महँगी चूत सस्ता पानी -3
By किशोर Published on पढ़े जाने की संख्या: 788
दोस्तों आपने मेरी कहानी का पहला एपिसोड “महँगी चूत सस्ता पानी -2“ पढ़ा होगा.
अब आगे...
फिर उन्होने उसी झटके में अपनी ब्लाउस और ब्रा भी खोल दी ....उफफफफफफफफफफफ्फ़ मैं पागल हो गया था ....अब वो बिल्कुल नंगी , दोनों पैर फैलाए ..उनके पैरों के बीच मैं नंगा ..और मेरे सामने वो नंगी ....उनके चेहरे पर ज़रा भी हिचकिचाहट नहीं ..एक दम बे-बाक ...
" देख ले ....अच्छे से अपनी दीदी को ...."उनके चेहरे पे शरत भरी मुस्कान थी
मेरी नज़रें दीदी की खूबसूरत जवानी को जैसे पिए जा रही थी ..सुडौल स्तन ..भारी भारी ...एक दम दूधिया रंग और उसके बीच थोड़े थोड़े गुलाबी रंग लिए निपल्स ... घूंदियाँ कड़ी और उठी उठी ...
पेट भारी भारी पर सपाट ..नाभि की गोलाई ऐसी कि उनमें जीभ डाल चाट जाऊं ....भारी भारी सुडौल जंघें ... और जांघों के बीच काले काले बालों को चीरती हुई एक पतली सी फाँक ....दीदी की योनि में भी पानी जैसा रस था .योनि के बालों में मोटी जैसे रस के बूँद चमक रही थी ...जांघों पर भी रस लगा था ..... .मुझ से अब रहा नहीं गया ...मैं उठा और दीदी को हाथों से थामते हुए अपने उपर ले लिया और बूरी तरह चिपका लिया ....किसी नंगी औरत का मेरे नंगे बदन से चिपकना..एक ऐसा अनुुभाव ...बताया जा नहीं सकता .....मैं थोड़ी देर तक उन्हें चिपकाए राहा ..उनके बदन की गर्मी , उनके मांसल शरीर की नर्मी और उनके आँखों की खूबसूरती अपने अंदर लिए जा रहा था....
मैं कुछ कर पता उसके पहले ही दीदी ने अपना कमाल दिखा दिया ..मेरे खड़े लंड पर अपनी गीली सी योनि घिसना शुरू कर दिया ..मेरा पूरा बदन सिहर उठा ...
हे भगवान इस एक दिन में ही क्या से क्या हो गया है..मेरे लिए अपने आप को संभाल पाना मुश्किल हो रहा था ..मेरा लंड उनकी योनि के दबाब से और भी कड़ा होता जा रहा था ...पूरे बदन में सन सनी सी हो रही थी ..दीदी अपने स्तन भी मेरे सीने से लगाए थी ..उनके कड़े कड़े निपल्स मेरे सीने को कुरेद रहे थे .....जिस तरह मुझे मूठ मारते वक़्त लगा था ..अभी बिल्कुल वैसे ही मेरे लंड के अंदर मेरे शरीर से मानो बिजली जैसी कुछ सन सन्नाते हुए जमा होती जा रही थी और मैं अपने आप को रोक नहीं पा रहा था ......दीदी भी कराहती जा रही थी .... सिसकियाँ भरे जा रही थी और मेरे लंड को घिसे जा रही थी ......उफफफफफफफफफफ्फ़ डीडीिईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई...मैं चिल्ला उठा , उन्हें जाकड़ लिया और अपने आप मेरे लंड ने पिचकारी छ्चोड़ दी ...मेरे चूतड़ उछल रहे थे ..... मैं झटके पे झटका दिए जा रहा था , बार बार डिड़िद्द्द्दडिईईईई डीडीिईईईईईई मेरे मुँह से निकले जा रहा था ..और मैं सुस्त पड़ गया .
"हां हाआँ किशू ....हाआँ मेला बच्चा ..हां हाआँ ......." दीदी प्यार से पूचकारे जा रही थी और उनका घिसना भी जारी था ....और फिर मैने उनके चूतडो के झटकों को अपने लंड पे महसूस किया .....".किशुउऊुुुुुुुुुुउउ....मेला बच्छाआआआअ ...ऊऊऊऊओ ले रे मैं भी गाइिईईईए.."
मैने फिर से अपने लंड पर कुछ गीला सा महसूस किया ....
और दीदी मेरे उपर ढीली हो कर ढेर हो गयीं ....
शायद ये उनका भी पहला अनुभव था ..... दोनों एक दूसरे से चिपके थे .... गर्म साँसें टकरा रही थी ..दीदी और उनका किशू एक हो कर पड़े थे .
मैं तो जैसे किसी स्वप्न लोक में खोया था .......ये सब इतनी जल्दी हो गया ......मुझे विश्वास नही हो रहा था ..... ये सपना है या सच..??? उफफफफ्फ़ दीदी का इस तरह मुझ से लिपटना ..उनके शरीर की गर्मी , उनके मुलायम स्तनों का मेरे सीने पर दाबना ......अभी तक मैं उन्हें अपनी शरीर में अनुभव कर रहा था ...... मैं आँखें बंद किए उस मस्ती भरे आलम का मज़ा ले रहा था .....
थोड़ी देर बाद आँखें खोली .देखा तो दीदी अपने हाथों को सर के पीछे रखे अपने हथेलियों पर सर रखे सीधी लेटी थी , इस तरह के उनकी आर्म्पाइट्स बिलककुल मेरी आँखों के सामने थी .....उनमें बाल उगे थे .......पर अगाल बगल उनकी त्वचा कितनी सफेद थी ...... और पसीने की बूंदे चमक रही थी ....
किसी औरत की आर्म्पाइट भी इतनी कामुक हो सकती है .....मैने अपना मुँह उधर घूमाया .... अपने हाथों से दीदी को सीधे लेते हुए ही जाकड़ लिया , उन्हें अपनी तरफ खींचा और उनके आर्म्पाइट में मुँह लगा उसे चूसने लगा .........जीभ फिराने लगा ...उफफफफ्फ़ क्या स्वाद था दीदी के पसीने का ..
मेरे अचानक इस हमले से दीदी चौंक पड़ीं ..पर फिर चूप चाप उसी तरह हाथ सर के पीछे रखी रही और मुझे अपनी हवस पूरी करने में किसी भी तरह कोई रुकावट नहीं की ..सिर्फ़ इतना कहा
" अरे भोलू राम ज़रा धीरे धीरे जीभ फिरा ...मुझे बहुत गुद गुदि हो रहे है........और ये भी कोई चूसने की जागेह है ..... ??'
"उम्म्म्मम दीदी बहुत अच्छा लग रहा है ..आप का पसीना भी इतना टेस्टी है ..और यहाँ आपकी जागेह कितनी मुलायम है " और मैने अपने दाँतों से वहाँ उनकी आर्म्पाइट पर हल्के से काट लिया ......" मन तो किया के पूरे का पूरा खा जाऊं .....
" अरे .... वहाँ गंदा है किशू ....ठीक है अगर तुम्हें इतना ही पसंद है ..मैं कल से वहाँ के बाल साफ कर दूँगी ..फिर चाटना वहाँ ....अब हट जा ...."
