कजिन सेक्स

महँगी चूत सस्ता पानी -5

By किशोर Published on पढ़े जाने की संख्या: 849

दोस्तों आपने मेरी कहानी का एपिसोड “महँगी चूत सस्ता पानी -4“ पढ़ा होगा.
अब आगे...

हम दोनों एक दूसरे से चिपके थे..और हम दोनों को स्वेता दीदी अपनी बाहों में भरते हुए चूमे जा रही थी......

"वाह रे वा किशू ..तू तो कमाल का हाथ और मुँह चलाता है .......पायल की ट्रैनिंग अच्छी है......" वो बोलती जाती और चूमती जाती.....

"अरे स्वेता अभी तो शो चालू हुआ है ..चल पलंग पर तीनों साथ लेट ते हैं फिर शो का असली मज़ा शुरू होगा...."

और स्वेता दीदी हंसते हुए हम दोनों भाई बहन को अपने से लगाते हुए पलंग की ओर खींचते हुए चल पड़ीं ..........

स्वेता दीदी ने हमें पलंग पर लिटा दिया ..दोनों दीदियो ने अपने भाई को बीच में कर ..मेरे अगल बगल लेट गयीं ..

मैने दोनों की तरफ देखा ..पायल दीदी अधखिली फूल थीं तो स्वेता दीदी पूरी तरह खिली हुई फूल .....

कोई किसी से कम नहीं .....पायल दीदी के शरीर में एक अजीब मादक सुगंध थी ...और स्वेता दीदी का शरीर मुलायम और रस से भरपूर .उन्हें चूसने का मन करता था और पायल दीदी को काट खाने का .......

तभी स्वेता दीदी ने पायल को कहा " पायल ज़रा टाइम का भी ख़याल रखना ..कहीं कोई आ ना जाए .."

" अभी बहुत टाइम है स्वेता ..अभी तो सिर्फ़ 530 बजे हैं .....और शादी की शॉपिंग से वो लोग सात-आठ बजे के पहले नहीं आ सकते ...चल जल्दी कर ना , सोच क्या रही है..???? देख ना किशू कितना मस्त हो कर लेटा है हमारे बीच ......" पायल दीदी ने कहते कहते अपनी टाँगें मेरे पैरों पर रखते हुए मुझे अपनी तरफ खींच लिया ......और मेरे बाल रहित सीने पर अपनी लॅप लपाति जीभ रख दी और लगी चाटने

मैं उनके इस अचानक हमले से चिहूंक उठा ..मेरा सारा शरीर सिहर उठा.....

मैं भी उनकी चूचियाँ अपने हाथों में ले दबाने लगा .........

इधर स्वेता दीदी अपनी चूत मेरे चूतड़ से लगाते हुए घिसने लगीं और मेरा लंड अपने हाथ में भर लिया और हल्के हल्के मसलना शुरू कर दिया ..

मेरे चूतड़ काफ़ी मस्क्युलर और टाइट थे , ये मेरे क्रिकेट खेलने का असर था, भाग दौड़ करने के चलते मेरा शरीर काफ़ी मस्क्युलर था .........और अब तक पूरे बाल नहीं आए थे इसलिए चिकने भी थे....स्वेता दीदी की चूत जैसे मेरे चूतड़ पर फिसल रही थी.........मैने अपनी चूतडो की मसल और भी टाइट कर ली...उन्हें अपनी चूत मेरे गतीले चूतड़ पर घिसने में और भी मज़ा आने लगा..उनके घिसने की स्पीड बढ़ती जा रही थी ...और मेरी चूतड़ उनकी चूतरस से सराबोर हो रहा था....

दीदी मेरे सीने पर ..मेरे सीने की घूंदियो पर जीभ चलाती जातीं ..मेरा पूरा बदन कांप उठ ता..और मैं उतने ही जोरों से उनकी चूचियाँ मसल देता ......जैसे आटा गून्ध्ते हैं ...दीदी की मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी .......मैं उनके आर्म्पाइट पर भी टूट पड़ा........एक अजीब सूगांध थी वहाँ ..मैने अपनी नाक वहाँ लगाई ..और लंबी साँस ले कर सूंघ रहा था, और फिर उसे चाटने लगा ..दीदी ने अपना हाथ और उपर कर दिया .....आहह पूरा आर्म्पाइट मेरे कब्ज़े में था

तीनों फिर से एक दूसरे से चिपके थे और अपनी अपनी हरकतों में मस्त ..

एक दूसरे की शरीर से मनमानी किए जा रहे थे..कोई रोक टोक नहीं , जिसे जहाँ मन आता चाट लेता ..चूस लेता .......

मेरा लॉडा स्वेता दीदी के हाथो में जकड़ा फन्फना रहा था ...कड़क और कड़क होता जाता

दीदी मुझे बूरी तरह चाटे जा रही थीं ..मेरे होंठ चूसे जा रही थी..

