़ा उनके गालों पर ..उनकी गर्दन , उनका सीना चूम रहा था , चाट रहा था ....मुझे तो ये भी नहीं मालूम था प्यार कैसे किया जाता है ...दीदी की सारी अस्त व्यस्त हो गयी थी ..आँचल बिस्तर से नीचे लटक रहा था ...उनकी साँसें तेज़ थीं ..वो हाँफ रही थी .....

हाफते हुए उन्होने दबी ज़ुबान में चीखते हुए कहा " अरे बेवक़ूफ़ दरवाज़ा तो बंद कर ले....."

मैं फ़ौरन उठा , भागते हुए दरवाज़े से पहले झाँका ...कहीं कोई है तो नहीं ..फिर बंद कर दिया ...वापस पलंग की तरफ बढ़ा ...दीदी लेटी थीं ...उनका आँचल अभी भी नीचे लटक रहा था ..बाल अस्त व्यस्त थे ..सारी घुटनों तक उठी हुई थी ...उफ्फ उनकी गोरी गोरी मांसल पिंदलियाँ ... मैं उनकी पिंदलियाँ चूमने लगा ..चाटने लगा ..वो सिहर उठीं ... मुझे अपने उपर लिटा लिया और मुझे अपनी छाती से लगाया बूरी तरह चिपका लिया .और लगीं मेरे होंठ चूसने ..... उफ़फ्फ़ ऐसा लगा जैसे मेरे दोनों होंठ उनके मुँह के अंदर अब गये तब गये ....हम दोनों पागलों की तरह बस चूमे जा रहे थे ....

थोड़ी देर बाद चूमने चाटने का सिलसिला कम हुआ ....एक शुरुआती आँधी आई थी ..जैसे बाँध टूट ता है ..पानी की धारा

एक दम से फूट पड़ती है..वैसे ही हम दोनों के अंदर से भावनाओं की धारा फूट पड़ी थी ....अब कुछ शांत हुई थी ..

मैं उनके बगल लेटा था ..दोनों की साँसें तेज़ थी .... हम दोनों टाँगें फैलाए अगल बगल लेटे थे ....

कोई कुछ बोल नहीं रहा था ... कमरे में सिर्फ़ साँसों की आवाज़ थी ...

फिर उन्होने चुप्पी तोड़ी " किशू ....तुम्हें दर्द हुआ क्या ......??" और मेरा गाल जहाँ थप्पड़ लगा था ..सहलाने लगी ...." "मैं भी कैसी पागल हूँ .."

" आप भी ना दीदी ..चलो कुछ नहीं ... आप का थप्पड़ भी कितना सही वक़्त पे था ..वरना कुछ भी मैं नहीं कर पाता .."

" हां रे मैं जानती थी ना ..तू है ना भोले बाबा "

" पर दीदी एक बात मेरी समझ में नहीं आ रहै ..इस एक दिन में ही अचानक क्या हो गया हम दोनों को ..??? "

" मैं अपने बारे तो बता सकती हूँ ..पर तुम्हें क्या हुआ ..???"

" पहले आप बताइए दीदी ..फिर मैं बताऊँगा .."

"नहीं पहले तू बता ..."

" दीदी जब मैने आपकी शादी की बात सूनी ..मुझे आपका दूसरा रूप , किसी की बीबी का रूप भी दिखा ...और जब उस रूप में मैने आपको देखा ...आप मुझे कितनी अच्छी लगीं .....कितनी सुन्दर ...और उसी वक़्त मेरा दिल किया आप को प्यार करूँ..."

" ह्म्‍म्म्म ..मेरा क्या अच्छा लगा रे ..??''

" सब कुछ ...दीदी आप की हर चीज़ इतनी अच्छी है.... चलिए अब आप बताइए ना .."