" नहीं दीदी ..कल की कल देखी जाएगी अभी तो चाटने दो ना प्ल्ज़्ज़ ..अभी तो दूसरी तरफ वाली तो बाकी है....."
और मैं झट उनके दूसरी तरफ उठ कर चला गया , और फिर लेट कर वहाँ मुँह लगा दिया
" तू भी ना किशू ......ठीक है बाबा कर ले मन मानी ...." और अपने हाथ और भी उपर कर लिए ..उनकी आर्म्पाइट अब और भी खूल गये थे
मैने आर्म्पाइट चाट ते हुए पूछा , "पर दीदी ..एक बात बताइए ज़रा ..आप को इतनी सब बातें मालूम कैसे हुई ..??"
दीदी हँसने लगी ......"तू आम खा ना ...पेड़ गिन ने से क्या मतलब ..?? "
"दीदी बताइए ना .... आप ही ने कहा था ना हमें एक दूसरे से कुछ छुपाना नहीं चाहिए ..????"
और अब मेरा मुँह उनकी आर्म्पाइट में था , और एक हाथ जो उनके सीने पर था ..जाने कब उपर आ गया उनके स्तनों पर ....उनके स्तनों के स्पर्श का आज पहला मौका था ..इतना सॉफ्ट और साथ में कुछ भरा भरा भी .....मैने उसे हल्के से दबाया ....उफफफफफफफ्फ़ मेरे हाथ में जैसे कोई स्पंज जिसमें गर्मी हो....नर्मी हो ..एक अजीब सी मस्ती मेरी हाथेलि में थी ...दीदी की मुँह से " अया ......" निकल गयी .....उनकी आँखें बंद हो गयी ....
" ओओओओओह्ह्ह्ह दीदी आप के स्तन ........मन करता है इन्हें भी खा जाऊं ........"
मेरी बातों पर दीदी जोरों से हंस पड़ीं .... कहाँ तो इतना रोमॅंटिक मूड था मेरा ......और दीदी हंस रही थीं ..सारा मूड किर कीरा हो गया ....
"क्या दीदी ...आप भी ना ..क्या मेरा आप के स्तनों को सहलाना अच्छा नहीं लगा ...???"
" अरे नहीं नहीं ..बहुत अच्छा लग रहा है ...सही में ..और ज़ोर से दबाओ ना ......उफफफफफ्फ़ ..तू बहुत अच्छे से दबा रहा है ..."
"फिर आप हँसी क्यूँ.."" मैने और जोरों से उनके स्तन दबाते हुए कहा .....
"उईईईईईईईईईईईईईईईईईई,,माअं , अरे इतने ज़ोर से नहीं रे......मैं हँसी तुम्हारी बातों से .......अरे किताबी शब्दों को ऐसे समय मत बोला कर ..... एक दम चालू वर्ड्स यूज़ कर ..तुम ने इसे ,( अपने स्तनों को अपने हाथों से पकड़ उन्न्होने मेरे सामने कर दिया )..... स्तन कहा ..मज़ा नहीं आता यार ..इसे चूची बोल ..क्या बोलेगा इसे अब ..???"
" चू- -ची ......" मैने धीरे से कहा ..पहली बार ऐसे शब्द मेरे मुँह से इतने फ़र्राटे से नहीं निकल पा रहे थे
--
"हाआँ अब ठीक है ..पर ज़रा गला खोल के बोल , ले मेरी चूचियाँ चूस ..आर्म्पाइट्स बहुत चूस लिया ....."
और एक चूची मेरे मुँह में ठूंस दी उन्होने ......."जैसे आम चूस्ता है ना ..बस वैसे ही चूस" ......
मैं एक अग्यकारी शिष्या की तरह झट छापड़ छापड़ उनकी चूची चूस रहा था .......जीभ नीचे और होंठ उपर लगाए ..मानो उसका सारा रस अंदर ले लूँ ..उन्होने मेरा एक हाथ पकड़ा और अपनी दूसरी चूची पर रख दिया ...
" ले इसे दबा ....एक को चूस और दूसरे को दबा ....हां हां रे........उउफफफफफफफफफ्फ़ ..बड़ी जल्दी सीख लिया रे तू ..बड़ा होशियार है ......आआआआआआआ ......उईईईईईईई हां बस ऐसे ही ....मज़ा आ रहा है रे ........"
"आआप जैसी गुरु हों तो सीखना ही पड़ता है ना दीदी ...." और मैं फिर से लग गया अपने काम में ....
मैं भी मस्ती में चूसे जा रहा था दीदी की गदराई चूची और मसल रहा भी रहा था ......
दीदी सिसकारियाँ लिए जा रही थी ..मस्ती में सराबोर थी ..मैं उनके उपर था ....मेरा लंड कड़क होता हुआ उनकी जांघों से , कभी उनकी योनि से रगड़ती जा रही थी ....मेरे लंड और उनकी योनि से भी लगातार पानी निकले जा रहा था
"दीदी आप की योनि बहुत गीली लग रही है ....उफफफफफ्फ़ ..मेरे लंड को और भी गीला कर रही है....."
" अरे बाबा मेरी योनि को चूत बोल ना रे ...उफफफफफफ्फ़ तू भी ना ......."
" हां दीदी आप की चूत ...कितनी गीली है ..."
मेरे मुँह से " चूत " सुन के दीदी मस्त हो गयीं ..हां देख इस शब्द में कितनी जान है..सुनते ही मेरी चूत फदक रही है
और सही में मैने अपने लंड में उनकी चूत का फड़कना महसूस किया .....
औरत और मर्द के मिलन की गहराइयों में दीदी मुझे लिए जा रही थी और मैं चूप चाप उनके साथ चलता जा रहा था .....
फिर दीदी ने अपना कमाल दिखाया ..उन्होने कहा " तू मेरी चूचियाँ चूस्ता रह .......जितनी ज़ोर से तू चूस सकता है ..बस चूस .." और अपने हाथ से मेरे लंड को थाम लिया ..दूसरे हाथ की उंगलियों से अपनी चूत की फाँक खोल लीं और मेरे लंड का सूपड़ा अपनी चूत की फाँक पर रख उसे घिसने लगी जोरों से अपनी चूत पर.....उपर नीचे ..उपर नीचे , चूत के फाँक की पूरी लंबाई तक ....
पहले दौर की घिसाई में मेरा लंड उनकी चूत के उपर ही उपर रगड़ खा रहा था ..पर इस बार तो बिल्कुल चूत के अंदर , चूत के दोनों होंठों के बीचो बीच ...उफ्फ कितनी गर्मी थी अंदर और कितना गीला भी था .......कितना मुलायम .....जब लंड उपर आता , चूत की उपरी छोर पर ..कुछ हल्की सी चूभन महसूस होती मुझे वहाँ ....और लंड गुदगुदी से भर उठ ता .....बाद में पता चला वो उनके चूत की घुंडी थी ......
उफफफफफफफ्फ़ मुझे इतनी जोरों की सिहरन हुई ..... पूरा बदन कांप उठा ..और मेरा उनकी चूची चूसने की लपलपाहट ने ज़ोर पकड़ ली ,,मैने अपने होंठों से भींच लिया ..