अब मैने अपना एक हाथ दीदी की जांघों के बीच ले गया दीदी ने झट अपनी टाँगें फैला दी.उनकी चूत खूल गयी ,,मेरी उंगलियाँ चूत की फाँक में दौड़ रही थी ..

और स्वेता दीदी अपनी एक टाँग मेरे जाँघ पर रख अपनी फैली चूत को और भी फैला ..मेरे चूतड़ से घिसे जा रही थी

उफफफफफफफफफफ्फ़ ...इस दो तरफे हमले से मैं मदहोश था ..मेरा दीदी के आर्म्पाइट चाटने की स्पीड बढ़ गयी और उनकी चूत पर उंगलियाँ भी और तेज़ चलने लगीं

तीनों कराह रहे थे...सिसकारियाँ ले रहे थे .....एक दूसरे को मसल रहे थे , चूस रहे थे चाट रहे थे......

'उफफफ्फ़.. किशू तेरा लॉडा कितना हसीन है रे ..कितना चिकना और कड़क ........" स्वेता ने कहा

" तो फिर रोका किसने है स्वेता ..ले ले ना अपने मुँह में .." पायल दीदी ने कहा

और मुझे दीदी ने सीधा लिटा दिया..मेरा लॉडा तननाया हवा से बातें कर रहा था....स्वेता दीदी मेरे पैरों के बीच आ गयीं और लॉडा अपने हाथों से थामते हुए मुँह अंदर कर घूसा दिया ..मेरा लॉडा उनके गरम गरम मुँह के अंदर था ...जीभ . होंठ और हाथों का कमाल मेरे लौडे पर चल रहा था ..मैं मस्ती में भरा था ,,मेरी आँखें बंद थीं....

स्वेता दीदी की शादी का एक्सपीरियेन्स यहाँ काम आ रहा था उनके हाथों की जाकड़, होंठों की पकड़ और जीभ के फेरने से मेरा बूरा हाल था.........लंड अकड़ रहा था ..मेरे पूरे शरीर से सारी सिहरन और मस्ती लंड में बिजली की करेंट की तरह दौड़ रही थी...सब कुछ वहाँ जमा होता जा रहा था , किसी भी समय फॅट पड़ने को तैयार.....

और फिर जैसे बादल फॅट ता है ..मुझे भी ऐसा ही महसूस हुआ......मेरा लंड फॅट पड़ा और मेरा चूतड़ उछाल मारता हुआ स्वेता दी के मुँह में लंड से गरम गरम लावा फूट पड़ा....

मैं झटके पे झटका ख़ाता रहा ..स्वेता दीदी मुँह खोले मेरा रस अंदर लेती रही ..उनका मुँह भर गया......गाल पर भी छींटे थे.....होंठों पर भी फैले थे ....

दीदी उठ कर बैठ गयी ...स्वेता का चेहरा अपने हाथों में ले मेरा रस चाट चाट कर उनका पूरा चेहरा सॉफ कर दिया ......

" उफफफफफफ्फ़ कितना टेस्टी है रे किशू का लंड और उसका रस..." स्वेता दीदी ने मुँह के अंदर का रस निगलते हुई बोल उठीं ..

" तभी तो मैने कहा था ना चूस मेरे भाई का लंड....."

पायल दीदी ने मुझे अपनी बाहों में ले लिया और मुझे अपने सीने से चिपका लिया , मैं सूस्त उनकी चूचियों के उपर सर रखे आँखें बंद किए पड़ा रहा .....

थोड़ी देर बाद मैने आँखें खोलीं ..दोनों मेरे अगल बगल लेती थीं ..टाँगें फैलाए ..चूत फैलाए अपनी अपनी उंगलियों से सहलाती हुई ......

उनकी उंगलियाँ मैने हटाते हुए अपनी उंगलियों से दोनों ओर की दोनों चूतो को सहलाने लगा....

दोनों चूतो का अपना ही मज़ा था .....स्वेता दीदी की चूत फैली थी , मुलायम थी और दीदी की चूत मुलायम पर टाइट ...

मैं मज़े ले ले कर उन्हें सहलाए जा रहा था .. पहले से ही दोनों काफ़ी गरम थीं , मस्त थी और मेरे द्वारा फिर से उनकी चूत सहलाने से वह और भी मस्ती में आ गयीं ..

दोनों ने मुझे जाकड़ लिया ..........और फिर मेरे जाँघ पर अपनी अपनी जाँघ रखे चूतड़ उछाल उछाल अपनी अपनी चूत का रस छोड़ने लगी .......

मैने अपने हाथ दोनों तरफ फैलाए उन्हें अपने से और भी चिपका लिया .......

हम तीनों अब एक थे

दोनों मेरे सीने पर अपना सर रखे हाँफ रहे थे .....और फिर शांत हो कर पड़े रहे .....