" ठीक है तो सुन....किशू ...जब माँ ने मुझे शादी पक्की होने की बात बताई...मेरे दिमाग़ में पहली बात ये आई के मैं तुम से दूर चली जाऊंगी..मुझे एक अजीब धक्का सा लगा...... और मैं फूट फूट के रोने लगी.......तभी मैने सोचा के जब तक यहाँ रहूंगी तुझे कोई कमी नहीं होने दूँगी ..... और जब तुझे रोते वक़्त सीने से चिपकाया था ना ...मुझे भी बहुत अच्छा लगा था........ "

" ह्म्‍म्म्म..तो दीदी आप को मैं अच्छा लगा..?? क्या अच्छा लगा ..??'

" अरे क्यूँ मरा जा रहा है सुन ने को.... धीरे धीरे , सब पता चल जाएगा ...... " और उन्होने अपनी टाँग मेरी जांघों पर रख दिया , अपने हाथ मेरे सीने पर रखे हल्के हल्के सहलाना शुरू कर दिया

किसी भी औरत का मेरे इतना नज़दीक आना , मेरी शरीर से खेलना ..ये सब इतना नशीला ,इतना प्यारा होगा मैने कभी नहीं सोचा था .....मेरा पूरा बदन कांप रहा था ..मैं आँखें बंद किए आनेवाले सुख और मस्ती के सपनों में खोया था ..........

उफफफफ्फ़ उनकी हथेली और उंलगलियों में मानों जादू था .....

..मैं आँखें बंद किए अपने सीने पर उनकी हथेली और उंगलियों के खेल से मस्ती के एक ऐसे लहर में था ..मानों में हवा में उड़ रहा हूँ ....मैं सीधा लेटा था ..पीठ के बल ...दीदी ने अपनी एक टाँग अपनी साड़ी उपर कर मेरे जांघों पर रखा हुआ था ..घूटने से मेरे पॅंट के उपर हल्के हल्के घिस रही थी ..और हथेली और उंलगियों से मेरे सीने पर हाथ घूमा घूमा कर सहलाए जा रही थी ... उनका सर मेरे उपर था इस तरह की हम दोनों का चेहरा आमने सामने था ....

"कैसा लग रहा है .. किशू ..?" उन्होने भर्राई आवाज़ में पूछा

"मत पूछो दीदी ..... में तो मानो स्वर्ग में हूँ ..." मेरी आवाज़ भी भर्राई हुई थी ...

मेरे पॅंट के अंदर उनके घूटने ने हलचल मचा रखी थी .... पॅंट के उपर हल्की हल्की घिसाई से मैं सिहर रहा था ...मेरा लंड मानों पॅंट फाड़ कर बाहर आने को उतावला हो रहा था....

मैं अपनी हथेलिओं से उनके दोनों गालों को सहलाने लगा ...दीदी की भी आँखें बंद हो गयीं थी मस्ती में ,.....

आँखें बंद किए किए ही उन्होने अपनी भर्राई आवाज़ में कहा

"किशू ....??"

"हां दीदी ...."

"तू जानता है मैं ये सब तेरे साथ क्यूँ कर रही हूँ ..???"

"क्यूँ दीदी..?"

"देख किशू मैं चाहती हूँ ना के शादी से पहले अपने आप को भी इस खेल में तैयार कर लूँ ....मैं अपने पति को खुश कर देना चाहती हूँ....इतना के वो मेरे लिए पागल हो जाए ....और दूसरी बात तुझ से जुड़ी है ..."

वो बोलती भी जा रही थी और अपने नंगे घूटने से मेरे लंड की घिसाई और हथेली और उंगलियों से सीने का कुरेदना भी जारी था ....अपने नाख़ून भी हल्के हल्के मेरे सीने पर गढ़ा देती

मैने अपनी उंलगियों से उनके मुलायम होंठों को दबाते हुए कहा

" अरे दीदी मेरे होनेवाले जीजू और आप के बीच मैं कहाँ से आ गया ..???"