मेरे लंड की उनकी चूत में घिसाई से दीदी भी उछल पड़ीं ..उनका चूतड़ उछल रहा था ..पर वो मेरा लंड थामे घिसे जा रही थी अपनी चूत ..और मैं दबा रहा था ..चूस रहा था उनकी चूचियाँ
"हां रे चूस ..चूस ..मेरा सारा रस आज निकाल दे ....उफफफफफफ्फ़ ..उईईईईईईईई..माआाआआनन्न ...उफफफफफफ्फ़ किशू ये क्या हो रहा है रे ....इतना मज़ाआआ ...आआआ ...."
इस मस्ती के झोंके ने मुझे झकझोर दिया था ..दीदी भी कांप रही थी ..और मैं भी
"दीदी ..डीडीिईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई उफफफफफफफफ्फ़ क्या हो रहा है ...आआआआआआहह " और मैं झाड़ रहा था बूरी तरह ....बार बार लंड झटके खा रहा था ..पिचकारी छूटे जा रही थी ...दीदी भी उछल उछल रही थी ..उनका चूतड़ मेरे लंड सहित मुझे उपर उछल रहा था
"हाई ...ऊवूऊवूयूयुयूवयू आआआआआआअ कीश्यूवूऊवूऊवूऊवूऊवूऊवूऊवूऊवूऊयूयुयूवयू .." और वो भी चूत से जोरदार पानी छोड़ते हुए ढेर हो गयीं
आआज दूसरी बार हम साथ झाड़ते हुए एक दूसरे पर लेटे थे ..हाँफ रहे थे ..
पर इस बार मुझे लगा जैसे मेरा पूरा बदन खाली हो गया हो
और दीदी भी इस बार हाथ फैलाए मेरे नीचे सुस्त पड़ी थी ......
दोनों आँखें बंद किए एक दूसरे से चिपके हुए , एक दूसरे की मस्ती से मस्त पड़े थे ......
कुछ देर बाद मेरे सांस में सांस आई ... मैं दीदी का मुलायम और मांसल शरीर पर अभी भी पड़ा था ..उनकी बाहें अभी भी मेरी पीठ पर थी , पर अब पकड़ ज़रा ढीली थी , उनकी आँखें बंद थी पर चेहरे पे शुकून और सन्तूश्ति थी.......मेरे लंड के नीचे काफ़ी चिप चिपा सा महसूस हो रहा था....
मैं उनके उपर से उठा ...और वहाँ देखा ..उनकी चूत के बाहर मेरे लंड से निकली सफेद पानी और कुछ और उनकी चूत से निकला रस का मिला जुला बड़ा ही चमकीला सा गाढ़ा गाढ़ा लगा था , उनकी चूत की फाके जो पहले , जब मैने उन्हें खड़े और नंगी देखा था, एक दूसरे से काफ़ी चिपकी थी, पर अभी दोनों फाँकें अलग थीं ..जैसे दोनों होंठ ख़ूले हों ....अंदर बिल्कुल गुलाबी लिए रस से सराबोर था ......उफ़फ्फ़ क्या नज़ारा था ..मन किया के चाट जाऊ उनकी पूरी की पूरी चूत..फिर मैने अपना चेहरा उनकी चूत के बिल्कुल करीब ले गया और अंदर देखा ,कितनी मस्त थी , अभी भी अंदर उनकी मांसल और गुलाबी चूत थोड़ी फदक रहीं थी..अभी अभी घिसाई की मस्ती पूरी तरह ख़तम नहीं हुई थी शायद ....
मुझ से रहा नहीं गया ...मैं उनके पैरों के बीच बैठ गया ..अपने उंगलियों से उनकी चूत की फाँकें और भी फैला लिया ...उफफफफफफफफफफ्फ़ अंदर मुझे एक छेद दिखाई पड़ा ..वहाँ भी काफ़ी गीला था ....और मैं अपनी जीभ उनकी चूत की फांकों में लगा दी और लगा उसे सटा सत , लपा लॅप चाटने ..दीदी एक दम से उछल पड़ीं ..जैसे उन्हें करेंट लगा हो ...
उनकी आँखें पूरी तरह खुल गयीं " अरे किशू ....क्या कर रहा है रे......उफफफफफफ्फ़ बड़ाअ अच्छा लग रहा है रे ...."
" दीदी , मैं आपकी चूत चाट रहा हूँ ..मुझे भी बड़ा अच्छा लग रहा है..मैं और चातू ..दीदी..?????"
:" हां रे चाट चाट अच्छे से चाट......पर दाँत मत लगाना...... सिर्फ़ अपने होंठ और जीभ लगाना...."
उनकी चूत का रस और मेरे गाढ़े पानी का मिला जूला टेस्ट भी बड़ा मस्त था ..एक दम सोंधा सोंधा .....
मैने उनकी चूतड़ नीचे से जाकड़ लिया और उपर उठाया , मेरे मुँह में उनकी चूत बूरी तरह चिपकी थी ..मेरे होंठ , नाक के नीचे , नाक पर सभी जागेह रस लगा था.. मैं बस आँखें बंद किए..दीदी की बात रखते हुए अपने होंठ और जीभ से चाट ता जा रहा था ..चाट ता जा रहा था और दीदी मस्ती में सिसकारियाँ ले ले कराह रहीं थी ...उनका सारा बदन सिहर रहा था ..कांप रहा थाअ .....
" अरे वाह रे मेला बच्छााआ ...कहाँ से सीखा रे ...उफफफफफफफफफ्फ़ ......."
मैने कोई जवाब नहीं दिया ..मैं अपना मुँह वहाँ से हटाना नहीं चाहता था और भला क्यूँ ..मैं तो बस उस आनंद में विभोर उन्हे चाटता जा रहा था ...उनको क्या मालूम के हर बात बताई नहीं जाती ..कुछ बातें बस अपने आप हो जाती है .....
" हाई रीइ...ले रे किशू , और ले मेरा रस ..चूस ..चूवस ........आआआआआआआआ " और उनका चूतड़ जोरों से मेरे मुँह पर उछला और उनकी चूत से फिर से रस निकलना शुरू हो गया ..मेरे मुँह में ..मैं मुँह खोले उनकी चूतड़ जकड़े रहा और सारा का सारा रस अंदर लेता रहा ..वो पानी
छोड़ती रही..मैं पीता रहा .........जब वो शांत हुईं ..मैने चाट चाट कर पूरी चूत सॉफ कर दी
और उनके पेट पर अपनी तंग रखे उनके बगल लेट गया ....
मेरे गाल उनकी गाल से चिपके थी ,,,और उनकी दूसरी ओर की गाल मैं अपनी उंगलियों से सहला रहा था ...बड़ी मस्ती का आलम था ..दीदी आँखें बंद किए सूस्त पड़ी थी ...
"दीदी...."
"क्या है ...??" उन्होने आँखें बंद किए ही मुझ से कहा ....उनकी आवाज़ बहुत धीमी थी ,,जैसे उनकी मस्ती मेने खलल डाल दी हो....
" दीदी आप का एक एक अंग इतना टेस्टी है ...इतना मजेदार है.....उफ़फ्फ़ मन करता है पूरे का पूरा खा जाऊं.."