तीनों एक दूसरे की बाहों में पस्त हो कर ..अपने अंदर का सारा रस खाली कर ..;एक निचोड़े हुए नींबू की तरह बिल्कुल खाली हो गये थे ......

तभी स्वेता दीदी की नज़र दीवाल पर लगी घड़ी की तरफ गयी....."ऊऊऊओ माअं ,,अरे बाबा 730 बज रहें है री पायल....कुछ होश भी है......" और वह हड़बड़ाती हुई उठ गयी ..जल्दी से कपड़े पहने ..मुझे और दीदी को चूमते हुए कमरे से बाहर निकल पड़ीं

मैने उनकी तरफ देखा ...उन्होने मुड़ते हुए मेरी तरफ ऐसे देखा मानों कह रही हों...."थॅंक यू किशू ..."

मैने एक फ्लाइयिंग किस दी उनको और दीदी को फिर से चिपकता हुआ उन्हें चूम रहा था..

दीदी ने बड़े प्यार से मुझे धकेलते हुए ...मेरे लौडे को मसल्ते हुए , मुस्करती हुई उठ गयी ...और झट कपड़े पहन रूम से बाहर निकल गयीं ...

मैं उनकी मटकती चूतड़ देखता रहा....

और इसी तरह हमारे दिन बीत ते गये ... स्वेता दीदी हम से इतनी घूल मिल गयीं ..जैसे हम तीनों एक हों.....हम एक दूसरे की भावनाओं , इच्छाओं से इस कदर वाक़िफ़ हो गये .किसी को कुछ कहने की ज़रूरत नहीं होती .....मेरे दीदी की चूत को उनकी शादी तक महफूज़ रखने की बात से स्वेता दीदी बहुत प्रभावित थीं .....मेरे भावनाओं की कद्र करती थीं ..और इसलिए उन्होने भी कभी मुझे अपनी चूत में लंड अंदर डालने को मजबूर नहीं किया .....

स्वेता दीदी की भी हम बहुत कद्र करते थे..उनकी भावनाओं को ठेस ना लगे , इसलिए उनके अपने पति से अलग रहने की बात उन से ना कभी दीदी करती ना मैं .

एक दिन खुद उन्होने ही बताया ..

शादी के दो साल बाद भी उन्हें बच्चे नहीं हुए ..जैसा के हमारे समाज में होता है..सारा दोष स्वेता दीदी पर डाल उन के ससूरल वाले दिन रात उन्हें ताना देते रहते .....पति का भी उन्हें कोई सपोर्ट नहीं मिलता ..और कैसे मिलता ..वो खुद नपून्सक था ...... ये बात स्वेता दीदी के अलावा और किसी को नहीं मालूम थी.....

स्वेता दीदी का आभार मान ना तो दूर ..वो अपनी मर्दानगी साबित करने को मार पीट पर भी उतर आया ....ये बात स्वेता दीदी सहेन नहीं कर पाईं ..उनका स्वाभिमान उन्हें एक दिन सब कुछ छ्चोड़ अपनी माँ के यहाँ ले आया ...... उन्होने पास के सरकारी स्कूल में टीचर का काम शुरू कर दिया ..और दुबारा अपनी ससूराल की तरफ मुँह उठा कर भी नहीं देखा...

मैं और दीदी उनके इस साहस भरे कदम से उन की और भी इज़्ज़त करने लगे .. उन दिनों ये माना जाता था के लड़की की डोली ससुराल जाती है और अर्थी ही उसे वहाँ से हटाती है.... स्वेता दीदी का वहाँ से निकल आना एक बहुत बड़ा कदम था .......

हम तीनों तीन शरीर पर एक जान थे....मस्ती के दिन गुज़र रहे थे.....

और फिर आख़िर वो दिन आ ही गया .....पायल दीदी की शादी......

मेरे मामा की एकलौती संतान थी वो..बड़े धूम धाम से उन्होने पायल दीदी को विदा किया ......

मेरी जिंदगी चली गयी........मेरा रोम रोम चीत्कार रहा था..तड़प रहा था.......बिलख रहा था, मेरे हाथ पैर कट गये थे......

मेरा दिल रो रहा था..पर दीदी को हंसते हुए विदा किया ......दीदी मुझे अपने सीने से लगाए फूट पड़ीं ..उनके आंसूओ- का बाँध फूट पड़ा........पर फिर उन्होने अपने आप को संभाला,

" स्वेता ..तू मेले बच्चे का ख़याल रखना ......" और इस से पहले की उनकी छाती फाट पड़ती..उन्होने मुझे अलग किया और कार के अंदर वेट कर रहे जीजा जी के साथ बैठ गयीं ..नये साथी..नयी दुनिया और नये जीवन की शुरुआत की ओर चल पड़ीं ..

मैं खड़ा था ..जब तक के कार मेरी आँखों से ओझल ना हुई.......