उन्होने मुझे अपने सीने से चिपका लिया और अपने स्तन से मेरे सीने को सहलाते हुए कहा

" है ना किशू ..ये सब खेल मैं तुझ पर आजमाऊंगी ..मैने शाम को देखा ना तू हाथ से काम चला रहा है. .....जब मैं तेरे सामने हूँ ....फिर इसकी क्या ज़रूरत ..ले ना किशू ....कर ले जी भर के मुझे प्यार ..तू संतुष्ट रहेगा तभी तो तेरी पढ़ाई भी ठीक से होगी...मैं नहीं चाहती तेरी पढ़ाई में कुछ मेरे कारण प्राब्लम हो ...."

दीदी मुझे चूम रही थी ....कभी होंठों को, कभी गालों को ....और अब उनका हाथ मेरे पॅंट की बटन की तरफ पहूच गया था और उसे उतारने की कोशिश में थी .....

मैं बिल्कुल सन्न था ..पर मैने कुछ नहीं किया ...मैने अपने आप को दीदी के हवाले कर दिया था .....

" दीदी आप कितनी अच्छी हैं ..मैं आप की हर बात मानूँगा, आप जैसा कहेंगी मैं करूँगा ..."

" हां किशू ...." अब तक उन्होने मेरे पॅंट को मेरे घूटनों से नीचे कर दिया था ..और मेरा लंड बिल्कुल आज़ाद ,खूली हवा में सांस लेता हुआ कड़क लहरा रहा था ......

उन्होने अपनी मुलायम हथेली से उसे थाम लिया और अपने गालों से लगाया ....होंठों से मेरे सुपाडे को चूम लिया

"देख तो बेचारा कितना तड़प रहा है..मेला लाजा ..मेला भोलू ....अब इसका भी ख़याल मैं रखूँगी ..तुम्हें हाथ हिलाने का मूड करे ना ..मुझे बोल देना ..अब ये मेरा है ......

उन्होने मेरी पॅंट घूटनों से भी उतार दी , नीचे मैं पूरा नंगा था ......और मेरी जाँघ पर बैठ गयी ..इस तरह के मेरा लंड उनकी जांघों के बीच था और अपनी जांघों से बड़े प्यार से हल्के हल्के दबा रही थी ...उफ़फ्फ़ मेरी जान निकलने वाली थी ...मुझे लगा जैसे मेरे पूरे शरीर से सब कुछ निकलता हुआ मेरे लंड में जमा होता जा रहा है ..अब फूटा तो तब ......मैं सिहर रहा था ....

फिर उन्होने उसी पोज़िशन में बैठे मेरी शर्ट उपर कर दी और उसे भी उतार दिया ...... मैं बस सब कुछ चूप चाप देखे जा रहा था ...अपनी फटी फटी आँखों से ......

मुझे पूरा विश्वास था ना उन पर ....

फिर मेरे दोनों जांघों को अपने पैरों के बीच करती हुई खड़ी हो गयी ...मेरी ओर एक तक बड़े ही शरारती ढंग से फिर जो उन्होने किया ..मेरी तो सिट्टी पिटी गुम हो गयी ....

एक झटके में ही अपनी साड़ी और पेटिकोट खोल दिया उन्होने .....नीचे से बिल्कुल नँगीं थी .....मैं तो उन्हें देखता ही रहा ..एक दम सन्न था मैं ...मेरे सामने वो पहली औरत थी जिन्हें मैं नंगी देख रहा था ..मेरी आँखें चौंधिया गयीं...फटी की फटी रह गयी ...दीदी के अंदाज़ सच में निराले थे ...

कहानी जारी रहेगी………. महँगी चूत सस्ता पानी -3

अगर आपको यह कहानी पसंद आई या नहीं आई, तो Like, Dislike या Comment करके अपना अनुभव दूसरे पाठकों के साथ साझा करें।

  1. महँगी चूत सस्ता पानी -7
  2. महँगी चूत सस्ता पानी -6
  3. महँगी चूत सस्ता पानी -5
  4. महँगी चूत सस्ता पानी -4
  5. महँगी चूत सस्ता पानी -3

Leave your comment

अभी कोई स्वीकृत टिप्पणी नहीं है।