" तेरा भी तो किशू ....अभी तेरे शरीर में ज़्यादा बाल नहीं उगे ..इतना चिकना है ....मेरा भी मन करता है किशू उन्हें चाट जाऊं ..."
और इतना कहते ही उन्होने मेरे लंड को अपने हाथ में ले लिया और अपनी मुट्ठी में भर कर निचोड़ने लगीं ......उफफफफ्फ़ क्या मस्त अंदाज़ था ...मेरा लंड अभी तक सिकूडा था..मुलायम था ..उनकी मुट्ठी में धीरे धीरे कड़क होने लगा ... उनके हाथ हौले हौले उसे दबा रही थी , निचोड़ रही थी .....और जब काफ़ी कड़ा हो गया मेरा लंड ..उसकी चॅम्डी धीरे धीरे उपर नीचे करना शुरू कर दिया ....मैं सिहर रहा था ....
अब उन्होने फिर कमाल दिखाया ....मुझे सीधा लिटा दिया ...मेरी ओर अपनी पीठ कर अपने हाथों को मेरे जांघों और पेट के बीच रखते हुए मेरा लंड अपनी हथेलियों के बीच ले लिया और चॅम्डी उपर नीचे करते करते एक दम से अपने मुँह के अंदर ले लिया , अपने होंठों को गोल करते हुए मेरे लंड के उपर नीचे करने लगी ....ऊऊऊऊऊऊऊऊओ , मेरे शरीर में जैसे गुदगुदी का करेंट जैसा दौड़ गया ...मैं कांप उठा ..फिर कभी जीभ चलाती लंड पर ..कभी लंड के सूपदे पर जीभ फिराती और हथेली से उसकी चॅम्डी भी उपर नीचे करती जाती ..मैं पागल हो उठा था ...
और अपनी कमर से उपर अपने आप को उपर उठा लेता झटके से मस्ती में . बार बार मैं उछल रहा था , उन्हें जाकड़ लिया उनकी पीठ से और पीठ चूमने लगा ....चाटने लगा ..चूचियाँ पीछे से जाकड़ कर दबाना शुरू कर दिया . वो मेरे लंड से खेल रही थी ..मैं उनकी शरीर से ......
दीदी अब मस्ती में मेरे लंड को अपने होंठों से और भी जोरों से दबा ते हुए चूस रही थी ..चाट रही थी ..मेरा लंड उनके मुँह के अंदर ही अंदर कड़ा और कड़ा होता जा रहा था .......
"उफफफफफफफ्फ़ दीदी आप बताती क्यो नहीं आप ने ये सब सीखा कहाँ से ..????"
उन्होने कुछ नहीं कहा ..बस उनका चाटना और चूसना और ज़ोर पकड़ लिया था ......मेरे बाल रहित लंड चूसना उन्हें बहुत अच्छा लग रहा था
अचानक उन्हे महसूस हुआ के मैं झड़ने के करीब हूँ ..उन्होने अपना मुँह वहाँ से हटा लिया और अपने हाथों से जोरों से चॅम्डी उपर नीचे करने लगीं .....उपर नीचे ..उपर नीचे ....और मैं बार बार कमर उपर नीचे करता हुआ झड़ने लगा ...पिचकारी दीदी के पेट पर , चूचियों पर ..सारे बदन पर छूट रही थी ..वो बस मेरे बगल बैठीं सारे का सारा गाढ़ा पानी अपने बदन पर पैचकारी से छूट ते हुए देख रहे थीं ..मैने उन्हें पेट से जाकड़ लिया , और फिर उनके कंधों पर सर रख उनसे लिपट ते हुए ढेर हो गया .........
उस रात हम दोनों तीन -तीन बार झाडे ..और हर बार ऐसे के जैसे अंदर से बिल्कुल खाली हो गये हों . उस रात दीदी का एक बिल्लकुल ही नया रूप मेरे सामने आया ...जिसके बारे मैं बिल्कुल अंजान था....उफफफ्फ़ क्या रूप था ये उनका ...मुझे ऐसा महसूस होता हर बार के मैं अपने आप को उनके हवाले कर दूं ..उनमें समा जाऊ ..खो जाऊं उनमें .....
ऐसे ऐसे तरीके उस रात उन्होने मुझ पर आज़माए , मेरे लिए तो पहली बार था ....मुझे पहला स्वाद मिल चुका था .....ये अनुभव बताया नहीं जा सकता ....एक ऐसा अनुभव , कभी ना भुलाया जानेवाला , याद करते ही सारे बदन में रोमांच हो उठता था ....और मेरी किस्मेत कितनी अच्छी थी के किसी की जिंदगी के इतने अहम पड़ाव में मुझे अपनी प्यारी प्यारी दीदी का साथ मिला .....
उस रात हम दोनों इतनी गहरी नींद में सोए थे की कब सुबेह हुई कुछ पता ही नहीं चला ...
मैं दीदी के कमरे में ही सोया था ...सुबेह दीदी ने मुझे झकझोरते हुए उठाया ..मैं आँख मलते हुए उठा ...."क्या दीदी इतनी अच्छी नींद आ रही थी ..आप ने जगा दिया .."
" किशू ..ज़रा अपना हाल तो देख....अगर कोई इधर आ गया ..तो बस समझ क्या हाल होगा ...जल्दी उठ ..कपड़े पहेन और अपने कमरे में जा .."
मैने अपनी हालत पर नज़र डाली ......नंगा ...लंड सिकूडा ...जांघों , पेट और चेहरे पे हल्की सी पपड़ी जमी थी ..मेरे और दीदी के रस का मिश्रण ..मैं झेंप गया ..फ़ौरन उठा ..कपड़े पहने ..दीदी को फिर से जकड़ते हुए उनके होंठों को जोरदार चूमते हुए भागता हुआ निकला और अपने रूम के अंदर घूस गया ..और पलंग पर लेट गया .
मेरे दिमाग़ में रात में दीदी के साथ बिताए पल घूम रहे थे ....एक एक सीन आता , मेरे शरीर में गुदगुदी , रोमांच और मस्ती के झोंके एक के बाद एक आते जाते ...मैं उन्हें याद करता हुआ मस्ती में अपने लंड को सहला रहा था ....
पर आख़िर दीदी को इतनी सब बातें मालूम कहाँ से हुई..??? सिर्फ़ किताबों से ..?? नहीं ऐसा नहीं हो सकता .... किताबों से आप सिर्फ़ जान सकते हैं ..पर इस तरह करना ...?? उनके हाथों में जादू था ..मेरे लंड को इस तरह हिलना के मेरा पूरा बदन झंझणा उठे ..इस उसे चूसना जैसे लंड से मेरे शरीर का पूरा रस बाहर निकलने को मचल उठे ....आख़िर क्या बात है....कहाँ से सीखा उन्होने ..???
और इस बात का जवाब मिला हमें दूसरे दिन .....
उस दिन मैं शाम को जब स्कूल से आया ...घर में सन्नाटा था ..कहीं कोई दिखाई नहीं दे रहा था ....मुझे याद आया उस दिन पड़ोस में किसी के यहाँ कोई पूजा थी ..माँ और मामी वहाँ जाने की बात कर रहे थे ....शायद वो लोग वहीं गये थे ..पर दीदी ..??? उनको तो यहाँ होना चाहिए ..???