कार के धुएँ ने जैसे मेरे जीवन के आहें , सब से खूबसूरत हिस्से को पूरी तरह ढँक दिया ......

स्वेता दीदी मुझे अपने सीने से लगाते हुए घर के अंदर ले गयीं .....

"किशू...मैं पायल तो नहीं बन सकती...पर कभी भी तू मुझे कम नहीं समझना ....."

और फिर मेरे सब्र का बाँध टूट गया.......मैं उनके सीने से लगा फूट फूट कर रो रहा था..बिलख रहा था......एक नन्हें बच्चे की तरह ......स्वेता दीदी चूप थीं .....मेरे बाल सहला रही थीं और ..मैं आँसू बहाए जा रहा था............

जाने कब रोते रोते मैं उनकी गोद में ही सो गया.....

नींद खूली तो देखा मैं पलंग पर अकेला लेटा था .........

मुझे ऐसा महसू हुआ जैसे मेरी पिछली जिंदगी ...पायल दीदी के साथ की जिंदगी ..एक सुखद सपना था .....और मैं अभी अभी ही उस मीठे सपने की नींद से जगा हूँ...

और मैं उस सुखद सपने को अपने मानो-मश्तिश्क में संजोए ...उन सुनहरे यादों का सहारा लिए अपनी नयी जिंदगी की ओर चल पड़ा

एक नया सवेरा ..एक नये दिन की शुरुआत की ओर .............

पर आगे का रास्ता उतना आसान नहीं था ..जिस रास्ते पर मेरे साथ हमेशा ..हर पल .हर वक़्त पायल दीदी मेरे हाथ थामे मेरे साथ रहती ...आज मैं उस रास्ते पर अकेला था ... बेहद अकेला....

दीदी की एक एक बात ..उनका खिलखिलाना..उनका हँसना ..उनकी प्यारी , मुलायम और गर्म गोद...उनका मुझे इतने प्यार से खिलाना ....कुछ भी तो मैं भूल नहीं पाता .....मैं बेचैन हो उठ ता ...पढ़ने बैठ ता तो वो सामने आ जाती...किताबों के हर पन्ने पर जैसे उनकी तस्वीर थी ....

मैं बस चूप चाप किताब खोले देखता रहता ....

मैं एक बेजान च्चाभी वाले खिलोने की तरह बेकार सा हो गया था ,,जैसे उस खिलोने के स्प्रिंग का तनाव ख़त्म हो चूका था ..मेरी जिंदगी के खिलोने की चाभी का तनाव ख़त्म हो चूका था ..

मैं उस शाम भी ऐसे ही टेबल पर सूस्त सा खोया खोया बैठा था .... मेरे सामने किताब खूली थी , पर आँखों में कुछ और ही था..

तभी मुझे किसी के आने की आहट हुई...देखा तो स्वेता दीदी मेरे बगल खड़ी थीं...

वो मेरे सर पर हाथ फेरते हुए मेरे बगल बैठ गयीं ..मुझे अपने सीने से लगा लिया ..मैं उनकी मुलायम , गर्म और गुदज चूचियों के महसूस से थोड़ा आश्वस्त हुआ ..मुझे अच्छा लगा ..

" देख किशू , पायल की याद तो आएगी ही...इतनी जल्दी जानेवाली नहीं ....और उनकी याद तो हमारे साथ हमेशा रहेगी ...मरते दम तक...पर इस तरह उनकी याद को तुम अपनी बर्बादी का कारण क्यूँ बना रहे हो किशू..उनकी याद को तो अपना सहारा बना ले मेरे प्यारे भाय्या ... उन्हें भी कितनी खुशी होगी ..." .

मैं थोड़ी देर तक बिल्कुल चूप उनकी ओर देखता रहा ....मुझे एक दम से उनकी बात ने झकझोर दिया ,,जैसे गहरी नींद से जगा दिया गया हो....स्वेता दीदी ने कितनी बड़ी बात कह दी""उनकी यादों को अपना सहारा बना लो..""

" स्वेता दीदी ,,आप ने सही कहा .....आज के बाद पायल दीदी की याद मुझे हर पल , हर वक़्त रहेगी ..वो मेरे रोम रोम में हमेशा रहेंगी. मैं उन्ही के सहारे आगे और आगे बढ़ूंगा ..काफ़ी आगे .."

इतना सुनते ही स्वेता दीदी ने मुझे अपने सीने से बिल्कुल चिपका लिया .....मुझे चूमने लगीं , मेरे होंठ चूसने लगीं

" हाँ हाँ किशू ......" और अपनी हथेली से मेरे लौडे को पॅंट के उपर से ही सहलाने लगीं .. मेरे कान में फूफूसाते हुए कहा..." तभी तो मैं भी तेरा पूरा ख़याल रख पाऊँगी....वरना पायल जब आएगी मैं क्या जवाब दूँगी...???"