मैं उनके कमरे की ओर बढ़ा ....
कहानी जारी रहेगी………. महँगी चूत सस्ता पानी -4
अब आगे...
फिर उन्होने उसी झटके में अपनी ब्लाउस और ब्रा भी खोल दी ....उफफफफफफफफफफफ्फ़ मैं पागल हो गया था ....अब वो बिल्कुल नंगी , दोनों पैर फैलाए ..उनके पैरों के बीच मैं नंगा ..और मेरे सामने वो नंगी ....उनके चेहरे पर ज़रा भी हिचकिचाहट नहीं ..एक दम बे-बाक ...
" देख ले ....अच्छे से अपनी दीदी को ...."उनके चेहरे पे शरत भरी मुस्कान थी
मेरी नज़रें दीदी की खूबसूरत जवानी को जैसे पिए जा रही थी ..सुडौल स्तन ..भारी भारी ...एक दम दूधिया रंग और उसके बीच थोड़े थोड़े गुलाबी रंग लिए निपल्स ... घूंदियाँ कड़ी और उठी उठी ...
पेट भारी भारी पर सपाट ..नाभि की गोलाई ऐसी कि उनमें जीभ डाल चाट जाऊं ....भारी भारी सुडौल जंघें ... और जांघों के बीच काले काले बालों को चीरती हुई एक पतली सी फाँक ....दीदी की योनि में भी पानी जैसा रस था .योनि के बालों में मोटी जैसे रस के बूँद चमक रही थी ...जांघों पर भी रस लगा था ..... .मुझ से अब रहा नहीं गया ...मैं उठा और दीदी को हाथों से थामते हुए अपने उपर ले लिया और बूरी तरह चिपका लिया ....किसी नंगी औरत का मेरे नंगे बदन से चिपकना..एक ऐसा अनुुभाव ...बताया जा नहीं सकता .....मैं थोड़ी देर तक उन्हें चिपकाए राहा ..उनके बदन की गर्मी , उनके मांसल शरीर की नर्मी और उनके आँखों की खूबसूरती अपने अंदर लिए जा रहा था....
मैं कुछ कर पता उसके पहले ही दीदी ने अपना कमाल दिखा दिया ..मेरे खड़े लंड पर अपनी गीली सी योनि घिसना शुरू कर दिया ..मेरा पूरा बदन सिहर उठा ...
हे भगवान इस एक दिन में ही क्या से क्या हो गया है..मेरे लिए अपने आप को संभाल पाना मुश्किल हो रहा था ..मेरा लंड उनकी योनि के दबाब से और भी कड़ा होता जा रहा था ...पूरे बदन में सन सनी सी हो रही थी ..दीदी अपने स्तन भी मेरे सीने से लगाए थी ..उनके कड़े कड़े निपल्स मेरे सीने को कुरेद रहे थे .....जिस तरह मुझे मूठ मारते वक़्त लगा था ..अभी बिल्कुल वैसे ही मेरे लंड के अंदर मेरे शरीर से मानो बिजली जैसी कुछ सन सन्नाते हुए जमा होती जा रही थी और मैं अपने आप को रोक नहीं पा रहा था ......दीदी भी कराहती जा रही थी .... सिसकियाँ भरे जा रही थी और मेरे लंड को घिसे जा रही थी ......उफफफफफफफफफफ्फ़ डीडीिईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई...मैं चिल्ला उठा , उन्हें जाकड़ लिया और अपने आप मेरे लंड ने पिचकारी छ्चोड़ दी ...मेरे चूतड़ उछल रहे थे ..... मैं झटके पे झटका दिए जा रहा था , बार बार डिड़िद्द्द्दडिईईईई डीडीिईईईईईई मेरे मुँह से निकले जा रहा था ..और मैं सुस्त पड़ गया .
"हां हाआँ किशू ....हाआँ मेला बच्चा ..हां हाआँ ......." दीदी प्यार से पूचकारे जा रही थी और उनका घिसना भी जारी था ....और फिर मैने उनके चूतडो के झटकों को अपने लंड पे महसूस किया .....".किशुउऊुुुुुुुुुुउउ....मेला बच्छाआआआअ ...ऊऊऊऊओ ले रे मैं भी गाइिईईईए.."
मैने फिर से अपने लंड पर कुछ गीला सा महसूस किया ....
और दीदी मेरे उपर ढीली हो कर ढेर हो गयीं ....
शायद ये उनका भी पहला अनुभव था ..... दोनों एक दूसरे से चिपके थे .... गर्म साँसें टकरा रही थी ..दीदी और उनका किशू एक हो कर पड़े थे .
मैं तो जैसे किसी स्वप्न लोक में खोया था .......ये सब इतनी जल्दी हो गया ......मुझे विश्वास नही हो रहा था ..... ये सपना है या सच..??? उफफफफ्फ़ दीदी का इस तरह मुझ से लिपटना ..उनके शरीर की गर्मी , उनके मुलायम स्तनों का मेरे सीने पर दाबना ......अभी तक मैं उन्हें अपनी शरीर में अनुभव कर रहा था ...... मैं आँखें बंद किए उस मस्ती भरे आलम का मज़ा ले रहा था .....
थोड़ी देर बाद आँखें खोली .देखा तो दीदी अपने हाथों को सर के पीछे रखे अपने हथेलियों पर सर रखे सीधी लेटी थी , इस तरह के उनकी आर्म्पाइट्स बिलककुल मेरी आँखों के सामने थी .....उनमें बाल उगे थे .......पर अगाल बगल उनकी त्वचा कितनी सफेद थी ...... और पसीने की बूंदे चमक रही थी ....
किसी औरत की आर्म्पाइट भी इतनी कामुक हो सकती है .....मैने अपना मुँह उधर घूमाया .... अपने हाथों से दीदी को सीधे लेते हुए ही जाकड़ लिया , उन्हें अपनी तरफ खींचा और उनके आर्म्पाइट में मुँह लगा उसे चूसने लगा .........जीभ फिराने लगा ...उफफफफ्फ़ क्या स्वाद था दीदी के पसीने का ..
मेरे अचानक इस हमले से दीदी चौंक पड़ीं ..पर फिर चूप चाप उसी तरह हाथ सर के पीछे रखी रही और मुझे अपनी हवस पूरी करने में किसी भी तरह कोई रुकावट नहीं की ..सिर्फ़ इतना कहा
" अरे भोलू राम ज़रा धीरे धीरे जीभ फिरा ...मुझे बहुत गुद गुदि हो रहे है........और ये भी कोई चूसने की जागेह है ..... ??'
"उम्म्म्मम दीदी बहुत अच्छा लग रहा है ..आप का पसीना भी इतना टेस्टी है ..और यहाँ आपकी जागेह कितनी मुलायम है " और मैने अपने दाँतों से वहाँ उनकी आर्म्पाइट पर हल्के से काट लिया ......" मन तो किया के पूरे का पूरा खा जाऊं .....
" अरे .... वहाँ गंदा है किशू ....ठीक है अगर तुम्हें इतना ही पसंद है ..मैं कल से वहाँ के बाल साफ कर दूँगी ..फिर चाटना वहाँ ....अब हट जा ...."
" नहीं दीदी ..कल की कल देखी जाएगी अभी तो चाटने दो ना प्ल्ज़्ज़ ..अभी तो दूसरी तरफ वाली तो बाकी है....."
और मैं झट उनके दूसरी तरफ उठ कर चला गया , और फिर लेट कर वहाँ मुँह लगा दिया
" तू भी ना किशू ......ठीक है बाबा कर ले मन मानी ...." और अपने हाथ और भी उपर कर लिए ..उनकी आर्म्पाइट अब और भी खूल गये थे
मैने आर्म्पाइट चाट ते हुए पूछा , "पर दीदी ..एक बात बताइए ज़रा ..आप को इतनी सब बातें मालूम कैसे हुई ..??"
दीदी हँसने लगी ......"तू आम खा ना ...पेड़ गिन ने से क्या मतलब ..?? "
"दीदी बताइए ना .... आप ही ने कहा था ना हमें एक दूसरे से कुछ छुपाना नहीं चाहिए ..????"
और अब मेरा मुँह उनकी आर्म्पाइट में था , और एक हाथ जो उनके सीने पर था ..जाने कब उपर आ गया उनके स्तनों पर ....उनके स्तनों के स्पर्श का आज पहला मौका था ..इतना सॉफ्ट और साथ में कुछ भरा भरा भी .....मैने उसे हल्के से दबाया ....उफफफफफफफ्फ़ मेरे हाथ में जैसे कोई स्पंज जिसमें गर्मी हो....नर्मी हो ..एक अजीब सी मस्ती मेरी हाथेलि में थी ...दीदी की मुँह से " अया ......" निकल गयी .....उनकी आँखें बंद हो गयी ....
" ओओओओओह्ह्ह्ह दीदी आप के स्तन ........मन करता है इन्हें भी खा जाऊं ........"
मेरी बातों पर दीदी जोरों से हंस पड़ीं .... कहाँ तो इतना रोमॅंटिक मूड था मेरा ......और दीदी हंस रही थीं ..सारा मूड किर कीरा हो गया ....
"क्या दीदी ...आप भी ना ..क्या मेरा आप के स्तनों को सहलाना अच्छा नहीं लगा ...???"
" अरे नहीं नहीं ..बहुत अच्छा लग रहा है ...सही में ..और ज़ोर से दबाओ ना ......उफफफफफ्फ़ ..तू बहुत अच्छे से दबा रहा है ..."
"फिर आप हँसी क्यूँ.."" मैने और जोरों से उनके स्तन दबाते हुए कहा .....
"उईईईईईईईईईईईईईईईईईई,,माअं , अरे इतने ज़ोर से नहीं रे......मैं हँसी तुम्हारी बातों से .......अरे किताबी शब्दों को ऐसे समय मत बोला कर ..... एक दम चालू वर्ड्स यूज़ कर ..तुम ने इसे ,( अपने स्तनों को अपने हाथों से पकड़ उन्न्होने मेरे सामने कर दिया )..... स्तन कहा ..मज़ा नहीं आता यार ..इसे चूची बोल ..क्या बोलेगा इसे अब ..???"
" चू- -ची ......" मैने धीरे से कहा ..पहली बार ऐसे शब्द मेरे मुँह से इतने फ़र्राटे से नहीं निकल पा रहे थे
--
"हाआँ अब ठीक है ..पर ज़रा गला खोल के बोल , ले मेरी चूचियाँ चूस ..आर्म्पाइट्स बहुत चूस लिया ....."
और एक चूची मेरे मुँह में ठूंस दी उन्होने ......."जैसे आम चूस्ता है ना ..बस वैसे ही चूस" ......
मैं एक अग्यकारी शिष्या की तरह झट छापड़ छापड़ उनकी चूची चूस रहा था .......जीभ नीचे और होंठ उपर लगाए ..मानो उसका सारा रस अंदर ले लूँ ..उन्होने मेरा एक हाथ पकड़ा और अपनी दूसरी चूची पर रख दिया ...
" ले इसे दबा ....एक को चूस और दूसरे को दबा ....हां हां रे........उउफफफफफफफफफ्फ़ ..बड़ी जल्दी सीख लिया रे तू ..बड़ा होशियार है ......आआआआआआआ ......उईईईईईईई हां बस ऐसे ही ....मज़ा आ रहा है रे ........"
"आआप जैसी गुरु हों तो सीखना ही पड़ता है ना दीदी ...." और मैं फिर से लग गया अपने काम में ....
मैं भी मस्ती में चूसे जा रहा था दीदी की गदराई चूची और मसल रहा भी रहा था ......
दीदी सिसकारियाँ लिए जा रही थी ..मस्ती में सराबोर थी ..मैं उनके उपर था ....मेरा लंड कड़क होता हुआ उनकी जांघों से , कभी उनकी योनि से रगड़ती जा रही थी ....मेरे लंड और उनकी योनि से भी लगातार पानी निकले जा रहा था
"दीदी आप की योनि बहुत गीली लग रही है ....उफफफफफ्फ़ ..मेरे लंड को और भी गीला कर रही है....."
" अरे बाबा मेरी योनि को चूत बोल ना रे ...उफफफफफफ्फ़ तू भी ना ......."
" हां दीदी आप की चूत ...कितनी गीली है ..."
मेरे मुँह से " चूत " सुन के दीदी मस्त हो गयीं ..हां देख इस शब्द में कितनी जान है..सुनते ही मेरी चूत फदक रही है
और सही में मैने अपने लंड में उनकी चूत का फड़कना महसूस किया .....
औरत और मर्द के मिलन की गहराइयों में दीदी मुझे लिए जा रही थी और मैं चूप चाप उनके साथ चलता जा रहा था .....
फिर दीदी ने अपना कमाल दिखाया ..उन्होने कहा " तू मेरी चूचियाँ चूस्ता रह .......जितनी ज़ोर से तू चूस सकता है ..बस चूस .." और अपने हाथ से मेरे लंड को थाम लिया ..दूसरे हाथ की उंगलियों से अपनी चूत की फाँक खोल लीं और मेरे लंड का सूपड़ा अपनी चूत की फाँक पर रख उसे घिसने लगी जोरों से अपनी चूत पर.....उपर नीचे ..उपर नीचे , चूत के फाँक की पूरी लंबाई तक ....
पहले दौर की घिसाई में मेरा लंड उनकी चूत के उपर ही उपर रगड़ खा रहा था ..पर इस बार तो बिल्कुल चूत के अंदर , चूत के दोनों होंठों के बीचो बीच ...उफ्फ कितनी गर्मी थी अंदर और कितना गीला भी था .......कितना मुलायम .....जब लंड उपर आता , चूत की उपरी छोर पर ..कुछ हल्की सी चूभन महसूस होती मुझे वहाँ ....और लंड गुदगुदी से भर उठ ता .....बाद में पता चला वो उनके चूत की घुंडी थी ......
उफफफफफफफ्फ़ मुझे इतनी जोरों की सिहरन हुई ..... पूरा बदन कांप उठा ..और मेरा उनकी चूची चूसने की लपलपाहट ने ज़ोर पकड़ ली ,,मैने अपने होंठों से भींच लिया ..