"हाँ स्वेता दीदी ..मुझे भी तो आप का ख़याल रखना पड़ेगा ...." मैने भी मुस्कुराते हुए उन से कहा .....दीदी के जाने के बाद ये मेरी पहली मुस्कान थी ....

मैं उन के होंठ चूसने लगा ..उनके होंठ कुछ मोटे मोटे थे..मैने अपने होंठों से उन्हें दबाया और बूरी तरह चूसने लगा ..स्वेता दीदी तड़प उठीं ..उन्होने मुझे और भी जोरों से चिपका लिया .....और अब उन्होने पॅंट के बटन खोल मेरे लौडे को अपनी मुट्ठी में भर लिया था.

उसे बड़े प्यार से हल्के हल्के दबाती , निचोड़ती...जैसे गाय के थन से दूध निचोड़ते हैं ....उफफफफफफफफ्फ़ ..उन्हें मेरा ककड़ी की तरह कड़ा लंड थामने में बड़ा अच्छा लगता था ......बीच बीच सिर्फ़ अंगूठे और उंगली से चॅम्डी भी उपर नीचे करती जाती .....

मैं पागल हो उठा ..उनकी ब्लाउस के अंदर हाथ डाल उनकी चूचियाँ हाथ में भर लिया और जितनी मस्ती में आती उतने ही जोरों से दबाता जाता ......

स्वेता दीदी ने देखा दरवाज़ा बंद था .....

उन्होने ब्लाउस और ब्रा एक झटके में खोल दिया ...और अपनी साड़ी को भी घूटनों तक उठा लिया ..

मेरा दूसरा हाथ उन्होने अपनी चूत पर रख दिया .....

मैं उनकी अब तक गीली चूत पर अपनी हथेली फेरना चालू कर दिया ...वो कराह उठीं ....

मेरा लॉडा सहलाना तेज़ पकड़ता जाता ..और साथ में मेरा उनके होंठ चूसना , चूचियाँ दबाना और चूत का सहलाना भी तेज़ होता जाता ....उनकी चूत काफ़ी फूली फूली ...थोड़ी चौड़ी फाँक और थोड़ी ढीली थी ....हाथ चलाने में उंगलियाँ ऐसी चलती मानों फिसल रही हों .....

मैं भी सिसकारियाँ ले रहा था ...उन्हें अपने से और चिपकाता जाता ...

स्वेता दीदी भी मंद मंद करहती जातीं ......

"उईईई माअं ..हाँ किशू ऐसे ही ..हाआँ ..और तेज़ '....हाआँ मेरे भाइय्या .....आआआआआआआआआहह......"

मेरी हथेली उनके चूत रस से पूरी तरह गीली थी ..बीच बीच में उन्हें चाट जाता ...

स्वेता दीदी अपनी चूतरस का चाटना देख काफ़ी मस्ती में आ जातीं ....

तब तक उनके हाथ में मेरा लॉडा भी अपनी पूरी लंबाई में आ गया था ..इतने दिनों के बाद आज पहली बार इस तजुर्बे का मज़ा कुछ और ही था .......

मैने उन्हें अपने से और भी बूरी तरह चिपका लिया और ...".दीदी दीदी ..." का चीत्कार करते हुए उनके हाथ में अपनी पिचकारी छ्चोड़ दी....

मैं झटके देता जाता अपने लंड से और इधर मेरी उंगलियाँ भी और तेज़ हो गयीं उनकी चूत पर ...इतनी फिसलन थी वहाँ .......

" हाआँ ..हाां मेला बच्चा..पायल का बचा .....आ जा ..आ जाआअ " और उन्होने अपने हाथ मेरे लौडे रख पूरे का पूरा पानी अपने हाथों में भर लिया और फिर उसी ले में अपनी चूतड़ उछाल उछाल मेरी हथेली में अपना रस छ्चोड़ने लगी...

थोड़ी देर बाद जब हम अपने अपने रस पूरी तरह एक दूसरे की हथेलियों में खाली कर चूके ....एक दूसरे की आँखों में देखते हुए अपने हथेलिया चाट चाट पूरी तरह सफाई कर लिए.....

"किशू ...कैसा लगा ..?" स्वेता दीदी ने पूछा .

" बहुत अच्छा दीदी ....आज मुझे बहुत हल्का लग रहा है....."

" हाँ किशू मुझे मालूम था ..तुझे इसकी ज़रूरत है.....अच्छा अब मैं जाती हूँ ...और तू अपनी पढ़ाई में मन लगाना .."

"हाँ स्वेता दी..,,,,"

उस दिन के बाद मैं फिर कभी दीदी की यादों से उदास नहीं होता ...वरन उनकी याद से मुझ में और भी कुछ अच्छा करने का हौसला बढ़ जाता ..मेरे मन में ये बात घर कर गयी ...... ........ दीदी मेरी प्रेरणा हैं ,,मेरी कमज़ोरी नहीं .....दीदी ..दीदी...आइ लव यू ..आइ लव यू दीदी .....आइ लव यू सूऊऊ मुचह......