मेरे लंड की उनकी चूत में घिसाई से दीदी भी उछल पड़ीं ..उनका चूतड़ उछल रहा था ..पर वो मेरा लंड थामे घिसे जा रही थी अपनी चूत ..और मैं दबा रहा था ..चूस रहा था उनकी चूचियाँ
"हां रे चूस ..चूस ..मेरा सारा रस आज निकाल दे ....उफफफफफफ्फ़ ..उईईईईईईईई..माआाआआनन्न ...उफफफफफफ्फ़ किशू ये क्या हो रहा है रे ....इतना मज़ाआआ ...आआआ ...."
इस मस्ती के झोंके ने मुझे झकझोर दिया था ..दीदी भी कांप रही थी ..और मैं भी
"दीदी ..डीडीिईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई उफफफफफफफफ्फ़ क्या हो रहा है ...आआआआआआहह " और मैं झाड़ रहा था बूरी तरह ....बार बार लंड झटके खा रहा था ..पिचकारी छूटे जा रही थी ...दीदी भी उछल उछल रही थी ..उनका चूतड़ मेरे लंड सहित मुझे उपर उछल रहा था
"हाई ...ऊवूऊवूयूयुयूवयू आआआआआआअ कीश्यूवूऊवूऊवूऊवूऊवूऊवूऊवूऊवूऊयूयुयूवयू .." और वो भी चूत से जोरदार पानी छोड़ते हुए ढेर हो गयीं
आआज दूसरी बार हम साथ झाड़ते हुए एक दूसरे पर लेटे थे ..हाँफ रहे थे ..
पर इस बार मुझे लगा जैसे मेरा पूरा बदन खाली हो गया हो
और दीदी भी इस बार हाथ फैलाए मेरे नीचे सुस्त पड़ी थी ......
दोनों आँखें बंद किए एक दूसरे से चिपके हुए , एक दूसरे की मस्ती से मस्त पड़े थे ......
कुछ देर बाद मेरे सांस में सांस आई ... मैं दीदी का मुलायम और मांसल शरीर पर अभी भी पड़ा था ..उनकी बाहें अभी भी मेरी पीठ पर थी , पर अब पकड़ ज़रा ढीली थी , उनकी आँखें बंद थी पर चेहरे पे शुकून और सन्तूश्ति थी.......मेरे लंड के नीचे काफ़ी चिप चिपा सा महसूस हो रहा था....
मैं उनके उपर से उठा ...और वहाँ देखा ..उनकी चूत के बाहर मेरे लंड से निकली सफेद पानी और कुछ और उनकी चूत से निकला रस का मिला जुला बड़ा ही चमकीला सा गाढ़ा गाढ़ा लगा था , उनकी चूत की फाके जो पहले , जब मैने उन्हें खड़े और नंगी देखा था, एक दूसरे से काफ़ी चिपकी थी, पर अभी दोनों फाँकें अलग थीं ..जैसे दोनों होंठ ख़ूले हों ....अंदर बिल्कुल गुलाबी लिए रस से सराबोर था ......उफ़फ्फ़ क्या नज़ारा था ..मन किया के चाट जाऊ उनकी पूरी की पूरी चूत..फिर मैने अपना चेहरा उनकी चूत के बिल्कुल करीब ले गया और अंदर देखा ,कितनी मस्त थी , अभी भी अंदर उनकी मांसल और गुलाबी चूत थोड़ी फदक रहीं थी..अभी अभी घिसाई की मस्ती पूरी तरह ख़तम नहीं हुई थी शायद ....
मुझ से रहा नहीं गया ...मैं उनके पैरों के बीच बैठ गया ..अपने उंगलियों से उनकी चूत की फाँकें और भी फैला लिया ...उफफफफफफफफफफ्फ़ अंदर मुझे एक छेद दिखाई पड़ा ..वहाँ भी काफ़ी गीला था ....और मैं अपनी जीभ उनकी चूत की फांकों में लगा दी और लगा उसे सटा सत , लपा लॅप चाटने ..दीदी एक दम से उछल पड़ीं ..जैसे उन्हें करेंट लगा हो ...
उनकी आँखें पूरी तरह खुल गयीं " अरे किशू ....क्या कर रहा है रे......उफफफफफफ्फ़ बड़ाअ अच्छा लग रहा है रे ...."
" दीदी , मैं आपकी चूत चाट रहा हूँ ..मुझे भी बड़ा अच्छा लग रहा है..मैं और चातू ..दीदी..?????"
:" हां रे चाट चाट अच्छे से चाट......पर दाँत मत लगाना...... सिर्फ़ अपने होंठ और जीभ लगाना...."
उनकी चूत का रस और मेरे गाढ़े पानी का मिला जूला टेस्ट भी बड़ा मस्त था ..एक दम सोंधा सोंधा .....
मैने उनकी चूतड़ नीचे से जाकड़ लिया और उपर उठाया , मेरे मुँह में उनकी चूत बूरी तरह चिपकी थी ..मेरे होंठ , नाक के नीचे , नाक पर सभी जागेह रस लगा था.. मैं बस आँखें बंद किए..दीदी की बात रखते हुए अपने होंठ और जीभ से चाट ता जा रहा था ..चाट ता जा रहा था और दीदी मस्ती में सिसकारियाँ ले ले कराह रहीं थी ...उनका सारा बदन सिहर रहा था ..कांप रहा थाअ .....
" अरे वाह रे मेला बच्छााआ ...कहाँ से सीखा रे ...उफफफफफफफफफ्फ़ ......."
मैने कोई जवाब नहीं दिया ..मैं अपना मुँह वहाँ से हटाना नहीं चाहता था और भला क्यूँ ..मैं तो बस उस आनंद में विभोर उन्हे चाटता जा रहा था ...उनको क्या मालूम के हर बात बताई नहीं जाती ..कुछ बातें बस अपने आप हो जाती है .....
" हाई रीइ...ले रे किशू , और ले मेरा रस ..चूस ..चूवस ........आआआआआआआआ " और उनका चूतड़ जोरों से मेरे मुँह पर उछला और उनकी चूत से फिर से रस निकलना शुरू हो गया ..मेरे मुँह में ..मैं मुँह खोले उनकी चूतड़ जकड़े रहा और सारा का सारा रस अंदर लेता रहा ..वो पानी
छोड़ती रही..मैं पीता रहा .........जब वो शांत हुईं ..मैने चाट चाट कर पूरी चूत सॉफ कर दी
और उनके पेट पर अपनी तंग रखे उनके बगल लेट गया ....
मेरे गाल उनकी गाल से चिपके थी ,,,और उनकी दूसरी ओर की गाल मैं अपनी उंगलियों से सहला रहा था ...बड़ी मस्ती का आलम था ..दीदी आँखें बंद किए सूस्त पड़ी थी ...
"दीदी...."
"क्या है ...??" उन्होने आँखें बंद किए ही मुझ से कहा ....उनकी आवाज़ बहुत धीमी थी ,,जैसे उनकी मस्ती मेने खलल डाल दी हो....
" दीदी आप का एक एक अंग इतना टेस्टी है ...इतना मजेदार है.....उफ़फ्फ़ मन करता है पूरे का पूरा खा जाऊं.."
" तेरा भी तो किशू ....अभी तेरे शरीर में ज़्यादा बाल नहीं उगे ..इतना चिकना है ....मेरा भी मन करता है किशू उन्हें चाट जाऊं ..."