तीन चार दिनों केबाद दीदी की चिट्ठी आई..उन दिनों ना मोबाइल था ना इंटरनेट ..बस चिट्ठि का ही सहारा रहता था ...

मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था चिट्ठि देख.....मुझे ऐसा लगा मानो दीदी की चिट्ठी नहीं वो खुद मेरे सामने हैं और मुझ से बातें कर रही हैं ....

मैं काफ़ी एग्ज़ाइटेड था ...चिट्ठि खोली ..काफ़ी लंबी थी ...वाह ससुराल में भी उन्हें इतनी लंबी चिट्ठि लिखने का मौका मिल गया .....

चिट्ठि पढ़ के मुझे काफ़ी अच्छा लगा ..उस दिन स्वेता दीदी के साथ बात चीत और उनका मेरा लंड सहलाना ..और आज दीदी की चिट्ठि ..मुझे बहुत हल्का महसूस हो रहा था ..दीदी ने चिट्ठि में अपना पूरा दिल खोल दिया था ...यहाँ से जाने के बाद का पूरा डीटेल लिखा था उन्होने ...

धड़कते दिल से मैने लिफहफ्हा खोला ..जाने क्या बीत रही होगी पायल दीदी पर ..आख़िर इतनी लंबी चिट्ठि में उन्होने क्या लिखा है..??? ..चिट्ठी निकाली....चिट्ठि क्या थी , पूरा पोथा ही था....मैने पढ़ना शुरू किया और बस पढ़ता ही गया ....एक बार ..दो बार ...बार बार पढ़ता रहा ......

मैं कितना खुश था ......

दीदी की चिट्ठि

किशू ..

कैसा है रे .....तू बहुत रो रहा था ना....मैं भी बहुत रोई ....बहुत आँसू बहाई रे .....पर क्या करें ये दिन तो एक ना एक दिन आना ही था ....पर तेरे जीजा .... मैं उनको गौरव पुकारती हूँ ..येई है उनका नाम ...इतने अच्छे हैं और इतने अंडरस्टॅंडिंग ..मुझे बहुत अच्छे से संभाल लिया किशू...मुझे ज़रा भी महसूस नहीं होने दिया के मैं किसी पराए मर्द के साथ हूँ ....

और किशू खास कर तो पहली बार जब उन्होने मुझे चोदा ..क्या बताऊं किशू ..उन्होने तुम्हारी पायल दीदी को ज़रा भी तकलीफ़ महसूस नहीं होने दी ..तुम्हारी चूत (हाँ किशू ये तो तुम्हारी ही अमानत है ना मेरे पास जब तक के तू इसे चोद नहीं लेता ) को इतने संभाल संभाल कर चोदा है....मानों ये गुलाब की पंखुड़ीयाँ हों और छूने से इसकी पंखुड़ीयाँ बिखर ना जायें ....

तुम खुश होगे के तुम्हारी दीदी को इतना प्यार करने वाला पति मिला ...

देख ना किशू ...पहली रात जब वो हमारे कमरे में आए ..उन्होने सिर्फ़ प्यार किया ..मुझे खूब चूमा ...चुचियाँ भी हल्के हल्के दबाई ...और मुझ से कहा " पायल मैं जानता हूँ शादी के रस्मों रिवाज़ को पूरा करने में तुम कितनी थक गयी होगी ..मैं भी थका हूँ ..आओ हम एक दूसरे की बाहों में आराम करते हैं ...एक दूसरे को महसूस करते हैं .. बाकी काम कल करेंगे ..."

सही में किशू उन्होने जैसे मेरे दिल की बात कह दी हो ..एक तो मैं थकि थी ..दूसरी तुम्हारी याद भी बहुत आ रही थी ...चुदाई का बिल्कुल मूड नहीं था ....

मैने खुश होते हुए कहा " जैसी आप की मर्ज़ी...."

पर गौरव का आराम करने का भी अपना ही अंदाज़ था ..

उन्होने अपने सारे कपड़े उतार दिए ..और धीरे धीरे मुझे भी नंगा कर दिया किशू..हाई मैने अपनी आँखें बंद कर लीं शर्म से ....

उन्होने मेरा हाथ चेहरे से हटाया ..मेरी ओर बस एक तक निगाहों से देखते रहे , मुझे अपनी बाहों में लिए , मुझे अपने से चिपकाए ..अपने बगल में लिटा लिया ....मेरी कमर के उपर अपनी टाँगें रख दी ...और हम दोनों आमने सामने मुँह किए बातें करते रहे .....मैने तुम्हारे बारे भी उनको बताया ...अरे नहीं नहीं वो सब बातें नहीं रे ..सिर्फ़ अपने भाई बहन वाले प्यार की बातें ....