और इतना कहते ही उन्होने मेरे लंड को अपने हाथ में ले लिया और अपनी मुट्ठी में भर कर निचोड़ने लगीं ......उफफफफ्फ़ क्या मस्त अंदाज़ था ...मेरा लंड अभी तक सिकूडा था..मुलायम था ..उनकी मुट्ठी में धीरे धीरे कड़क होने लगा ... उनके हाथ हौले हौले उसे दबा रही थी , निचोड़ रही थी .....और जब काफ़ी कड़ा हो गया मेरा लंड ..उसकी चॅम्डी धीरे धीरे उपर नीचे करना शुरू कर दिया ....मैं सिहर रहा था ....
अब उन्होने फिर कमाल दिखाया ....मुझे सीधा लिटा दिया ...मेरी ओर अपनी पीठ कर अपने हाथों को मेरे जांघों और पेट के बीच रखते हुए मेरा लंड अपनी हथेलियों के बीच ले लिया और चॅम्डी उपर नीचे करते करते एक दम से अपने मुँह के अंदर ले लिया , अपने होंठों को गोल करते हुए मेरे लंड के उपर नीचे करने लगी ....ऊऊऊऊऊऊऊऊओ , मेरे शरीर में जैसे गुदगुदी का करेंट जैसा दौड़ गया ...मैं कांप उठा ..फिर कभी जीभ चलाती लंड पर ..कभी लंड के सूपदे पर जीभ फिराती और हथेली से उसकी चॅम्डी भी उपर नीचे करती जाती ..मैं पागल हो उठा था ...
और अपनी कमर से उपर अपने आप को उपर उठा लेता झटके से मस्ती में . बार बार मैं उछल रहा था , उन्हें जाकड़ लिया उनकी पीठ से और पीठ चूमने लगा ....चाटने लगा ..चूचियाँ पीछे से जाकड़ कर दबाना शुरू कर दिया . वो मेरे लंड से खेल रही थी ..मैं उनकी शरीर से ......
दीदी अब मस्ती में मेरे लंड को अपने होंठों से और भी जोरों से दबा ते हुए चूस रही थी ..चाट रही थी ..मेरा लंड उनके मुँह के अंदर ही अंदर कड़ा और कड़ा होता जा रहा था .......
"उफफफफफफफ्फ़ दीदी आप बताती क्यो नहीं आप ने ये सब सीखा कहाँ से ..????"
उन्होने कुछ नहीं कहा ..बस उनका चाटना और चूसना और ज़ोर पकड़ लिया था ......मेरे बाल रहित लंड चूसना उन्हें बहुत अच्छा लग रहा था
अचानक उन्हे महसूस हुआ के मैं झड़ने के करीब हूँ ..उन्होने अपना मुँह वहाँ से हटा लिया और अपने हाथों से जोरों से चॅम्डी उपर नीचे करने लगीं .....उपर नीचे ..उपर नीचे ....और मैं बार बार कमर उपर नीचे करता हुआ झड़ने लगा ...पिचकारी दीदी के पेट पर , चूचियों पर ..सारे बदन पर छूट रही थी ..वो बस मेरे बगल बैठीं सारे का सारा गाढ़ा पानी अपने बदन पर पैचकारी से छूट ते हुए देख रहे थीं ..मैने उन्हें पेट से जाकड़ लिया , और फिर उनके कंधों पर सर रख उनसे लिपट ते हुए ढेर हो गया .........
उस रात हम दोनों तीन -तीन बार झाडे ..और हर बार ऐसे के जैसे अंदर से बिल्कुल खाली हो गये हों . उस रात दीदी का एक बिल्लकुल ही नया रूप मेरे सामने आया ...जिसके बारे मैं बिल्कुल अंजान था....उफफफ्फ़ क्या रूप था ये उनका ...मुझे ऐसा महसूस होता हर बार के मैं अपने आप को उनके हवाले कर दूं ..उनमें समा जाऊ ..खो जाऊं उनमें .....
ऐसे ऐसे तरीके उस रात उन्होने मुझ पर आज़माए , मेरे लिए तो पहली बार था ....मुझे पहला स्वाद मिल चुका था .....ये अनुभव बताया नहीं जा सकता ....एक ऐसा अनुभव , कभी ना भुलाया जानेवाला , याद करते ही सारे बदन में रोमांच हो उठता था ....और मेरी किस्मेत कितनी अच्छी थी के किसी की जिंदगी के इतने अहम पड़ाव में मुझे अपनी प्यारी प्यारी दीदी का साथ मिला .....
उस रात हम दोनों इतनी गहरी नींद में सोए थे की कब सुबेह हुई कुछ पता ही नहीं चला ...
मैं दीदी के कमरे में ही सोया था ...सुबेह दीदी ने मुझे झकझोरते हुए उठाया ..मैं आँख मलते हुए उठा ...."क्या दीदी इतनी अच्छी नींद आ रही थी ..आप ने जगा दिया .."
" किशू ..ज़रा अपना हाल तो देख....अगर कोई इधर आ गया ..तो बस समझ क्या हाल होगा ...जल्दी उठ ..कपड़े पहेन और अपने कमरे में जा .."
मैने अपनी हालत पर नज़र डाली ......नंगा ...लंड सिकूडा ...जांघों , पेट और चेहरे पे हल्की सी पपड़ी जमी थी ..मेरे और दीदी के रस का मिश्रण ..मैं झेंप गया ..फ़ौरन उठा ..कपड़े पहने ..दीदी को फिर से जकड़ते हुए उनके होंठों को जोरदार चूमते हुए भागता हुआ निकला और अपने रूम के अंदर घूस गया ..और पलंग पर लेट गया .
मेरे दिमाग़ में रात में दीदी के साथ बिताए पल घूम रहे थे ....एक एक सीन आता , मेरे शरीर में गुदगुदी , रोमांच और मस्ती के झोंके एक के बाद एक आते जाते ...मैं उन्हें याद करता हुआ मस्ती में अपने लंड को सहला रहा था ....
पर आख़िर दीदी को इतनी सब बातें मालूम कहाँ से हुई..??? सिर्फ़ किताबों से ..?? नहीं ऐसा नहीं हो सकता .... किताबों से आप सिर्फ़ जान सकते हैं ..पर इस तरह करना ...?? उनके हाथों में जादू था ..मेरे लंड को इस तरह हिलना के मेरा पूरा बदन झंझणा उठे ..इस उसे चूसना जैसे लंड से मेरे शरीर का पूरा रस बाहर निकलने को मचल उठे ....आख़िर क्या बात है....कहाँ से सीखा उन्होने ..???
और इस बात का जवाब मिला हमें दूसरे दिन .....
उस दिन मैं शाम को जब स्कूल से आया ...घर में सन्नाटा था ..कहीं कोई दिखाई नहीं दे रहा था ....मुझे याद आया उस दिन पड़ोस में किसी के यहाँ कोई पूजा थी ..माँ और मामी वहाँ जाने की बात कर रहे थे ....शायद वो लोग वहीं गये थे ..पर दीदी ..??? उनको तो यहाँ होना चाहिए ..???
मैं उनके कमरे की ओर बढ़ा ....
कहानी जारी रहेगी………. महँगी चूत सस्ता पानी -4
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