फिर बातें करते हम दोनों कब सो गये कुछ पता ही नहीं चला ..सुबेह उठी तो देखा वो मेरे गले में बाहें डाले एक बच्चे की तरह , बिल्कुल तुम्हारी तरह मुझ से लिपटे सो रहे थे

मैने गौरव को उठाया ...पर वो तो किसी और ही मूड में थे..उन्होने मुझे फिर से जाकड़ लिया और लगे चूमने ..." आज रात तैयार रहना पायल ..आज तो बस मैं रहूँगा और तेरी बेशक़ीमती चूत ...." और ये कहते ही उन्होने मेरी चूत को अपनी मुट्ठी में लेते हुए मसल दिया ....अफ मैं सर से पावं तक सिहर उठी किशू .....मेरी चूत से गंगा बह रही थी .....

फिर वो उठ गये ..और लेटे रहे ..मैं बाथ रूम चली गयी ..तैयार होने ...

दिन भर मैं अपनी पहली चुदाई के बारे सोचती रही ..कभी डर लगता ...पर गुदगुदी भी होती ...कभी मज़े में सिहर उठ ती.....दिन भर मैं एक अजीब ही ख़यालों में थी ...

जैसे तैसे रात हुई ..

मैने उस रात खाना भी कम ही खाया .....स्वेता ने मुझे बताया था .. चुदाई के पहले पेट पूरा भरा नहीं होना चाहिए वरना मज़ा नहीं आता ....

किशू तू मेरी बातों से नाराज़ तो नहीं है ना रे.....तू ही तो मेरा अपना है रे ..जिस से मैं सब बातें खूल कर कर सकती हूँ .....

किशू ...मैं तुम्हें बहुत प्यार करती हूँ ...बहुत ...

हाँ तो रात हुई ...मैं पलंग के एक कोने में घूँघट निकाल .....नयी नवेली दुल्हन बनी....गौरव का इंतेज़ार कर रही थी .......

वे आए ..दरवाज़ा अच्छी तरह बंद कर दिया .....मेरी ओर ताकते हुवे .....धीरे धीरे आगे बढ़ते हुए मेरे बगल आ कर बैठ गये .....

मैने अपनी घूँघट के अंदर से ही सर उठा कर देखा ..बहुत बेसब्री थी उनके चेहरे पर..उन्होने फ़ौरन मेरी घूँघट उठाया ....मेरे चेहरे को अपने हाथों से थामते हुए लगे मेरे होंठ चूसने .......

पहले तो मैने अपना चेहरा हटाने की नाकाम कोशिश की ....उनकी पकड़ इतनी मजबूत थी...उन्होने चूमना जारी रखा और चूमते चूमते उन्होने कब चूसना शुरू कर दिया ..मैं बिल्कुल खो गयी उनके साथ ......मुझे लगा मैं भी उनका साथ दूं ..पर मैं तो नयी नवेली दुल्हन थी ना किशू ..शर्मो-हया की मूरत ...मैं बस हल्की सिसकारियाँ लेते हुए मज़ा ले रही थी ..

मेरी साड़ी अस्त व्यस्त हो गयी ...आँचल नीचे गिरा था , पलंग पर..मेरी छाती पर सिर्फ़ ब्लाउस था ..उन्होने मेरे होंठ चूसना जारी रखते हुए ब्लाउस के उपर से ही मेरी चूचियाँ मसलनी शुरू कर दी....उफ्फ किशू ..मैं एक दम से सिहर उठी ..उनका मेरी चूची सहलाना भी ऐसा था मानों किसी बहुत नाज़ुक सी चीज़ को हाथ लगा रहे हों ...कहीं टूट ना जाए ......मेरी सिसकारियाँ बढ़ती गयीं ..मेरे हाथ भी अपने आप उनके कंधों को झिझकते हुए जाकड़ लिया...

"पायल झिझक काहे की ...मुझे अच्छे तरह जकडो ना ......ठीक है मैं तुम्हारी झिझक दूर किए देता हूँ....." और उन्होने एक एक कर मेरे सारे कपड़े उतार दिए .....मैं बिल्कुल नंगी थी ..अपना मुँह छुपाए .....

फिर मेरे सामने पलंग से उतर खड़े हो कर ..अपने भी कपड़े उतार दिए ....

हम दोनों बिल्कुल नंगे थे ..मेरी नज़रें झूकि थी ..पर वे एक टक मुझ देखे जा रहे थे ......

उफ़फ्फ़ किशू ..मैं शर्म से पानी पानी हो रही थी ....

मेरे पास बैठ ते हुए उन्होने मुझे सीने से लगाया ...मेरी चूचियाँ उनके सीने से चिपकी थीं ...मेरा सर उनके कंधों पर था ..... बार बार मुझे अलग करते मुझे देखते फिर सीने से लगा लेते ......उफ़फ्फ़ मैं पागल हो रही थी ....और मेरी शर्मो-हया भी ख़त्म हो रही थी ......

और जब इस बार उन्होने मुझे अपने सीने से चिपकाया ..मुझ से रहा नही गया ..मैने भी उन्हें अपने हाथों से जाकड़ लिया ..दोनों एक दूसरे की बाहों में एक दूसरे से चिपके , एक दूसरे को महसूस कर रहे थे .....दिल की धड़कनें ...सांस .....शरीर सब कुछ एक दूसरे में समाते जा रहे थे ...मानों हम एक दूसरे का जायज़ा ले रहे हों....

फिर उन्होने मुझे लिटा दिया और मेरे उपर आते हुए मुझे चूमने लगे ..चूसने लगे ..चूचियाँ मसल्ने लगे ...उफफफफफफफ्फ़..किशू मैं कांप रही थी ..सिहर रही थी .....

मेरी टाँगों को अपनी टाँगों से बूरी तरह जाकड़ लिया था उन्होने .......और फिर अचानक उन्होने अपना हाथ मेरी चूत पर रख दिया और सहलाने लगे ...मैं एक दम से चिहूंक उठी .....मेरे चूतड़ उछल पड़े .......

एक हाथ उनका मेरी चूचियाँ बारी बारी से मसलता जाता ...बड़े प्यार से ....दूसरा हाथ चूत सहला रहा था ...मेरे होश ठिकाने नहीं थे .....चूत गीली होती जाती ...जितनी गीली होती उनकी उंगलियाँ और तेज़ और तेज़ मेरी चूत की फांकों के बीच दौड़ती जाती .......उफफफफफफ्फ़ ...और फिर उन्होने मेरे होंठों को भी चूसना शुरू कर दिया ..किशू मैं पागल हो रही थी .....चूत के अंदर खलबली मची थी ....मन करता खुद अपने हाथों से उनका मदमस्त लंड अंदर ले लूँ .....

उन्होने मेरी बेचैनी समझते हुए कहा "पायल रानी इतना बेचैन मत हो मेरी जान .....मैं भी अपना लंड अंदर घूसेड़ने को बेचैन हूँ ..पर तुम्हारी कुँवारी चूत है ना...खूब गीली होने दो .... तभी तो मेरा मोटा लंड अंदर आराम से जाएगा ...

मैं क्या कहती किशू ..बस आँखें बंद किए मस्ती में पड़ी थी ..

काफ़ी देर तक उन्होने मेरी चूत मसली ..फिर मेरी चूत को अपनी उंगलियों से फैलाया ...चूत के होल के अंदर एक उंगली डाली ....उफफफफफफ्फ़ .....मुझे थोड़ा सा दर्द महसूस हुआ ..पर थोड़ी देर अंदर बाहर करने के बाद मुझे मज़ा आने लगा ..मैं सिहर रही थी ..सिसक रही थी ..मेरा पूरा बदन कांप रहा था ...

उन्हें लगा कि मेरी चूत अब काफ़ी गीली और ढीली हो गयी है ....

उन्होने अपने लौडे को ....... तंन और कड़क लौडे को चूत की होल पर रखा और अपने हाथों से घिसने लगे ..मैं मस्ती में उछल पड़ी.....मन किया कि अपनी चूत उछाल कर उनका कड़क लंड अंदर ले लूँ ....पर आज तो मैं नयी नवेली दूल्हन थी ...शर्मो-हया की मूरत .....मैने अपने आप को उनके हवाले कर दिया था ....मैं मंद मंद मुस्कुरा रही थी ....बंद मुँह के अंदर ही सिसकारियाँ ले रही थी ...

वो और भी एग्ज़ाइट हो रहे थे

अब उन्होने लंड को होल के मुँह पर रखा....मेरी टाँगें फैला दी और कच से एक हल्का सा धक्का लगाया ..फॅच से सुपाडा अंदर था ....पर मुझे कोई खास दर्द नहीं हुआ .....शायद उनका मेरे चूत को काफ़ी गीली कर देने का असर था ...

थोड़ी देर ऐसे ही रहे और अब एक और धक्का लगाया और उनका लंड मेरी चूत में आधे से भी ज़्यादा अंदर था ...उफफफफफफफफफफफफफ्फ़...किशू मुझे दर्द भी महसूस हो रहा था और उसे अंदर लेने का भी मन कर रहा था ..उन्होने मुझे अपने से बिल्कुल चिपका लिया था .....और मुझे चूमे जा रहे थे ..चूसे जा रहे थे .......कितना ख़याल था उन्हें मेरा ....मेरे किशू की अमानत का ..हाँ किशू ..

कहानी जारी रहेगी………. महँगी चूत सस्ता पानी -6

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